RAJNEETI KE US PAAR
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Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
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देश के अग्रणी समाजवादी विचारक, राजनीतिज्ञ, राज्यसभा के सदस्य, समाजवादी पार्टी के प्रधान महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं। बिना किसी महत्त्वाकांक्षा के सतत जनसेवा को समर्पित, अहंकाररहित जीवन उनका वैशिष्ट्य है। एक सुव्यवस्थित और सम्मानपूर्ण जीवन शुरू होने के बावजूद विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे जनसामान्य की पीड़ा ने प्रो. रामगोपाल के संवेदनशील हृदय तथा क्रियाशील मस्तिष्क को व्यथित करती रही, फलतः राजनीति को उन्होंने जनसेवा का महत्त्वपूर्ण माध्यम समझते हुए राजनीति विज्ञान के उच्चतम अध्ययन-अध्यापन और अनुसंधान का कीर्तिमान स्थापित किया।
विज्ञान और राजनीति के मणिकांचन संयोग के कारण प्रो. रामगोपाल का चिंतन एवं विश्लेषण पर्याप्त सुस्पष्ट व दूरदर्शितापूर्ण रहा है। सदन में विभिन्न मुद्दों पर तथ्यों के आधार पर तार्किक ढंग से विषय का प्रतिपादन इसका ज्वलंत प्रमाण है। उनके तर्कों को कोई स्वीकार करे या न करे, लेकिन अनसुना तो नहीं कर सकता। तेजस्वी सांसद, संसदीय प्रक्रियाओं के ज्ञाता एवं प्रखर वक्ता के रूप में उनकी प्रतिभा और क्षमता सर्वविदित व प्रशंसनीय है। इसी का परिणाम है कि सत्ता एवं विपक्ष के अन्यान्य शीर्ष नेता उनकी टिप्पणियों और विचारों का यथेष्ट सम्मान करते हैं।
प्रो. रामगोपाल यादव ने विषम परिस्थितियों में भी कभी आपा नहीं खोया और संसदीय गरिमा व अनुशासन हमेशा बनाए रखा, जो अन्य सांसदों के लिए अनुकरणीय है। निष्कलंक जीवन के 75 वसंत पूरे करने पर प्रो. रामगोपाल यादव का अभिनंदन वस्तुतः समाजवादी आदर्शों से अनुप्राणित राजनीति का गौरववर्धन है, जिसे इस पुस्तक में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का विनम्र प्रयास किया गया है।
ISBN: 9789390923755
Pages: 336
Avg Reading Time: 11 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Dr. Rupesh Patkar
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- Description: अंदमान म्हटले की तिथला सेल्युलर जेल आणि तिथे काळ्या पाण्याची शिक्षा भोगायला पाठवलेले क्रांतिकारक आठवतात. अंदमान हे भारतीय स्वातंत्र्यसैनिकांचे क्रांतितीर्थ ! भगतसिंहांचे सहकारी विजयकुमार सिन्हा अंदमानला 'भारताचे बॅस्टील' म्हणतात. बॅस्टील हा फ्रेंच राज्यक्रांतीचे प्रतीक बनलेला तुरुंग. बॅस्टीलच्या तुरुंगात डांबण्यात आलेल्या फ्रेंच क्रांतिकारकांनी सरंजामशाहीची कबर खणत स्वातंत्र्य, समता आणि बंधुभाव ही मूल्ये उद्घोषित केली. फ्रान्ससाठी जसा बॅस्टीलचा तुरुंग तसा भारतासाठी अंदमानचा तुरुंग ! अंदमानच्या या तुरुंगात शेकडो क्रांतिकारकांना डांबण्यात आले होते. पण या तुरुंगातदेखील हे क्रांतिकारक लढत होते, जसे फ्रेंच क्रांतिकारक बॅस्टीलमध्ये लढत होते. फ्रेंच क्रांतिकारकांनी बॅस्टीलचा तुरुंग फोडला तर अंदमानात डांबण्यात आलेल्या क्रांतिकारकांनी चिवट अन्नसत्याग्रह करून ब्रिटिश साम्राज्यशाहीला वाकायला भाग पाडले. त्यासाठी महावीर, मोहित आणि मोहन यांना बलिदान करावे लागले. अंदमानच्या तुरुंगातदेखील जराही न वाकता देदीप्यमान लढा देणाऱ्या क्रांतिकारकांची ही कथा म्हणजे विजयकुमार सिन्हा यांनी लिहिलेले, 'In Andamans, the Indian Bastille' हे पुस्तक. त्या पुस्तकातील गोष्ट मराठी वाचकांना सांगण्याचा हा प्रयत्न.
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