THE HELL OF HEAVEN
(0)
₹
600
₹ 480 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
The Hell of Heaven’ is one of the most famous novels of Shanta Kumar, which has a multiplicity of themes ranging from petty politics to the communal nationalism which represents integrity of character, sense of belonging and commitment to the human cause. It is also a story of Promod and Savitri, their hopes and illusions, their obligations and disillusions, which ultimately flower into cherished values of life. The best and the worst of politics, the best and worst of women's exploitation find simultaneous place in the novel. The novel also depicts the hard, mountainous life of people living beyond the Rohtang Pass in the Lahaul and Spiti valleys. The book is a fascinating exposition of hill life and the dreams, faltering, illusions, and disillusions of the hill people. The author is sensitive to even the most minor incidents and events in villagers' lives. The astute and crooked politicians also find their share in the novel's descriptions, which take on epic dimensions as it reaches its culmination.
Read moreAbout the Book
The Hell of Heaven’ is one of the most famous novels of Shanta Kumar, which has a multiplicity of themes ranging from petty politics to the communal nationalism which represents integrity of character, sense of belonging and commitment to the human cause. It is also a story of Promod and Savitri, their hopes and illusions, their obligations and disillusions, which ultimately flower into cherished values of life. The best and the worst of politics, the best and worst of women's exploitation find simultaneous place in the novel. The novel also depicts the hard, mountainous life of people living beyond the Rohtang Pass in the Lahaul and Spiti valleys. The book is a fascinating exposition of hill life and the dreams, faltering, illusions, and disillusions of the hill people. The author is sensitive to even the most minor incidents and events in villagers' lives. The astute and crooked politicians also find their share in the novel's descriptions, which take on epic dimensions as it reaches its culmination.
Book Details
-
ISBN9788184303278
-
Pages424
-
Avg Reading Time14 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Alvida Chunavi Rajneeti
- Author Name:
Shanta Kumar
- Book Type:

- Description:
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, विचारक और चिंतक शान्ता कुमार ने अपने छह दशकों के राजनैतिक जीवन में देश की विभिन्न समस्याओं को बहुत करीब से देखा है। उन्हें जब भी अवसर मिला है, उन्होंने इन समस्याओं पर अपनी चिंता ही व्यक्त नहीं की, अपितु अपनी लेखनी के माध्यम से इन समस्याओं के निदान की राह भी सुझाई है। उनके चिंतन का आधार समाज में अंतिम पंक्ति में खड़ा वह व्यक्ति है, जो आजादी के बाद से आज तक सदा उपेक्षित रहा है। इस उपेक्षा ने देश में आर्थिक विषमता का ऐसा जाल फैला दिया है कि समाज का कोई भी वर्ग इसके क्रूर पंजों से बच नहीं पाया है। अमीरी चमक रही है और गरीबी सिसक रही है। बढ़ती जनसंख्या के कारण सरकार के विकास संबंधी सभी प्रयास निरर्थक साबित हो रहे हैं। छह दशकों की सक्रिय राजनीति के बाद चुनावी राजनीति को सम्मानजनक ढंग से अलविदा कहकर शान्ता कुमार ने सिद्धांतों और मूल्यों की राजनीति को नया आयाम प्रदान किया है, जो निस्संदेह प्रशंसनीय ही नहीं, अनुकरणीय भी है। आशा है सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक विषयों पर पठनीय लेखों के इस संग्रह का पाठक भरपूर स्वागत करेंगे।
Himalaya Par Lal Chhaya
- Author Name:
Shanta Kumar
- Book Type:

- Description:
वर्ष 1962 में भारत पर चीनी आक्रमण स्वतंत्र भारत के इतिहास की एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और भारतीय सेना की शर्मनाक पराजय एक कलंक। वह हार सेना की नहीं थी, अपितु तत्कालीन सरकार की लापरवाही के कारण हुई थी। भारत की सरकार पंचशील के भ्रम में और ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ के नारे में मस्त रही; यद्यपि चीन द्वारा तिब्बत के अधिग्रहण के बाद भारतीय सीमा पर घुसपैठ चलती रही थी। जो भारत की सेना अपनी बहादुरी के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध थी और जिस सेना के पराक्रम से मित्र देशों ने दो विश्वयुद्धों में जीत हासिल की थी, भारत की वही बहादुर सेना 1962 में बुरी तरह से परास्त हुई। पिछले कुछ वर्षों से सीमा पर घुसपैठ कुछ अधिक होेने लगी है। कई बार चीनी सेना कई मील अंदर आ गई। चिंता का विषय यह है कि चीनी सेना भारतीय सीमा में अपनी मरजी से आती है और अपनी मरजी से ही वापस चली जाती है। इस पुस्तक का एकमात्र उद्देश्य भारत को उस चुनौती के लिए तैयार करना है, जो आज मातृभूमि पर आए संकटों ने हमारे सामने उपस्थित कर दी है। परिस्थितियाँ विपरीत हैं, मानो समय भारत के पौरुष, नीतिज्ञता व साहस की परीक्षा लेना चाहता है। निस्संदेह कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे भविष्य के प्रति महान् निराशा होती है, परंतु हमें यह भूलना नहीं चाहिए कि विकट और महान् संकटों में से राष्ट्रों के उज्ज्वल भविष्य का उदय हुआ करता है।
Bhrashtachaar Ka Kadva Sach
- Author Name:
Shanta Kumar
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Lockdown ke Chalees Din
- Author Name:
Shanta Kumar
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
The Tale of a Place
- Author Name:
S.K. Pottekkat +1
- Book Type:

- Description:
Prema Jayakumar provides the English translation of S.K. Pottekkar's acclaimed Malayalam novel, ' Oru Deshanthinte Katha, ' published by Sahitya Akademi in 2015. The narrative centres on Sreedharan, a boy from Athiranippadam, portraying villagers' lives through the perspectives of the narrator and other characters. Set during British India, the story begins with Sreedharan's return to his hometown after more than 40 years. He is dropped near a petrol overhead tank on the site of his teenage love's house. He recounts the lives of the residents of Athiranippadam. The novel is segmented into five parts: childhood, early youth, teenage years, and a final section called "marmarangal." It features a story told by Velu Mooper, who witnesses events after Sreedharan's father's death, following his extensive travels to North India, Africa, and Europe. Throughout the story, he encounters individuals who leave lasting impressions from different stages of life, including Emma from Switzerland, a Bengali Babu, his half-brothers Kunhappu and Gopalettan (who caused him suffering by contracting syphilis), the mother goddess psyche of a Tamil Brahmin woman, with whom he longs, a girl who loved him unrequitedly before dying of tuberculosis, pranks with the " Supper Circuit Set, " lost loves, profound loneliness, his father's legendary life, and his journeys across continents. He started by dropping off his widowed mother at her family's home, initially at Elanhippoyil, then heading to Bombay- a solitary voyage into the vast, bewildering world, as SKP describes. This haunting autobiographical novel spans about 60 years of history, reflecting on themes of memory, nostalgia, hardship, dreams, and numbness. It concludes with a monologue: "Forgive me, the representative of the new generation of Athiranippadam, forgive me for trespassing into your land, and consider me merely an antique collector, a non-native!"
Digant Ki Oar
- Author Name:
Bipin Bihari Mishra
- Book Type:

- Description:
उम्र की ढलती साँझ में अपने गाँव में, अपने लोगों के बीच, अपने घर में रहने की इच्छा हरेक मनुष्य की होती है। ‘अपना घर’! कितना प्यारा शब्द है यह। लेकिन क्या सबको नसीब होता है। घर बनाने और बसाने में कितनी मुश्किलें आती हैं, यह किसी भी मध्यवित्त व्यक्ति का सबसे तल्ख़ और संजीदा अनुभव होता है।
‘दिगन्त की ओर’ इन्हीं अनुभवों का प्रवाहपूर्ण भाषा में औपन्यासिक विस्तार है। यह जीवन और समाज की विडम्बनाओं और विद्रूपताओं पर तो प्रकाश डालता ही है, जीवन–संध्या में बुजुर्गों की उपेक्षाओं और उम्मीदों को भी रेखांकित करता है। ओड़िया भाषा के इस महत्त्वपूर्ण उपन्यास का सुजाता शिवेन द्वारा किया सर्जनात्मक अनुवाद निश्चय ही हिन्दी पाठकों को रुचिकर और पठनीय लगेगा, ऐसा हमारा विश्वास है।
Vaikalya
- Author Name:
Dr. Shireesh Gopal Deshpande
- Book Type:

- Description:
वैकल्य अर्थात् विकलता। कुष्ठरोग पर आधारित हिंदी में संभवतः यह पहला क्लासिकल और मूल ललित शैली में लिखा गया उपन्यास है। इसने कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास और उपचार को लेकर समाज में लोगों की आँखें खोलने का काम किया है। उपन्यास का कथानक अंतर्मन को छू लेता है। विषय बहुत ही हृदयस्पर्शी और दिलचस्प है। यह दो महापुरुषों के मौन संघर्ष की गाथा है। एक वह जो, समाजसेवी हैं, कुष्ठरोगियों के लिए आश्रम व्यवस्था की बात करते हैं, तो दूसरे वह, जो प्रख्यात डॉक्टर हैं, अस्पताल व्यवस्था की बात करते हैं और रोगियों का इलाज घर से ही होना चाहिए—इसका पुरजोर समर्थन करते हैं। कुल मिलाकर कुष्ठरोग को लेकर वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण के बीच की यह गहरी खाई सशक्त कथ्य के ताने-बाने से बुनी एक करुण-गाथा है। दोनों महापुरुषों की पत्नियों का अपने पति और उनके कार्य के प्रति त्याग और समर्पण की कहानी भी गजब की है। कुष्ठरोग को महारोग के नाम से भी जाना जाता है, जिसके प्रति लोगों के मन में कई प्रकार के भ्रम, भय और अंधविश्वासी भावनाएँ थीं। इस रोग के संसर्ग की स्थिति, टीके का आविष्कार, उपलब्ध दवाइयाँ, देश-विदेश के अनुसंधानकर्ताओं की मान्यताएँ, सरकारी रवैया, रोगियों का देश निकाला, पाप-पुण्य जैसे मुद्दों को लेकर यह उपन्यास वैचारिक द्वंद्व पेश कर जनजागरण की स्थिति पैदा करता है।
Rah Dar Badar
- Author Name:
Govind Mishra
- Book Type:

- Description:
‘राह दर बदर’ गोविन्द मिश्र का नया उपन्यास है जिसे हम उपन्यास विधा के सन्दर्भ में भी एक ‘नया उपन्यास’ कह सकते हैं। जो चीज़ इसे एक औपन्यासिक कृति बनाती है वह किसी एक पात्र की केन्द्रीय अथवा आद्योपान्त उपस्थिति नहीं बल्कि एक ‘थीम’ का क्रमशः विकास है। इस थीम का ताल्लुक़ भारतीय स्त्री से, उसके अस्मिता-बोध की पिछली आधी सदी से भी ज़्यादा लम्बी यात्रा से है। गोविन्द मिश्र स्वयं इसे ‘मध्यवर्गीय भारतीय नारी की अन्तश्चेतना का 1940 से 2020 तक का क्रमिक विकास’ कहते हैं और यह भी कि इसी के चलते यह कृति जितनी साहित्यिक है, उतनी ही समाजशास्त्रीय भी। भारतीय स्त्री ने पिछली सदी के उत्तरार्द्ध और मौजूदा सदी के अब तक के वर्षों में एक लम्बा सफ़र अपने भीतर भी किया है, और समाज के सार्वजनिक स्पेस में भी। परिवार और विवाह के स्वरूप में भी काफ़ी बदलाव आया है, लेकिन शायद उतना नहीं, जितना गुणात्मक परिवर्तन भारतीय स्त्री की प्राथमिकताओं में आया है। यह उपन्यास इस परिवर्तन की धारा को रेखांकित करते हुए भविष्य के विषय में भी कुछ प्रश्न छोड़ता है, जो स्त्री के साथ समाज के लिए भी विचारणीय हैं, और पुरुष के लिए भी। एक दिलचस्प और विचारोत्तेजक कथा-कृति!
Kailas Mein Golmaal
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

- Description:
महान फ़िल्मकार और अनूठे कथाकार सत्यजित राय के चर्चित जासूस किरदार फेलूदा का एक लोमहर्षक कारनामा है— ‘कैलास में गोलमाल’। इस बहुचर्चित उपन्यास में फेलूदा का सामना होता है प्राचीन मूर्तियों की तस्करी करनेवालों से। भुवनेश्वर के एक प्रसिद्ध मन्दिर से यक्षिणी की मूर्ति के मस्तक गायब होने की घटना से शुरू हुआ यह मामला उस वक्त बेहद पेचीदा हो जाता है, जब सम्भावित तस्कर वस्तुतः एक जासूस निकलता है। रहस्य-रोमांच के बेहद चक्करदार रास्तों से होकर गुजरती इस कथा में भरपूर रोमांच और मनोरंजन तो है ही, देश की ऐतिहासिक और कलात्मक धरोहर के संरक्षण तथा उसके प्रति प्रेम का सन्देश भी निहित है।
Chaturang (Raj)
- Author Name:
Ravindranath Thakur
- Book Type:

- Description:
‘चतुरंग’ मूलत: जीवन के प्रयोजनों और उनकी उपलब्धि के बीच अनिर्णीत संघर्ष का कथा-प्रयोग है। अब तक हुई तमाम बौद्धिक व्याख्याओं की पहुँच के परे इस संघर्ष का प्रारम्भ कहीं भौतिक परिवेश में दिखाई देता है, कहीं तर्क और विवेक की जुगलबन्दी में और कहीं मनो-जगत में पलती आत्म-प्रताड़णा में; और तीनों ही स्रोतों से यह हमारे आधुनिक विचार-जगत में प्रवेश करता दिखता है। शचीश, श्रीविलास, दामिनी और लीलानन्द स्वामी इसे अपने-अपने स्तर पर जीते हैं—अध्यात्म और भक्ति के दिशाहारा आवेग में, दैहिक प्रेम की तृषार्त-भीरु गुफाओं में, जीवन के भीतर, जीवन के बाहर, प्रभंजन के व्यामोह से घिरे-घिरे। ताऊ जी (जगमोहन) इस कथा को रवीन्द्रनाथ की तत्कालीन सामाजिक चिन्ताओं से जोड़ते हैं, देहरी लाँघने की व्याकुलता तक।
Chhavigriha Mein Andhera Hai
- Author Name:
Sunil Gangopadhyay
- Book Type:

- Description:
बंगला-साहित्य के मूर्धन्य रचनाकार सुनील गंगोपाध्याय की यह कृति उनके महत्त्वपूर्ण औपन्यासिक रचनाओं में शुमार है। इसमें दो परिवारों की कहानी समानान्तर धाराओं में चलती है। एक परिवार पूँजीपति शिवशंकर लाहिड़ी का है जिसने अपने एक सिनेमा हॉल को अपनी ज़िद के कारण बन्द कर दिया है और हड़ताली कर्मचारियों के आगे झुकने को किसी भी हालत में तैयार नहीं है। दूसरी कहानी उसी सिनेमा हॉल के एक कर्मचारी रमेश मुखर्जी के परिवार की है जो इस हड़ताल के कारण खाने-पीने की बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज है। लेकिन विडम्बना यह है कि दोनों के बेटे अपने-अपने पिताओं से झगड़ा करके अलग रह रहे हैं। लेखक ने इस दोनों परिवारों की स्थितियों के तनाव को इतने संवेदनशील रूप से रचा है कि वह पाठकों में एक रचनात्मक बेचैनी भर देता है। इन दोनों परिवारों की कहानियों के बीच धीमी मगर विरल लय में एक प्रेम कहानी की अन्तःसलिल धारा बढ़ रही है जो मीठी आँच की तरह प्यारी और सुखद लगती है। स्थितियों, चरित्रों और घटनाओं का रचनात्मक संयोजन पाठकों को अपने बहाव में इस तरह लिए चलता है कि पाठक इस कृति को एक ही बैठक में पूरा पढ़ जाना चाहेंगे, ऐसा हमारा विश्वास है।
Mantra-Viddh
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

- Description:
‘मंत्र-विद्ध’ प्यार की खुरदरी कहानी है—आज की मूर्तिकला की तरह... तारक और सुरजीत कौर के बीच एक तीसरा ‘व्यक्ति’ और है, और वह है प्यार! तारक अपने को समझाते हुए, दूसरे आदमी की निग़ाह से सारी स्थिति को देखता है और स्वयं आतंकित रहता है कि क्या सचमुच वीरता का वह क्षण उसी ने धारण किया था...क्षण अथवा आवेश-भरे दबाव का शायद एक ऐसा विस्फोट, जिसका अनुभव केवल कायर ही कर सकता है। यानी परम वीरता के काम पक्के कायर के सिवा कोई दूसरा नहीं कर सकता! प्यार जैसे रिश्ते और मानवीय आशा-आकांक्षा के साथ प्रायः ही उठ खड़े होने वाले द्वन्द्व का एक अलग ही कोण दिखाती है यह कथाकृति। तारक स्वयं को जिस रूप में प्रस्तुत करता है, वास्तव में वह उसके विपरीत है अर्थात भीरु, शंकालु और जिम्मेदारियों से भागने वाला। उसके विपरीत स्वाभिमानी और जिम्मेदार सुरजीत सामन्ती घुटन से मुक्ति के लिए तारक का साथ स्वीकार करती है और अपनी शक्ति और अभावों की तरफ से आँखें मूँदकर प्रेम को हासिल कर लेने का स्वप्न देखती है। परस्पर विपरीत ध्रुवों की नजदीकी का यह त्रासद यथार्थ इस उपन्यास को प्रेम और व्यक्ति-सम्बन्धों के बारे में एक भिन्न ही कोण से सामने लाता है। अपने समय का एक चर्चित उपन्यास।
Mediyaya Namah
- Author Name:
Girish Pankaj
- Book Type:

- Description:
मीडिया की आधुनिक दुनिया निश्चित रूप से अनेक विकृतियों से भरी हुई है। कुछ अखबारी चेहरे भले ही नायक जैसी लगें, लेकिन उनके पीछे एक खलनायक छुपा होता है। गिरीश पंकज ने मीडिया की कुछ खामियों को उजागर करने का सार्थक प्रयास किया है। गिरीश पिछले तीस वर्षों से मीडिया से जुड़े हैं। इससे पहले, उन्होंने 'मिठलबरा की आत्मकथा’ नामक उपन्यास लिखा, जो तेलुगु और ओडिया भाषाओं में भी अनूदित हुआ है। यह व्यंग्य उपन्यास इसलिए खास है क्योंकि यह सिर्फ कहने का व्यंग्य नहीं है, बल्कि शुरू से अंत तक उसमें व्यंग्य का तत्व निरंतर रहता है। इसकी भाषा रंजक, व्यंग्यपूर्ण, बेबाक और पाठक को बांधे रखने वाली है। कभी-कभी भाषा कुछ खुली-खुली भी लग सकती है, पर पूरी तरह से मर्यादित है। इस तरह के व्यंग्य उपन्यासों में अक्सर व्यंग्य खोजना पड़ता है, लेकिन ‘मीडियाय नमः’ में कहीं- कहीं व्यंग्य का समावेश हर कदम पर है। मुझे पूरा भरोसा है कि गिरीश का यह नया व्यंग्य उपन्यास बाजारवादी मीडिया के संकीर्ण, समझौता-प्रधान चेहरे को जानने में मदद करेगा।
Naya Nagar
- Author Name:
Tasneef Haidar
- Book Type:

- Description:
ये नया नगर है जहाँ सड़क पर आँखों के सामने हुए एक्सीडेंट को लोग उतनी जल्दी तवज्जो नहीं देते जितनी जल्दी अचानक कानों में पड़ गए किसी शे'र और वाह-वाह को देते हैं। ग़ज़लें यहाँ परिन्दों की तरह उड़ती हैं, बरसाती पानी की तरह गलियों में बहती हैं और जहाँ चाहे वहाँ बैठकर नशिस्त जमा देती हैं। यहाँ जो लोग हैं, वे शायरी को ईमान की तरह जीते हैं; ऐसा अक्सर नहीं होता कि ज़िन्दगी की बाहरी ज़रूरतें उन्हें भटकाकर किसी दफ़्तर में ले जाकर बिठा दें; बिठा भी दें तो वहाँ से उठाकर वे फिर किसी शे'री नशिस्त में आकर बैठ जाते हैं; या किसी रेस्तराँ या चाय की टपरी पर जम जाते हैं। ये कहानी इसी नगर की है। उर्दू के सुपरिचित युवा शायर-कथाकार तसनीफ़ हैदर का यह उपन्यास हिन्दी पाठकों को एक ताज़ा हवा की तरह महसूस होगा। कहानी की रवानी और तंज़-ओ-मिज़ाह की तुर्श छौंक के साथ यह कहानी पढ़नेवाले को बाँध लेती है। और हाँ क्योंकि यह नगर ग़ज़लों से बसा है तो इसमें उर्दू शायरी से जुड़ी कुछ तकनीकी पेचीदगियाँ भी आपको जानने को मिलेंगी, कुछ क़िस्से और बहसें भी, मुस्लिम समाज के सामाजिक-आर्थिक हालात भी; मौजूदा भारतीय राजनीति के हवाले भी; और हाँ मुहब्बत का एक नाकाम क़िस्सा भी।
Mahashweta
- Author Name:
Tarashankar Bandyopadhyay
- Book Type:

- Description:
सुविख्यात बांग्ला उपन्यासकार ताराशंकर बंद्योपाध्याय की यह पुस्तक कथावस्तु और रचना-शिल्प की दृष्टि से एक अनूठी और मार्मिक कथाकृति है। माता-पिताविहीन नीरजा नामक एक बालिका का जैसा चरित्र-चित्रण यहाँ हुआ है, वह सिर्फ़ तारा बाबू जैसे कथाकार ही कर सकते हैं। पशुवत् मनुष्यों के लोभ, कुत्सा और समाज की कुरूपताओं से अनथक संघर्ष करती हुई नीरजा मानो तेजोद्दीप्त भारतीय नारी का प्रतीक बनकर उभरती है, जिसमें परदुख-कातरता भी है और उसके लिए आत्मोत्सर्ग की भावना भी। एक ओर वह अनाचार से जूझने के लिए जलती हुई मशाल है, तो दूसरी ओर उसके अन्तर में प्रेम की अन्तःसलिला प्रवाहित हो रही है। नारी की आत्मनिर्भरता उसके जीवन का मूलमंत्र है, जिसे वह सम्मानपूर्वक जीने की पहली शर्त मानती है। वस्तुतः तारा बाबू ने इस उपन्यास में स्थितियों और परिवेश को नाटकीयता प्रदान करके विलक्षण प्रभाव उत्पन्न किया है।
God Is A Gamer
- Author Name:
Ravi Subramanian
- Book Type:

- Description:
गॉड इज अ गेमर’ एक दिलचस्प कहानी है, जो पाठक को मुंबई की गलियों से गोवा के समुद्र तट तक और वॉशिंगटन की आलीशान इमारतों से न्यूयॉर्क की वित्तीय राजधानी तक ले जाती है। एक ऐसी कहानी, जो पाठक को अज्ञात स्थानों की, जिन्हें किसी ने नहीं देखा, सैर कराती है, लेकिन उनका एहसास कइयों ने किया है—वह स्याह वेब। इंटरनेट का नाजुक हिस्सा। और इन सबके बीच, मानव भावनाओं की एक कहानी है। एक पिता, जिसका बेटा लौट आता है, एक राजनेता जो बेबाक है, एक बैंक का सीईओ, जिसे एक राज सीने में दफन रखना है। इस दलदल में फँसा है एक पुराना बैंकर, जिसकी गेमिंग कंपनी तबाह होनेवाली है; एक बीस वर्षीय जोड़ा, जो प्यार की तलाश में है; और एक एफबीआई एजेंट, जो अपने परिवार को भूलने के लिए अपने आपको काम में डुबो देना चाहता है। इन सारी कहानियों के बीच बुनी गई है बिटकॉयन्स की कहानी—वह आभासी मुद्रा, जिसने दुनिया में तहलका मचा दिया है। अगर इस किताब के कुछ हिस्से आपको डरा दें, दहशत पैदा कर दें और आपको ऐसा लगे कि क्या वास्तव में ऐसी बातें होती हैं तो यकीन मानिए, इस किताब के कई चौंका देनेवाले क्षण वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित हैं। रहस्य, रोमांच और सर्वशक्तिमान ईश्वर की उपस्थिति का प्रतिपल अहसास करानेवाला अत्यंत पठनीय उपन्यास।
Ghar
- Author Name:
Vibhuti Narayan Rai
- Book Type:

- Description:
समकालीन हिन्दी कथा-साहित्य के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर विभूति नारायण राय का यह उपन्यास मध्यवर्गीय परिवार की विडम्बनापूर्ण जीवन-स्थितियों का दारुण दस्तावेज़ है। पेंशनयाफ़्ता मुंशी रामानुज लाल का यह घर क्यों ईंट-गारे के मकान में तब्दील होकर रह गया, ‘घर’ शब्द से जुड़ी ऊष्मा कैसे एकाएक वाष्प बनकर उड़ गई, एक ही छत के नीचे रहते हुए घर के प्राणी एक-दूसरे से एकदम कटकर संवादहीनता की अंधी सुरंग में क्यों फँस गए जहाँ न परिचित स्पर्श था और न ही स्वर? इन सवालों के जवाब के अलावा यह हमारी व्यवस्था की उन विडम्बनाओं और विद्रूपताओं की कहानी भी है जिनमें फँसकर एक पढ़ा-लिखा नवयुवक बेरोज़गारी का दंश झेलते हुए नपुंसक आक्रोश से भर उठता है और स्वयं से तथा समाज से आँखें चुराने लगता है, दूसरी तरफ़ यह उन हज़ारों राजकुमारियों के करुण दु:ख की कथा भी है जिन्हें कोई राजकुमार लेने नहीं आता। सरस भाषा और प्रवाहपूर्ण कथा विन्यास विभूति नारायण राय की अपनी विशिष्टता है जिसे पाठक इस उपन्यास में भी पाएँगे।
Purnamadah
- Author Name:
Saroj Kaushik
- Book Type:

- Description:
प्रेम की न कोई भाषा होती है, न परिभाषा, न सीमाएँ उसे सीमित करती हैं, न दूरियाँ उसे ओझल करती हैं, वह दूरी जीवन और मृत्यु भी क्यों न हों! ‘पूर्णमिदम्’ के बाद सरोज कौशिक का यह उपन्यास ‘पूर्णमदः’; अलग-अलग होते हुए भी ये दोनों उपन्यास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। वह अध्यात्म के आलोक में प्रकाशमान, तो यह जीवन के संघर्षों ने बीच के पवित्र दीप को अपने सचेत आत्मबोध की ओट में बचाते हुए एक सघन यात्रा। ‘पूर्णमदः’ में पीड़ा है, अतीत के दुखते घाव हैं, स्मृति में कौंधती विविधवर्णी छवियाँ हैं, चहुँओर व्याप्त कालिमा में अपने अन्तस की पवित्रता को निष्कलंक रखते अपने मूल्यों को बचाने का संघर्ष है; और जीवन तथा समाज में मनुष्य की आत्मा को कचोटतीं, खोखला करतीं अपूर्णताओं के बरक्स पूर्ण को बचाने और अगली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखने की कामना है। भावनाओं के सघन चित्रों से परिपूर्ण एक पठनीय औपन्यासिक कृति।
Arrowsmith
- Author Name:
Sinclair Lewis
- Book Type:

- Description:
Arrowsmith is an early major novel dealing with the culture of science. It was written in the period after the reforms of medical education flowing from the Flexner Report on Medical Education in the United States and Canada: A Report to the Carnegie Foundation for the Advancement of Teaching, 1910, which had called on medical schools in the United States to adhere to mainstream science in their teaching and research. Arrowsmith is a Nobel Award-winning novel by Vishwa Classic Books Translated into Hindi.
Jane Eyer
- Author Name:
Sharlotte Bronte
- Book Type:

- Description:
प्राचीन साहित्य में नायिका का चित्रण प्रेम की प्रतिमा के रूप में, पति की छाया के रूप में, आज्ञाकारिणी दासी के रूप में ही हुआ है। अपवाद के रूप में नारी कभी-कभी कुटिल और दुष्टा के रूप में भी चित्रित हुई है, परन्तु बुद्धिमान, विवेकशील और पति को सही सलाह देनेवाली दृढ़ नारी का रूप साहित्य में कम ही देखने को मिलता ‘महाभारत’ की गांधारी को देखें...गांधारी जैसी विवेकशील नारी ने यदि पतिव्रत धर्म की ग़लत व्याख्या के कारण आँखों पर पट्टी न बाँधी होती, तो महाभारत की कथा आज दूसरी होती, नीति-निपुण मंदोदरी यदि उतनी विनम्र और सहनशील नहीं होती, और उसने वीर पुत्र और विवेकशील सम्बन्धियों को समझा-बुझाकर अपना पक्ष मज़बूत कर लिया होता, तो पराक्रमी रावण अपनी लालसा के कारण यूँ पूरे परिवार को नष्ट नहीं कर पाता। प्रस्तुत उपन्यास में नायिका जेन आयर के व्यक्तित्व के कई पहलू हमें देखने को मिलते हैं—प्रथम तो वीरांगना किशोरी; फिर एक विवेकशील संयमी नवयौवना, निष्ठावान और दृढ़ चरित्र की युवती और अन्त में शरीर की अपेक्षा आत्मा को महत्त्व देनेवाली एक परिपक्व स्त्री का रूप। जेन आयर में अपनी क्षमता पर विश्वास, अपने स्वतंत्र व्यक्तित्व की अनुभूति और उसके महत्त्व की समझ स्पष्ट दिखलाई पड़ती है। प्यार के ऊष्ण, पिघला देनेवाले प्रस्ताव के समक्ष भी वह विवेक का दामन नहीं छोड़ती और अपने व्यक्तित्व का गौरव बनाए रखने में सदा सजग रहती है। स्त्री-पुरुष समानता की प्रबल पक्षधर तथा नारी की आर्थिक स्वाधीनता की सशक्त समर्थक शार्लोट ब्रॉन्टे की बहुचर्चित-बहुप्रशंसित नायिका-प्रधान कृति है—जेन आयर।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book