Boond Aur Samudra
(0)
Author:
Amritlal NagarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
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पठनीयता के बल पर हिन्दी उपन्यास को ख्याति और प्रतिष्ठा दिलानेवालों में अमृतलाल नागर का नाम अग्रणी है। कई पीढ़ियों ने उनकी क़लम से निकले हृदयग्राही कथा-रस का आस्वाद लिया है। कथा-साहित्य के कई अविस्मरणीय चरित्रों की सृष्टि का सेहरा भी नागरजी के ही सर बँधा है। डॉ रामविलास शर्मा ने लिखा, “हिन्दी के कुछ लेखक मार्क्सवाद पर पुस्तकें भी लिख चुके हैं लेकिन उनके पात्र वैसे सजीव नहीं होते, जैसे गाँधीवादी लेखक अमृतलाल नागर के ‘सेठ बाँकेमल’ या ‘बूँद और समुद्र’ की ताई। इसका कारण यह है की मार्क्सवाद या गांधीवाद ही किसी लेखक को कलाकार नहीं बना देता। कथाकार बनाने के लिए मार्मिक अनुभूति आवश्यक है जो जीवन के हर पहलू को देख सके। सामाजिक जीवन की जानकारी ही न होगी तो दृष्टिकोण बेचारा क्या करेगा?” लखनऊ के नागर, मध्यवर्गीय सामाजिक जीवन का अन्तरंग और सजीव चित्रण करनेवाला यह उपन्यास हिन्दी उपन्यास-परम्परा में एक कालजयी कृति माना जाता है।
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पठनीयता के बल पर हिन्दी उपन्यास को ख्याति और प्रतिष्ठा दिलानेवालों में अमृतलाल नागर का नाम अग्रणी है। कई पीढ़ियों ने उनकी क़लम से निकले हृदयग्राही कथा-रस का आस्वाद लिया है। कथा-साहित्य के कई अविस्मरणीय चरित्रों की सृष्टि का सेहरा भी नागरजी के ही सर बँधा है।
डॉ रामविलास शर्मा ने लिखा, “हिन्दी के कुछ लेखक मार्क्सवाद पर पुस्तकें भी लिख चुके हैं लेकिन उनके पात्र वैसे सजीव नहीं होते, जैसे गाँधीवादी लेखक अमृतलाल नागर के ‘सेठ बाँकेमल’ या ‘बूँद और समुद्र’ की ताई। इसका कारण यह है की मार्क्सवाद या गांधीवाद ही किसी लेखक को कलाकार नहीं बना देता। कथाकार बनाने के लिए मार्मिक अनुभूति आवश्यक है जो जीवन के हर पहलू को देख सके। सामाजिक जीवन की जानकारी ही न होगी तो दृष्टिकोण बेचारा क्या करेगा?”
लखनऊ के नागर, मध्यवर्गीय सामाजिक जीवन का अन्तरंग और सजीव चित्रण करनेवाला यह उपन्यास हिन्दी उपन्यास-परम्परा में एक कालजयी कृति माना जाता है।
Book Details
-
ISBN9788126700400
-
Pages472
-
Avg Reading Time16 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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