The Tale of a Place
(22)
Author:
S.K. Pottekkat, Prema JayakumarPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
EnglishCategory:
Contemporary-fiction₹
300
₹ 249 (17% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Prema Jayakumar provides the English translation of S.K. Pottekkar's acclaimed Malayalam novel, ' Oru Deshanthinte Katha, ' published by Sahitya Akademi in 2015. The narrative centres on Sreedharan, a boy from Athiranippadam, portraying villagers' lives through the perspectives of the narrator and other characters. Set during British India, the story begins with Sreedharan's return to his hometown after more than 40 years. He is dropped near a petrol overhead tank on the site of his teenage love's house. He recounts the lives of the residents of Athiranippadam. The novel is segmented into five parts: childhood, early youth, teenage years, and a final section called "marmarangal." It features a story told by Velu Mooper, who witnesses events after Sreedharan's father's death, following his extensive travels to North India, Africa, and Europe. Throughout the story, he encounters individuals who leave lasting impressions from different stages of life, including Emma from Switzerland, a Bengali Babu, his half-brothers Kunhappu and Gopalettan (who caused him suffering by contracting syphilis), the mother goddess psyche of a Tamil Brahmin woman, with whom he longs, a girl who loved him unrequitedly before dying of tuberculosis, pranks with the " Supper Circuit Set, " lost loves, profound loneliness, his father's legendary life, and his journeys across continents. He started by dropping off his widowed mother at her family's home, initially at Elanhippoyil, then heading to Bombay- a solitary voyage into the vast, bewildering world, as SKP describes. This haunting autobiographical novel spans about 60 years of history, reflecting on themes of memory, nostalgia, hardship, dreams, and numbness. It concludes with a monologue: "Forgive me, the representative of the new generation of Athiranippadam, forgive me for trespassing into your land, and consider me merely an antique collector, a non-native!"
Read moreAbout the Book
Prema Jayakumar provides the English translation of S.K. Pottekkar's acclaimed Malayalam novel, ' Oru Deshanthinte Katha, ' published by Sahitya Akademi in 2015.
The narrative centres on Sreedharan, a boy from Athiranippadam, portraying villagers' lives through the perspectives of the narrator and other characters. Set during British India, the story begins with Sreedharan's return to his hometown after more than 40 years. He is dropped near a petrol overhead tank on the site of his teenage love's house.
He recounts the lives of the residents of Athiranippadam. The novel is segmented into five parts: childhood, early youth, teenage years, and a final section called "marmarangal." It features a story told by Velu Mooper, who witnesses events after Sreedharan's father's death, following his extensive travels to North India, Africa, and Europe.
Throughout the story, he encounters individuals who leave lasting impressions from different stages of life, including Emma from Switzerland, a Bengali Babu, his half-brothers Kunhappu and Gopalettan (who caused him suffering by contracting syphilis), the mother goddess psyche of a Tamil Brahmin woman, with whom he longs, a girl who loved him unrequitedly before dying of tuberculosis, pranks with the " Supper Circuit Set, " lost loves, profound loneliness, his father's legendary life, and his journeys across continents.
He started by dropping off his widowed mother at her family's home, initially at Elanhippoyil, then heading to Bombay- a solitary voyage into the vast, bewildering world, as SKP describes.
This haunting autobiographical novel spans about 60 years of history, reflecting on themes of memory, nostalgia, hardship, dreams, and numbness. It concludes with a monologue: "Forgive me, the representative of the new generation of Athiranippadam, forgive me for trespassing into your land, and consider me merely an antique collector, a non-native!"
Book Details
-
ISBN9788126046843
-
Pages656
-
Avg Reading Time22 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Shilakshar Ban Mere Man
- Author Name:
Meena Jha
- Book Type:

- Description: 'शिलाक्षर बन मेरे मन' उपन्यास एक साथ स्त्री-संघर्ष और लड़ते-मरते कृषक समाज की आधुनिक महागाथा है। बिहार के 1967 के विश्व-व्यापी सूखे और अकाल की परिघटनाओं को लेकर मीना झा ने बहुत ही जीवंत और विश्वसनीय ढंग से इस उपन्यास के ताने-बाने को बुना है। अन्नदायिनी धरती की कोख में दरारें पड़ी हैं, खेत में खड़ी फसलें जल गई हैं या उसमें दाने नहीं हैं, नदियों का पानी सूख गया है, मछलियों के जीवन पर भी संकट आ गए हैं और छोटे बच्चों को स्कूलों में मिलने वाली खिचड़ी दुर्लभ पकवान से भी बढ़कर हो गई है और उसी समय सरकारी राशन की कालाबाज़ारी भी चरम पर—ऐसे अमानुषिक अकालबेला के जीवन का चित्रण कथाकार और यात्रा वृत्तांत की सिद्ध लेखिका मीना झा ने इस तरह किया है कि आप उस जीवन के तल में उतरने से खुद को रोक नहीं सकते। यहाँ सूखे और अकाल से जूझते लोगों की भीड़ से मीना झा ने कुछ ऐसे स्त्री-पुरुष, युवक-युवतियों और बच्चों को अपने कैनवस पर उतारा है जो उस समाज के प्रतिनिधि चरित्र के रूप में सामने आते हैं और जिनके दीर्घ काल तक पाठकों के मन-मस्तिष्क में टिके रहने की प्रबल संभावना है। मिथिला समाज के मिट्टी-पानी में लिथड़े ये पात्र महज़ औपन्यासिक पात्र नहीं, उस समाज के प्रतिनिधि चरित्र हैं—नागार्जुन के 'बलचनमा' और 'वरुण के बेटे' के चरित्रों की तरह। मास्टर काका, विजय, बुढिय़ा दादी, शंभू, रागिनी तक को आप विस्मृत नहीं कर पाएँगे; प्रधान नायिका कुसुम की तो बात ही मत कीजिए। बेहद पठनीय यह उपन्यास जितना ही जीवंत और चाक्षुष है, उतना ही विचारोत्तेजक भी। —श्रीधरम
Duniya Anna Ki Nazar se
- Author Name:
Jostein Gaarder
- Book Type:

- Description: इस उपन्यास की कथा काल्पनिक है, लेकिन तथ्य, तर्क, विश्लेषण... सब वास्तविक है। यह मनोरंजक कहानी आपको दुनिया के अतीत, वर्तमान और भविष्य की वह सच्ची तस्वीर देती है, जिसे आप जीवन में देखते हैं और उपन्यास में महसूस करते हैं, इसलिए अंतिम पेज़ तक पहुँचते हुए आप बदल जाते हैं। इसकी कथा सिर्फ़ एक दिन की है। लेकिन इस एक दिन को एना अतीत और भविष्य से ऐसे देखती है कि हम अपने आत्मघाती व्यवहारों व भावी पीढ़ियों के प्रति अपनी जवाबदेहियों का साक्षात्कार कर लेते हैं। एक मनुष्य के रूप में अपने आत्मसाक्षात्कार का प्रभाव बहुत गहरा होता है। आप इस ग्रह के तमाम पारितंत्रों, जीव-जंतुओं और उनपर आसन्न संकटों के बारे में जानेंगे। आप अपने पैरों के नीचे की इस पृथ्वी को नई आँखों से देखेंगे। आसपास के पारिस्थितिक वैभव और उसके मूल्य को पहली बार महसूस करेंगे। यह किताब आपके ज्ञान और संवेदना का विस्तार करेगी। पृथ्वी के पारिस्थितिक संकट पर ढेरों किताबें पढ़ने से बेहतर है यह रुचिकर उपन्यास पढ़ना।
Akaal Me Utsav
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description: ‘‘इस साल उपन्यासों में केवल एक किताब उल्लेखनीय है -पंकज सुबीर का उपन्यास ‘अकाल में उत्सव’। यह गाँव और किसान जीवन के दुख-दर्द कहने वाली रचना है। इस उपन्यास को पढ़कर कहा जा सकता है कि किसान जीवन में आजकल सुख कम और दुख ज़्यादा है। इस उपन्यास में एक किसान की आत्महत्या भी है। शासन-प्रशासन द्वारा उस किसान को पागल घोषित कर अपनी ज़िम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है।’’ -डॉ. मैनेजर पांडेय (शीर्ष आलोचक) ‘जनसत्ता’ समाचार पत्र में ‘साहित्य इस बरस’ चर्चा के अंतर्गत वर्ष 2016 की महत्त्वपूर्ण पुस्तकों की चर्चा करते हुए।
Faisla Abhi Baki Hai
- Author Name:
Mukesh Dubey
- Book Type:

- Description: This book has no description
Ek Doctor Ki Kahani
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: ‘एक डॉक्टर की कहानी’ दरअसल जया की कहानी है और उसके देखे-महसूस किये जीवन की। जैसे जीवन का एक आम-सा चलचित्र एक फ़्रेम में विशिष्ट हो उठा हो। एक मध्यवर्गीय परिवार की लड़की जया अपनी पढ़ाई, विद्यार्थी जीवन और युवा सपनों की यात्रा करते हुए एक दिन गिनेस से मिलती है, और माँ-पिता की असहमति के बावजूद उससे शादी कर लेती है। गिनेस का सम्बन्ध भारतीय मूल के एक मॉरीशसवासी परिवार से है। दिल्ली में वह अपने अध्ययन के लिए एक अस्पताल में कार्यरत है। अत्यन्त संप्रेषणीय और रोचक ढंग से लिखी हुई इस कथा में हमें मुख्य रूप से अस्पताल के भीतर की ज़िन्दगी के दर्शन होते हैं जिन्हें ममता जी ने बहुत सूक्ष्म ऑब्ज़र्वेशन के साथ उकेरा है। डॉक्टरों का निर्मम और स्वार्थी रवैया, पैसे का लोभ, मरीजों की बेबसी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का जीवन आदि का एक कैलाइडोस्कोपिक विवरण हमें इस उपन्यास में मिलता है। गिनेस इस सबमें शामिल नहीं है, वह एक कर्तव्यनिष्ठ और संवेदनशील डॉक्टर है लेकिन अपने काम के प्रति उसका यह निष्ठा-भाव जया को कई बार अकेला-सा कर जाता है। सबकुछ अच्छा होने के बावजूद जया को लगता है कि उसके पास वही नहीं रह गया जिसकी ज़रूरत उसे सबसे ज़्यादा है। दिल्ली और मॉरीशस का भूगोल इस उपन्यास को एक अलग आस्वाद प्रदान करता है।
Main Bhi Padhne Jaoongi
- Author Name:
Jyoti Parihar
- Book Type:

- Description: मैं भी पढ़ने जाऊँगी" ज्योति परिहार द्वारा लिखी गई एक बाल-साहित्यिक पुस्तक है, जिसे राधाकृष्ण प्रकाशन ने 2011 में प्रकाशित किया था। यह पुस्तक बच्चों के लिए है और इसकी कुल 28 पृष्ठ हैं।
Hullugarike
- Author Name:
Rajan Gawas +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Kannada Translation by Chandrakant Pokale of Rajan Gawas's award-winning Marathi Novel Tanakat
Parth Tumhen Jina Hoga
- Author Name:
Jyoti Jain
- Rating:
- Book Type:

- Description: Book
Samandar
- Author Name:
Milind Bokil
- Book Type:

- Description: Novel
Andhre Me Ujale Ki Kiran
- Author Name:
Madhur Kulshreshth
- Book Type:

- Description: MADHUR KULSHRESHTH New Novel
The Truth {Almost} About Bharat
- Author Name:
Kavery Nambisan
- Book Type:

- Description: Bharat, aka Vishwanath, aka Tarzan-teenage philosopher, nearly-there general practitioner and heartbroken victim of unrequited love-takes some time off to chronicle his life: an amazing saga of tender-hearted dacoits, heroic medics, gorgeous women, and assorted encounters with underwear... A quirky tale of youth and adventure set in contemporary India, this is the debut novel of the acclaimed author of The Scent of Pepper, Mango-Coloured Fish and On Wings of Butterflies.
Doo Dhap Aagan
- Author Name:
Dilip Kumar Jha
- Book Type:

- Description: दिलीप कुमार झा विशुद्ध जिज्ञासु रचनाकार छथि। समकालीन समाज केँ नस-नस चिन्हैत छथि। ओ यात्रीजीक कथन पर उचिते पूर्णतया उतरै छथि। दिलीपजी मैथिलीक जमीनी अभियानी छथि। ई उपन्यास तकर बेस उदाहरण अछि। यथार्थ आ कामना केँ एक टा छोट सन उपन्यास मे सफल बना देलनि। मनलग्गू तँ एहन जे हम एक बैसकी मे समाप्त क’ गेलहुँ। सब टा खूब नीक, पात्रोचित सहज भाषा छनि। —उषा किरण खान 'दू धाप आगाँ’ उपन्यास एहि रूपें उल्लेखनीय अछि जे, आइ जे समाज मे नहि अछि आ अहाँ चाहि रहल छी, त’ अपन संघर्ष बलें जेना सुधा करैत अछि ओना क’ सकैत छी। उपन्यास एहि बातक दृष्टि दैत अछि आ तकर प्रेरणा सेहो। वर्तमान समय मे शिक्षा-प्रणाली ओ राजनीतिक क्षेत्र दुनू विकृतिक चरम पर पहुँच गेल अछि। आब प्रश्न उठैत अछि जे एकरा ठीक कयल जा सकैत अछि? हमरा जनैत समकालीन साहित्यक यैह पैघ विशेषता छै जे ओ समाज मे घटित होइत घटना ओ स्थिति केँ देख मात्र विचलित नहि होइत अछि अपितु ओ समाज केँ प्रेरित करबाक लेल एहन संरचना करैत अछि जे समाज मे नहि अछि किंतु रचनाकार अपन रचना द्वारा ओहि स्थिति सँ उबरबाक लेल एक टा सुखद स्थितिक आयोजन करैत अछि। ओहि स्थिति केँ अनबाक लेल उपन्यासकार जाहि पात्र केँ ठाढ़ करैत छथि ओ एहि उपन्यास मे मुख्यरूप सँ सुधा छथि। हमरा जनैत आइयो सामाजिक परिस्थितिक परिवर्तन लेल नारी केँ आगू आनब कठिन अछि। —डा.शिवशंकर श्रीनिवास
Jane Eyer
- Author Name:
Sharlotte Bronte
- Book Type:

- Description: प्राचीन साहित्य में नायिका का चित्रण प्रेम की प्रतिमा के रूप में, पति की छाया के रूप में, आज्ञाकारिणी दासी के रूप में ही हुआ है। अपवाद के रूप में नारी कभी-कभी कुटिल और दुष्टा के रूप में भी चित्रित हुई है, परन्तु बुद्धिमान, विवेकशील और पति को सही सलाह देनेवाली दृढ़ नारी का रूप साहित्य में कम ही देखने को मिलता ‘महाभारत’ की गांधारी को देखें...गांधारी जैसी विवेकशील नारी ने यदि पतिव्रत धर्म की ग़लत व्याख्या के कारण आँखों पर पट्टी न बाँधी होती, तो महाभारत की कथा आज दूसरी होती, नीति-निपुण मंदोदरी यदि उतनी विनम्र और सहनशील नहीं होती, और उसने वीर पुत्र और विवेकशील सम्बन्धियों को समझा-बुझाकर अपना पक्ष मज़बूत कर लिया होता, तो पराक्रमी रावण अपनी लालसा के कारण यूँ पूरे परिवार को नष्ट नहीं कर पाता। प्रस्तुत उपन्यास में नायिका जेन आयर के व्यक्तित्व के कई पहलू हमें देखने को मिलते हैं—प्रथम तो वीरांगना किशोरी; फिर एक विवेकशील संयमी नवयौवना, निष्ठावान और दृढ़ चरित्र की युवती और अन्त में शरीर की अपेक्षा आत्मा को महत्त्व देनेवाली एक परिपक्व स्त्री का रूप। जेन आयर में अपनी क्षमता पर विश्वास, अपने स्वतंत्र व्यक्तित्व की अनुभूति और उसके महत्त्व की समझ स्पष्ट दिखलाई पड़ती है। प्यार के ऊष्ण, पिघला देनेवाले प्रस्ताव के समक्ष भी वह विवेक का दामन नहीं छोड़ती और अपने व्यक्तित्व का गौरव बनाए रखने में सदा सजग रहती है। स्त्री-पुरुष समानता की प्रबल पक्षधर तथा नारी की आर्थिक स्वाधीनता की सशक्त समर्थक शार्लोट ब्रॉन्टे की बहुचर्चित-बहुप्रशंसित नायिका-प्रधान कृति है—जेन आयर।
Begudi
- Author Name:
Kiran Nagarkar +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Kannada Translation of Award winning book Cuckold by Kiran Nagarkar
Allah Ho Ram
- Author Name:
Sachchidanand Sachchu
- Book Type:

- Description: सब संप्रदायक अपन-अपन देवता छै। ककरो अल्लाह, ककरो राम। एक दोसरा सँ छत्तीसक आँकड़ा! मुदा कहियो एना बुझल जाइ छलै, 'अल्लाह मे राम छै आ राम मे अल्लाह' तेँ अल्लाह हो राम! सहज ग्रामीण अंत:चेतना मे व्याप्त अध्यात्म केँ जीवन-मूल्यक रूप मे लैत आजादी सँ पहिने जुआन होइत पीढ़ी आ आजादीक बादक क्रमश: वर्तमान रुढि़, वैमनस्यक बीच जुआन भेल आजुक पीढ़ी केँ अनायासे तुलनात्मक रूप मे देखै अइ उपन्यासकार आ सविस्तार ओकर कथा कहै अइ। तेँ एहि क्षेत्रक सांस्कृतिक परिवर्तन (सम्यक सँ उन्मादी दिस उन्मुख)क तटस्थ निरूपण संग एक टा ऐतिहासिक दस्तावेज बनि क' प्रस्तुत होइत अइ उपन्यास 'अल्लाह हो राम'। उपन्यासक यात्रा प्राय: सत्तरि-अस्सी बरखक छै। आजादी सँ पहिनेक समय-समाज सँ उपन्यास शुरू होइत छै। एहि विस्तृत अवधिक काल-कथा, एहि अवधि मे बदलैत मनुक्खक कथा, एहन सहज रूप मे गुंफित जे बेसीकाल लोक-कथाक सहोदर बुझाइए। कथा मे कथा, समयक कथा, चरित्रक कथा। सब के सब अपना तरहक रीयल लाइफ कैरेक्टर, अपन (उन्नत कि मलिन) मूल्यक संग जीवंत। आजादीक लड़ाइ, बँटवाराक दाह-दंश-दाग, सुखाड़क डाँग, बाढि़क मूंगरा-मारि, राजनीतिक दखलंदाजीक बीज आ उत्सव-त्योहारक संगहि स्त्रीक स्थिति आ उत्पीडऩ...सब किछु सहज-स्वाभाविक... टाइम-ट्रेन (काल रथ) पर यात्रा करै सन। खास क' पार्टीशन आ वृहत मुस्लिम समाज पर मिथिला-मैथिलीक परिप्रेक्ष्य मे ई पहिल उपन्यास थिक। मुखर सामाजिक सरोकार आ कथा कहबाक आकर्षक शिल्पक संग, उपन्यास 'अल्लाह हो राम' उत्तम रचनाक श्रेणी मे प्रमुख स्थान राखत। एक तरहें मैथिली उपन्यासक एक टा मीलक पाथर सिद्ध हैत, से विश्वास अछि। —कुणाल
Bhoolana
- Author Name:
Chandan Pandey
- Book Type:

- Description: दिनोंदिन भीषण होते समय को भाषा में अंकित करने के संघर्ष को जीनेवाली, चन्दन पाण्डेय की कहानियों का बहुचर्चित संग्रह है—भूलना। हम भूल जाने लगे हैं, बिलकुल सामने बैठे को, जरा-सी दूरी पर वहाँ मरते हुए आदमी को। हमारी आँखें खुली हैं, पर उनके भीतर जो दृश्य नाच रहे हैं वे हमारे भीतर चल रहे विध्वंस के हैं, वे हमें किसी तक ले नहीं जाते, अपने अलावा किसी और का नहीं बनाते, और अपना भी कितना! संग्रह की शीर्षक कहानी उस विनाश का दस्तावेज़ है जिसके बीच हम कुछ भी न देखते, कुछ भी न याद रखते हुए आज आ खड़े हैं। यह अकारण नहीं कि चन्दन पाण्डेय की कथा-भाषा रस का सृजन नहीं करती। एक रचनाकार के रूप में वह इस विनाश को देख पा रहे हैं और उसे पूरा का पूरा इस तरह हम तक पहुँचा देना चाहते हैं कि उसकी निर्णायक भयावहता को हम समझ सकें। संग्रह की पहली कहानी प्रेम की हत्या के बारे में है—एक योजनाबद्ध हत्या—ख़बरिया अर्थ में योजनाबद्ध नहीं—संस्कृति की ज़मीन में दबी प्रेम-विरोध की सुरंगों की योजना जिसको अचूक बनाने पर यह समाज लगातार काम करता रहता है, और अर्थव्यवस्था के हिलते पाये जिसमें अपनी मददगार भूमिका निभाते हैं। इनके अलावा ‘नकार’, ‘परिन्दगी है या नाकामयाब है’, ‘सुनो’ और ‘सिटी पब्लिक स्कूल, वाराणसी’ शीर्षक कहानियाँ पुनः जीवन के किसी हलक़े या उम्र के किसी पड़ाव पर समाज की संरचना में स्वीकृति पातीं विसंगतियों को उनके सभी आयामों के साथ चिन्हित करती हैं। अपने कथाकार की क्षमता को रेखांकित करता यह संग्रह अविस्मरणीय है।
Khuli Hava
- Author Name:
Shakti Trivedi
- Book Type:

- Description: कुछ दिन इसी प्रकार और बीत गए। अभिवादनों का आदान-प्रदान हो गया। और एक दिन जब सायंकाल को दीये जल चुके थे, तभी अलका लौट रही थी। ऊपर से मणिकलाल ने धीरे से कहा— ‘‘भाभी?’’ वह ठिठक गई और उसने भी धीरे से कहा, ‘जी’। ‘‘आप से एक-दो मिनट बात करना चाहता हूँ?’’ मणिकलाल ने नम्रता भरे शब्दों से कहा। ‘‘इस समय?’’ अलका ने घूँघट में से ही पूछा। ‘‘हाँ। अभी! केवल दो मिनट! आप तनिक मेरे पास इधर आ जाए!’’ ‘‘क्या बात है यहीं कह दीजिए!’’ अलका ने वहीं खड़े-खड़े कहा। ‘‘भाभी ये रास्ता है यहाँ ठीक नहीं है, आप डरिए नहीं। तनिक इधर आ जाओ।’’ कहकर वह द्वार से भीतर को बैठक में चला गया। अलका ने मन-ही-मन सोचा कदाचित् आज ही वह दिन आ गया, जिसकी उसे आशंका थी। उसने सोचा ‘नहीं!’ इसके प्रस्ताव को ठुकरा दो, इसे स्पष्ट मना कर दो। पर उन वस्त्रों और खाद्य पदार्थों के दबाव ने उसे ऐसा नहीं करने दिया और वह अपने स्थान से थोड़ी सी हटकर बैठक के द्वार के निकट खड़ी हो गई बोली—‘‘कहिए?’’ ‘‘देखिए, आप घबराएँ नहीं, अंदर ही आ जाएँ!
Mujhe Sooraj Chahiye
- Author Name:
Akash Mathur
- Rating:
- Book Type:


- Description: ‘मुझे चाँद चाहिए’ की जगह ‘मुझे सूरज चाहिए’ की सशक्त दावेदारी ठोकती तीन अलग-अलग आयु वर्ग की स्त्रियाँ। जो अपने ही साथ भगवान या तथाकथित भगवान की भी आज़ादी की माँग करती हैं। मुझे चाँद चाहिए ये इच्छा जहाँ एक सादगी भरी सौम्य ऊँचाई की, अस्तित्व की माँग हैं। वहीं मुझे सूरज चाहिए अधिक उग्र किंतु आत्मविश्वास से सूरज को सम्भाल लेने की भावना को इंगित करती है। ये किसी ऐसे फ़रियादी की फ़रियाद भी लगती है जो सहनशक्ति के आख़िरी छोर पर आ पहुँचा है और अब चाँद की शीतलता भरी ऊँचाई नहीं आकाश के भाल पर चमकते सूरज की गर्मी ही उसे ठंडक दे सकती है। आकाश माथुर का लिखा ये उपन्यास शिवना प्रकाशन से आया है। जिसका विमोचन 2024 के विश्व पुस्तक मेला नई दिल्ली में हुआ। इस से पहले उनका उपन्यास ‘उमेदा-एक योद्धा नर्तकी’ सफलता अर्जित कर चुका है और आज भी चर्चित है। इस उपन्यास की कहानी शुरू होती है एक सम्भ्रांत परिवार की मध्य-आयु की एक विधवा के सादे जीवन के साथ जिसे एक भरा-पूरा संयुक्त परिवार बहुत सम्मान के साथ देखता है और पूजता है। साथ ही परिवार की एक पुत्र-वधू और उसकी बेटी के अपने-अपने पीढ़िगत संघर्षों को उपन्यास बहुत संवेदना के साथ चित्रित करता है। मध्य-प्रदेश के ग्रामीण समाज की कुरितियों को बहुत विस्तार से आकाश स्पष्ट करते हैं। ये सामाजिक कुरीतियाँ आख़िर तो स्त्री के मन और तन को रौंद कर की ख़ुद को जीवित रखें हुए हैं। वो फिर चाहे शादी की आटा-साटा प्रथा हो या नातरा। आटा-साटा में जहाँ वार या वधू के ससुराल के ही किसी महिला या पुरुष से घर की किसी महिला या पुरुष की शादी कर दी जाती हैं। यानि ये ज़रुरी नहीं आप ससुराल में जाकर अपनी बहन के ननदोई ही बने, आप उसके दामाद भी बन सकते हैं। जिन अयोग्य पात्रों की शादी ना हो रही हो वहाँ प्रभावी परिवार दूसरे परिवार पर इस तरह का दबाव बना लेता है। जिस में आर्थिक कमजोरी सबसे बड़ा कारण होता है। इसी प्रकार नातरा में दूसरी शादी आपसी सहमति से तलाक़ ले कर ली जाती है और दूसरी शादी के एवज़ में परिवार बड़ी रक़म कमाता है। इसमें स्त्री को एक घर से उठ दूसरे घर जा बसने की पीड़ा से गुजरना पड़ता है। रमा ऐसे ही आटा-साटा की चपेट में आकर अपने ही भाई की विधवा सास बन बैठी थी। एक पढ़ी-लिखी उमंगो से भरी लड़की की एक बूढ़े व्यक्ति से शादी, उसके कौन-कौन से अरमानो को तिरोहित करती है इसका वर्णन लेखक ने बहुत संवेदनशीलता के साथ किया है। जंगल को, प्रकृति को सम्मान देना और पूजना हमारी परम्परा है और ये उसकी जीवनदायिनी शक्ति का सम्मान व आदर है। जिसे पूजते-पूजते हम उसकी पूजा में उसे ही नष्ट करने लगते हैं और कर्मकांडों में फँस कर स्वयं की और भगवान की ग़ुलामी की नीवों को पोषित करते हैं। इस भाव की विवेचना, कारण और निवारण पर लेखक ने खुल कर कलम चलाई है और विस्तार के साथ बहुत ही सुलझी हुई भाषा में इस विषय को बरता है। उसमें जहाँ लेखक पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समाज के उपेक्षा के सवाल उठाते हैं। वहीं वो धर्मांधता पर भी कटाक्ष करने से नहीं चूकते। आकाश के स्त्री पात्र परिस्थितियों के शिकार अवश्य हैं, लेकिन कमज़ोर नहीं हैं। और अंत में सशक्त रूप से अपने हिस्से के सूरज के लिए खड़े होते हैं। यहाँ अच्छी बात ये है कि वे एक दूसरे के दुश्मन नहीं है और बहनापे की सहायता से पित्र-सत्ता और रूढ़ियों के ख़िलाफ़ खड़ी होती हैं। जो आकाश के लेखन को सामयिक बनाता है। उपन्यास की भाषा देशकाल - अनुकूल है और सहज है। अपने पात्रों के साथ। एडिटिंग अच्छी है, इसलिए उपन्यास को बहुत अधिक लम्बाई तक ना खींच कर विषयानुसर लेखक कम में ही अपनी बात रख पाने में समर्थ है। जिसके लिए लेखक को बहुत शुभकामनाएँ। ये एक सामाजिक सरोकारों से भरा उपन्यास है जो भगवान सहित अपने पात्रों की वकालत सफलता से करता नज़र आता है। वन और प्रकृति के कुछ द्रश्य बहुत ही सुंदरता से लिखे गए हैं। वहीं स्त्रियों के सन्दर्भ में एक जगह आकाश लिखते हैं। — ‘महिलाओं की ख़ासियत है कि वे उम्र में छोटी होकर भी अपने से बड़ों पर मातृत्व न्योछावर कर देती हैं। जबकि एक छोटा पुरुष इस तरह का व्यवहार अपने से बड़े पुरुष के साथ नहीं कर सकता। असल में महिलाओं का मूल ही प्रेम है।’ वहींं एक जगह वो लिखते हैं। — ‘स्त्रियों के मन और तन पर उनका अपना अधिकार नहीं है। उस पर भी पुरुष, धर्म, समाज और पता नहीं किस-किस का क़ब्ज़ा है।’ सती को पूजना भी कहीं ना कहीं सती-प्रथा को अभी तक सही मानना ही है, परिवर्तन अपने जीवन में ला सकती है तो स्त्री ही ला सकती हैं, जैसी हिम्मत देता आकाश माथुर का ये नया उपन्यास निश्चय ही पठनीय है।
Joys and Woes are Woven Fine
- Author Name:
Arkaprava De
- Rating:
- Book Type:

- Description: She was born in Kolkata. She was an unwelcomed guest, a product of lust. She had to pay the price. She was abducted and trafficked to Hyderabad. She spent nine years begging on the roadside. Destiny brought her back to Kolkata, where she was sold off to a procuress in Sonargachi. She married Raghu and started leading a healthy life. However, she attempted suicide. She was Ketaki. Why was Ketaki abducted and trafficked? Where were her father and mother? Was Ketaki ever able to meet her birth parents? Why did she attempt suicide? Was it all destiny that brought her back to Kolkata, or did The Almighty have something else in His holy mind? After all, Joys and Woes are always woven fine!!
Ek Tukda Aasman
- Author Name:
Vinod Kushwaha
- Book Type:

- Description: This book has no description
Customer Reviews
Be the first to write a review...
4.36 out of 5
Book