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An anthology of poems in Hindi translation read by Indian and Foreign poets at the World Poetry Festival:Sabad,organised by sahitya Akademi and Ministry of culture,Government of india on 21-24 March 2014 at New Delhi.
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About the Book
An anthology of poems in Hindi translation read by Indian and Foreign poets at the World Poetry Festival:Sabad,organised by sahitya Akademi and Ministry of culture,Government of india on 21-24 March 2014 at New Delhi.
Book Details
-
ISBN9788126046898
-
Pages188
-
Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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"तुम कहते हो, जीवन सुन्दर है...ठीक है, लेकिन उसके सुन्दर लगने से ही क्या होता है। हम तीनों बहनों के लिए अभी तक के जीवन में क्या सुन्दर है? जैसे पौधे को दीमक खा जाती है, उसी तरह हम तीनों जीवन के हाथों में घुटती रही हैं...अरे लो, मैं तो रोने भी लगी—मुझे रोना नहीं चाहिए..." "मुझे लगता है कि मनुष्य के पास एक आस्था होनी चाहिए, या और कुछ नहीं तो उसे कोई विश्वास और आस्था खोज लेनी चाहिए, वर्ना उसकी जिंदगी सूनी और खोखली हो जाएगी।...आदमी को मालूम तो होना चाहिए कि उसकी जिंदगी का अर्थ क्या है..." "प्यारी बहनों, हमारे जीवन का अन्त यहीं नहीं हो जाएगा। हम लोग जीवित रहेंगी, यह संगीत कैसा आनन्ददायक, कैसा सुखद है कि मन होता है, थोड़ी देर और चलता रहे, ताकि हम जान लें कि हम किसलिए ज़िन्दा हैं, हमें पता चल जाए कि हम दु:ख क्यों भोग रही हैं।" "काश, जो कुछ हमने जिया है, वह सिर्फ़ ज़िन्दगी का रफ़-ड्राफ़्ट होता और इसे फ़ेयर करने का एक अवसर हमें और मिलता।" चेख़व की रचनाओं की आत्मीयता, करुणा और ख़ास क़िस्म की निराश उदासी (लगभग आत्मदया जैसी) मुझे बहुत छूती है। मैं उसके प्रभाव से लगभग मोहाच्छन्न था। उसी श्रद्धा से मैंने इन नाटकों को हाथ लगाया था। रूसी भाषा नहीं जनता था, मगर अधिक से अधिक ईमानदारी से उसके नाटकों की मौलिक शक्ति तक पहुँचाना चाहता था। इसलिए तीन अंग्रेज़ी अनुवादों को सामने रखकर एक-एक वाक्य पढ़ता और मूल को पकड़ने कि कोशिश करता। आधार बनाया मॉस्को के अनुवाद को। बाद में सुना, अनुवादों को पाठकों ने पसन्द किया, अनेक रंग-संस्थानों और रेडियो इत्यादि ने इन्हें अपनाया, पाठ्यक्रम में भी उन्हें लिया गया। —राजेन्द्र यादव
Mere Priya
- Author Name:
Saiyed Haider Raza +3
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रज़ा साहब जब 2010 के अन्त में अपने जीवन का आख़िरी चरण बिताने दिल्ली आ गए तो अपने साथ पुस्तकों, कैटलॉगों व अन्य काग़ज़ात का एक बड़ा संग्रह भी लाए। इस सारी सामग्री को एकत्र और व्यवस्थित कर रज़ा अभिलेखागार बनाया जा रहा है। जो काग़ज़ात हमें मिले उनमें रज़ा के कलाकार-मित्रों के कई पत्र भी मिले हैं। इनमें मक़बूल फिदा हुसेन, फ्रांसिस न्यूटन सूज़ा, के.एच. आरा, रामकुमार, कृष्ण खन्ना और तैयब मेहता शामिल हैं। उनके पत्राचार में निजी, कलात्मक, सामाजिक आदि कई विषयों पर लिखा गया है और उन्हें पढ़ने से एक मूर्धन्य कलाकार की संघर्ष-गाथा के कई पहलू समझ में आते हैं। उस परिवेश, उन मित्रों और उनके सम्बन्धों पर भी रोशनी पड़ती है जिन्होंने रज़ा को एक व्यक्ति और कलाकार के रूप में विकसित होने में भूमिका निभाई। यह एक तरह का अनौपचारिक रिकॉर्ड भी है जो हमें बताता है कि हमारे कुछ कला-मूर्धन्य अपने समय कैसे देख-समझ रहे थे, उनकी उत्सुकताएँ और बेचैनियाँ क्या थीं और एक विकासशील सौन्दर्य-बोध कैसे आकार ले रहा था। इस पत्राचार को क्रमश: कुछ पुस्तकों में प्रकाशित करने का इरादा है। इस सीरीज़ में पहली पुस्तक रज़ा और कृष्ण खन्ना के पत्राचार की है। सौभाग्य से इन दोनों ने एक-दूसरे के पत्र सँभालकर रखे। दो मूर्धन्य कलाकारों के बीच यह पत्र-संवाद बिरला है और इसे हिन्दी अनुवाद में प्रकाशित करते हमें प्रसन्नता है। —अशोक वाजपेयी
Sitayan
- Author Name:
Susheel Kanti
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Book
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Book
Sabad preserves a singular moment in Indian literary history: the World Poetry Festival held in New Delhi from 21–24 March 2014, where poets from over forty nations read their work, now rendered into Hindi translation. Organized jointly by Sahitya Akademi and the Ministry of Culture, this anthology does not merely document an event — it creates a living archive of how contemporary global voices sound when refracted through the Hindi language. Each poem carries the trace of its original culture while finding new resonance in translation, making this collection a rare experiment in cross-cultural poetic transmission. For readers seeking poetry that transcends national borders yet speaks in the intimacy of Hindi, Sabad offers a panoramic yet personal encounter with the world's verse.
सबद पढ़ने से मुझे किस तरह का अनुभव मिलेगा?
यह संकलन आपको एक साथ कई संस्कृतियों की काव्य-चेतना से परिचित कराता है। हर कविता अपनी मूल भाषा और भूगोल से हिंदी में आकर नया रूप धारण करती है। पढ़ते समय आप महसूस करेंगे कि विभिन्न देशों के कवि कैसे प्रेम, विस्थापन, स्मृति और समय जैसे सार्वभौमिक विषयों को अपनी अनूठी दृष्टि से देखते हैं।
यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए उपयुक्त है?
- जो पाठक अनुवाद में विश्व-कविता का स्वाद लेना चाहते हैं
- जिन्हें समकालीन वैश्विक काव्य-प्रवृत्तियों में रुचि है
- जो हिंदी के माध्यम से अन्य संस्कृतियों की काव्य-संवेदना को समझना चाहते हैं
- जो साहित्य अकादेमी जैसे आधिकारिक मंच पर प्रस्तुत अंतरराष्ट्रीय कविता की तलाश में हैं
भारतीय पाठकों के लिए इस संकलन का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
यह संकलन भारत को विश्व-काव्य के केंद्र के रूप में स्थापित करता है। 2014 में आयोजित यह महोत्सव भारतीय साहित्यिक परंपरा और वैश्विक समकालीन कविता के बीच संवाद का प्रतीक है। हिंदी अनुवाद के माध्यम से यह दर्शाता है कि भारतीय भाषाएँ विश्व-साहित्य को आत्मसात करने और उसे नया जीवन देने में सक्षम हैं।
इस संकलन को अन्य अनुवादित कविता-संग्रहों से अलग क्या बनाता है?
यह केवल अनुवाद नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक काव्य-समारोह का दस्तावेज़ है। प्रत्येक कविता वास्तव में नई दिल्ली में उपस्थित कवियों द्वारा पढ़ी गई थी, जिससे इसमें मौखिकता और प्रदर्शन का भाव शामिल है। साहित्य अकादेमी और संस्कृति मंत्रालय के सहयोग ने इसे आधिकारिक और व्यापक स्वरूप प्रदान किया है।
यह किताब पाठक के मन में क्या स्थायी छाप छोड़ती है?
- विश्व-कविता की विविधता और एकता का बोध
- अनुवाद की शक्ति और सीमाओं की समझ
- हिंदी भाषा की लचीलापन और ग्रहणशीलता के प्रति सम्मान
- भारत के वैश्विक साहित्यिक संवाद में सक्रिय भूमिका का एहसास