Aabhas
(0)
Author:
Varsha Adalja, SatyanarayanPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
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आभास साहित्य अकादमी से गुजरती भाषा में पुरस्कृत अड़सार उपन्यास का हिन्दी अनुवाद है। इस कृति में कथाकार ने कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास और इस बीमारी के साथ जुड़े सामाजिक कलंक की समस्या को उठाया है। यह प्रत्येक संवेंदनशील व्यक्ति को अंतर्मुख करनेवाली तथा जीवन्मूल्यों का अन्वेषण करने के लिए प्रेरित करने वाली कृति है। "अड़सार" का अर्थ है - 'ईश्वर की घंटी'। हर किसी के मन में ईश्वर की एक घंटी होती है। हर एक मन में सत-असत् प्रवृत्तियों का संघर्ष जारी रहता है। संवेदनशील व्यक्ति के मन में जब उस ईश्वर की घंटी की आवाज़ आती है और वह संघर्ष जब अस्तित्व को ही चुनौती देता है, तभी उस घंटी की गूंज सुनाई देती है और मनुष्य की 'मनुष्यता' ही अपनी चरमसीमा तक पहुँचती है। इस उपन्यास में मोह और विमोह के दो ध्रुवों को इस कौशल के साथ स्पर्श किया गया है कि कथाचरित्र का दारुण कष्ट और निर्मोही समाज का वास्तविक चेहरा बयाँ हो जाता है।
Read moreAbout the Book
आभास साहित्य अकादमी से गुजरती भाषा में पुरस्कृत अड़सार उपन्यास का हिन्दी अनुवाद है। इस कृति में कथाकार ने कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास और इस बीमारी के साथ जुड़े सामाजिक कलंक की समस्या को उठाया है। यह प्रत्येक संवेंदनशील व्यक्ति को अंतर्मुख करनेवाली तथा जीवन्मूल्यों का अन्वेषण करने के लिए प्रेरित करने वाली कृति है।
"अड़सार" का अर्थ है - 'ईश्वर की घंटी'। हर किसी के मन में ईश्वर की एक घंटी होती है। हर एक मन में सत-असत् प्रवृत्तियों का संघर्ष जारी रहता है। संवेदनशील व्यक्ति के मन में जब उस ईश्वर की घंटी की आवाज़ आती है और वह संघर्ष जब अस्तित्व को ही चुनौती देता है, तभी उस घंटी की गूंज सुनाई देती है और मनुष्य की 'मनुष्यता' ही अपनी चरमसीमा तक पहुँचती है।
इस उपन्यास में मोह और विमोह के दो ध्रुवों को इस कौशल के साथ स्पर्श किया गया है कि कथाचरित्र का दारुण कष्ट और निर्मोही समाज का वास्तविक चेहरा बयाँ हो जाता है।
Book Details
-
ISBN9789389195002
-
Pages280
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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