Chhako Ki Vapasi
(0)
Author:
BadiuzzamanPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
250
₹ 200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
मुस्लिम-समाज की संरचना, गठन, जातीय स्मृतियों, आस्था और विश्वास के कुल योग—उसकी समूची आन्तरिकता को सघन कलात्मक रचाव से प्रस्तुत करनेवाले उपन्यासों में से यदि किन्हीं दो या तीन अग्रणी रचनाओं का चुनाव किया जाएगा तो ‘छाको की वापसी’ को उस सूची में रखना ही होगा, इसके बिना वह पूरी नहीं होगी।</p> <p>छाको एक धुरी है, जिस पर घूम रही है एक भरी-पूरी दुनिया। एक समूची क़ौम की ज़ेहनियत और ज़िन्दगी। बीच में जो विभाजन की रेखा दिखाई देती है, वह हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच से होती हुई दोनों देशों के शासकवर्ग और जनता के वर्ग-हितों की भी सुस्पष्ट पहचान कराती है, और अन्तत: मनुष्य के अस्तित्व के प्रश्न में बदल जाती है।</p> <p>मिट्टी की गन्ध जिस तरह से पूरी कृति में समाई हुई है, उसके आगे देश-प्रेम की भारी-भरकम शब्दावली वाली कितनी ही परिभाषाएँ बेकार हैं। सरहदों और सीमाओं में बँधी नागरिकता का एक प्रति-विमर्श रचते हुए यह उपन्यास ज़िन्दगी और ज़मीन के कहीं गहरे, लगभग शाश्वत रिश्ते की ओर इशारा करता है। यही वह रिश्ता है जो आख़िरकार मानव-सभ्यता के विकास का बीज बनता है।</p> <p>‘एक चूहे की मौत’ जैसे अत्यन्त लोकप्रिय उपन्यास के लेखक का यह उपन्यास नागरिकता और देश की मौजूदा बहसों के सन्दर्भ में और भी प्रासंगिक हो जाता है।
Read moreAbout the Book
मुस्लिम-समाज की संरचना, गठन, जातीय स्मृतियों, आस्था और विश्वास के कुल योग—उसकी समूची आन्तरिकता को सघन कलात्मक रचाव से प्रस्तुत करनेवाले उपन्यासों में से यदि किन्हीं दो या तीन अग्रणी रचनाओं का चुनाव किया जाएगा तो ‘छाको की वापसी’ को उस सूची में रखना ही होगा, इसके बिना वह पूरी नहीं होगी।</p>
<p>छाको एक धुरी है, जिस पर घूम रही है एक भरी-पूरी दुनिया। एक समूची क़ौम की ज़ेहनियत और ज़िन्दगी। बीच में जो विभाजन की रेखा दिखाई देती है, वह हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच से होती हुई दोनों देशों के शासकवर्ग और जनता के वर्ग-हितों की भी सुस्पष्ट पहचान कराती है, और अन्तत: मनुष्य के अस्तित्व के प्रश्न में बदल जाती है।</p>
<p>मिट्टी की गन्ध जिस तरह से पूरी कृति में समाई हुई है, उसके आगे देश-प्रेम की भारी-भरकम शब्दावली वाली कितनी ही परिभाषाएँ बेकार हैं। सरहदों और सीमाओं में बँधी नागरिकता का एक प्रति-विमर्श रचते हुए यह उपन्यास ज़िन्दगी और ज़मीन के कहीं गहरे, लगभग शाश्वत रिश्ते की ओर इशारा करता है। यही वह रिश्ता है जो आख़िरकार मानव-सभ्यता के विकास का बीज बनता है।</p>
<p>‘एक चूहे की मौत’ जैसे अत्यन्त लोकप्रिय उपन्यास के लेखक का यह उपन्यास नागरिकता और देश की मौजूदा बहसों के सन्दर्भ में और भी प्रासंगिक हो जाता है।
Book Details
-
ISBN9789393768209
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Ham Gunahgar aur Besharm Auraten
- Author Name:
Kavita Kadambari
- Book Type:

- Description: Collection of Hindi Poems
Saga of a Nerdy Girl (Illustrated)
- Author Name:
Anushree Pandey
- Rating:
- Book Type:

- Description: Saga of a Nerdy Girl has been written by the geeky 11-year-old Anushree Pandey. This compilation of funny ways through which she faces obstacles life throws at her is bound to get the giggles out of all ages. She has indeed taken “when life gives you lemons make lemonade” to another level. This book is all about how her perspective to view the world. So, be prepared for the rollercoaster of emotions, fun and laughter.
Kawale and Manas
- Author Name:
Uttam Kamble
- Book Type:

- Description: कावळे आणि माणसं... एक जमिनीवरून चालणारा आणि हवेत उडणारा पक्षी तर दुसरा जमिनीवरून चालणारा आणि कल्पनेचे पंख घेऊन उडणारा... दोघांचं भौतिक जग भिन्न वाटत असलं तरी मानसिक जग जवळपास जाणारं... काही वेळा कावळे माणसासारखं वागतात तर माणसं कावळ्यासारखं... कावळा माणसाचा बाप बनतो पण माणूस कावळ्याचा बाप नाही बनत... ज्या माणसाच्या सहवासात कावळा राहतो त्याचे गुण-दुर्गुण उचलतो... कधी कधी कावळा माणसापेक्षा शहाणा होतो तर कधी कधी असहाय्य माणूस कावळ्यासमोर हात जोडतो... कावळे, माणसं आणि स्मशान यांना शब्दात पकडण्याचा हा एक प्रयत्न... Kawale and Manas : Uttam Kamble कावळे आणि माणसं : उत्तम कांबळे
Shisha Ghar
- Author Name:
Pratyaksha
- Book Type:

- Description: ‘शीशाघर’ के केन्द्र में एक परिवार है जो सन् सैंतालिस में बिखरना शुरू होता है तो बिखरता ही जाता है। और जब हम एक मुल्क के, एक भरी-पूरी दुनिया के विभाजित होते जाने की त्रासदी से गुज़र रहे होते हैं तब एक इलहाम की तरह यह बात भीतर प्रकट होती है कि यह उपन्यास विभाजन और बिखराव से ज़्यादा उस अन्दरूनी इनसानी एकता के बारे में है जो इसके चरित्रों को बिखरकर भी बिखरने नहीं देती और वे एक-दूसरे से हज़ारों किलोमीटर दूर, दूसरे देशों में अपना रोज़मर्रा का जीवन जीते हुए भी एक-दूसरे से गहरे तौर पर जुड़े हुए हैं। इस उपन्यास के केन्द्र में है प्रेम, जिसका प्रवाह धर्म, नस्ल, राष्ट्र और भूगोल के सिरों को धूमिल करता, साथ ही लोगों के बसने, उजड़ने और फिर बसने की यादों को सहेजता चलता है। केन्द्रीय कथा से इतर भी इसमें बहुतेरे ऐसे चरित्र हैं जो प्रेम की आग में झुलसकर बन और बिगड़ रहे हैं या कि उनका व्यक्तित्व उस प्रेम की याद से बन रहा है। कभी न भूलनेवाले यादगार किरदारों, उनके द्वन्द्व और चाहनाओं, ज़िद और लापरवाहियों से बुनी हुई, देखी-जानी दुनिया के समानान्तर उतनी ही ज़िन्दा, सम्मोहक और मानीख़ेज़ एक दूसरी दुनिया।
Baduku
- Author Name:
Geeta Nagbhushan +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Dr. Geetha Nagabhushana's work primarily focuses on the struggles of the distressed, exploited, and naïve individuals from slums or the lowest strata of the Hindu caste system. Her unique storytelling provides a glimpse into real-life experiences that resonate deeply with us, rather than simply presenting fictional characters. The Kannada dialect used in "Baduku" deserves special recognition for its authenticity and cultural richness. Throughout the novel, the hardships faced by those in the lowest tiers of the Varna system are depicted without any apologies. The portrayal of women's struggles in "Baduku" serves as a critique of patriarchal society. The novel offers a comprehensive view of society, addressing various forms of atrocity and oppression, including issues related to class, caste, and gender, as well as the challenges faced by both urban and rural downtrodden communities. There is no fair treatment found in any of these intersections.
Hatya
- Author Name:
Hrideyesh
- Book Type:

- Description: सुपरिचित कथाकार हृदयेश ने इस उपन्यास में एक छोटे-से शहर की धड़कती ज़िन्दगी को केन्द्र बनाकर हत्या जैसे कृत्य के बहुआयामी चित्र प्रस्तुत किए हैं। शिवनारायण एक आदर्शवादी व्यक्ति है, और है शहर का एक नामी गुंडा चुन्नू जो मोहल्ले और शहर के निरीह लोगों पर जोर-जुल्म करता है। शिवनारायण उसकी इन हरकतों पर उत्तेजित होकर, उसके साथ कोई व्यक्तिगत शत्रुता न होते हुए भी, एक दिन उसकी हत्या कर देता है। मुक़दमा चलता है और अन्ततः शिवनारायण को फाँसी की सज़ा होती है। इस सारी प्रक्रिया में न केवल क़ानून का वास्तविक रूप उजागर होता है बल्कि हत्या के अनेक पहलू उभरकर सामने आते हैं। क़ानून की नज़र में हत्या सिर्फ़ एक आदमी के प्राण ले लेना है, जबकि हत्या व्यक्ति के चरित्र की, उज्ज्वल सम्भावनाओं की, अभिव्यक्ति पाने के लिए छटपटाती प्रतिभा की भी होती है। लेकिन समाज के कर्णधारों, सत्ता में बैठे लोगों और क़ानून के लिए हत्या के ये रूप चिन्तनीय नहीं हैं। ‘हत्या’ उपन्यास में लेखक ने इन सब पहलुओं को प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया है।
Kamini Kay Kantare Vol-I
- Author Name:
Mahesh Katare
- Book Type:

- Description: कामिनी काय कांतारे’ अर्थात कामिनी काया के जंगल में! राजा भर्तृहरि, गृहस्थ भर्तृहरि, प्रेमी भर्तृहरि, कवि भर्तृहरि, वैयाकरण भर्तृहरि, योगी भर्तृहरि! बहुमखी प्रतिभा के धनी विविध रूप-गुणों से संपन्न भर्तृहरि के जीवन पर आधारित यह उपन्यास कामिनी कंचन के बीच से ही नहीं गुजरता, कामिनी काया के जंगल से भी गुजरता है और कथा, इतिहास, मिथक के बल पर एक महान क्लासिक रचना वरिष्ठ कथाकार-उपन्यासकार महेश कटारे की कलम से पूर्णता को प्राप्त करती है। यह उपन्यास न मात्र बेहद पठनीय और रोचकता के लिहाज से महत्त्वपूर्ण है, ज्ञान को दीप्त करने वाली विशिष्ट कृति है। भारतीय परंपरा की थाती। उपन्यासकार के शब्दों में, ''भरथरी गाने वालों की कथा में बीवी की बेवफाई से दुखी राजा भरथरी जोगी बनकर महल, हवेली, राजपाट छोड़कर निकल गए। गुरु गोरखनाथ के कहने पर वह अपनी उसी पत्नी रानी पिंगला से भीख माँगने द्वार पर पहुँचे तो राजा को जोगी के भेष में देख रानी पछाड़ खाकर गिर पड़ी। 'भरथरी’ सुनती स्त्रियों की भीड़ राजा के घर से निकलते ही आँसू बहाने लगती और रानी के पछाड़ खा गिरने पर तो अनेक की 'कीक’ फूट जाती। इस भर्तृहरि से मेरा बचपन का परिचय था। बाद में सरसरी दृष्टि से शतकत्रय भी पढ़े थे तो उस रात मैंने मित्रों को दो-तीन श्लोक सुना डाले। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि भर्तृहरि बहुत बड़ा कवि है। हमारे यहाँ ऐसे लोगों पर बहुत कम काम हुआ है, सो मैं एक उपन्यास लिखूँ।...’’ और अब यह उपन्यास दो खण्डों में आपके सामने है। हिंदी की एक अनमोल कृति के रूप में!...
Krishna Sakhi
- Author Name:
Pratibha Saxena
- Book Type:

- Description: Book
Weeds
- Author Name:
Deepak Borgave +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: WEEDS - Tankat (Sahitya Akademi Award-winning Marathi Novel)
Kamini Kay Kantare Vol-II
- Author Name:
Mahesh Katare
- Book Type:

- Description: कामिनी काय कांतारे’ अर्थात कामिनी काया के जंगल में! राजा भर्तृहरि, गृहस्थ भर्तृहरि, प्रेमी भर्तृहरि, कवि भर्तृहरि, वैयाकरण भर्तृहरि, योगी भर्तृहरि! बहुमखी प्रतिभा के धनी विविध रूप-गुणों से संपन्न भर्तृहरि के जीवन पर आधारित यह उपन्यास कामिनी कंचन के बीच से ही नहीं गुजरता, कामिनी काया के जंगल से भी गुजरता है और कथा, इतिहास, मिथक के बल पर एक महान क्लासिक रचना वरिष्ठ कथाकार-उपन्यासकार महेश कटारे की कलम से पूर्णता को प्राप्त करती है। यह उपन्यास न मात्र बेहद पठनीय और रोचकता के लिहाज से महत्त्वपूर्ण है, ज्ञान को दीप्त करने वाली विशिष्ट कृति है। भारतीय परंपरा की थाती। उपन्यासकार के शब्दों में, ''भरथरी गाने वालों की कथा में बीवी की बेवफाई से दुखी राजा भरथरी जोगी बनकर महल, हवेली, राजपाट छोड़कर निकल गए। गुरु गोरखनाथ के कहने पर वह अपनी उसी पत्नी रानी पिंगला से भीख माँगने द्वार पर पहुँचे तो राजा को जोगी के भेष में देख रानी पछाड़ खाकर गिर पड़ी। 'भरथरी’ सुनती स्त्रियों की भीड़ राजा के घर से निकलते ही आँसू बहाने लगती और रानी के पछाड़ खा गिरने पर तो अनेक की 'कीक’ फूट जाती। इस भर्तृहरि से मेरा बचपन का परिचय था। बाद में सरसरी दृष्टि से शतकत्रय भी पढ़े थे तो उस रात मैंने मित्रों को दो-तीन श्लोक सुना डाले। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि भर्तृहरि बहुत बड़ा कवि है। हमारे यहाँ ऐसे लोगों पर बहुत कम काम हुआ है, सो मैं एक उपन्यास लिखूँ।...’’ और अब यह उपन्यास दो खण्डों में आपके सामने है। हिंदी की एक अनमोल कृति के रूप में!...
Vaishalinama : Loktrantra Ki Janamkatha
- Author Name:
Prabhat Pranit
- Book Type:

- Description: वैशालीनामा सुदूर अतीत की पृष्ठभूमि में ऐसी एक कथा प्रस्तुत करता है जो न केवल रोचक है बल्कि जिसमें निहित मूल्यबोध तत्कालीन देशकाल में जितना युग-परिवर्तक हो सकता था, उससे कम परिवर्तनकारी और प्रासंगिक वह आज भी नहीं है। वह मूल्यबोध है मनुष्यमात्र की समानता का। यह समानता ऐसी किसी व्यवस्था में सम्भव नहीं हो सकती जिसका आधार स्वयं असमानता पर टिका हो। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था ही यह सम्भव कर सकती है। वैशाली को लोकतंत्र की जन्मस्थली माना जाता है। इतिहास ही नहीं, इसके पौराणिक सन्दर्भ भी मिलते हैं। लेखक ने इस उपन्यास के लिए एक पौराणिक आख्यान को आधार बनाया है और वर्णों के श्रेणीक्रम में विभाजित समाज की सतह के नीचे खदबदाते उस लावे पर रोशनी डाली है जो मुट्ठीभर उच्चस्थों के वर्चस्व से उत्पीड़ित अधिसंख्य जनों के क्षोभ और क्रोध से निर्मित है। स्पष्टतः यह किसी पूर्ववर्णित आख्यान का औपन्यासिक रूपान्तर मात्र नहीं है। लेखकीय कल्पना का इसमें पर्याप्त निवेश हुआ है जिसके जरिये यह कृति राजतंत्र के प्राचीन युग में समाज में व्याप्त असमानता और उसके विरुद्ध हुई प्रतिक्रिया का उल्लेख कर लोकतंत्र के आदि रूप को रेखांकित करता है और किसी ऐतिहासिकता का दावा किये बिना एक समानता पर आधारित समाज का आह्वान करता है।
Kurinji - The Story of a Music Maestro
- Author Name:
Kove Manisekharan +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: English translation by K Chellapen of Kove Manisekharan's Sahitya Akademi award winning Tamil Novel Kutrala Kurinji. Sahitya Akademi Award 2013
THE CHARIOT
- Author Name:
Raghavendra Patil +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: DESCRIPTION AWAITED
Mulk : Patkatha
- Author Name:
Anubhav Sinha
- Book Type:

- Description: मैंने 17 साल की उम्र में जब ‘गरम हवा’ देखी थी तो मुझे अपना सिर्फ़ भारतीय होना पता था। मैं ‘मुल्क’ देखते हुए रोती रही, क्योंकि अब मुझे पता है कि मुसलमान होना क्या होता है और उसके साथ क्या-क्या आता है। —राना सफ़वी, इतिहासकार ‘मुल्क’ देखकर मेरा मन किया कि मैं ख़ुशी से चिल्लाऊँ। बहुत ज़ोर से। —शुभ्रा गुप्ता, फ़िल्म समीक्षक, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ निडर, दमदार और सम्मोहक। —सैबल चटर्जी, फ़िल्म समीक्षक, ‘एनडीटीवी’ ‘मुल्क’ ने बतौर भारतीय मुझे गर्व और ख़ुशी से भर दिया। —विशाल ददलानी, गायक-संगीतकार कमाल की फ़िल्म। हर शॉट, हर डायलॉग और हर पल बिल्कुल परफ़ेक्ट। —फ़े डिसूज़ा, पत्रकार ‘मुल्क’ की चमक और साहस स्तब्ध कर देते हैं। हमारे समय की सबसे महत्त्वपूर्ण फ़िल्मों में से एक। —शेखर गुप्ता, पत्रकार एवं सम्पादक
Kaath Ka Ullu
- Author Name:
Pallavi Prasad
- Rating:
- Book Type:

- Description: ‘काठ का उल्लू’ को ‘दोआबा’ पत्रिका में प्रकाशित करते हुए, सम्पादकीय के अन्तर्गत एक महत्त्वपूर्ण टिप्पणी की गई थी कि यह उपन्यास अपनी थीम के कारण पाठकों के बीच लोकप्रिय होगा। प्रश्न उठता है कि इस उपन्यास की ‘थीम’ है क्या? निःसन्देह इसका उत्तर एक शब्द में नहीं दिया जा सकता है। ‘काठ के उल्लू’ की थीम के कई स्तर हैं जो प्याज के छिलके की भाँति परत दर परत खुलते चले जाते हैं। सपनों में पलती नौकरशाही, अभिजात्य वर्ग की ढँकी-छुपी सच्चाई, स्याह-सफेद के बीच खिलवाड़ करती राजनीति... और एक सामान्य-सी लड़की को ‘दलित इकाई’ के रूप में बदल देने की चतुराई। अर्थात इस उपन्यास में हमारे समाज के इतने रंग हैं कि उन सबको मिला कर यदि ‘रंगामेज़ी’ शैली में कोई चित्र बनाया जाए तो वह बदरंग ही होगा, आकर्षक भले हो। जाहिर है कि यह एक जटिल यथार्थ है, जिसे एक छोटे से उपन्यास में व्यक्त कर देना आसान काम नहीं था। मगर, पल्लवी प्रसाद ने उसे बखूबी कर दिखाया है। इस उपन्यास में कई अन्य यथार्थ भी दर्ज हैं। जैसे गाँवों का ‘आधुनिक’ हो जाना, हर व्यक्ति का लगभग ‘आम आदमी’ हो जाना और अन्ततः कृष्णकान्त जैसे महत्वाकांक्षी व्यक्ति का ‘काठ का उल्लू’ बन जाना। उल्लू का पसन्दीदा समय ‘अँधेरा’ पूरे उपन्यास में आदि से अन्त तक छाया हुआ है। मगर लेखिका ने उसमें भी रोशनी की एक ‘झिरी’ देख ली है। वह है एक बूढ़ी स्त्री जो गाँव में रहती है और जो किसी की माँ है, किसी की दादी तो किसी की परदादी। वास्तव में इस ‘झिरी’ ने ही इस उपन्यास को वह सार्थकता बख्शी है, जो उसका मूल उदेश्य प्रतीत होती है। पल्लवी प्रसाद का यह उपन्यास ऐसे समय में आया है जबकि अभिजात्य वर्ग में ही नहीं बल्कि सामान्य जीवन में भी पारिवारिक सम्बन्धों की दीवारें दरक रही हैं। इसलिए इस उपन्यास का अपना अलग ही महत्त्व है। —अब्दुल बिस्मिल्लाह
Durdamya
- Author Name:
Gangadhar Gadgil +1
- Book Type:

- Description: A truly wonderful book . It explains the life of one of our greatest leader Lokmanya Bal Gangadhar Tilak . A truly inspiring book
Roti Ke Char Harf
- Author Name:
Alok Ranjan
- Book Type:

- Description: यात्राएँ आलोक रंजन के स्वभाव में पैबस्त हैं। कहानियाँ लिखते हुए भी वे यात्राएँ करते रहते हैं—कभी बाहर की, कभी अन्तर्मन की। सबसे खूबसूरत बात यह है कि इन यात्राओं में वे आपके सहयात्री बन जाते हैं—हाथ पकड़कर चरित्रों, घटनाओं, दृश्यों की यात्राएँ करवाने वाले। जैसा कि एक कहानी में कहते हैं—‘ताकि एक आँख बाहर रहे और दूसरी अन्दर देखती रहे।’ आलोक डिटेलिंग के कथाकार हैं—चरित्रों के अन्तः एवं बाह्य रूप, दृश्यावलियाँ, बदलते घटनाक्रम—यह सब इतने स्वाभाविक और बारीक विवरणों के साथ कि उन पर विश्वास करने की इच्छा जन्म लेने लगती है। अगर आलोक आपको चुपके से दक्षिण भारत की यात्रा पर ले जाते हैं तो यह एक कल्चरल शॉक की तरह नहीं आता बल्कि चरित्र, वातावरण सबके साथ एकाकार होकर आपके अन्दर उतरता है। उनके चरित्र हममें से ही एक मालूम होते हैं—उनकी पीड़ाएँ, उनकी खूबियाँ, उनके शोषण, उनकी कामनाएँ—सब हमारी ही प्रतिछवियाँ हैं। आलोक की कहानियों में प्रेम की अनुपस्थित उपस्थिति रहती है। कुछ कहानियों में प्रेम है भी और नहीं भी है—मुखर रहते हुए भी मौन है—‘इस दुनिया के किनारे’, ‘जलते सबके मकान’, ‘स्वाँग के बाहर’ आदि कहानियाँ इस आलोक में पढ़ी जा सकती हैं। आलोक भाषाई तरलता का एक ऐसा स्वाभाविक वितान रचते हैं जिसमें हिन्दी, उर्दू, मैथिली, दक्षिण भारतीय भाषाएँ सब घुल-मिलकर एक रूप हो जाती हैं और धीमे-धीमे बहती नदी का रूप धरती रहती हैं। कहानियों की अन्य खूबियों के साथ जो गहरे आकर्षित करती है, वह है आलोक की नुक्ता-ए-नज़र—आलोक की पॉलिटिक्स बिलकुल साफ है, जो उनके पात्रों के चयन से ज़ाहिर हो जाती है—तकरीबन सभी चरित्र निम्नवर्गीय या निम्नमध्यवर्गीय हैं। जी में चीजों को बदलने की बहुत उत्कट इच्छा न भी हो तो समय के साथ, परिस्थितियों के साथ लड़-भिड़कर लहूलुहान हो जाने की सदिच्छा जरूर है।पंकज मित्र
Maaya : A Tryst With Self
- Author Name:
Minal Arora
- Book Type:

- Description: Maaya – A tryst with self, is the story Maaya, who, through her love for a man, Rahul, took on an incredible journey within, where she understood and experienced love in its purest, truest form. When Maaya first met Rahul, he touched a part of her soul that she had suppressed long ago in order to become the perfect girl for the love of her life, Kunal, whom she was engaged to. As Rahul and Maaya realised their feelings for each other, they also realised the futility of it all. A few days of togetherness was all they enjoyed before they accepted that they weren’t meant to be. Maaya gracefully let go of him to marry Kunal and have her happily ever after. Little did she expect that he would show up again in her life, at a point where she had separated from Kunal after six years of marriage, and her pursuit for his love would lead her to see love in a light she had never seen it in before. She never knew her inner journey was awaiting to be unleashed. She goes through ecstasy, joy, grief, failure, misery and sadness due to the love she longs to have in her life. On the road she travels to re-unite with her twin-soul, unexpectedly leads her to becoming a spiritual healer, the experience of which, opened her up to an infinite horizon where she not only found love, but found herself. Maaya is the essence of human experience through a woman, beyond time, which began with her loving someone so intensely that she dissolved in whom she loved and then finding herself through what followed. The book carries deep revelations about soul mate and twin-soul relationships including how they have been a source to spiritual upliftment for both the twins and how they can prove instrumental in transcending the limitations of each other. Time and again these lovers meet and part, giving each other an experience so intense that it leaves each in a state where they have no choice but to look within for the void they experience while the other isn’t around. The book carries deeper experiential understanding of what the need for love might bring one to experience. It is a tryst with self-facilitated through the twin. Maaya is a journey deep within, all the way to the sub-conscious and exploring long lost memories from past lives and beyond. In her desperation to be loved by Rahul, Maaya travels into her several past lives, encounters herself as love, as sadness, as betrayal, as grief, as loss, as failure and yet realizes that all these were mere experiences transient in nature and they only led her to loving herself and believing in herself even more in this moment. Minal Arora, as a past life therapist and mentor has held the hand of many in their journey within, to explore the explored dimensions of their being, to understand how the soul operates out of human consciousness and how relationships, both good and bad, play a vital role in learning our lessons. All relationships are important, but this book is focused on how the relationship with a twin-soul can allow one to be revealed deep secrets or mysteries of the universe to live a more powerful
Kisani Ki Kahani: Beti Ke Liye
- Author Name:
Sorit Gupto
- Book Type:

- Description: किसान नहीं होंगे तो हम नहीं होंगे। खेती नहीं होगी तो ये शहर नहीं होंगे जहाँ हम उस विशाल आबादी से आँखें चुराए इत्मीनान से रहते हैं, जिस आबादी का सब कुछ खेती पर निर्भर है, वे लोग जो अन्न उगाते हैं, लेकिन अकसर खाली पेट सोते हैं, कर्ज लेते हैं और फिर आत्महत्या कर लेते हैं। हैरानी की बात है कि इतने महत्त्वपूर्ण क्षेत्र पर न तो नीति-निर्माताओं का फोकस है, न ही नागरिक चेतना का। ‘किसानी की कहानी : बेटी के लिए’ हमारा ध्यान उस ओर खींचती है, और एकदम अलग और नए ढंग से। किताबों, खबरों और निजी अनुभवों के माध्यम से आजादी से पहले और बाद के वक्तों पर नजर डालते हुए यह किताब भारतीय किसान और खेती की पीड़ा को हमारी सोच के केन्द्र में ला देती है।
Garden Of Eden Urf Sai Society
- Author Name:
Makarand Sathe
- Book Type:

- Description: समकालीन मराठी साहित्य-जगत में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में स्वीकृत ‘गार्डन ऑफ़ ईडन उर्फ़ साईं सोसायटी’ उपन्यास हमारे आसपास की दुनिया का बयान है जो यूँ तो तमाम रंगीनियों और हलचलों से भरी हुई है लेकिन इसमें हरेक आदमी एक वीराने में फँसा हुआ है। यह वीराना अभाव से भी उपजा है और अधिकता से भी; विचार से भी उपजा है और विचारहीनता से भी। बहुप्रचारित और सर्वस्वीकृत विकास ने समाज में अनगिनत दरारें पैदा कर दी हैं। खंडित अस्मिताएँ लोगों को कभी हिंसा की ओर धकेलती हैं तो कभी निविड़ एकान्त की ओर। गढ़ी हुई वास्तविकता वास्तविक वास्तविकता पर भारी पड़ रही है। इस तरह पूरा समय ही एक रेगिस्तान में तब्दील होता जा रहा है। प्रेम का टिके रहना मुश्किल हो रहा है, जबकि जातिवाद, कट्टरता और तानाशाही निरन्तर बढ़ रही हैं। हिंसा क्रूर से क्रूरतर रूप धरकर सामने आ रही है। ‘गार्डन ऑफ़ ईडन उर्फ़ साईं सोसायटी’ आधुनिक जीवन के लगातार विद्रूप होते जाने के मौजूदा दौर में मानवीय भविष्य से जुड़े प्रश्नों पर गहराई से विचार करने वाली एक प्रयोगशील कृति है, एक बेहद दिलचस्प और विचारोत्तेजक उपन्यास।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book