Samvad Purush Prof. Devendra Swarup
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प्रो. देवेंद्र स्वरूप एक निमित्त हैं, जो राष्ट्रीय हैं। जिनमें सांस्कृतिक प्रवाह है। जिनमें गांधी और राष्ट्रीयता का संगम है। उसे दूसरी तरह से भी कह सकते हैं। भारत की सनातन यात्रा में जो-जो और जब-जब प्रवाह पैदा हुए, उसे अगर समझना हो तो देवेंद्र स्वरूप को पढ़ना जरूरी होगा। उन्हें सुनना भी ऐसा अनुभव होता है मानो इतिहास की तरंगों में आप खेल रहे हों। जिन्हें यह भ्रम है कि राष्ट्रीयता की संघ धारा में बौद्धिक विमर्श कर सकने लायक व्यक्ति नहीं होते, वे प्रो. देवेंद्र स्वरूप को जानें और समझें। जैसे ही वे ऐसा करेंगे, उनका भ्रम गिर जाएगा। आग्रह की वह दीवार ढह जाएगी। सामने होगा खुला मैदान, जो संवाद का होगा।
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प्रो. देवेंद्र स्वरूप एक निमित्त हैं, जो राष्ट्रीय हैं। जिनमें सांस्कृतिक प्रवाह है। जिनमें गांधी और राष्ट्रीयता का संगम है। उसे दूसरी तरह से भी कह सकते हैं। भारत की सनातन यात्रा में जो-जो और जब-जब प्रवाह पैदा हुए, उसे अगर समझना हो तो देवेंद्र स्वरूप को पढ़ना जरूरी होगा। उन्हें सुनना भी ऐसा अनुभव होता है मानो इतिहास की तरंगों में आप खेल रहे हों।
जिन्हें यह भ्रम है कि राष्ट्रीयता की संघ धारा में बौद्धिक विमर्श कर सकने लायक व्यक्ति नहीं होते, वे प्रो. देवेंद्र स्वरूप को जानें और समझें। जैसे ही वे ऐसा करेंगे, उनका भ्रम गिर जाएगा। आग्रह की वह दीवार ढह जाएगी। सामने होगा खुला मैदान, जो संवाद का होगा।
Book Details
-
ISBN9789352660452
-
Pages200
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: देश के अग्रणी समाजवादी विचारक, राजनीतिज्ञ, राज्यसभा के सदस्य, समाजवादी पार्टी के प्रधान महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं। बिना किसी महत्त्वाकांक्षा के सतत जनसेवा को समर्पित, अहंकाररहित जीवन उनका वैशिष्ट्य है। एक सुव्यवस्थित और सम्मानपूर्ण जीवन शुरू होने के बावजूद विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे जनसामान्य की पीड़ा ने प्रो. रामगोपाल के संवेदनशील हृदय तथा क्रियाशील मस्तिष्क को व्यथित करती रही, फलतः राजनीति को उन्होंने जनसेवा का महत्त्वपूर्ण माध्यम समझते हुए राजनीति विज्ञान के उच्चतम अध्ययन-अध्यापन और अनुसंधान का कीर्तिमान स्थापित किया। विज्ञान और राजनीति के मणिकांचन संयोग के कारण प्रो. रामगोपाल का चिंतन एवं विश्लेषण पर्याप्त सुस्पष्ट व दूरदर्शितापूर्ण रहा है। सदन में विभिन्न मुद्दों पर तथ्यों के आधार पर तार्किक ढंग से विषय का प्रतिपादन इसका ज्वलंत प्रमाण है। उनके तर्कों को कोई स्वीकार करे या न करे, लेकिन अनसुना तो नहीं कर सकता। तेजस्वी सांसद, संसदीय प्रक्रियाओं के ज्ञाता एवं प्रखर वक्ता के रूप में उनकी प्रतिभा और क्षमता सर्वविदित व प्रशंसनीय है। इसी का परिणाम है कि सत्ता एवं विपक्ष के अन्यान्य शीर्ष नेता उनकी टिप्पणियों और विचारों का यथेष्ट सम्मान करते हैं। प्रो. रामगोपाल यादव ने विषम परिस्थितियों में भी कभी आपा नहीं खोया और संसदीय गरिमा व अनुशासन हमेशा बनाए रखा, जो अन्य सांसदों के लिए अनुकरणीय है। निष्कलंक जीवन के 75 वसंत पूरे करने पर प्रो. रामगोपाल यादव का अभिनंदन वस्तुतः समाजवादी आदर्शों से अनुप्राणित राजनीति का गौरववर्धन है, जिसे इस पुस्तक में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का विनम्र प्रयास किया गया है।
Shikshan Aani Shanti
- Author Name:
Jane Sahi +1
- Book Type:

- Description: शाळा ही काही समाजाबाहेर, एखाद्या पोकळीत असणारी गोष्ट नाही. ती समाजातून येते आणि पुन्हा समाजापर्यंतच वाहत जाते. शाळा काही फक्त जीवनाची तयारी नव्हे; ती समाजाच्या सामाजिक, आर्थिक वास्तवाचा अविभाज्य भाग असते. सध्या समाजात एकंदरीतच जे ताण आहेत आणि दडपणं आहेत त्यांनाच शाळांनाही तोंड द्यावं लागत आहे. उदाहरणार्थ, स्पर्धा आणि व्यापारीकरणाच्या वरवंट्याखाली भरडलं जाणं. शाळा ज्या प्रकारे वाढलेल्या दिसतात, तो काही योगायोग नाही; तो समाज, त्याची मूल्यं, त्याच्या अपेक्षा आणि गरजा यांचा तर्कशुद्ध विस्तार किंवा प्रतिबिंब आहे. आपल्या सध्याच्या समाजातली हिंसा, भेदभाव आणि अन्याय यांनीच विविध प्रकारच्या शाळांमधली उतरंडीची व्यवस्था निर्माण केली, अभ्यासक्रमाचे तपशील ठरवले आणि शिक्षणाच्या पद्धती आणि मूल्यमापनाच्या पद्धती ठरवल्या. थोडं नकारात्मक अर्थानं आणि एका दृष्टिकोनातून पाहिलं पण त्या शाळा जीवनापासून अलिप्त नाहीत तर अन्याय आणि असमानता या कठोर वास्तवांचा भाग आहेत. Shikshan Aani Shanti : Jane Sahi , Shobha Bhagwat शिक्षण आणि शांती : जेन साही, शोभा भागवत
Bundelkhand Ki Sanskrtik Nidhi
- Author Name:
Mahendra Kumar Navaiya
- Book Type:

- Description: वैसे तो देश में हजारों बोलियाँ बोली जाती हैं और इन सब बोलियों का अपना-अपना महत्त्व अपनी-अपनी जगह है | मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भी बुंदेलखंडी बोली बोली जाती है, जिसका अपना एक अंदाज है | किसी भी बोली को अलंकृत करने, मोहक और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए उस बोली में पहेलियों, कहावतों, मुहावरों, कहानियों और अहानों का विशेष महत्त्व होता है। बुंदेलखंडी बोली में लोक-स्मृति में आज भी ऐसी पहेलियाँ, कहावतें, कहानी, अहाने और मुहावरे सुरक्षित एवं संरक्षित हैं | यह सब पुरानी पीढ़ी के पास ही है, ऐसी लोक-स्मृतियों को एक जगह समेटने में आज तक कोई प्रयास नहीं हुआ है, संभवत 'बुंदेलखंड की सांस्कृतिक निधि' एकमात्र ऐसी पुस्तक है, जिसे लेखक ने लोक स्मृतियों से निकालकर साहित्य के रुप में संरक्षित किया है। इतना ही नहीं, बुंदेलखंड की सांस्कृतिक निधि पुस्तक बच्चों, युवाओं और सभी आयु वर्ण के लोगों को बुंदेलखंड के रीति-रिवाज, बुंदेली बोली के गूढ़ रहस्यों, पहेलियों, कहावतों, कहानियों, मुहावरों और अहान से परिचित कराने में मील का पत्थर है। निश्चित रूप से आज की चकाचौंध भरी दुनिया में ऐसे ज्ञानमयी साहित्य की आवश्यकता है, जिसे लेखक ने इस पुस्तक में बखूबी सजाया है|
Nammamma Andre Nangishta
- Author Name:
Vasudhendra
- Rating:
- Book Type:

- Description: ಕಥೆಗಾರ, ಬರಹಗಾರ ವಸುಧೇಂದ್ರ ಅವರು ಬರೆದ ‘ನಮ್ಮಮ್ಮ ಅಂದ್ರೆ ನಂಗಿಷ್ಟ’ ಕೃತಿ 2006ರಲ್ಲಿ ಮೊದಲ ಮುದ್ರಣಗೊಂಡು 2019ರಲ್ಲಿ ಹತ್ತೊಂಬತ್ತನೇ ಆವೃತ್ತಿ ಕಂಡಿದೆ. ಸರಳ ಪ್ರಬಂಧ ಸಂಕಲನಗಳಲ್ಲಿ ಲೇಖಕರು ತಾಯಿಯ ಮೊದಲ ಕೂಗಿನಿಂದ ನಡೆದ ಹೃದಯಸ್ಪರ್ಶಿ ಘಟನೆಗಳನ್ನು ವಿವರಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಹುಟ್ಟಿದ ಕ್ಷಣದಿಂದ ಮಗು ತಾಯಿಯನ್ನು ಅಳಿಸುವಷ್ಟು ದೊಡ್ಡದಾದ ಸಮಯಕ್ಕೆ. ಪ್ಯಾಂಟಿನಲ್ಲಿ 'ಗಲೀಜು' ಮಾಡಿ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಅಸ್ಪೃಶ್ಯಳಾಗುವಂತೆ ಮಾಡುವ ತಾಯಿ, ಬಂಗಾರದಂತಹ ಸ್ಟೀಲ್ ಪಾತ್ರೆಗಳನ್ನು ಪ್ರೀತಿಸುವ ತಾಯಿ, ಭಿಕ್ಷುಕ ಮಗನ ಮುಂದೆ ಕುಳಿತು "ನೀನು ನಂಗೆ ಬೈದುಬಿಟ್ಟಿ" ಎಂದು ಮುಗ್ಧವಾಗಿ ಅಳುವ ತಾಯಿ. ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಅಜ್ಞಾತ ಬೀದಿಯಲ್ಲಿ ಕಳೆದುಹೋಗುತ್ತಾಳೆ, ಶೌಚಕ್ಕೆ ಹೋದಷ್ಟೇ ಸಲೀಸಾಗಿ ಇಹಲೋಕ ತ್ಯಜಿಸುವ ತಾಯಿ, ತನಗೆ ಗೊತ್ತಿರದ ಉತ್ಕಟ ಪ್ರೀತಿ ಹೊಂದಿರುವ ತಾಯಿ. ಓದುಗನ ಭಾವುಕ ಜಗತ್ತಿಗೆ ನವಿರಾಗಿ ತಿಳಿಸುವ ಲೇಖಕರ ಈ ಕೃತಿ ಹಲವು ಬಗೆಯ ತಾಯಂದಿರ ಮನಸುಗಳನ್ನು ತಿಳಿಸುತ್ತದೆ. ಈ ಕೃತಿಗೆ ಕರ್ನಾಟಕ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿ ಪ್ರಶಸ್ತಿ ಲಭಿಸಿದೆ
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