Bhukhmaroo
(0)
Author:
Bama, Savita PathakPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
250
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दो जून की रोटी के लिए जिन्हें रोज़ जूझना पड़ता है; उनके लिए अपने भीतर की ताक़त ही सब कुछ है। तमिल भाषा की दलित स्त्री कथाकारों की ये कहानियाँ उन लोगों की ताक़त को स्वर देने की कोशिश करती हैं, उसे और मज़बूत करने की भी। भूख और ग़रीबी के अलावा जातिगत भेदभाव, श्रम का शोषण और प्रकृति के दोहन से उपजी समस्याएँ भी हैं जिनकी सबसे ज़्यादा मार इन्हीं लोगों पर पड़ती है। लेकिन जैसाकि इस संकलन में शामिल उमा देवी की कहानी ‘कमला’ रेखांकित करती है, संघर्ष और बदलाव की शुरुआत भी यही लोग करते हैं। ‘भुखमारू’ संग्रह में शामिल प्रत्येक कहानी एक अलग परिवेश और जीवन के एक अलग पहलू को पाठक के सामने लाती है। बिना किसी फ़ॉर्मूले का अनुकरण किए इन कहानियों में हमें बेहद सजीव पात्र और बहुत नज़दीक से देखे गए विवरण मिलते हैं। इनका प्राकृतिक और सामाजिक परिवेश कथा-पात्रों को भी एक भिन्न आयाम देता है जिससे वे ज़्यादा मौलिक और वास्तविक दिखने लगते हैं। विसंगतियों, उत्पीड़न और अन्याय पर टिके मनुष्य समाज के बरक्स पशु-पक्षियों और जंगल की मौजूदगी इन कहानियों को और विशिष्ट बनाती है। इन कहानियों का चयन और संकलन तमिल भाषा की सुप्रसिद्ध कथाकार बामा ने किया है जिनकी रचनाओं ने देश से बाहर भी अपनी पहचान बनाई है।
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दो जून की रोटी के लिए जिन्हें रोज़ जूझना पड़ता है; उनके लिए अपने भीतर की ताक़त ही सब कुछ है। तमिल भाषा की दलित स्त्री कथाकारों की ये कहानियाँ उन लोगों की ताक़त को स्वर देने की कोशिश करती हैं, उसे और मज़बूत करने की भी।
भूख और ग़रीबी के अलावा जातिगत भेदभाव, श्रम का शोषण और प्रकृति के दोहन से उपजी समस्याएँ भी हैं जिनकी सबसे ज़्यादा मार इन्हीं लोगों पर पड़ती है। लेकिन जैसाकि इस संकलन में शामिल उमा देवी की कहानी ‘कमला’ रेखांकित करती है, संघर्ष और बदलाव की शुरुआत भी यही लोग करते हैं।
‘भुखमारू’ संग्रह में शामिल प्रत्येक कहानी एक अलग परिवेश और जीवन के एक अलग पहलू को पाठक के सामने लाती है। बिना किसी फ़ॉर्मूले का अनुकरण किए इन कहानियों में हमें बेहद सजीव पात्र और बहुत नज़दीक से देखे गए विवरण मिलते हैं। इनका प्राकृतिक और सामाजिक परिवेश कथा-पात्रों को भी एक भिन्न आयाम देता है जिससे वे ज़्यादा मौलिक और वास्तविक दिखने लगते हैं। विसंगतियों, उत्पीड़न और अन्याय पर टिके मनुष्य समाज के बरक्स पशु-पक्षियों और जंगल की मौजूदगी इन कहानियों को और विशिष्ट बनाती है।
इन कहानियों का चयन और संकलन तमिल भाषा की सुप्रसिद्ध कथाकार बामा ने किया है जिनकी रचनाओं ने देश से बाहर भी अपनी पहचान बनाई है।
Book Details
-
ISBN9789360864248
-
Pages168
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘हरित नोङ्जाबी’ महाराज कुमारी बिनोदिनी देवी का बहुचर्चित नाटक है जिसकी सिर्फ उनके लेखन में नहीं अपितु आधुनिक मणिपुरी साहित्य में उल्लेखनीय स्थान है। ‘नोङ्जाबी’ शब्द का आशय वर्षा ऋतु में दिखाई देने वाले ताम्रवर्णी आभा से युक्त उन बादलों से है जिन्हें वर्षा ऋतु के विराम ले लेने का संकेत माना जाता है। वस्तुत: नोङ्बाजी का शाब्दिक अर्थ है—वर्षा या बादल का भक्षक जिसका प्रयोग लेखक ने प्रेम को खा जाने वाले समय और समाज को रूपायित करने के लिए किया है। बिनोदिनी इस नाटक में उस प्रतिगामिता को उजागर करती हैं जो न केवल प्रेम को बल्कि कला को भी हेय सिद्ध करने रीति-नीतियों का समर्थन करती है, और जीवन के प्रति रचनात्मक दृष्टि को हतोत्साहित करती हुई मनुष्य की रचनात्मकता को निरे उत्पादन में जोत देना चाहती है। इसके अलावा इस संकलन में दो रेडियो नाटक भी संकलित हैं जिनमें मणिपुरी समाज की स्थानीय परिस्थितियों, आकांक्षाओं और सपनों को कुशलतापूर्वक चित्रित किया गया है। हिन्दी में इन्हें प्रस्तुत करते हुए विशेष रूप से यह ध्यान में रखा गया है कि वे शब्द जो मणिपुरी जीवन व भाषा का आस्वाद हम तक पहुँचाते हैं, उन्हें जस-का-तस रखा जाए; और उनके अर्थ दे दिए गए हैं। सुरुचिपूर्ण ढंग से लिखित और उतनी ही सजगता से अनूदित मणिपुरी साहित्य की ये प्रतिनिधि रचनाएँ हिन्दी पाठकों को महत्त्वपूर्ण लगेंगी, ऐसा हमारा विश्वास है।
Arrowsmith
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Sinclair Lewis +1
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Arrowsmith is an early major novel dealing with the culture of science. It was written in the period after the reforms of medical education flowing from the Flexner Report on Medical Education in the United States and Canada: A Report to the Carnegie Foundation for the Advancement of Teaching, 1910, which had called on medical schools in the United States to adhere to mainstream science in their teaching and research. Arrowsmith is a Nobel Award-winning novel by Vishwa Classic Books Translated into Hindi.
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