Wah Phir Nahin Aai
(0)
Author:
Bhagwaticharan VermaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
199
₹ 159.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
"लेकिन शायद हम झूठ से अलग रह ही नहीं सकते। हमारा सामाजिक जीवन भी तो एक तरह का व्यापार है—आर्थिक न भी सही, भावनात्मक व्यापार, यद्यपि यह अर्थ हमारे अस्तित्व से ऐसे बुरी तरह चिपक गया है कि हम इससे भावना को मुक्त रख ही नहीं पाते। इस व्यापार में माल नहीं बेचा जाता या ख़रीदा जाता, बल्कि भावना का क्रय-विक्रय होता है। हमारा समस्त जीवन ही लेन-देन का है, और इसलिए झूठ की इस परम्परा को तोड़ सकने की सामर्थ्य मुझमें नहीं है। सामाजिक शिष्टाचार निभाने के लिए मैं निकल पड़ा। और कोई काम भी तो नहीं था मेरे पास।" नारी सनातन काल से पुरुष की लालसा का केन्द्र है। जीवन के संघर्षों में फँसकर अभागी नारी को संसार के प्रत्येक छल-कपट का सहारा लेना पड़ता है। किन्तु आधुनिक जीवन-संघर्षों की विषमता में ममता का सम्बल जीवन-नौका के लिए महान आशा है। भगवती बाबू का यह उपन्यास आकार में छोटा होकर भी अपनी प्रभावशीलता में व्यापक है, जिसकी गूँज देर तक अपने भीतर और बाहर महसूस की जा सकती है।
Read moreAbout the Book
"लेकिन शायद हम झूठ से अलग रह ही नहीं सकते। हमारा सामाजिक जीवन भी तो एक तरह का व्यापार है—आर्थिक न भी सही, भावनात्मक व्यापार, यद्यपि यह अर्थ हमारे अस्तित्व से ऐसे बुरी तरह चिपक गया है कि हम इससे भावना को मुक्त रख ही नहीं पाते। इस व्यापार में माल नहीं बेचा जाता या ख़रीदा जाता, बल्कि भावना का क्रय-विक्रय होता है। हमारा समस्त जीवन ही लेन-देन का है, और इसलिए झूठ की इस परम्परा को तोड़ सकने की सामर्थ्य मुझमें नहीं है। सामाजिक शिष्टाचार निभाने के लिए मैं निकल पड़ा। और कोई काम भी तो नहीं था मेरे पास।"
नारी सनातन काल से पुरुष की लालसा का केन्द्र है। जीवन के संघर्षों में फँसकर अभागी नारी को संसार के प्रत्येक छल-कपट का सहारा लेना पड़ता है। किन्तु आधुनिक जीवन-संघर्षों की विषमता में ममता का सम्बल जीवन-नौका के लिए महान आशा है।
भगवती बाबू का यह उपन्यास आकार में छोटा होकर भी अपनी प्रभावशीलता में व्यापक है, जिसकी गूँज देर तक अपने भीतर और बाहर महसूस की जा सकती है।
Book Details
-
ISBN9788126716647
-
Pages96
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Kamini Kay Kantare Vol-I
- Author Name:
Mahesh Katare
- Book Type:

- Description:
कामिनी काय कांतारे’ अर्थात कामिनी काया के जंगल में! राजा भर्तृहरि, गृहस्थ भर्तृहरि, प्रेमी भर्तृहरि, कवि भर्तृहरि, वैयाकरण भर्तृहरि, योगी भर्तृहरि! बहुमखी प्रतिभा के धनी विविध रूप-गुणों से संपन्न भर्तृहरि के जीवन पर आधारित यह उपन्यास कामिनी कंचन के बीच से ही नहीं गुजरता, कामिनी काया के जंगल से भी गुजरता है और कथा, इतिहास, मिथक के बल पर एक महान क्लासिक रचना वरिष्ठ कथाकार-उपन्यासकार महेश कटारे की कलम से पूर्णता को प्राप्त करती है। यह उपन्यास न मात्र बेहद पठनीय और रोचकता के लिहाज से महत्त्वपूर्ण है, ज्ञान को दीप्त करने वाली विशिष्ट कृति है। भारतीय परंपरा की थाती। उपन्यासकार के शब्दों में, ''भरथरी गाने वालों की कथा में बीवी की बेवफाई से दुखी राजा भरथरी जोगी बनकर महल, हवेली, राजपाट छोड़कर निकल गए। गुरु गोरखनाथ के कहने पर वह अपनी उसी पत्नी रानी पिंगला से भीख माँगने द्वार पर पहुँचे तो राजा को जोगी के भेष में देख रानी पछाड़ खाकर गिर पड़ी। 'भरथरी’ सुनती स्त्रियों की भीड़ राजा के घर से निकलते ही आँसू बहाने लगती और रानी के पछाड़ खा गिरने पर तो अनेक की 'कीक’ फूट जाती। इस भर्तृहरि से मेरा बचपन का परिचय था। बाद में सरसरी दृष्टि से शतकत्रय भी पढ़े थे तो उस रात मैंने मित्रों को दो-तीन श्लोक सुना डाले। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि भर्तृहरि बहुत बड़ा कवि है। हमारे यहाँ ऐसे लोगों पर बहुत कम काम हुआ है, सो मैं एक उपन्यास लिखूँ।...’’ और अब यह उपन्यास दो खण्डों में आपके सामने है। हिंदी की एक अनमोल कृति के रूप में!...
The River of Blood
- Author Name:
Indira Parthsarathy +1
- Book Type:

- Description:
The River of Blood (Kuruthippunal) was first published in Tamil in 1975. As a work of art, the novel stands testimony to the multifaceted personality of its author. The novel is based on the Keezhavenmani carnage of 1967 in which 42 Harijans were burnt to death in landlord-peasant clash. To the agrarian problem, tinged with untouchablity, Indira Parthasarthy gives a psychological dimension, which is the unique aspects of the book. Parthasarthy has beautiful highlighted the degradation in the field of politics and the corruption having assumed the way of life.
Haril
- Author Name:
Hitendra Patel
- Book Type:

- Description:
Novel
Beticket Muzrim Se Arabpati Banne Ki Kahani
- Author Name:
Rajiv Singh
- Book Type:

- Description:
एक वास्तविक समयकाल के समांतर राजनीतिक और आर्थिक-सामाजिक परिदृश्य में स्थित यह उपन्यास, सपने की शक्ति, विश्वास की शक्ति और प्यार की शक्ति की असाधारण कहानी है। यह कहानी है गाँव के एक वंचित लड़के की, जिससे उसके सपने पूरे करने का प्रत्येक अवसर छीन लिया जाता है, लेकिन जीवन में अनेक मुश्किलों का सामना करते हुए भी वह अपने सपने का पीछा करना नहीं छोड़ता। वर्ष 1978 में उत्तर प्रदेश के एक पिछड़े गाँव में जिला कलेक्टर का दौरा गरीब, श्रमिक परिवार के ग्यारह वर्षीय गोदना को आई.ए.एस. अफसर बनने के लिए प्रेरित करता है। क्या वह अपना सपना पूरा कर पाता है या परिस्थितियों के आगे हार मान लेता है? या फिर वह और अधिक ऊँचाइयाँ प्राप्त कर लेता है? क्या जाति आधारित आरक्षण नीतियों से उसे मदद मिलती है? क्या जाति आधारित राजनीति उसे आकर्षित कर पाती है? क्या वह अपने खिलाफ चली गईं चतुर कॉरपोरेट चालों और साजिशों का सामना कर पाता है?
Mulk : Patkatha
- Author Name:
Anubhav Sinha
- Book Type:

- Description:
मैंने 17 साल की उम्र में जब ‘गरम हवा’ देखी थी तो मुझे अपना सिर्फ़ भारतीय होना पता था। मैं ‘मुल्क’ देखते हुए रोती रही, क्योंकि अब मुझे पता है कि मुसलमान होना क्या होता है और उसके साथ क्या-क्या आता है। —राना सफ़वी, इतिहासकार ‘मुल्क’ देखकर मेरा मन किया कि मैं ख़ुशी से चिल्लाऊँ। बहुत ज़ोर से। —शुभ्रा गुप्ता, फ़िल्म समीक्षक, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ निडर, दमदार और सम्मोहक। —सैबल चटर्जी, फ़िल्म समीक्षक, ‘एनडीटीवी’ ‘मुल्क’ ने बतौर भारतीय मुझे गर्व और ख़ुशी से भर दिया। —विशाल ददलानी, गायक-संगीतकार कमाल की फ़िल्म। हर शॉट, हर डायलॉग और हर पल बिल्कुल परफ़ेक्ट। —फ़े डिसूज़ा, पत्रकार ‘मुल्क’ की चमक और साहस स्तब्ध कर देते हैं। हमारे समय की सबसे महत्त्वपूर्ण फ़िल्मों में से एक। —शेखर गुप्ता, पत्रकार एवं सम्पादक
Faraway Yet Closer
- Author Name:
Amina Hazim
- Book Type:

- Description:
What happens when someone drops from the skies of dreams to the muddy grounds of truth? Life has it’s own ways of teaching lessons, and when it does, one must hold onto the people they trust and brace for the impact. Alina Campbell, an extremely opulent teenager falls into her darkest nightmare when her beloved father passes away and she’s left with nothing but people ready to snatch away her wealth. The story moves onto London where Alina must find happiness in whatever she’s left with, and clench to friendship and love while battling with her inner pain and fears. Witness the world of Alina Campbell, to learn the bitter and constant truth of life – change and understand the two sides of the coin of life, that keeps flipping forever.
Sah-Saa
- Author Name:
Geetanjali Shree
- Book Type:

- Description:
‘सह-सा’ छोटे-छोटे अकस्मातों में बनती व्यापक मानव नियति की कहानी है। रोज़मर्रा के अनाटकीय प्रसंगों की टकराहटों से बड़े सवालों के खुले में आ जाने की कहानी। न्यायमूर्ति भूलेराम मिसिर अवकाश-प्राप्ति के बाद पत्नी प्रेमिला, बेटी चिया, और अपाहिज अम्मा के साथ रह रहे हैं। पत्नी व बेटी नौकरी पर निकल जाती हैं और घर की ज़िम्मेदारियाँ खुशी खुशी उन्होंने अपने ऊपर ले ली हैं। माँ अपनी शोर करती पटरागाड़ी पर बैठ घर भर का मुआयना करती रहती हैं। भूलेराम का बेटा, श्रवण, दूसरे शहर में है। दो नौकर हैं, शम्भु और उसकी जिज्जी। सब साथ भी हैं, अलग-थलग भी। घरों के जाने पहचाने शीतयुद्ध में रत, जिसे भूलेराम खुला युद्ध नहीं बनने देते। हँसते-खेलते सब पर आदतन चिल्लाते हैं, और बिना डींग-दावे के सबका ध्यान रखते हैं। सहसा एक दिन वे बेआराम हो जाते हैं। प्यार से बनाये उनके वन-प्रांगण में एक गौरैया उनकी बाँह पर आ बैठती है। वे मुस्कुराते हैं कि बाँह को डाल समझ रही है पर तभी मन में संदेह कौंधता है कि उन्हें देख ही नहीं रही शायद। ‘मैं क्या अदृश्य? हवा? प्रेत? भूत सा फिरता अपने घर में।’ यह संदेह यादों की लंबी कड़ी से जुड़ता है। वे जर्जराने लगते हैं और अचानक बीमारी के एक झटके में दम तोड़ देते हैं। जीते जी अदृश्य होने लगे भूले मृत्योपरांत चारों ओर छा जाते हैं। प्रकट कथा के पीछे, उसके अनकहे में, एक और कथा भी चलती है जो दिखाती है कि इस वाचाल समय में हम वही देखते सुनते हैं जो ढिंढोरा है, भड़कीला है, उसके पीछे हो रहे को नहीं। बात चाहे परिजनों की हो या नेताओं की या मेहनतकश मज़दूरों की, हम चुपचाप के अच्छे और बुरे दोनों को मिस कर देते हैं। भूले द्वारा चुपचाप किया गया अच्छा और चूहों द्वारा चुपचाप किया गया संहार इसीलिए छिपा रहता है। इस कृति में भी गीतांजलि श्री की भाषा और शैली का अपना वैभव है। बदलती स्थितियों, मनःस्थितियों को उजागर करती कभी चुटीली, नुकीली, कभी प्रशांत, उदास और दार्शनिक। हमेशा बहुअर्थी। और इसमें है उस प्रकृति का अद्भुत वात्सल्य जिसे हम बेगाना बना बैठे हैं। ‘सह-सा’ एक अनूठी प्रेम गाथा है।
Shastriji Ke Prerak Prasang
- Author Name:
Renu Saini
- Book Type:

- Description:
"कथा-कहानियाँ सृष्टि के आरंभ से ही मनुष्य का मार्ग-दर्शन करती रही हैं। पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियाँ प्राचीन काल से हमारा मार्गदर्शन करती चली आ रही हैं। प्रत्येक कहानी के लिए कथावस्तु का होना अनिवार्य है, क्योंकि इसके अभाव में कहानी की रचना की कल्पना भी नहीं की जा सकती। कहानी में केवल मनोरंजन ही नहीं होता, उसमें कोई उद्देश्य और संदेश भी निहित होता है। जीवन में सादगी और सरलता का बहुत महत्त्व है। हमारी परंपरा में वर्णित है ‘सादा जीवन, उच्च विचार’। सादगी हमारे व्यक्तित्व को जो आभा प्रदान करती है, वह आडंबर या दिखावा नहीं। यह सादगी हमें आत्मविश्वास, शक्ति और आत्मबल देती है। इन्हीं जीवनमूल्य को समेटे, सादगी की महत्ता बताती प्रेरणाप्रद कहानियों का संकलन।"
Draupadi
- Author Name:
Yarlagadda Lakshmi Prasad +1
- Book Type:

- Description:
ಮೂಲತಃ ತೆಲುಗಿನಲ್ಲಿ ಬರೆದ ದ್ರೌಪದಿ ಪುಸ್ತಕವಾಗಿ ಪ್ರಕಟವಾಗುವ ಮೊದಲು ಆಂಧ್ರ ಜ್ಯೋತಿಯಲ್ಲಿ ಧಾರಾವಾಹಿಯಾಗಿ ಪ್ರಕಟವಾಯಿತು. ವಿಶಿಷ್ಟ ಶೈಲಿಯಲ್ಲಿ ಪ್ರಸ್ತುತಪಡಿಸಲಾದ ಈ ಕಾದಂಬರಿಯು ದ್ರೌಪದಿಯನ್ನು ಒಳಗೊಂಡ ವಿವಿಧ ಘಟನೆಗಳ ವಿವರಣೆಯಲ್ಲ, ಆದರೆ ಈ ಘಟನೆಗಳನ್ನು ಒಂದು ಆಕರ್ಷಕ ಕಥೆಯಾಗಿ ಹೆಣೆಯಲಾಗಿದೆ. ಲಕ್ಷ್ಮೀಪ್ರಸಾದ್ ಬಳಸಿದ ನಿರೂಪಣಾ ಶೈಲಿ ಮತ್ತು ವಿವರಣೆಯ ರಚನಾತ್ಮಕ ವಿಧಾನವು ಓದುಗರನ್ನು ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ತೊಡಗಿಸುತ್ತದೆ.
Satrupa
- Author Name:
Shivendra
- Book Type:

- Description:
समकालीन लेखन में शिवेन्द्र की विशिष्ट पहचान ऐसे कहानीकार के रूप में है जो चित्र-विचित्र घटनाओं वाली पुराकथाओं और परीकथाओं के ढब-ढाँचे में ठेठ आधुनिक जीवन के प्रश्नों और संकटों से हमें रू-ब-रू कराता है। पिछले लगभग सवा सौ सालों से हिन्दी कहानी अपनी बात कहने के लिए जिस ‘वेरिसिमिलीट्यूड’ पर, विश्वसनीय अंकन की जिस विधि पर भरोसा करती आई है, उसे तोड़ या छोड़ कर शिवेन्द्र एक वयस्क आधुनिक पाठक को झटका देते हैं; ऐसा लगता है कि वे उसे एकबारगी आधुनिक के मुक़ाबले पुरातन या वयस्क के मुक़ाबले बालसुलभ कथा-आस्वाद की ओर ले जाना चाहते हैं, लेकिन उनके द्वारा सम्बोधित सवाल इस भ्रम की गुंजाइश नहीं रहने देते। उनके यहाँ अपनी जाति बताकर प्यार से वंचित हो जाने वाले और सीवर में ही ज़िन्दगी खपा देने वाले दलित हैं; ‘किसी ऊबे हुए बन्दर की तरह फ़ेसबुक की एक दीवाल से दूसरी दीवाल पर यूँ ही कूदने’ वाले बेरोज़गार हैं; गेम न खेलने पर गोली मार देने वाले कमांडोज़ से डर कर अपने-अपने मोबाइल में घुसे, अपने आसपास की दुनिया से नावाक़िफ़ लोग हैं; आज़ादी प्रतीत होने वाली नई ग़ुलामी है; ऐसे चुनाव हैं जिनमें जनता उन्हीं को चुनती है जिनकी सरकार बनाने का ठेका बड़ी कम्पनियों ने लिया है; ‘बिना कुछ सोचे-समझे ऐसी चीज़ों को पाने में नष्ट होती’ ज़िन्दगियाँ हैं ‘जिनकी असल में कोई ज़रूरत ही नहीं’; और सबसे बड़ी बात, दूसरों की आज़ादी छीनने वालों और आज़ादी चाहने वालों के बीच का संघर्ष है जिसमें एक ओर तानाशाहों से लेकर उनके पक्ष के विचारक, हत्यारे और आज की दुनिया में मसीहा की तरह पूजे जानेवाले धनकुबेर तक हैं, तो दूसरी ओर बेरोज़गार, मज़लूम और अपने को बेचने के लिए तैयार न होने वाले चैतन्य लोग। हमारे इस वर्तमान को शिवेन्द्र जिस कल्पनाशीलता के साथ कहानी में लाना सम्भव करते हैं, वह आपको बार-बार चकित करती है और आप साश्चर्य कहानी के इस आदिम गुण की वापसी के साक्षी बनते हैं। वे निस्सन्देह हमारे समय के सबसे उर्वर रचनात्मक मस्तिष्कों में से एक हैं। —संजीव कुमार
Kamal Ka Hai Mannu
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description:
मन्नू यानी मानस के लिए दादी ठीक ही कहती हैं—‘कमाल का है साड्डा मन्नू!’ वरिष्ठ कथाकार ममता कालिया का यह उपन्यास किशोरों के लिए है। परीक्षाओं में नंबरों की मारामारी के बरअक्स मन्नू और उसके दोस्तों की यह कहानी बताती है कि ऊँचे नंबर लाना जितना अहम है, उतना ही अहम एक बेहतर नागरिक बनना भी है, बल्कि उससे ज़्यादा। और इसी के साथ ज़रूरी है अपनी प्रतिभा की पहचान करना, अपनी वास्तविक रुचि को समझना और उस दिशा में काम करते रहना। मन्नू का मन बिगड़ी हुई घड़ियों, ट्रांजिस्टरों आदि को ठीक करने में जितना लगता है, उतना न तो किताबें रटने में लगता है, न ही दोस्तों के साथ मटरगश्ती में। इसीलिए भले ही उसके नम्बर बस पास होन के लिए ही आए हों, उसके विज्ञान मॉडल को राज्यस्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में पहला पुरस्कार मिला। यह लघु-उपन्यास किशोरों और छात्रों को पढ़ाई और जीवन के प्रति एक स्वस्थ; सन्तुलित और रचनात्मक नज़रिया देता है।
5 Point Someone
- Author Name:
Chetan Bhagat
- Book Type:

- Description:
"रेयान दौड़कर बोर्ड के पास पहुँचा और पहली पंक्ति के नाइन पॉइंटर मुसकराए कि एक फाइव पॉइंटर क्लास के लिए योगदान देगा। यद्यपि समीकरण सही था; रेयान बोर्ड तक नहीं जाता, जब तक कि वह यह न जान ले कि वह सही है। “बहुत अच्छा, धन्यवाद रेयान। अच्छा, पिछले टर्म पेपर में स्कूटर के पेट्रोल के उपयोग पर लूब्रीकेंट की कार्य-क्षमता के बारे में तुमने ही लिखा था?” “जी हाँ, सर।” “क्या यह सच है कि यह परिणाम तुमने अपने स्कूटर पर टेस्ट किया है?” “हाँ, मैंने किया है, सर। यद्यपि बिलकुल सही तरीके से नहीं।” “वह मुझे अच्छा लगा।” प्रो. वीरा ने नाइन पॉइंटर्स की तरफ देखते हुए कहा, जो रट्टू तोतों की तरह नोट्स बनाने में व्यस्त थे—“मुझे वास्तव में अच्छा लगा।” —इसी उपन्यास से आज की गलाकाट प्रतिस्पर्द्धा के दौर में कैसे अपनी क्षमता, इच्छाशक्ति और कुछ हासिल करने की शिद्दत से युवा सफल हो सकते हैं-यह मूल संदेश है 5 पॉइंट समवन का । लेखन के क्षेत्र में पदार्पण करते ही अपनी सरल-सुबोध भाषा, आकर्षक शिल्प तथा किस्सागोई के कारण लाखों युवाओं को लुभा लेनेवाले बेस्टसेलर लेखक चेतन भगत का उपन्यास है 5 पॉइंट समवन। "
Do Dhruvon Ke Beech Ki Aas
- Author Name:
Dr. Garima Dubey
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Yamini Katha
- Author Name:
Surya Bala
- Book Type:

- Description:
यामिनी कथा’ में यामिनी के मानसिक भँवर की अथाह गहराई, उसकी गंभीरता, उसमें सम्मिलित गोचर-अगोचर अनगिनत मानसिक संवेदना-प्रवाहों का विशद रूपायन, आधुनिक नारी के जटिल तनाव और इसी बीच किसी तरह संतुलन के लिए सफल-असफल प्रयास करने में अभिव्यक्त जिजीविषा के शक्तिपूर्ण और कलात्मक दर्शन होते हैं। यामिनी एक अतिशय संवेदनशील नारी है, जिसकी संवेदना ने उसके अनुभव को विलक्षण धार दी है। यामिनी की अथाह वेदना के अनेक केंद्र हैं। यामिनी के दु:ख का प्रारंभ, जो कथानिविष्ट है, उसके असफल विवाह से है। अपने पति विश्वास से यदि वह कुछ अधिक चाहती है तो वह है—प्यार, जो शरीर से उत्पन्न होता हुआ भी मानसिक और आत्मिक अधिक है। परंतु उसके पूर्ण समर्पण से भी विश्वास उसे वह प्यार नहीं दे पाता, क्योंकि स्त्री की ओर उसने विशेष सम्मान की दृष्टि से कभी देखा ही नहीं। इन दोनों के बीच के संबंधों का वह असमंजस सूर्यबाला ने अनेक घटनाओं, संवादों और संवेदनात्मक दंशों से प्रकट किया है। यामिनी की दारुण नियति से संघर्ष की गाथा का बड़ा ही करुण रूप लेखिका ने प्रत्यक्ष गोचर किया है। यामिनी के दुःख का स्वरूप अनेक स्तरीय है। उसके आंतरिक और बाह्य संघर्ष का हृदय-विदारक चित्र लेखिका ने महीन परंतु ठोस रंग-रेखाओं से खींचा है। मोहभंग का यह दर्दनाक चित्र यामिनी की कराहों से पाठक को साझीदारी करने को बाध्य करता है। संवेदनात्मक बदलावों के बीच यामिनी के संघर्ष की वीरगाथा भी सरकती जाती है—जो संघर्ष उसने पति की जान बचाने के लिए किया और किसी बिंदु पर अपने असफल संघर्ष की परिणति से रू-बरू होते हुए भी वह अपनी मानसिक शांति के लिए अपने को झोंक रही है। प्रस्तुत कृति में भारतीय स्त्री-मानस का उज्ज्वल चित्र प्रस्तुत किया गया है।
Amar Desva
- Author Name:
Praveen Kumar
- Book Type:

- Description:
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीतते-न-बीतते उस पर केन्द्रित एक संवेदनशील, संयत और सार्थक औपन्यासिक कृति का रचा जाना एक आश्चर्य ही कहा जाएगा। कहानियों-कविताओं की बात अलग है, पर क्या उपन्यास जैसी विधा के लिए इतनी अल्प पक्वनावधि/जेस्टेशन पीरियड काफ़ी है? और क्या इतनी जल्द पककर तैयार होनेवाले उपन्यास से उस गहराई की उम्मीद की जा सकती है जो ऐसी मानवीय त्रासदियों को समेटनेवाले उपन्यासों में मिलती है? इनका उत्तर पाने के लिए आपको अमर देसवा पढ़नी चाहिए जिसने अपने को न सिर्फ़ सूचनापरक, पत्रकारीय और कथा-कम-रिपोर्ट-ज़्यादा होने से बचाया है, बल्कि दूसरी लहर को केन्द्र में रखते हुए अनेक ऐसे प्रश्नों की गहरी छान-बीन की है जो नागरिकता, राज्यतंत्र, भ्रष्ट शासन-प्रशासन, राजनीतिक निहितार्थों वाली क्रूर धार्मिकता और विकराल संकटों के बीच बदलते मनुष्य के रूपों से ताल्लुक़ रखते हैं। इस छान-बीन के लिए प्रवीण संवादों और वाचकीय कथनों का सहारा लेने से भरसक परहेज करते हैं और पात्रों तथा परिस्थितियों के घात-प्रतिघात पर ज़्यादा भरोसा करते हैं। इसीलिए उनका आख्यान अगर मानवता के विरुद्ध अपराध घोषित किए जाने लायक़ सरकारी संवेदनहीनता और मौत के कारोबार में अपना लाभ देखते बाजार-तंत्र के प्रति हमें क्षुब्ध करता है, तो निरुपाय होकर भी जीवन के पक्ष में अपनी लड़ाई जारी रखनेवाले और शिकार होकर भी अपनी मनुष्यता न खोनेवाले लोगों के प्रति गहरे अपनत्व से भर देता है। संयत और परिपक्व कथाभाषा में लिखा गया अमर देसवा अपने जापानी पात्र ताकियो हाशिगावा के शब्दों में यह कहता जान पड़ता है, ‘कुस अस्ली हे... तबी कुस नकली हे। अस्ली क्या हे... खोज्ना हे।’ असली की खोज कितनी करुण है और करुणा की खोज कितनी असली, इसे देखना हो तो यह उपन्यास आपके काम का है।
Vinayak
- Author Name:
Ramesh Chandra Shah +1
- Book Type:

- Description:
Vinayak, a Sahitya Akademi-award winning Hindi Novel, as a sequel to the author;s first novel 'Gobar Ganesh', according to the novelist, is the "pratismriti" (remembrance of our national-cultural memories) and the katha or narrative of India as a civilizational state. Its multi-perspectiveal, multi-centric kathana (plot), involving characters representing a cross section of Indian Society, is marked by engaging and interesting debates on such issues as gender-politics, culturalimperialism, casteism, communalism, the Kashmir-question and the condition of Kashmiri Pundits, sustainable development, ecological consciouness, swaraj or decolonization of mind, role of "Breaking India" forces comouflaged as NGO-activism, and the all0embracing nature of the spiritual that subsumes the secular, the significance of purusharthas or cardinal principles of life, etc. A sahridaya or cultivaed reader whould also relish how deftly the narrative echoes the voices of such great masters as Valmiki, Vyas, Krishna, Keats, Rike, Yeats, Eliot, Naipaul, Proust, Prasad and others.
Jatara
- Author Name:
Boya Jangaiah +1
- Book Type:

- Description:
English translation by K Damodar Rao of Boya Jangaiah's Telugu novel.
Hatya
- Author Name:
Hrideyesh
- Book Type:

- Description:
सुपरिचित कथाकार हृदयेश ने इस उपन्यास में एक छोटे-से शहर की धड़कती ज़िन्दगी को केन्द्र बनाकर हत्या जैसे कृत्य के बहुआयामी चित्र प्रस्तुत किए हैं। शिवनारायण एक आदर्शवादी व्यक्ति है, और है शहर का एक नामी गुंडा चुन्नू जो मोहल्ले और शहर के निरीह लोगों पर जोर-जुल्म करता है। शिवनारायण उसकी इन हरकतों पर उत्तेजित होकर, उसके साथ कोई व्यक्तिगत शत्रुता न होते हुए भी, एक दिन उसकी हत्या कर देता है। मुक़दमा चलता है और अन्ततः शिवनारायण को फाँसी की सज़ा होती है। इस सारी प्रक्रिया में न केवल क़ानून का वास्तविक रूप उजागर होता है बल्कि हत्या के अनेक पहलू उभरकर सामने आते हैं। क़ानून की नज़र में हत्या सिर्फ़ एक आदमी के प्राण ले लेना है, जबकि हत्या व्यक्ति के चरित्र की, उज्ज्वल सम्भावनाओं की, अभिव्यक्ति पाने के लिए छटपटाती प्रतिभा की भी होती है। लेकिन समाज के कर्णधारों, सत्ता में बैठे लोगों और क़ानून के लिए हत्या के ये रूप चिन्तनीय नहीं हैं। ‘हत्या’ उपन्यास में लेखक ने इन सब पहलुओं को प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया है।
Ek Tukda Aasman
- Author Name:
Vinod Kushwaha
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Suraj Mere Saath Mein
- Author Name:
Smt. Kamna Singh
- Book Type:

- Description:
सूरज मेरे साथ में’ चार उपन्यासों का संकलन है। बाल एवं किशोर मन की दैनंदिन समस्याओं से जुड़े ये चारों उपन्यास सचमुच सूरज की ऐसी उजली किरण हैं, जो बच्चों के पथ को प्रकाशित करने में समर्थ हैं। ‘परीक्षा के बाद’ गौरव का स्कूली परीक्षा के साथ-साथ जीवन के इम्तिहान में भी ऊँचे अंक लेकर सफलता पाने का किस्सा है। बच्चों के लिए पल-पल जिन रोचक-रोमांचक घटनाओं की पिटारी खुलती है, वे उन्हें चमत्कृत किए बिना नहीं रहतीं। ‘खट्टी-मीठी गोलियाँ’ में बाल-मजदूरी उन्मूलन की बात कही गई है। ‘मुझे तो पढ़ना है’ में शिक्षा के बाल अधिकार को एक निर्धन तदपि पढ़ने की ललक रखनेवाले बालक के माध्यम से दरशाया गया है। ‘सूरज मेरे साथ में’ भी कथानायक रोशन के हौसलों की उड़ान है, जो उसे सफलता दिलाती है। कुल मिलाकर चारों उपन्यास बच्चों को सद्गुणों से तो जोड़ते ही हैं, जीवन के प्रति समझ भी जगाते हैं। कदाचित् यही आज के समय की माँग भी है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book