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Sukhi Evan Deerghayu Jeevan Ke 90 Secrets

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मार्च 2009 में हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज का उनके लगभग आधे से अधिक वरिष्ठ शिक्षकों का फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्री का स्थायी कर्मचारी होने का खुलासा उस सत्य को स्पष्ट करता है, जिसे मैं इस पुस्तक में प्रकट करने का प्रयास कर रहा हूँ। चिकित्सकीय पाठ्य पुस्तकें आमतौर पर दवा कंपनियों द्वारा मेडिकल कॉलेजों में अपने लेखकों के संपर्कों द्वारा वित्त-पोषित होती हैं। मेरे शिक्षा काल की बीती यादें और इसके सुख व दु:ख मेरी इस पुस्तक रचना का प्रथम कारण रहा। आशा करता हूँ कि यह प्रयास चिकित्सकों की सोच को रोगी शय्या पर आने के लिए प्रेरित करेगा, जो स्वास्थ्य सेवा का मर्म है। इससे मानवता अधिक खुशहाल होगी। मेरा सपना है कि मैं डॉक्टरों को दवा और प्रौद्योगिकी विक्रेता नहीं, बल्कि उनके उपचारक के नियत स्थान पर देखूँ। काश, यह पुस्तक डॉक्टरों की मदद करे और वे रोगियों को दिलचस्प मामले की तरह नहीं, बल्कि परेशान मनुष्यों के रूप में देखने लगें! मैं उस दिन की प्रतीक्षा में हूँ, जब स्वास्थ्य सेवा प्रतिपादन में दुनियाभर के अनेकानेक प्राचीन ज्ञान को सम्मिलित कर इन्हें मानक वैज्ञानिक पद्धति से परखने के बाद प्रमाणीकरण करके अधिक मानवीय, रोगी-मित्रवत तथा सस्ता बनाया जा सके। हमें इतना विनम्र अवश्य होना चाहिए कि हम अपनी कमजोरियों को स्वीकार करें और दूसरों की अच्छाइयों को बिना किसी भय या पक्षपात के स्वीकार कर सकें। आखिरकार, डॉक्टर यहाँ समाज को स्वस्थ करने के लिए हैं, न कि बीमार को जोड़-तोड़ प्रदान करने के लिए।

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मार्च 2009 में हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज का उनके लगभग आधे से अधिक वरिष्ठ शिक्षकों का फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्री का स्थायी कर्मचारी होने का खुलासा उस सत्य को स्पष्ट करता है, जिसे मैं इस पुस्तक में प्रकट करने का प्रयास कर रहा हूँ।
चिकित्सकीय पाठ्य पुस्तकें आमतौर पर दवा कंपनियों द्वारा मेडिकल कॉलेजों में अपने लेखकों के संपर्कों द्वारा वित्त-पोषित होती हैं। मेरे शिक्षा काल की बीती यादें और इसके सुख व दु:ख मेरी इस पुस्तक रचना का प्रथम कारण रहा। आशा करता हूँ कि यह प्रयास चिकित्सकों की सोच को रोगी शय्या पर आने के लिए प्रेरित करेगा, जो स्वास्थ्य सेवा का मर्म है। इससे मानवता अधिक खुशहाल होगी। मेरा सपना है कि मैं डॉक्टरों को दवा और प्रौद्योगिकी विक्रेता नहीं, बल्कि उनके उपचारक के नियत स्थान पर देखूँ। काश, यह पुस्तक डॉक्टरों की मदद करे और वे रोगियों को दिलचस्प मामले की तरह नहीं, बल्कि परेशान मनुष्यों के रूप में देखने लगें! मैं उस दिन की प्रतीक्षा में हूँ, जब स्वास्थ्य सेवा प्रतिपादन में दुनियाभर के अनेकानेक प्राचीन ज्ञान को सम्मिलित कर इन्हें मानक वैज्ञानिक पद्धति से परखने के बाद प्रमाणीकरण करके अधिक मानवीय, रोगी-मित्रवत तथा सस्ता बनाया जा सके। हमें इतना विनम्र अवश्य होना चाहिए कि हम अपनी कमजोरियों को स्वीकार करें और दूसरों की अच्छाइयों को बिना किसी भय या पक्षपात के स्वीकार कर सकें। आखिरकार, डॉक्टर यहाँ समाज को स्वस्थ करने के लिए हैं, न कि बीमार को जोड़-तोड़ प्रदान करने के लिए।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Paperback
Publisher
Prabhat Prakashan
Weight
371 grams
ISBN-13
9789355212160
Pages
525
Reading time
~18 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

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