Andhere Mein : Antastal Ka Poora Viplav

(0)

Author:

Nirmala Jain

Language:

Hindi

495

396 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


‘अँधेरे में’ उत्तरशती की सबसे महत्त्वपूर्ण और शायद सबसे विवादास्पद कविता है। वि‍वाद भि‍न्न रुचि और वि‍चारधारा वालों के बीच ही नहीं, समानधर्मा आलोचकों के बीच भी है। यह तथ्य कविता की सम्भावनाशीलता का प्रमाण है। यह भी सही है कि मुक्ति‍बोध के जीवन-काल में इस कविता को ख़ुद उनसे सुना तो कइयों ने होगा, लेकि‍न इसे सराहा उनकी मृत्यु के बाद ही गया। इस वि‍लम्ब का कारण उपेक्षा या उदासीनता नहीं, बल्कि ऐतिहासिकता है। अपने समय का अतिक्रमण हर कालजयी रचना में होता है। लेकि‍न आनेवाले समय के इस कदर साथ चलनेवाली रचनाओं की संख्या बहुत नहीं होती। इस दृष्टि से देखने पर यह बात हैरत में डालनेवाली है कि अपने सारे जटिल अर्थ-वि‍न्यास और अपारदर्शी शि‍ल्प के बावजूद इस कविता के पाठकों की संख्या उत्तरोत्तर बढ़ती गई है। कविता के पाठक-आलोचकों ने तरह-तरह से इस बात को दोहराया है कि मध्यवर्ग के सुविधाजीवी, समझौतावादी और आदर्शजीवी मन का संघर्ष ही ‘अँधेरे में’ की काव्य-वस्तु है। इस पुस्तक में ख्यात हि‍न्दी आलोचक नि‍र्मला जैन ने ‘अँधेरे में’ पर आधारित आलोचनात्मक आलेखों को संकलित कि‍या है। ये आलेख इस कालजयी कविता की वि‍भिन्न पक्षों से व्याख्या करते हैं।

Read more

ISBN
N/A
Pages
N/A
Avg Reading Time
5 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

‘अँधेरे में’ उत्तरशती की सबसे महत्त्वपूर्ण और शायद सबसे विवादास्पद कविता है। वि‍वाद भि‍न्न रुचि और वि‍चारधारा वालों के बीच ही नहीं, समानधर्मा आलोचकों के बीच भी है। यह तथ्य कविता की सम्भावनाशीलता का प्रमाण है। यह भी सही है कि मुक्ति‍बोध के जीवन-काल में इस कविता को ख़ुद उनसे सुना तो कइयों ने होगा, लेकि‍न इसे सराहा उनकी मृत्यु के बाद ही गया। इस वि‍लम्ब का कारण उपेक्षा या उदासीनता नहीं, बल्कि ऐतिहासिकता है।

अपने समय का अतिक्रमण हर कालजयी रचना में होता है। लेकि‍न आनेवाले समय के इस कदर साथ चलनेवाली रचनाओं की संख्या बहुत नहीं होती। इस दृष्टि से देखने पर यह बात हैरत में डालनेवाली है कि अपने सारे जटिल अर्थ-वि‍न्यास और अपारदर्शी शि‍ल्प के बावजूद इस कविता के पाठकों की संख्या उत्तरोत्तर बढ़ती गई है।

कविता के पाठक-आलोचकों ने तरह-तरह से इस बात को दोहराया है कि मध्यवर्ग के सुविधाजीवी, समझौतावादी और आदर्शजीवी मन का संघर्ष ही ‘अँधेरे में’ की काव्य-वस्तु है।

इस पुस्तक में ख्यात हि‍न्दी आलोचक नि‍र्मला जैन ने ‘अँधेरे में’ पर आधारित आलोचनात्मक आलेखों को संकलित कि‍या है। ये आलेख इस कालजयी कविता की वि‍भिन्न पक्षों से व्याख्या करते हैं।

Book Details

  • ISBN
    9788183619936
  • Pages
    155
  • Avg Reading Time
    5 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

0 out of 5

Book

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp