Laharon Ka Aarav
(0)
Author:
R. Krishnamurthi 'Kalki', Radha JanardanPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
350
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लहरों का आरव प्रसिद्ध तमिल लेखक रा कृष्णामूर्ति 'कल्कि' द्वारा लिखित और साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत उपन्यास अलैयोशे का हिन्दी अनुवाद है। उपन्यास में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान १९३० से १९४७ तक की अठारह वर्ष की कहानी को विभिन्न पात्रों के ज़रिए उभारा गया है। यह वह समय था, जब भारत की धरती पर कई बड़ी घटनाएँ एक साथ घट रही थीं। एक तरफ़ राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी अपनी अहिंसा की शक्ति के दम पर पर करोड़ों भारतीयों के मन पर राज कर रहे थे तो ख़ुद यहाँ की जनता भी परिवर्तन के लिए कई क्रांतिकारियों कदम उठा रही थी। देश की स्वतंत्रता के लिए हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुरूप कोई-न-कोई कदम उठा रहा था। इन छोटे बड़े प्रयासों की गूँज इस उपन्यास में आप सर्वत्र महसूस कर सकते हैं।
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लहरों का आरव प्रसिद्ध तमिल लेखक रा कृष्णामूर्ति 'कल्कि' द्वारा लिखित और साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत उपन्यास अलैयोशे का हिन्दी अनुवाद है। उपन्यास में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान १९३० से १९४७ तक की अठारह वर्ष की कहानी को विभिन्न पात्रों के ज़रिए उभारा गया है। यह वह समय था, जब भारत की धरती पर कई बड़ी घटनाएँ एक साथ घट रही थीं। एक तरफ़ राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी अपनी अहिंसा की शक्ति के दम पर पर करोड़ों भारतीयों के मन पर राज कर रहे थे तो ख़ुद यहाँ की जनता भी परिवर्तन के लिए कई क्रांतिकारियों कदम उठा रही थी।
देश की स्वतंत्रता के लिए हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुरूप कोई-न-कोई कदम उठा रहा था। इन छोटे बड़े प्रयासों की गूँज इस उपन्यास में आप सर्वत्र महसूस कर सकते हैं।
Book Details
-
ISBN9788126045372
-
Pages591
-
Avg Reading Time20 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: नीरमती उपन्यास एक ऐसी भारतीय नारी की कहानी है, जो विषम परिस्थितियों से जूझती हुई हताश होकर एक बार मृत्यु का वरण करने की कोशिश करती है; किंतु फिर अपने जीवन को तपने के लिए तैयार कर लेती है । लोकनिदा के भय पर उसकी ममता विजय पा जाती है और वह संघर्ष के मार्ग पर निकल पड़ती है । इसी समाज में यदि दुराचारी और वंचक हैं, जो केवल दु :ख और अपमान देते हैं, और अपने निजी स्वार्थ के लिए किसी की मजबूरी का लाभ उठाते हैं, तो कुछ ऐसे भी लोग हैं जो आश्रय देकर छाँह भी बन जाते हैं । नीरमती अपने परिश्रम और सौजन्य से इस तरह की छाँह पाती है और उस छाँह के हाथों में अपना भविष्य सौंप देती है । नीरमती नदी की वह प्रवाहमयता है, जिसमें जीवन है, जो सबको जीवन देने में अपने जीवन की सार्थकता पाती है । नीरमती लांछित, मर्माहत स्त्री का वह सत्य है, जो अपमानित होती है, पर ममता की शक्ति से जीवन का क्षय नहीं होने देती । वह आग में तपती, निखरती, कुंदन बनकर मूल्यवान हो जाती है । बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षा व्यवस्था पर आज प्रश्न-चिह्न लग रहे हैं; दंड संहिता का खोखलापन बेनकाब हो रहा है । समाज और राजनीति के दोमुंहे साँप के चेहरे देखे जा रहे हैं, पर आज केवल देखने की नहीं, उन्हें बदलने की जरूरत है । ' नीरमती ' के पात्रों की यह कोशिश किसी के मन में कुछ सुगबुगाहट जगा सके तो नीरमती का जन्म सफल हो जाएगा । अत्यंत भावपूर्ण, मार्मिक एवं संवेदनाओं को झकझोरता एक सामाजिक उपन्यास ।
Gadiwalon Ka Katra
- Author Name:
Aleksandr Kuprin
- Book Type:

- Description: गाड़ीवालों का कटरा जारकालीन रूस की पृष्ठभूमि में वेश्यावृत्ति की ज्वलन्त समस्या का हृदयविदारक चित्र प्रस्तुत करता है। कुप्रिन सामाजिक बीमारियों को छिपाने में विश्वास नहीं रखते थे और मानते थे कि भयंकर से भयंकर सत्य को उजागर करना मनुष्य के हित में है। इसी कारण उन्होंने इस उपन्यास में वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर स्त्रियों की दारुण कथा के जरिये मानव-समाज के अकल्पनीय पतन का ऐसा हाल बयान किया जिसे वेश्यावृत्ति के विषय पर पहला और अन्तिम ईमानदार काम माना जाता है। इस उपन्यास ने प्रेमचन्द को भी गहरे प्रभावित किया था।
Asato Ma Sadgamay
- Author Name:
Smt. Renu Gupta
- Book Type:

- Description: जिस प्रकार नदी का पानी बहते-बहते मिलता भी है तो बिछुड़ता भी है, पुराने तटों को छोड़ता है तो नए तट पकड़ता भी है, उसी प्रकार हम संसार के प्राणी जीवन से जीवन, स्थान से स्थान और काल से काल तक की यात्राओं में मिलते-बिछुड़ते रहते हैं। असतो मा सद्गमय में जीवन के सनातन पहलुओं से गुजरती हुई कथा आधुनिक राजतांत्रिक और अफसरशाही तक भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार की कथा भी है तो हमारी पुरातन, परंतु नित नवीन आध्यात्मिक भारत की कथा भी है। इस कथा में भक्ति, ज्ञान, अहंकार, उच्चाकांक्षा, संतोष, भाग्य, पदलिप्सा, लोभ, कर्म, स्नेह, औदार्य—सभी भाव समाहित हैं। यह कथा जीवन की सभी कलाओं से परिचय कराती है तथा चेतावनी देती है कि बुरे कर्मों का परिणाम बुरा ही होता है। प्रस्तुत उपन्यास की कथा यथार्थ की भूमि से निकली है, जिसे प्रसिद्ध लेखिका रेणु ‘राजवंशी’ गुप्ता ने अपने विद्यार्थी जीवन में निकट से देखा था। इस उपन्यास को पढ़कर पाठक एक ओर भारतीय पुलिस तंत्र की पदलिप्सा, भ्रष्टता, उच्चाकांक्षा तो दूसरी ओर ईमानदारी, स्नेह और औदार्य से परिचित होंगे।
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