Cheen Mein Darshanshastra
(0)
Author:
G. RamkrishnaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
250
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‘दर्शनशास्त्र : पूर्व और पश्चिम’ ग्रन्थमाला की यह दूसरी पुस्तक है जिसमें विश्व की एक प्राचीनतम दार्शनिक धारा का परिचय प्रस्तुत किया गया है।</p> <p>चीन में दर्शन की परम्परा यों तो बहुत पुरानी है, लेकिन ईसा-पूर्व की पाँचवीं से तीसरी शताब्दी का काल दार्शनिक चिन्तन की दृष्टि से समृद्धि का काल माना जाता है। कन्फ्यूशियस का चिन्तन इसी काल की देन है। तब से लेकर कुछ शताब्दी पहले तक इस देश में अनेक दार्शनिक मतवाद अस्तित्व में आए। प्रस्तुत पुस्तक में इन सभी मतवादों की पृष्ठभूमि स्पष्ट करने के लिए अनेक सदियों के कालक्रम में चीन के राजवंशों की एक संक्षिप्त रूपरेखा दी गई है। उसके बाद विभिन्न सम्प्रदायों के सिद्धान्तों और उनके सामाजिक-राजनीतिक निहितार्थों का विवेचन किया गया है। चीन में बौद्ध मत का आगमन एक महत्त्वपूर्ण घटना थी, जिसके फलस्वरूप चिन्तन के क्षेत्र में कई धाराओं-उपधाराओं का जन्म हुआ। चीनी दर्शन में चूँकि इन धाराओं-उपधाराओं का विशेष महत्त्व है, इसलिए लेखक ने ख़ास तौर पर इनका विश्लेषण और इनके दार्शनिक लक्ष्यों का मूल्यांकन किया है। इसी प्रकार, इन्होंने एक ओर महिमामंडित कन्फ्यूशियस को एक सटीक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में स्थापित किया है तो दूसरी ओर लांछित ताओवाद की एक सुबोध व्याख्या भी दी है।</p> <p>चीनी दर्शन के अनेक सम्प्रदायों का मत रहा है कि दर्शनशास्त्री होने के लिए हर समय तत्त्वमीमांसा के गूढ़ रहस्यों में उलझे रहना आवश्यक नहीं है। इसी प्रकार हमारा भी विश्वास है कि प्रस्तुत पुस्तक को पढ़ने और समझने के लिए दर्शन का पंडित होना आवश्यक नहीं है। थोड़े-से पृष्ठों में चीनी दर्शन का एक व्यापक, फिर भी सुबोध, परिचय इस पुस्तक की विशेषता है, और आशा की जा सकती है कि इससे विशेषतः भारतीय और चीनी दर्शनों के तुलनात्मक अध्ययन की प्रेरणा प्राप्त होगी।
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‘दर्शनशास्त्र : पूर्व और पश्चिम’ ग्रन्थमाला की यह दूसरी पुस्तक है जिसमें विश्व की एक प्राचीनतम दार्शनिक धारा का परिचय प्रस्तुत किया गया है।</p>
<p>चीन में दर्शन की परम्परा यों तो बहुत पुरानी है, लेकिन ईसा-पूर्व की पाँचवीं से तीसरी शताब्दी का काल दार्शनिक चिन्तन की दृष्टि से समृद्धि का काल माना जाता है। कन्फ्यूशियस का चिन्तन इसी काल की देन है। तब से लेकर कुछ शताब्दी पहले तक इस देश में अनेक दार्शनिक मतवाद अस्तित्व में आए। प्रस्तुत पुस्तक में इन सभी मतवादों की पृष्ठभूमि स्पष्ट करने के लिए अनेक सदियों के कालक्रम में चीन के राजवंशों की एक संक्षिप्त रूपरेखा दी गई है। उसके बाद विभिन्न सम्प्रदायों के सिद्धान्तों और उनके सामाजिक-राजनीतिक निहितार्थों का विवेचन किया गया है। चीन में बौद्ध मत का आगमन एक महत्त्वपूर्ण घटना थी, जिसके फलस्वरूप चिन्तन के क्षेत्र में कई धाराओं-उपधाराओं का जन्म हुआ। चीनी दर्शन में चूँकि इन धाराओं-उपधाराओं का विशेष महत्त्व है, इसलिए लेखक ने ख़ास तौर पर इनका विश्लेषण और इनके दार्शनिक लक्ष्यों का मूल्यांकन किया है। इसी प्रकार, इन्होंने एक ओर महिमामंडित कन्फ्यूशियस को एक सटीक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में स्थापित किया है तो दूसरी ओर लांछित ताओवाद की एक सुबोध व्याख्या भी दी है।</p>
<p>चीनी दर्शन के अनेक सम्प्रदायों का मत रहा है कि दर्शनशास्त्री होने के लिए हर समय तत्त्वमीमांसा के गूढ़ रहस्यों में उलझे रहना आवश्यक नहीं है। इसी प्रकार हमारा भी विश्वास है कि प्रस्तुत पुस्तक को पढ़ने और समझने के लिए दर्शन का पंडित होना आवश्यक नहीं है। थोड़े-से पृष्ठों में चीनी दर्शन का एक व्यापक, फिर भी सुबोध, परिचय इस पुस्तक की विशेषता है, और आशा की जा सकती है कि इससे विशेषतः भारतीय और चीनी दर्शनों के तुलनात्मक अध्ययन की प्रेरणा प्राप्त होगी।
Book Details
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ISBN9789394902930
-
Pages108
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: "वस्तुतः रसायन विज्ञान प्रकृति, पर्यावरण और जीवन से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। और तो और पृथ्वी पर जीवन का प्रादुर्भाव भी जटिल रासायनिक प्रतिक्रियाओं का ही परिणाम है। यहाँ तक कि जीवन की प्रत्येक गतिविधि में रासायनिक क्रिया-प्रतिक्रिया छिपी है। रासायनिक प्रतिक्रियाओं के बिना जीवन संभव नहीं है। प्रस्तुत पुस्तक में रसायन विज्ञान के महत्त्वपूर्ण अध्यायों, जैसे कि परमाणु संरचना, कार्बन और उसके यौगिक, धातुएँ और अधातुएँ, विलयन, नाभिकीय रसायन इत्यादि के अंतर्गत उपयोगी वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का समावेश किया गया है। छात्र-छात्राओं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों एवं सामान्य वर्ग के पाठकों के लिए यह पुस्तक निश्चित ही अत्यंत उपयोगी साबित होगी। "
Ped Aur Parchhai
- Author Name:
Udyan Vajpeyi +1
- Book Type:

- Description: प्रसिद्ध कवि और लेखक उदयन वाजपेयी के लघु निबंध और भज्जू श्याम के चित्र इस पुस्तक का निर्माण करते हैं। उदयन वाजपेई के निबंध कल्पनाशील और चतुराई से गढ़े गए हैं। वह परिभाषाओं से निपटता नहीं है बल्कि वह किसी चीज़ को देखने के वैकल्पिक तरीकों पर विचार करता है। इस प्रकार वह वस्तु को उसकी प्रचलित परिभाषाओं से मुक्त कर देता है। भज्जू श्याम के चित्र सोच-समझकर बनाए गए और विस्तृत हैं। उनके सूक्ष्म विवरणों का आनंद लेने के लिए उन्हें ध्यानपूर्वक, बारीकी से देखें। Age group 9-12 years
Bad Man
- Author Name:
Gulshan Grover +1
- Book Type:

- Description: "हमारे देश की राजधानी के बाहरी इलाके में पले-बढ़े गुलशन ग्रोवर 1970 के दशक में एक्टिंग में अपना कॅरियर बनाने के लिए बंबई चले आए। ऐसे समय में जब एक्टर बनने की ख्वाहिश रखनेवाले अधिकांश लोग हीरो बनना चाहते थे, तब उन्होंने अपनी पसंद से खलनायक की भूमिकाओं को चुना। उन्होंने एक के बाद एक कई यादगार किरदार निभाए जिनमें से 1989 की सुपरहिट फिल्म, ‘राम-लखन’ में उनकी भूमिका कॅरियर के लिए निर्णायक साबित हुई और बॉलीवुड के ‘बैड मैन’ के तौर पर उनकी पहचान पक्की हो गई। उस युग की कितनी ही बड़ी-बड़ी फिल्मों को उनके खास तकियाकलामों और अजीब-अजीब किस्म की पोशाकों की वजह से कामयाबी मिली जो अब बॉलीवुड के किस्से-कहानियों का हिस्सा बन चुके हैं। धीरे-धीरे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फिल्मों का रुख किया और वहाँ भी अपने बेहतरीन अभिनय केकारण भारत का जाना-माना चेहरा बन गए। इस आत्मकथा में, ग्रोवर अपनी कहानी बयाँ करते हैं—अपनी फिल्मों की, अपने सफर की, बैड मैन की छवि को बनाए रखने के मनोवैज्ञानिक और व्यक्तिगत नुकसान की, बॉलीवुड के खलनायकों के बीच होड़ की, ज्यादा विविधता भरे किरदार निभाने के फैसले की, और बहुत कुछ ऐसी बातों की, जो उनकेबारे में लगभग अनजानी हैं।
4 Baal Upanyas
- Author Name:
Prakash Manu
- Book Type:

- Description: साहित्य अकादेमी के पहले बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित प्रकाश मनु बच्चों के सुविख्यात कथाकार हैं। बच्चे और किशोर पाठक उनकी कहानियों और बाल उपन्यासों को खूब रस ले-लेकर पढ़ते, सराहते और जीवन भर अपनी यादों के पिटारे में सहेजकर रखते हैं। प्रकाश मनु उस्ताद किस्सागो हैं, इसीलिए देश के कोने-कोने में फैले हजारों बच्चे उनके मुरीद हैं, जिन्हें उनकी लिखी कहानी की नई पुस्तकों और उपन्यासों का इंतजार रहता है। मनुजी की कलम का जादू इस कदर बाल पाठकों के मन को बाँध लेता है कि उनके साथ बहते हुए, कब वे देश-दुनिया की नई-नई और रोमांचक जगहों की सैर करके आ गए, उन्हें खुद पता नहीं चलता। ‘चार बाल उपन्यास’ प्रकाश मनुजी के दिलचस्प और भावनापूर्ण बाल उपन्यासों की नई पुस्तक है, जिसे पढ़कर बच्चे रोमांचित हो उठेंगे और खेल-खेल में बहुत कुछ सीखेंगे भी। पुस्तक में मनुजी के चार बड़े ही कौतुकपूर्ण बाल उपन्यास शामिल हैं—‘चिंकू-मिंकू और दो दोस्त गधे’, ‘भोलू पढ़ता नई किताब’, ‘सांताक्लाज का पिटारा’ तथा ‘गोलू भागा घर से’। ये चारों ऐसे उपन्यास हैं, जिनका जादू बाल पाठकों के दिलों पर तारी हो जाएगा, और जब तक वे उन्हें पूरा पढ़ नहीं लेंगे, पुस्तक उनके हाथ से छूटेगी नहीं। निस्संदेह ‘चार बाल उपन्यास’ एक ऐसा बहुरंगी, मनमोहक उपहार है, जिसे बच्चे हमेशा सँजोकर रखेंगे और बार-बार पढ़ना चाहेंगे।
Shivrayanchi Dharmniti
- Author Name:
Dr. Ismail Pathan
- Book Type:

- Description: सतराव्या शतकातील धर्मश्रद्ध वातावरणात छत्रपती शिवाजी महाराजांनी दख्खनमध्ये स्वबळावर हिंदवी स्वराज्य स्थापन केले. अर्थात शिवरायांचा सर्वधर्मसमभावाचा विचार त्यांच्या या हिंदवी स्वराज्याचा मूलाधार होता. खरं तर छत्रपती शिवाजी महाराजांची हिंदू धर्मावर निष्ठा होती. ते धर्माभिमानीही होते, तरीही ते धार्मिक स्वातंत्र्याचे पुरस्कर्ते होते. त्यांनी नेहमीच सहिष्णुतेचे धोरण अवलंबले आणि आपल्या राज्यात सर्व जातिधर्मांच्या लोकांना आश्रय दिला. इतकंच नाही, तर कोणत्याही स्वरूपात धर्मभेद, जातीभेद न करता महाराजांनी शूर, पराक्रमी आणि एकनिष्ठ लोक आपल्याभोवती गोळा केले. त्यांनी कायमच हिंदू आणि मुस्लीम धर्माबद्दल उदार आणि पुरोगामी दृष्टिकोन बाळगला. स्वराज्यातील सर्व धर्मांच्या बांधवांना सन्मान देत सामाजिक सलोखा निर्माण करत सर्वार्थाने हिंदवी स्वराज्य बळकट केले. जगभरात सर्वांनीच गौरविलेल्या शिवरायांच्या या सहिष्णू धार्मिक धोरणाची प्राचार्य डॉ. इस्माईल पठाण यांनी आपल्या या ग्रंथात साधार, तपशीलवार चर्चा केली असून समाजस्वास्थ्याच्या दृष्टिकोनातून ती मार्गदर्शक ठरणारी अशी आहे. वाचक त्याचं दमदार स्वागत करतील अशी आशा. Shivrayanchi Dharmniti | Dr. Ismail Pathan शिवरायांची धर्मनीती | डॉ. इस्माईल पठाण
Baleshwar Agarwal Jeevan Yatra
- Author Name:
Ramashankar Kushwaha
- Book Type:

- Description: एक व्यक्ति जीवन में क्या और कितना कर सकता है, इसके लिए बालेश्वर अग्रवाल एक श्रेष्ठ उदाहरण हैं । पत्रकारिता में रहे तो एक पत्रकार की तरह सोचते और कार्य करते रहे। सक्रियता और सतर्कता में कोई कमी नहीं । हर चीज पर निगाह होती | हमेशा अपने को पृष्ठभूमि में रखते और साथियों को आगे बढ़ाते। इस पुस्तक में उनकी सुदीर्घ जीवन यात्रा में पत्रकारित और समाज-सेवा के उपलब्ध समस्त विवरण आ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद् का जिम्मा मिला तो देश और प्रवासी समाज को जोड़ने में जुट गए। दुनिया में प्रवासियों को लेकर होनेवाली सभी तरह की गतिविधियों और जरूरतों पर उनकी नजर रहती | उनके सामने क्या कठिनाइयाँ आती हैं और उन्हें दूर करने में वे क्या कर सकते हैं, इसके लिए प्रयासरत रहे । प्रवासी-जगत् बहुत बड़ा है और आज वह भारतवर्ष का पूरी दुनिया में प्रतिनिधित्व करता है। उनके माध्यम से भारतीय संस्कृति और जीवन-शैली सर्वत्र पहुँचती है। बालेश्वर इसके लिए प्रवासी समाज की नई पीढ़ी को जोड़ने का भरपूर प्रयास करते रहे। बालेश्वर अग्रवाल राष्ट्र-साधक थे | वह कुछ भी करते तो भारत देश और उसको संस्कृति उनके ध्यान में रहती । उनका लेखन इसका उदहारण है। दुनिया में जो भी हो रहा था, उसमें भारतीय और भारत कहाँ है और उसे किस तरह अपने को स्थापित करना है, यह उनके विचार के केंद्र में था। पर उनकी निगाह में भारतीयता सदैव सर्वोच्च रही ।
Socrates
- Author Name:
Arun Tiwari
- Book Type:

- Description: दुनिया भर के दार्शनिकों में सुकरात का विशिष्ट स्थान है। उनमें सोचने-समझने की क्षमता थी और वह सत्य एवं न्याय की खोज के प्रति दृढ़-संकल्प थे। वह मानते थे कि एक बेहतर विश्व की कल्पना तभी साकार हो सकती है, जब लोग समझदार एवं बुद्धिमान हों। हमें किसी दूसरे के विचारों को यूँ ही स्वीकार नहीं कर लेना चाहिए, बल्कि उनको आलोचनात्मक तर्क की कसौटी पर परखना चाहिए। सुकरात के विचारों का अध्ययन आज अधिक उपयोगी एवं प्रासंगिक हो गया है। सुकरात की कही हुई बहुत सी बातों को बड़ी प्रसिद्धि मिली। उन्हीं में से एक है—‘बिना जाँचा-परखा जीवन जीने योग्य नहीं होता है।’ उनके प्रिय शिष्य प्लेटो ने कहा था, “उनके समय के जितने भी लोगों को हम जानते हैं, उनमें से वे सर्वश्रेष्ठ और सबसे बुद्धिमान तथा अत्यंत न्यायसंगत व्यक्ति थे।” विश्वास है कि यह पुस्तक पाठकों को सदाचारी बनने में सहायक होगी और वे सुकरात के विचारों से सीख लेकर अपने जीवन की विषम परिस्थितियों का सामना कुशलता से कर सकेंगे।
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