Hind Swaraj : Ek Anusheelan
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Author:
Tridip SuhrudPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
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‘हिन्द स्वराज : एक अनुशीलन’ न्योता है गांधी के बीज ग्रन्थ ‘हिन्द स्वराज’ को बाँचने का।</p> <p>1909 में गांधी ने जो इबारत तैयार की, उसको अक्षरश: मानकर नहीं, किन्तु उसकी प्रवाहिता को पहचानकर, उसके भाव-प्रभाव पहचानकर पढ़ने का न्योता है।</p> <p>त्रिदीप सुहृद ने गांधी को अपनी हार्दिकता में सहज रूप से सम्मिलित किया है। यही कारण है कि उनका यह अनुशीलन ‘हिन्द स्वराज’ के मर्म तक पहुँचता है। विचार-पद्धति और भाषा-शैली को देखते हुए यह पुस्तक ‘गांधी वाणी’ का रचनात्मक विस्तार है। सुप्रसिद्ध इतिहास-मर्मज्ञ सुधीर चन्द्र के अनुसार, त्रिदीप सुहृद के गांधी ज़िन्दा हैं, विकासमान हैं। हमसे मुख़ातिब हैं। फिर भी त्रिदीप सुहृद त्रिदीप सुहृद हैं, गांधी नहीं हैं। हमें न्योता दे रहे हैं अपने साथ गांधी के बीज-ग्रन्थ ‘हिन्द स्वराज’ को बाँचने का। इस विश्वास के साथ कि एक बार हमने उनका न्योता मान लिया तो निश्चय ही देर-सबेर हम सीधे गांधी से ही बात करने लगेंगे। शुरू करेंगे वह सिलसिला ख़ुद हिन्द स्वराज पढ़कर।’</p> <p>आज के संकीर्ण व कंटकाकीर्ण होते जा रहे समय में त्रिदीप सुहृद की इस पुस्तक से चेतना की चिनगारी उद्बुद्ध होगी, यह विश्वास है।
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‘हिन्द स्वराज : एक अनुशीलन’ न्योता है गांधी के बीज ग्रन्थ ‘हिन्द स्वराज’ को बाँचने का।</p>
<p>1909 में गांधी ने जो इबारत तैयार की, उसको अक्षरश: मानकर नहीं, किन्तु उसकी प्रवाहिता को पहचानकर, उसके भाव-प्रभाव पहचानकर पढ़ने का न्योता है।</p>
<p>त्रिदीप सुहृद ने गांधी को अपनी हार्दिकता में सहज रूप से सम्मिलित किया है। यही कारण है कि उनका यह अनुशीलन ‘हिन्द स्वराज’ के मर्म तक पहुँचता है। विचार-पद्धति और भाषा-शैली को देखते हुए यह पुस्तक ‘गांधी वाणी’ का रचनात्मक विस्तार है। सुप्रसिद्ध इतिहास-मर्मज्ञ सुधीर चन्द्र के अनुसार, त्रिदीप सुहृद के गांधी ज़िन्दा हैं, विकासमान हैं। हमसे मुख़ातिब हैं। फिर भी त्रिदीप सुहृद त्रिदीप सुहृद हैं, गांधी नहीं हैं। हमें न्योता दे रहे हैं अपने साथ गांधी के बीज-ग्रन्थ ‘हिन्द स्वराज’ को बाँचने का। इस विश्वास के साथ कि एक बार हमने उनका न्योता मान लिया तो निश्चय ही देर-सबेर हम सीधे गांधी से ही बात करने लगेंगे। शुरू करेंगे वह सिलसिला ख़ुद हिन्द स्वराज पढ़कर।’</p>
<p>आज के संकीर्ण व कंटकाकीर्ण होते जा रहे समय में त्रिदीप सुहृद की इस पुस्तक से चेतना की चिनगारी उद्बुद्ध होगी, यह विश्वास है।
Book Details
-
ISBN9788126724963
-
Pages116
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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