Gandhi Ke Desh Mein
(0)
Author:
Sudhir ChandraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
595
476 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
विवेक, सन्मति और सदाशयता के धनी चिन्तक, विख्यात इतिहासकार सुधीर चन्द्र की निबन्ध पुस्तक।</p> <p>‘‘सत्य, अहिंसा, प्रेम, अस्तेयादि एक झटके में और कायमी तौर पर लोगों की ज़िन्दगी में परिवर्तन ला देनेवाले गुण नहीं हैं। ख़ुद गांधी सारी ज़िन्दगी अपने को गांधी बनाने में लगे रहे थे। पर गांधी के नाम पर सब कुछ निछावर करनेवालों ने क़ुर्बानियाँ जो भी की हों, उन लोगों ने अपने को वैसा बनाने की कोशिश नहीं की जैसा बनकर ही गांधी का स्वराज हासिल हो सकता था।’’</p> <p>‘‘गांधी की हमारी समझ गम्भीर रूप से अपूर्ण रहेगी जब तक हम अहिंसा के परिप्रेक्ष्य में उस हिंसा के स्वरूप और परिस्थितियों को समझने की शुरुआत नहीं करते, जिसे नैतिक हिंसा कहा जा सके।’’</p> <p>‘‘समलैंगिकता को अप्राकृतिक या अस्वाभाविक मान लेने का आधार क्या है? इसी से जुड़ा एक बुनियादी सवाल भी उठता है : क्या किसी कर्म का अप्राकृतिक होना काफ़ी है उसे दंडनीय अपराध बनाए जाने के लिए? किसी कर्म का प्राकृतिक या अप्राकृतिक होना—जिस हद तक इस तरह का निर्धारण सम्भव है—उसे अपराध की श्रेणी में न तो लाता है और न ही उससे बाहर रखता है। हिंसा और वासना से जुड़े तमाम अपराधों को प्राकृतिक कृत्यों के रूप में देखा जा सकता है। दूसरी तरफ़ सभ्यता और संस्कृति का विकास उत्तरोत्तर हमें प्रकृति से दूर लाता आया है।’’</p> <p>‘‘जो मैं नहीं समझ पाता वह है बहुत सारे लोगों का विश्वास, देरीदा की मिसाल देते हुए कि, ‘डीकंस्ट्रक्शन’ और परिणामस्वरूप उत्तर-आधुनिकतावाद ‘एमॉरल’—नैतिक-अनैतिक से परे—है। देरीदा को, न कि देरीदा के बारे में, थोड़ा ही सही, पढ़े बगै़र कुछ प्रचलित भ्रान्तियों को मान लेना बौद्धिक आलस है।’’</p> <p>देश के गतिशील समकालीन यथार्थ को समझने के लिए एक ज़रूरी पाठ।
Read moreAbout the Book
विवेक, सन्मति और सदाशयता के धनी चिन्तक, विख्यात इतिहासकार सुधीर चन्द्र की निबन्ध पुस्तक।</p>
<p>‘‘सत्य, अहिंसा, प्रेम, अस्तेयादि एक झटके में और कायमी तौर पर लोगों की ज़िन्दगी में परिवर्तन ला देनेवाले गुण नहीं हैं। ख़ुद गांधी सारी ज़िन्दगी अपने को गांधी बनाने में लगे रहे थे। पर गांधी के नाम पर सब कुछ निछावर करनेवालों ने क़ुर्बानियाँ जो भी की हों, उन लोगों ने अपने को वैसा बनाने की कोशिश नहीं की जैसा बनकर ही गांधी का स्वराज हासिल हो सकता था।’’</p>
<p>‘‘गांधी की हमारी समझ गम्भीर रूप से अपूर्ण रहेगी जब तक हम अहिंसा के परिप्रेक्ष्य में उस हिंसा के स्वरूप और परिस्थितियों को समझने की शुरुआत नहीं करते, जिसे नैतिक हिंसा कहा जा सके।’’</p>
<p>‘‘समलैंगिकता को अप्राकृतिक या अस्वाभाविक मान लेने का आधार क्या है? इसी से जुड़ा एक बुनियादी सवाल भी उठता है : क्या किसी कर्म का अप्राकृतिक होना काफ़ी है उसे दंडनीय अपराध बनाए जाने के लिए? किसी कर्म का प्राकृतिक या अप्राकृतिक होना—जिस हद तक इस तरह का निर्धारण सम्भव है—उसे अपराध की श्रेणी में न तो लाता है और न ही उससे बाहर रखता है। हिंसा और वासना से जुड़े तमाम अपराधों को प्राकृतिक कृत्यों के रूप में देखा जा सकता है। दूसरी तरफ़ सभ्यता और संस्कृति का विकास उत्तरोत्तर हमें प्रकृति से दूर लाता आया है।’’</p>
<p>‘‘जो मैं नहीं समझ पाता वह है बहुत सारे लोगों का विश्वास, देरीदा की मिसाल देते हुए कि, ‘डीकंस्ट्रक्शन’ और परिणामस्वरूप उत्तर-आधुनिकतावाद ‘एमॉरल’—नैतिक-अनैतिक से परे—है। देरीदा को, न कि देरीदा के बारे में, थोड़ा ही सही, पढ़े बगै़र कुछ प्रचलित भ्रान्तियों को मान लेना बौद्धिक आलस है।’’</p>
<p>देश के गतिशील समकालीन यथार्थ को समझने के लिए एक ज़रूरी पाठ।
Book Details
-
ISBN9788126718733
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Bhavan : Sahitya Aur Anya Kalaon Ka Anushilan
- Author Name:
Mukund Laath
- Book Type:

-
Description:
मुकुन्द लाठ भारत के उन बहुत थोड़े लेखकों में से एक हैं जिनके यहाँ साहित्य और कलाओं को लेकर ऐसी गहरी और सूक्ष्म दृष्टि है जो प्राचीन साहित्य और शास्त्र, दर्शन और चिन्तन, संगीत और नाट्य, कविता, परम्परा और आधुनिकता आदि सबको एक संग्रथित समावेश में शामिल कर रूपायित होती रही है। वह परम्परा से जैसे कि आधुनिकता से भी अनाक्रान्त रहकर एक प्रश्नवाचक दूरी रखती है। साहित्य और कलाओं के स्वरूप पर ऐसा मौलिक चिन्तन, कुछ कृतियों की सूक्ष्म समीक्षा, हिन्दी में बहुत कम देखने को मिलता है। हिन्दी में पहले ऐसे लोग थे, जैसे कि वासुदेवशरण अग्रवाल, मोतीचन्द्र, हजारीप्रसाद द्विवेदी आदि, जो ऐसी समावेशी और आधुनिकता के लिए भेदक दृष्टि रखते थे। मुकुन्द लाठ उस परम्परा में ही दशकों से सक्रिय रहे हैं और उनकी यह संचयिता हम बहुत उत्साह और उम्मीद के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं कि अपने समय, समाज, साहित्य और कलाओं को समझने की यह दृष्टि हिन्दी के विचार-जगत में हस्तक्षेप की तरह पहचानी-गुनी जाएगी। यह निश्चय ही हिन्दी की विचार-सम्पदा का अपेक्षाकृत अब तक का जाना विस्तार है।
—अशोक वाजपेयी
Corporatekallol
- Author Name:
Neelambari Joshi
- Book Type:

- Description: काम करणं म्हणजे काय? कामाचे तास किती असावेत? यांत्रिकीकरणामुळे कामातला संपलेला आनंद परत मिळवता येईल का? अशा प्रश्नांचा वेध घेत असेंब्ली लाईन्स, एच.आर. पीटर ड्रकर यांचा उदय, व्यवस्थापन आणि प्रशिक्षण, टाटा गु्रपचं सामाजिक कार्य, कर्मचार्यांचं मूल्यमापन, टोयोटोची नॉलेज मॅनेजमेंट, कॅनन प्रिंटरचं बिअर कॅनवरून सुचलेलं डिझाईन, फेसबुकचा निवडप्रक्रियेतला शिरकाव, स्टीव्ह जॉब्जच्या भन्नाट मुलाखती, वर्कप्लेसमधले ताणतणाव, वर्क-लाईफ बॅलन्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हायपरलूप, 3डी प्रिंटिंग - हे सर्व मराठीत एकत्रितपणे प्रथमच या पुस्तकातून येत आहे! Corporatekallol कॉर्पोरेटकल्लोळ
Aadivasi : Shaurya Evam Vidroh
- Author Name:
Ramanika Gupta
- Book Type:

- Description: सर्वप्रथम हमें पूर्वोत्तर के इतिहास में जाना ज़रूरी है, जिससे यह पता चलता है कि वे अंग्रेज़ों, ज़ुल्मी राजाओं या किसी भी अन्याय के ख़िलाफ़ लड़े। इस पुस्तक में हमने अलग-अलग भाषा व राज्यों के वीर नायकों व नायिकाओं की कथाओं के अतिरिक्त पूर्वोत्तर के भिन्न राज्यों में हुए विद्रोहों, प्रतिरोधात्मक आन्दोलनों पर शोधपरक गाथाएँ व सामग्री प्रस्तुत की है। ये सभी गाथाएँ—लिजिन्द्रियाँ, लोककथाएँ या लोकगीत व टिप्पणियाँ पूर्वोत्तर के ही लेखकों द्वारा लिखी गई हैं। हमने इनका चयन कर हिन्दी में अनूदित कर प्रस्तुत किया है। इनके चयन और सम्पादन में काफ़ी समय लगा। चूँकि अनूदित सामग्री की भाषा को परिष्कृत भी करना पड़ा। हमने हिन्दी में कुछ गाथाएँ पूर्वोत्तर में उपलब्ध भिन्न ग्रन्थों व दस्तावेज़ों में दर्ज टिप्पणियों के आधार पर तैयार करके भी प्रस्तुत की गई हैं। एक ही नायक पर भिन्न-भिन्न लेखकों ने अपने-अपने क्षेत्र में उपलब्ध सामग्री (लोकगीत, किंवदंतियों, लोककथाएँ, ऐतिहासिक दस्तावेज आदि) से लेकर अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत की है। हमने सभी को सम्मानित करने का प्रयास किया है, ताकि पूर्वोत्तर में घटित इस इतिहास को गहराई तक समझा और जाना जा सके और शेष भारत उनसे अपना दर्द का रिश्ता जोड़ कर संवाद क़ायम करे। —‘सम्पादकीय’ से
Aadivasi Darshan
- Author Name:
Amrita Priyanka Ekka +4
- Book Type:

- Description: सभ्यता और संस्कृति के स्तर पर किसी भी समुदाय की जीवनीशक्ति मूलत: उस समुदाय के दार्शनिक चिन्तन में निहित होती है। जिज्ञासा इस चिन्तन का बीज है और कल्पना उसके अँखुआने के लिए आवश्यक जल। इस तरह जो यात्रा आरम्भ होती है वह दर्शन के दायरे में तब प्रवेश करती है जब कल्पना और कल्पनाशक्ति से आगे बुद्धि और विवेक प्रधान हो जाते हैं, तब अज्ञात की गुत्थी खोलने में अलौकिक माध्यमों का परित्याग कर दिया जाता है और अनुभव को तथ्यों की जाँच और व्याख्या का आधार बनाया जाता है। इस मामले में आदिवासी समुदाय भी अपवाद नहीं है। लेकिन दर्शन सम्बन्धी विचार-विमर्शों में आदिवासी समुदायों का सन्दर्भ अब तक प्राय: अनुपस्थित रहा है, जबकि पृथ्वी के प्राचीनतम बाशिन्दों के रूप में वे आदि जिज्ञासु और आदि चिन्तक रहे हैं। उनकी एक सुचिन्तित दर्शन-परम्परा है, जो उनके धर्म—जिन्हें आदि धर्म, सनातन धर्म, गोंडी धर्म, पूयेम धर्म जैसी कई संज्ञाओं से जाना जाता है—सम्बन्धी धारणाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह जरूर है कि इतर समुदायों के विपरीत आदिवासी समुदायों का दार्शनिक चिन्तन वाचिक रूप में ही रहा है। यह हिन्दी में किंचित पहली पुस्तक है जिसमें आदिवासी दर्शन के बुनियादी तत्त्वों का परिचय और विवेचन प्रस्तुत किया गया है। भारत के विभिन्न भागों-अनेक आदिवासी समुदायों के दर्शन-चिन्तन, सृष्टि-कथा, तत्त्व मीमांसा, सत्ता-मीमांसा, ज्ञान-मीमांसा आदि विषयक विचारोत्तेजक सामग्री इस पुस्तक में संकलित की गई है। इसकी एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें आदिवासी दर्शन को प्रस्तुत करने वाले विद्धानों में गैर आदिवासी और विदेशी विद्वान भी शामिल हैं जिनके अनुभव, अध्ययन और चिन्तन-मनन ने इस विषय को व्यापकता प्रदान की है। संक्षेप में, इतर समुदायों की तरह मनुष्य या ईश्वर केन्द्रित न होकर प्रकृति केन्द्रित आदिवासी दार्शनिक चिन्तन के विविध पहलुओं को सामने लाने वाली यह कृति निश्चय ही पाठक को एक नई दृष्टि प्रदान करेगी।
Tattvadarshi Nishank
- Author Name:
Rishabhdev Sharma
- Book Type:

- Description: ‘तत्त्वदर्शी निशंक’ दक्षिण की ओर से हिमालय-पुत्र श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की साहित्य-साधना का अभूतपूर्व संपूर्ण भावाभिनंदन है। इस ग्रंथ में आज चर्चित राजनेता के रूप में प्रतिष्ठित केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंकजी की साहित्य-साधना का दक्षिण भारत की हिंदी-सेवी प्रतिभाओं द्वारा पहली बार समग्र मूल्यांकन किया गया है। बहुआयामी साहित्य-साधक निशंकजी के संपूर्ण रचना-कर्म का कुल छह खंडों में विन्यस्त यह गहन मूल्यांकन अपने आप में एक विलक्षण कार्य है। आपदा को अवसर में बदलने का संकल्प इस कृति के नायक निशंकजी को ‘तत्त्वदर्शी निशंक’ बनाता है। मनोबल को तोड़ने पर आमादा समेकित दुःखों से विचलित न होते हुए उन्हें ही तोड़नेवाला संघर्षी मन निशंकजी के साहित्यिक व्यक्तित्व का केंद्रबिंदु है। दुःखों को झेल जानेवाला यह मन उन्हें व्यक्तिगत दुःखों से आगे निकलने और समष्टिगत दुःखों को महसूसने की वह शक्ति प्रदान करता है, जिसके बल पर ही कोई व्यक्ति साहित्यकार बनता है। आत्म का यह विस्तार संवेदनशीलता को सृजनात्मकता के पंख देता है। इस ग्रंथ में उनकी इसी संवेदना और सर्जना का संधान किया गया है। कुल मिलाकर, सार्वजनिक जीवन, समाज सेवा और राजनीति में सक्रिय रहते हुए निरंतर और अबाध साहित्य-सृजन के माध्यम से राष्ट्रभाषा हिंदी को समृद्ध करनेवाले विद्या-व्यसनी रचनाकार निशंकजी के साहित्यिक प्रदेय को समझने के लिए एक अनिवार्य और परिपूर्ण ग्रंथ।
Bakasht Sangharsh
- Author Name:
Avinash Jha
- Book Type:

- Description: उन अनजाने किसानों के नाम, जिनके संघर्ष की कहानी बड़े बड़े संघर्षों की दास्तान के बीच अनकही रह गई। समय के रेत पर जो अपने जीवन के निशान छोड़कर चले गए, शायद वो उसे हमारे लिए ही बना गये हों, जिनको ढूंढने , सहेजने और किताबों के पन्नों पर स्याही से उकेरने के नाम, यह दास्तान।
A Bouquet of Flowers
- Author Name:
Dr. Krishna Saksena
- Book Type:

- Description: Dr. Krishna Saksena is a well known author of unbound name and fame. She has written a number of books which include novels, stories & essays. Her works have a unique blend of modernity with tradition. Her language is too simple, her style attractive and contents are dealt with ease and sharpness. She offers to her readers difficult problems solved in an easy and convincing way. The three generations that she takes up are presented in the form of a critical story looking to the interest of the reader.
Jharkhand : Disum Muktigatha Aur Srijan Ke Sapne
- Author Name:
Harivansh
- Book Type:

- Description: झारखण्ड एक सांस्कृतिक-सामाजिक अवधारणा है। आन्दोलन के दीर्घकालिक इतिहास ने इसे विशिष्ट पहचान दी है। देशज सृजन एवं विचारों के सपने। जिन्दगी की सादगी। व्यवहार की सरलता। जिस तरह झरने पहाड़ों-जंगलों में गुनगुनाते हैं, उसी तरह झारखंडी आकांक्षाएँ प्राकृतिक साहचर्य का जीवन्त संवाद प्रेषित करती हैं। झारखंडी दिसुम की मुक्तिगाथा इन्हीं बोधों का दस्तावेज है। मानवीय सम्मान, देशज जनज्ञान और स्वशासन की अपराजेय चेतना झारखंड का मूल स्वर हैं। झारखण्ड स्त्री-पुरुष समानता, स्वशासी ग्राम-परम्परा, सामुदायिक जीवन, सम्पत्ति पर सामूहिक हक और सर्वानुमति मूलक जनतंत्र का जीवन्त जनबोध है। मानवीय सरोकारों की आदिम चेतना निरन्तर गतिशील व नवीनीकरण की प्रक्रिया से गुजरती भावी दुनिया के लिए अनेक उपहारों को सँजोए है और इनसे संघर्ष और निर्माण की दोहरी प्रक्रिया स्वाभाविक जीवन बनकर उभरती है। झारखण्ड प्रतिरोध संस्कृति का वह दिसुम (इलाका) है, जहाँ अस्मिता एवं स्वशासन एक गम्भीर विमर्श के रूप में सामूहिक चेतना का अभिन्न हिस्सा हैं। रचनात्मकता का एक नया क्षितिज दिखता है। श्रम की प्रतिष्ठा का अद्भुत केन्द्र। इस पुस्तक में झारखंडी दर्शन को व्यापक सन्दर्भ में देखने-समझने की कोशिश की गयी है। आदिवासी संस्कृति के मिथक एवं यथार्थ के विमर्श का विस्तृत फलक यहाँ प्रस्तुत है। समकालीन चुनौतियों एवं संकटों के बीच झारखंडी जनसमाज में अन्तर्निहित देशज विकल्प उम्मीदों से भरे रोशनदान हैं और अद्यतन विमर्श में एक नए अध्याय की तरह उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
Bundelkhand Ki Sanskrtik Nidhi
- Author Name:
Mahendra Kumar Navaiya
- Book Type:

- Description: वैसे तो देश में हजारों बोलियाँ बोली जाती हैं और इन सब बोलियों का अपना-अपना महत्त्व अपनी-अपनी जगह है | मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भी बुंदेलखंडी बोली बोली जाती है, जिसका अपना एक अंदाज है | किसी भी बोली को अलंकृत करने, मोहक और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए उस बोली में पहेलियों, कहावतों, मुहावरों, कहानियों और अहानों का विशेष महत्त्व होता है। बुंदेलखंडी बोली में लोक-स्मृति में आज भी ऐसी पहेलियाँ, कहावतें, कहानी, अहाने और मुहावरे सुरक्षित एवं संरक्षित हैं | यह सब पुरानी पीढ़ी के पास ही है, ऐसी लोक-स्मृतियों को एक जगह समेटने में आज तक कोई प्रयास नहीं हुआ है, संभवत 'बुंदेलखंड की सांस्कृतिक निधि' एकमात्र ऐसी पुस्तक है, जिसे लेखक ने लोक स्मृतियों से निकालकर साहित्य के रुप में संरक्षित किया है। इतना ही नहीं, बुंदेलखंड की सांस्कृतिक निधि पुस्तक बच्चों, युवाओं और सभी आयु वर्ण के लोगों को बुंदेलखंड के रीति-रिवाज, बुंदेली बोली के गूढ़ रहस्यों, पहेलियों, कहावतों, कहानियों, मुहावरों और अहान से परिचित कराने में मील का पत्थर है। निश्चित रूप से आज की चकाचौंध भरी दुनिया में ऐसे ज्ञानमयी साहित्य की आवश्यकता है, जिसे लेखक ने इस पुस्तक में बखूबी सजाया है|
Bastar Ki Aadivasi Evam Lok Hastshilp Parampara
- Author Name:
Harihar Vaishnav
- Book Type:

- Description: कोई भी शिल्प या कला केवल शिल्प या कला नहीं होती, वह इतिहास को भी अपने भीतर समेटे होती है और वर्तमान को भी उसी तरह सामने रखती है, उसे प्रतिबिम्बित करती है। इतना ही नहीं, हम उसमें सम्बन्धित समाज का भविष्य भी देख-पढ़ सकते हैं। कहना ग़लत न होगा कि आदिवासी एवं लोक हस्तशिल्पों में उनका कल्पना-लोक बहुत ही प्रभावशाली ढंग से रूपायित होता और अहम् भूमिका निभाता दिखलाई पड़ता है। बस्तर अंचल के हस्तशिल्प, चाहे वे आदिवासी हस्तशिल्प हों या लोक हस्तशिल्प, दुनिया-भर के कलाप्रेमियों का ध्यान आकृष्ट करने में सक्षम रहे हैं! कारण, इनमें इस आदिवासी बहुल अंचल की आदिम संस्कृति की सोंधी महक बसी रही है। यह शिल्प-परम्परा और उसकी तकनीक बहुत पुरानी है। शिल्प का यह ज्ञान बहुत पुराना और पारम्परिक है, किन्तु इस ज्ञान का लिखित स्वरूप अब तक नहीं मिल पाया था। यही कारण है कि बस्तर अंचल में जन्मे, पले, बढ़े और सतत जिज्ञासु साहित्यकार-लेखक और संस्कृतिकर्मी हरिहर वैष्णव को यह लगा कि न केवल बस्तर, अपितु देश के अन्य भागों में विभिन्न हस्तशिल्प विधाओं से जुड़े शिल्पियों के पास शिल्प और उसकी परम्परा से सम्बन्धित जो मौखिक ज्ञान है, वह किसी-न-किसी तरह अगली पीढ़ी तक हस्तान्तरित होना चाहिए। श्री वैष्णव के पास यहाँ के आदिवासी एवं लोक हस्तशिल्पियों से सम्बद्ध विभिन्न लोगों से बातचीत के दौरान पहले से एकत्र थोड़ी-बहुत सामग्री तो थी और कच्ची भी। अपनी इस नहीं के बराबर और कच्ची जानकारी को उन्होंने सम्बन्धित शिल्पियों से कई-कई बार मिलकर तथा सहभागी अवलोकन आदि के द्वारा और अधिक समृद्ध करने का प्रयास किया। विश्वास है कि बस्तर के आदिवासी एवं लोक हस्तशिल्प तथा इसकी परम्परा में रुचि रखनेवाले कलाप्रेमियों तथा अध्येताओं के लिए यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी।
Afganistan - Samrajyanchi Dafanbhumi
- Author Name:
Sachin Diwan
- Book Type:

- Description: व्यक्ती किंवा राष्ट्राच्या जीवनप्रवासात जशी उमेद देणारी आदर्श उदाहरणे आवश्यक असतात, तसेच काय करू नये हे सांगणारे, धोक्याची सूचना देणारे दाखलेही गरजेचे असतात. दुर्दैवाने आज अफगाणिस्तान हा देश धोक्याची सूचना देणाऱ्या दाखल्याच्या रूपात जगासमोर उभा आहे. भौगोलिक साधनसंपत्ती, पूर्वापार जागतिक व्यापारी मार्गांवर असलेले मोक्याचे स्थान, स्वाभिमानी आणि लढाऊ लोक अशा अनेक जमेच्या बाजू असूनही अफगाणिस्तान आज ओळखला जातो तो एक ‘फेल्ड स्टेट' म्हणून. पराकोटीचा आणि विधीनिषेधशून्य धर्माभिमान, त्याला मिळालेली हिंसेची जोड, आधुनिक जगाकडे फिरवलेली पाठ आणि परकीय शक्तींचा हस्तक्षेप यातून हा प्राचीन देश आणि समाज देशोधडीला लागला आहे. ही आपल्यासह अन्य देशांसाठीही धोक्याची घंटा ठरू शकते. त्यासाठीच अफगाणिस्तानची वाटचाल समजून घेणे निकडीचे ठरते.हा प्रवास संघर्षमय असला तरी रंजक आणि उद्बोधक आहे. साम्राज्यवादाच्या सुरुवातीच्या काळात महाशक्तींमध्ये खेळल्या गेलेल्या ‘द ग्रेट गेम'पासून अगदी आतापर्यंतच्या भू-राजकीय संघर्षाची किनार त्याला आहे. जग जिंकायला निघालेल्या अलेक्झांडरपासून सातासमुद्रांवर हुकूमत गाजवणाऱ्या ब्रिटनपर्यंत आणि सोविएत युनियनपासून अमेरिकेपर्यंत सर्व महासत्तांनी आजवर या भूमीत मारच खाल्ला आहे. त्यासाठीच अफगाणिस्तान ‘साम्राज्यांची दफनभूमी' म्हणून ओळखले जाते. अनेक रोमहर्षक प्रसंग आणि पात्रांनी ही कहाणी सजली आहे. त्यात भारताचेही हितसंबंध गुंतले असल्याने या कहाणीला वेगळे महत्त्व लाभले आहे. कवी इक्बाल यांनी शतकभरापूर्वी अफगाणिस्तानचे वर्णन ‘आशिया खंडाचे हृदय' असे केले होते. तेथे शांतता असेल तर आशियात शांतता असेल, तेथे संघर्ष असेल तर संपूर्ण आशियात संघर्ष असेल, असे इक्बाल यांनी म्हटले होते. आजही ते वर्णन अफगाणिस्तानला लागू पडते. त्या भळभळत्या हृदयाची स्पंदने टिपण्याचा प्रयत्न म्हणजे हा ग्रंथ होय! Afganistan : Samrajyanchi Dafanbhumi |Sachin Diwan अफगाणिस्तान : ‘साम्राज्यांची दफनभूमी'! | सचिन दिवाण
Sanskritik Rashtravad : Hashiye Ka Samaj Aur Hindi Upanyas
- Author Name:
Rohini Aggarwal
- Book Type:

- Description: ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद : हाशिए का समाज और हिन्दी उपन्यास’ वरिष्ठ आलोचक रोहिणी अग्रवाल की महत्त्वपूर्ण पुस्तक है जहाँ इतिहास-चेतना, राजनीतिक-दृष्टि और सामाजिक प्रतिबद्धता को आलोचनात्मक विश्लेषण की अनिवार्य दृष्टि बनाकर सत्ता-संरचना की जटिलताओं से वैचारिक मुठभेड़ की गई है। इस प्रक्रिया में वे जिस वैचारिक सजगता के साथ मुख्यधारा बनाम हाशिया, वर्चस्व बनाम प्रतिरोध, दमन बनाम संघर्ष की अपरिहार्य द्वन्द्वात्मक टकराहट की बारीकियों को पकड़ती हैं, उतनी ही प्रखरता के साथ विचार एवं अस्तित्व की गतिशील निर्मितियों को समय की सांस्कृतिक विकास-यात्रा के प्रमुख पड़ावों की तरह परखती हैं। यही कारण है कि उनकी आलोचना-दृष्टि का वितान सभ्यता-समीक्षा के गहन नैतिक दायित्व का दृष्टान्त बन जाता है। हिन्दी व हिन्दीतर उपन्यासों के विखंडनपरक विश्लेषण के क्रम में यह पुस्तक किसानों, आदिवासियों, स्त्रियों, थर्ड जेंडर और झोंपड़पट्टी समाज के संघर्ष की विडम्बनात्मक ध्वनियों के समानान्तर सत्ता-संरचना के विविध उपकेन्द्रों की कूटनीतिक रणनीतियों को ही उजागर नहीं करती, साहित्य को सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन का सक्रिय और जवाबदेह उपकरण भी बनाती है। इसलिए यहाँ उपन्यास कंटेंट के मालगोदाम की तरह नहीं, बल्कि एक समग्र वैचारिक कलाकृति की तरह विश्लेषित किये गए हैं। ‘पाठ’ के रूप में उभरते विश्लेषण को अर्थ-निर्माण की रचनात्मक प्रविधि का रूप देना, भाषा में बहुव्यंजक अर्थध्वनियों को भरना, और संवाद की सहभागिता में पाठक की सक्रियता को शामिल करना इसकी सबसे बड़ी ताकत है। ज़ाहिर है कि इस पुस्तक को पढ़ना हमारे समय की प्रश्नाकुल बेचैनियों को आलोचनात्मक विवेक के साथ जाँचना है।
Chetna Hero English
- Author Name:
Mission Chetna
- Book Type:

- Description: Chetna is a movement to recognise, appreciate and support goodness in the world. Living up to its mission of ‘Spreading Goodness’ and with the aim of inspiring many to follow goodness in life, the Chetna honours men and women across India, who are brave enough to go against the flow and reach out to help other individuals and families in need. These men and women are recognised as Chetna Heroes. Chetna Heroes are those people who have chosen to speak up through their deeds. None of them began their activities for social good as a broad-based, well-planned and well-funded programme. They simply responded to silent cries for help of people they came into contact with and they did not stop after answering the first cry. These Chetna Heroes continued to ask themselves—“What more can I do?”, “Who else needs this type of assistance?” The answers to these questions shaped their lives into the stories of inspiration that they are today. Chetna is presenting this Coffee Table Book—CHETNA HEROES—To appreciate applaud the dedication and selfless service of these great human beings. We believe that the stories of ‘Chetna Heroes’ will inspire many to follow suit, in embracing and supporting goodness. This very thought is the basis of publishing this Coffee Table Book.
Manohar Shyam Joshi
- Author Name:
Prabhat Ranjan
- Book Type:

- Description: मनोहर श्याम जोशी ने अनेक फिल्मों के लिए पटकथा और संवाद-लेखन का काम किया। यहाँ उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसका एक कारण शायद यह भी है कि सिनेमा में पूरी तरह निर्देशक ही माध्यम होता है और उसमें लेखक की कहानी को निर्देशक अपने किसी खास कोण से सिनेमा में ढालता है और इस क्रम में लेखक का संदेश कई बार कहीं पीछे छूट जाता है। ‘हे राम’, ‘भ्रष्टाचार’, ‘पापा कहते हैं’ उनकी लिखी कुछ ऐसी फिल्में हैं, जिनकी चर्चा की जा सकती है। मनोहर श्याम जोशी का व्यक्तित्व बहुआयामी कहा जा सकता है। उनके इस बहुआयामी व्यक्तित्व का केंद्रीय आयाम लेखन था। उनको एक ऐसे लेखक के रूप में याद किया जाएगा, जो अनेक माध्यमों में लेखन की कसौटी पर खरे उतरे। यही कारण है कि हिंदी पत्रकारों-लेखकों में उनका व्यक्तित्व सबसे अलग दिखाई देता है। वे एक ऐसे पत्रकार थे, जिनका पत्रकारिता और साहित्य से समान नाता रहा। हमें विश्वास है कि विश्वविद्यालय द्वारा मूर्धन्य पत्रकार-संपादकों की इस मोनोग्राफ श्रृंखला से पत्रकार जगत् और पत्रकारिता के विद्यार्थी लाभान्वित होंगे और विरासत की इस समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रवृत्त होंगे।
Neetidarshan : Ek Niyamak Adhyayan
- Author Name:
Shyam Kishor Seth
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक में नीतिदर्शन के पारम्परिक नियामक अध्ययन (Normative Study) का प्रस्तुतीकरण है। पुस्तक को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया गया है। प्रथम भाग नीतिदर्शन/नीतिशास्त्र की परिभाषा, स्वरूप, विषय-क्षेत्र व सुनिश्चित विषयवस्तु से सम्बन्धित है। इसी भाग में विभिन्न नैतिक सिद्धान्तों के वर्गीकरण को सुव्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है जिसके फलस्वरूप दो तरह के वर्ग सामने आते हैं : (1) परिणाम-निरपेक्षतावाद या शुद्ध कर्त्तव्यवाद (Deontological Theories) और (2) परिणाम-सापेक्षतावाद या फलवाद (Teleological Theories or Consequentialism)। पुस्तक के दूसरे भाग में परिणाम-निरपेक्षतावाद या शुद्ध कर्त्तव्यवाद के वर्ग में आने वाले विभिन्न सिद्धान्तों को विश्लेषित किया गया है जिसमें नैतिकता-निर्धारण हेतु कुछ बाह्य नियमों, यथा दैवी व सामाजिक नियमों, से सम्बन्धित तथा कुछ आन्तरिक नियमों सम्बन्धी सिद्धान्त, जैसे अन्तःप्रज्ञावाद व बुद्धिवाद शामिल हैं। पुस्तक के तीसरे भाग की विषयवस्तु परिणाम-सापेक्षतावाद या फलवाद है। इस भाग में सुखवाद व उसके विभिन्न प्रकारों, शक्ति के सिद्धान्त तथा पूर्णतावाद का विशद विश्लेषण है। पुस्तक में एक परिशिष्ट भी जोड़ा गया है जिसमें नीतिदर्शन सम्बन्धी एक अत्याधुनिक सिद्धान्त 'सद्गुण नीति' (Virtue Ethics) की संक्षिप्त चर्चा है, जो प्रथम भाग में वर्णित 'अधिनीतिशास्त्र' (Meta Ethics) के साथ मिलकर सम्भवतः इस पुस्तक की सामग्री को अधिक व्यापक बनाती है।
Khelatoon Vyakaran
- Author Name:
Renu Dandekar
- Book Type:

- Description: आपण बोलतो ती भाषा म्हणजेच व्याकरण. भाषेपासून व्याकरण वेगळं काढता येत नाही. लहान मूल ऐकून ऐकून बोलायला शिकतं तेव्हा ते व्याकरणासह त्याच्या त्याच्या बोलीभाषेत बोलत असतं. मात्र प्रत्यक्ष शिक्षण प्रक्रियेत व्याकरण हे भाषेपासून वेगळं काढून शिकवलं जातं आणि तिथेच मुलांच्या मनात भाषा विषयाबद्दलची एक अढी तयार होते. कारण नियम आणि व्याख्या यामध्ये मुलं अडकतात. परिणामी व्याकरणासह भाषा शिकणं ही कंटाळवाणी प्रक्रिया बनते. हे टाळायचं असेल, तर मनोरंजक अशा भाषिक खेळातून मुलांना व्याकरणाचे धडे दिले पाहिजेत. हाच दृष्टिकोन बाळगत रेणू दांडेकर यांनी ‘खेळातून व्याकरण' या पुस्तकाची रचना केली आहे. कोणताही नियम अथवा व्याख्या न सांगता विविध प्रकारच्या भाषिक खेळांमधून व्याकरणाचे धडे गिरवायला लावणारं हे पुस्तक आपल्या मुलांची मराठी भाषा अधिक समृद्ध करायला नक्कीच मदत करेल. तेव्हा शिक्षक, पालक आणि मुलं या सर्वांनीच खेळातून व्याकरण शिकवणारं पुस्तक आपल्या संग्रही ठेवायलाच हवं. Khelatoon Vyakaran | Renu Dandekar खेळातून व्याकरण | रेणू दांडेकर
Safai Kamgar Samuday
- Author Name:
Sanjeev Khudshah
- Book Type:

- Description: सिर पर मैला ढोने की प्रथा मानव सभ्यता की सबसे बड़ी विडम्बनाओं में से एक रही है। सोचनेवाले सदा से सोचते रहे हैं कि आख़िर ये कैसे हुआ कि कुछ लोगों ने अपने ही जैसे मनुष्यों की गन्दगी को ढोना अपना पेशा बना लिया। इस पुस्तक का प्रस्थान बिन्दु भी यही सवाल है। लेखक संजीव खुदशाह ने इसी सवाल का जवाब हासिल करने के लिए व्यापक अध्ययन किया, विभिन्न वर्गों के लोगों, विचारकों और बुद्धिजीवियों से विचार-विमर्श किया। उनका मानना है कि इस पेशे में काम करनेवाले लोग यहाँ की ऊँची जातियों से ही, ख़ासकर क्षत्रिय एवं ब्राह्मण जातियों से निकले। इसी तरह किसी समय श्रेष्ठ समझी जानेवाली डोम वर्ग की जातियाँ भी इस पेशे में आईं। लेखक ने इन पृष्ठों में सफ़ाई कामगार समुदायों के बीच रहकर अर्जित किए गए अनुभवों का विवरण भी दिया है।
Door Need Ke Pakshi
- Author Name:
Jai Prakash Pandey
- Book Type:

- Description: दूर नीड़ के पक्षी' जय प्रकाश पांडेय का प्रथम कहानी-संग्रह है, जिसमें पच्चीस कहानियाँ संकलित हैं। सभी कहानियों का विषय पृथक्-पृथक् है। इन कहानियों में लेखक ने हिंदी साहित्य के कुछ अनछुए विषयों को चुना है। 'दूर नीड़ के पक्षी ' पुस्तक की प्रतिनिधि रचना है, जिसमें टूटते, पारिवारिक नाते-रिश्ते और संस्कारों के बदलाव की आहट है। अरमान, पुनर्विवाह, जीवन-संघर्ष, रेत का साम्राज्य जैसी कहानियाँ मानव-मन की अनेक परतों को प्रतिबिंबित करती हैं। यंत्रवत् बाजार व्यवस्था, प्लेटिनम जुबली, बर्थ नंबर पच्चीस, आवास जैसी कहानियाँ वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को उसके वास्तविक स्वरूप में उजागर करती हैं। अधूरा समर्पण, बिंदास और बदलाव जैसी कहानियों में स्त्री-पुरुषों की ग्रंथियों, उनके संबंधों, परंपप और बदलते परिवेश की बयार को महसूस करने की कोशिश है। लाल अंगारे और दाखिला कहानी में मध्यम वर्ग की छोटी-छोटी खुशियों के लिए जीवन-रूपी सागर में डूबने-उतारने का सजीव और मार्मिक चित्रण है। कहानी-संग्रह की सभी कहानियों में समाज और व्यक्ति के बीच हिचकोले खाता जीवन अपने विविध रूपों और अनेकानेक विरोधाभासों में रूपायित हुआ है। हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए एक पठनीय एवं मनोरंजक कहानी-संग्रह ।
HASHIYE PAR HASRAT
- Author Name:
Bhim Singh Bhavesh
- Book Type:

- Description: "‘हाशिए पर हसरत’ एक ऐसे कटु यथार्थ का दस्तावेज है, जो हमारे समाज के लिए आज भी शर्म का बायस है। भारतीय समाज की संरचना में जाति-वर्ण की विभाजक रेखा इतनी प्रतिगामी और अमानवीय साबित हुई है कि एक सभ्य समाज उससे जितनी जल्द मुक्त होगा, उसका उतना ही भला होगा। यह पुस्तक उसी परिप्रेक्ष्य में भारतीय समाज की जाति-व्यवस्था में अस्पृश्य जातियों की अंतिम पंक्ति में खड़े मुसहर जाति की स्थिति से रू-ब-रू कराने की कोशिश है। भीम सिंह भवेश की यह पुस्तक वस्तुतः समाज विज्ञान में एक शोध है। यह पुस्तक मुसहरों के जीवन, उनकी जीवन-दृष्टि, आपसी संबंधों, दशा-दिशा, भविष्य और समाज की मुख्यधारा के प्रति उनकी धारणाओं का प्रामाणिक दस्तावेज है। मुसहर-टोलों के जीवन को जिस संवेदना के साथ भवेश ने उकेरा है, उसका एहसास इसे पढ़ने पर होता है। उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, मान्यताओं और जटिलताओं को लेखक ने बहुत करीब से देखा है। ग्रामीण जीवन के अमर चितेरे फणीश्वर नाथ रेणु के जन्म शताब्दी वर्ष में ‘हाशिए पर हसरत’ का प्रकाशन ‘मैला आँचल’ के लेखक को सबसे अच्छी श्रद्धांजलि भी है। भवेश ने जानकारियाँ जुटाने में मेहनत तो की ही है, उन्हें प्रस्तुत भी रोचक शैली में किया है। इसीलिए यह शुष्क शोध नहीं, बल्कि पठनीय कथ्य के माध्यम से संवेदनशील विषय के प्रति हमारे अंदर संवेदना जगाती है। यही इस पुस्तक की विशेषता है। यह पुस्तक मुसहर जाति को समझने, उनके दारुण दुःखों को महसूस करने और उन्हें उच्च मानवीय गरिमा प्रदान करने के प्रयासों को बल देगी। —अवधेश प्रीत "
Aao Model Banayen
- Author Name:
Shyam Sunder Sharma
- Book Type:

- Description: "आमतौर पर बच्चे विज्ञान को कठिन विषय समझते हैं। वे समझते हैं कि विज्ञान में बहुत पढ़ना पड़ता है, प्रयोग करने पड़ते हैं और कई बार घर या स्कूल से बाहर—बगीचों, जंगलों आदि में—घूमना पड़ता है। पर न तो विज्ञान के प्रयोग हमेशा बहुत कठिन होते हैं और न ही सब प्रयोगों को करने से पहले बहुत अध्ययन कर जरूरत होती है। प्रयोग करने के लिए कई बार मॉडलों की जरूरत होती है। ये मॉडल सरल यंत्र होते हैं और इन्हें आसानी से बनाया जा सकता है (वैसे इनको बनाना भी अपनेआप में बहुत रोचक प्रयोग होते हैं)। इन्हें तुम उन चीजों से बना सकते हो जो आसानी से बाजार में मिल जाती हैं और जिनकी लागत भी ज्यादा नहीं होती। "
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book