Vaishalinama : Loktrantra Ki Janamkatha
Author:
Prabhat PranitPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 239.2
₹
299
Available
वैशालीनामा सुदूर अतीत की पृष्ठभूमि में ऐसी एक कथा प्रस्तुत करता है जो न केवल रोचक है बल्कि जिसमें निहित मूल्यबोध तत्कालीन देशकाल में जितना युग-परिवर्तक हो सकता था, उससे कम परिवर्तनकारी और प्रासंगिक वह आज भी नहीं है। वह मूल्यबोध है मनुष्यमात्र की समानता का। यह समानता ऐसी किसी व्यवस्था में सम्भव नहीं हो सकती जिसका आधार स्वयं असमानता पर टिका हो। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था ही यह सम्भव कर सकती है।
वैशाली को लोकतंत्र की जन्मस्थली माना जाता है। इतिहास ही नहीं, इसके पौराणिक सन्दर्भ भी मिलते हैं। लेखक ने इस उपन्यास के लिए एक पौराणिक आख्यान को आधार बनाया है और वर्णों के श्रेणीक्रम में विभाजित समाज की सतह के नीचे खदबदाते उस लावे पर रोशनी डाली है जो मुट्ठीभर उच्चस्थों के वर्चस्व से उत्पीड़ित अधिसंख्य जनों के क्षोभ और क्रोध से निर्मित है। स्पष्टतः यह किसी पूर्ववर्णित आख्यान का औपन्यासिक रूपान्तर मात्र नहीं है। लेखकीय कल्पना का इसमें पर्याप्त निवेश हुआ है जिसके जरिये यह कृति राजतंत्र के प्राचीन युग में समाज में व्याप्त असमानता और उसके विरुद्ध हुई प्रतिक्रिया का उल्लेख कर लोकतंत्र के आदि रूप को रेखांकित करता है और किसी ऐतिहासिकता का दावा किये बिना एक समानता पर आधारित समाज का आह्वान करता है।
ISBN: 9788119092796
Pages: 216
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Aaivanho
- Author Name:
Sir Valter Scot
- Book Type:

- Description: जब एशबी के मैदान में आइवनहो बेहोश होकर गिर पड़ा था और सारी दुनिया उसका परित्याग कर चुकी थी तब रेबेका ने ही अपने पिता को राज़ी किया कि आइवनहो को अपने निवास-स्थान पर ले जाए। रेबेका ने ख़ुद अपने हाथ से उसके घावों पर पट्टियाँ बाँधीं। घर पहुँचने के बाद भी आइवनहो काफ़ी ख़ून निकल जाने के कारण देर तक बेहोश रहा। रेबेका ने कहा कि घाव गहरे नहीं हैं और अगर बुख़ार नहीं आया तो यार्क की यात्रा नुक़सानदेह नहीं होगी। आइज़क ज़्यादा-से-ज़्यादा वहीं अच्छा होने के लिए छोड़ जाना चाहता था, लेकिन रेबेका ने उसको अपने साथ ले जाने के लिए दो तर्क दिए। एक तो वह अपने बहुमूल्य मरहम की शीशी को किसी दूसरे चिकित्सक को नहीं दे सकती। दूसरे, घायल नाइट आइवनहो का विल्फ्रेड सिंह-हृदय रिचर्ड का घनिष्ठ मित्र है और चूँकि आइज़क ने उसके भाई जॉन को विद्रोहपूर्ण कार्यों के लिए काफ़ी पैसा दिया है, इसलिए उसको रिचर्ड के लौटने पर ऐसे शक्तिशाली संरक्षकों की ज़रूरत पड़ेगी। काले नाइट ने कहा, "एक कुलीन महिला का सम्मान ख़तरे में है।" भले रिसालेदार ने कहा, "बेचारे वफ़ादार मसखरे वाम्बा का बाल भी बाँका हुआ तो मैं ईंट-से-ईंट बजा दूँगा !" काले नाइट ने लाक्सले से कहा, "यह अच्छा हो कि सेड्रिक इस हमले का नेतृत्व करे।" लेकिन सेड्रिक ने युद्ध-कौशल में अनभिज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि वह अगली पंक्ति में ज़रूर रहेगा, पर नेतृत्व करना उसके वश का नहीं है। लाक्सले ने तीरन्दाज़ों का दिग्दर्शन करने का काम अपने ऊपर लिया। फिर काले नाइट को इस सेना का सूत्र सँभालना पड़ा और पहला हमला शुरू हो गया। सर वाल्टर स्कार्ट का प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास है ‘आइवानहो’।
Etawah Files
- Author Name:
Brij Lal
- Book Type:

- Description: मैंने नेताजी से कहा कि इंटर स्टेट गैंग के कुख्यात इनामी डकैत भूरा यादव मारा गया है और 4 लोगों की जान बचाई गई है। यदि मैंने इस साहसिक मुठभेड़ के बाद पूरे थाने को निलंबित कर दिया तो पुलिस का मनोबल टूटेगा और ऐसी स्थिति में वे राम आसरे चौबे उर्फ फक्कड़ गैंग पर कैसे कार्रवाई करेंगे। मुख्यमंत्रीजी नाराज होकर मीटिंग से उठ गए। डी.जी.पी. घबराकर कहने लगे कि मैं सबको निलंबित करता हूँ। मैंने पुलिस महानिदेशक को साफ-साफ बता दिया कि मैं पुलिसजनों को निलंबित नहीं करूँगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्ष 2013 में एक ही दिन आतंकवादियों के मुकदमों की 14 चार्जशीटों को न्यायालय से वापस लेने के आदेश दिए थे, परंतु इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उन्हें झटका दे दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आर.के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति आर.एस.आर. मौर्या की पीठ ने निर्णय दिया कि आज आप आतंकवादियों को रिहा कर रहे हैं, कल आप उन्हें पद्मभूषण भी दे सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम के विश्लेषण से पता चलता है कि गोली शिवपाल सिंह के गनर राजेश की कार्बाइन से चली थी, जिसमें एस.आई. आर.पी. सिंह मारे गए और हेड कांस्टेबल सुरेंद्र सिंह घायल हो गए। साक्ष्य को मिटाने के लिए शिवपाल सिंह के गनर द्वारा कार्बाइन और 192 कारतूस इटावा पुलिस लाइन की आर्मरी में जमा कर दिए गए।
Kasheer
- Author Name:
Sahana Vijayakumar
- Book Type:

- Description: यह एक त्रासदी है कि कुछ कहानियाँ अनकही रह जाती हैं, प्रमुख कथाओं और जटिल वास्तविकताओं के कोलाहल में खो जाती हैं। कश्मीरी हिंदुओं की कहानी ऐसी ही एक कहानी है। जब यह उपन्यास जुलाई 2018 में मूल रूप से कन्नड़ में प्रकाशित हुआ था, तब धारा 370 लागू थी। अब, इसके निरस्त होने के बाद भी, उपन्यास बहुत प्रासंगिक है। कश्मीर की सृष्टि और प्रगति का परिचय, उसके सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक आयामों से कराते हुए, यह उपन्यास न केवल कश्मीर के समकालीन और ऐतिहासिक दोनों चित्रों की कल्पना करता है, बल्कि सनातन धर्म और सेमेटिक मतों के अंतर्निहित दर्शन की भी छानबीन करता है। यह आवश्यक है कि आनेवाले दिन कश्मीर के लिए आशावाद से भरे हों। साथ ही कश्मीरी हिंदुओं की दुर्भाग्यपूर्ण कहानी को जानना भी उतना ही आवश्यक है, जो अपनी मातृभूमि से बेदखल किए गए हैं। यह उनकी कहानी है। यह कश्मीर की कहानी है।
Kaniya ek ghunghruawali
- Author Name:
Vibha Rani
- Book Type:

- Description: मैथिली मे नवम दशक सँ लेखनरत विभा रानी (1959) हिन्दी मे सेहो सक्रिय छथि। कथा, नाटक आ अनुवाद मे हुनक बहुत रास काज छनि। हिनक मौलिक सैंतीस टा आ अनूदित दस टा किताब प्रकाशित। विभा रानीक नवीनतम उपन्यास 'कनियाँ एक घुँघरुआवाली’क मादे मंतव्य: उपन्यास, जटिल आ स्त्री-मोनक लेल दमनकारी परिस्थितिक बीच कामनाक प्रतिफलन हेतु मर्म मे बसल संघर्षक निरंतरताक कथा कहैए। ई मिथिला-केंद्रित, स्त्री-प्रतिभाक प्रतिमान बनबाक कथा सेहो छी जे विडंबनाग्रस्त पितृ-सत्ताक अनवरत अवरोध, विरोध, छल-छद्मक अविराम प्रतिरोध करैए आ डोमकछ कें विस्तार दैए। —कुणाल नृत्य-संगीतक प्रति मैथिल समाज मे घोर उपेक्षा भाव कें उपन्यास मे आलोचनात्मक दृष्टिएँ दर्शाओल गेल अछि। मैथिल लोकनि गीत-नृत्यक रसिया होइत छथि ओकरा ई खूब नीक लगैत छनि, मुदा दोसरक बेटी-पुतोहु द्वारा कयल गेल नृत्य आ गाओल गेल गीत। —कमलानंद झा उपन्यास मे सामाजिक वातावरण, परिवेश, स्त्री-पुरुष लोकनिक संवाद उपन्यास कें सजीव रूप प्रदान करैत अछि। —बिभा कुमारी
Kisani Ki Kahani: Beti Ke Liye
- Author Name:
Sorit Gupto
- Book Type:

- Description: किसान नहीं होंगे तो हम नहीं होंगे। खेती नहीं होगी तो ये शहर नहीं होंगे जहाँ हम उस विशाल आबादी से आँखें चुराए इत्मीनान से रहते हैं, जिस आबादी का सब कुछ खेती पर निर्भर है, वे लोग जो अन्न उगाते हैं, लेकिन अकसर खाली पेट सोते हैं, कर्ज लेते हैं और फिर आत्महत्या कर लेते हैं। हैरानी की बात है कि इतने महत्त्वपूर्ण क्षेत्र पर न तो नीति-निर्माताओं का फोकस है, न ही नागरिक चेतना का। ‘किसानी की कहानी : बेटी के लिए’ हमारा ध्यान उस ओर खींचती है, और एकदम अलग और नए ढंग से। किताबों, खबरों और निजी अनुभवों के माध्यम से आजादी से पहले और बाद के वक्तों पर नजर डालते हुए यह किताब भारतीय किसान और खेती की पीड़ा को हमारी सोच के केन्द्र में ला देती है।
LOVE WITH BENEFIT
- Author Name:
SARVESH MISRHA
- Book Type:

- Description: Novel
Khuli Hava
- Author Name:
Shakti Trivedi
- Book Type:

- Description: कुछ दिन इसी प्रकार और बीत गए। अभिवादनों का आदान-प्रदान हो गया। और एक दिन जब सायंकाल को दीये जल चुके थे, तभी अलका लौट रही थी। ऊपर से मणिकलाल ने धीरे से कहा— ‘‘भाभी?’’ वह ठिठक गई और उसने भी धीरे से कहा, ‘जी’। ‘‘आप से एक-दो मिनट बात करना चाहता हूँ?’’ मणिकलाल ने नम्रता भरे शब्दों से कहा। ‘‘इस समय?’’ अलका ने घूँघट में से ही पूछा। ‘‘हाँ। अभी! केवल दो मिनट! आप तनिक मेरे पास इधर आ जाए!’’ ‘‘क्या बात है यहीं कह दीजिए!’’ अलका ने वहीं खड़े-खड़े कहा। ‘‘भाभी ये रास्ता है यहाँ ठीक नहीं है, आप डरिए नहीं। तनिक इधर आ जाओ।’’ कहकर वह द्वार से भीतर को बैठक में चला गया। अलका ने मन-ही-मन सोचा कदाचित् आज ही वह दिन आ गया, जिसकी उसे आशंका थी। उसने सोचा ‘नहीं!’ इसके प्रस्ताव को ठुकरा दो, इसे स्पष्ट मना कर दो। पर उन वस्त्रों और खाद्य पदार्थों के दबाव ने उसे ऐसा नहीं करने दिया और वह अपने स्थान से थोड़ी सी हटकर बैठक के द्वार के निकट खड़ी हो गई बोली—‘‘कहिए?’’ ‘‘देखिए, आप घबराएँ नहीं, अंदर ही आ जाएँ!
Ishq Koi News Nahin
- Author Name:
Vineet Kumar
- Rating:
- Book Type:

- Description: ‘‘न्यूज़रूम में हत्या, बलात्कार, घोटाले, हाशिए के समाज को लगातार धकेली जानेवाली ख़बरों—और तो और—लव, सेक्स, धोखा पर लॉयल्टी टेस्ट शो की आपाधापी के बीच भी कितना कुछ घट रहा होता है। किसी से क्रश, किसी की याद, कैम्पस में बिताए गए दिनों की नॉस्टेल्जिया, भीतर से हरहराकर आती कितनी सारी ख़बरें, लेकिन टेलीविज़न स्क्रीन के लिए ये सब किसी काम की नहीं। टेलीविज़न के लिए सिर्फ़ वो ही ख़बरें हैं जो न्यूज़रूम के बाहर से आती हैं, वो और उनकी ख़बरें नहीं जो इन सबसे जूझते हुए स्क्रीन पर अपनी हिस्सेदारी की ख़्वाहिशें रखते हैं। 'इश्क़ कोई न्यूज़ नहीं' उन ख़्वाहिशों का वर्चुअल संस्करण है।’’
Karm Path Par
- Author Name:
Aashish Kumar Trivedi
- Rating:
- Book Type:

- Description: novels
Vaikalya
- Author Name:
Dr. Shireesh Gopal Deshpande
- Book Type:

- Description: वैकल्य अर्थात् विकलता। कुष्ठरोग पर आधारित हिंदी में संभवतः यह पहला क्लासिकल और मूल ललित शैली में लिखा गया उपन्यास है। इसने कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास और उपचार को लेकर समाज में लोगों की आँखें खोलने का काम किया है। उपन्यास का कथानक अंतर्मन को छू लेता है। विषय बहुत ही हृदयस्पर्शी और दिलचस्प है। यह दो महापुरुषों के मौन संघर्ष की गाथा है। एक वह जो, समाजसेवी हैं, कुष्ठरोगियों के लिए आश्रम व्यवस्था की बात करते हैं, तो दूसरे वह, जो प्रख्यात डॉक्टर हैं, अस्पताल व्यवस्था की बात करते हैं और रोगियों का इलाज घर से ही होना चाहिए—इसका पुरजोर समर्थन करते हैं। कुल मिलाकर कुष्ठरोग को लेकर वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण के बीच की यह गहरी खाई सशक्त कथ्य के ताने-बाने से बुनी एक करुण-गाथा है। दोनों महापुरुषों की पत्नियों का अपने पति और उनके कार्य के प्रति त्याग और समर्पण की कहानी भी गजब की है। कुष्ठरोग को महारोग के नाम से भी जाना जाता है, जिसके प्रति लोगों के मन में कई प्रकार के भ्रम, भय और अंधविश्वासी भावनाएँ थीं। इस रोग के संसर्ग की स्थिति, टीके का आविष्कार, उपलब्ध दवाइयाँ, देश-विदेश के अनुसंधानकर्ताओं की मान्यताएँ, सरकारी रवैया, रोगियों का देश निकाला, पाप-पुण्य जैसे मुद्दों को लेकर यह उपन्यास वैचारिक द्वंद्व पेश कर जनजागरण की स्थिति पैदा करता है।
Anamika
- Author Name:
Gajendra Singh Verdhman
- Book Type:

- Description: Books
Shisha Ghar
- Author Name:
Pratyaksha
- Book Type:

- Description: ‘शीशाघर’ के केन्द्र में एक परिवार है जो सन् सैंतालिस में बिखरना शुरू होता है तो बिखरता ही जाता है। और जब हम एक मुल्क के, एक भरी-पूरी दुनिया के विभाजित होते जाने की त्रासदी से गुज़र रहे होते हैं तब एक इलहाम की तरह यह बात भीतर प्रकट होती है कि यह उपन्यास विभाजन और बिखराव से ज़्यादा उस अन्दरूनी इनसानी एकता के बारे में है जो इसके चरित्रों को बिखरकर भी बिखरने नहीं देती और वे एक-दूसरे से हज़ारों किलोमीटर दूर, दूसरे देशों में अपना रोज़मर्रा का जीवन जीते हुए भी एक-दूसरे से गहरे तौर पर जुड़े हुए हैं। इस उपन्यास के केन्द्र में है प्रेम, जिसका प्रवाह धर्म, नस्ल, राष्ट्र और भूगोल के सिरों को धूमिल करता, साथ ही लोगों के बसने, उजड़ने और फिर बसने की यादों को सहेजता चलता है। केन्द्रीय कथा से इतर भी इसमें बहुतेरे ऐसे चरित्र हैं जो प्रेम की आग में झुलसकर बन और बिगड़ रहे हैं या कि उनका व्यक्तित्व उस प्रेम की याद से बन रहा है। कभी न भूलनेवाले यादगार किरदारों, उनके द्वन्द्व और चाहनाओं, ज़िद और लापरवाहियों से बुनी हुई, देखी-जानी दुनिया के समानान्तर उतनी ही ज़िन्दा, सम्मोहक और मानीख़ेज़ एक दूसरी दुनिया।
Mr. Lapata (Tiwari)
- Author Name:
Devendra Pandey
- Book Type:

- Description: इश्क़ बकलोल' और 'बाली श्रृंखला' के लेखक की नई पेशकश "कल ऐसे ही गिरते पड़ते मिले थे, बस से उतरे और मुंह के बल गिरे थे, रास्ते मे भी कई दफा गिरते पड़ते रहें हैं।आज भी ठोकर ही खाते दिखाई दे रहें हैं। लगता है ठोकरों से पुराना रिश्ता है इनका, या ठोकरों का ही अपनापन ज्यादा है इनके लिए।" "शायद आपके गांव का हम शहर वालों से प्यार जताने का यह अपना तरीका है" "हां! जब तक आप इसे अपना नहीं मानेंगे तब तक कहां आपको इस प्यार दुलार का अहसास होगा? जड़ें तो यहीं से है आपकी, जब आपको यहां अपनापन दिखने लगेगा तब आपको इन ठोकरों में भी दुलार ही दिखेगा।" "ऐसे दुलार से दूरी भली।" "आप दूर ही तो हैं।" उसकी इस बात पर वह चाह कर भी मुस्कुरा नही पाया।
Rushyashrunga
- Author Name:
Harisha Hagalawadi
- Book Type:

- Description: ತಿಗೆ ಬೆನ್ನುಡಿ ಬರೆದಿರುವ ನಾಗರಾಜ ವಸ್ತಾರೆ ಅವರು “ಈ ಬೆಂಗಳೂರು ನಿನ್ನನ್ನು ಕಾಡಿರುವಷ್ಟೇ- ಬಹುಶಃ ಇನ್ನೂ ಹೆಚ್ಚು, ನನ್ನನ್ನು ಕೆಣಕಿರುವುದು ಹೌದು. ಆದರೆ, ಇನ್ನೂ ಮದುವಣಿಗನಾಗದ ಅವಸ್ಥೆಯಲ್ಲಿರುವ ನೀನು, ನಿನ್ನಂಥವರು ಕಾಣುವ ಈ ಶಹರ, ಶಾಹರಿಕತೆ ನನ್ನಲ್ಲಿ ಬೆರಗು ಹುಟ್ಟಿಸುತ್ತದೆ. ಉದ್ಯೋಗದೊಡನೆ ದುಡ್ಡು ಕೊಡುವ ಈ ಊರು ಜೀವನಕ್ಕೊಂದು ಕ್ರಮವನ್ನೂ ಕೊಡುತ್ತದೆನ್ನುವ ನಿನ್ನ ಮಾತಿಗೆ ಸಲಾಮು. ಇಷ್ಟಿದ್ದೂ, `ಇದು ಅರ್ಥವಾಗದ ಯಕ್ಷಿಣಿ' ಅಂತನ್ನುವುದು ನಿನ್ನದೇ ಇನ್ನೊಂದು ಮಾತು. ಇಲ್ಲಿನ ಬದುಕನ್ನು ಜೇನುಗೂಡು, ರೇಶ್ಮೆಗೂಡುಗಳಂತೆ ಗ್ರಹಿಸಿರುವುದು ಇಷ್ಟವಾದ ಇನ್ನೊಂದು ಸಂಗತಿ. ಏನೇ ಇರಲಿ, ನಿನ್ನ ಗ್ರಹಿಕೆ ನಿನ್ನ ಕಾಣ್ಕೆ. ಆದರೆ, ನಿನ್ನ ನೋಟವನ್ನು ಸಾರ್ವತ್ರಿಕ-ಸಾರ್ವಕಾಲಿಕ ಸಂಗತಿಯೆಂಬಂತೆ ಮನ್ನಣೆಗಿಡುತ್ತೀಯಲ್ಲ, ಅದು ಇಷ್ಟವಾಗದಿದ್ದರೂ, ನಿನ್ನ ಎದೆಗಾರಿಕೆಗೆ ಜೈ. ವಯಸ್ಸಿಗೆ ತಕ್ಕ ಲಂಪಟತನಕ್ಕೆ ಚೌಕಟ್ಟು ಹಾಕುವ ನಿನ್ನ ಹುಂಬತನಕ್ಕೆ ತುಸು ಇರುಸುಮುರುಸಾಯಿತಾದರೂ ಇದು ನಿನ್ನ ಮೆಥಡೆಂದು ಸುಮ್ಮನಾಗಿದ್ದೇನೆ. ಇನ್ನು, ನಿನ್ನ ಋಷ್ಯಶೃಂಗ-ತೆಯ ಬಗ್ಗೆ ಕಡೆಯಲ್ಲಿ ಹೇಳಿದ್ದು ಮನಸ್ಸು ನಾಟಿತು. ಬಹುಶಃ, ಇದು ನಮ್ಮೆಲ್ಲರ ಋಷ್ಯಶೃಂಗ-ತೆಯೂ ಹೌದು. `ವಿ ಸ್ಟಾರ್ಟ್ ಕನ್ಸ್ಯೂಮಿಂಗ್ ವಾಟೆವರ್ ಕಮ್ಸ್ ಇನ್ ಅವರ್ ವೇ...' ಅನ್ನುವ ಮಾತಿನ ಹಿಂದೆಯೇ, ಪರಾವರ್ತಿತ ರಿಫ್ಲೆಕ್ಸಿನಂತೆ ಅನಿಸಿದ್ದು- `ವಾಟ್ ಇಫ್ ಇಟ್ ಕನ್ಸ್ಯೂಮ್ಸ್ ದಿ ಸೆಲ್ಫ್?' ಅನ್ನೋದು. ಹೋಪ್ ದಟ್ ವೋಂಟ್ ಹ್ಯಾಪನ್. ಅಂಡ್, ಯೂ ವೋಂಟ್ ಲೆಟ್ ದಟ್ ಹ್ಯಾಪನ್. ಒಂದಷ್ಟು ಚಿಯರುಗಳು” ಎಂದಿದ್ದಾರೆ.
Sachcha Jhooth
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: ‘सच्चा झूठ’ उपन्यास का विषय कोरोना काल है, और यह कहानियाँ सुनाता है उन लोगों की जो अपनी-अपनी जगहों पर, अपनी-अपनी हैसियत और हदों के साथ इस स्याह समय से गुज़रे, जिन्होंने इसकी तकलीफ़ों, डरों, सदमों और दुखों को कभी हिम्मत से तो कभी आशंकाओं के साथ झेला। यानी कथा है हम सब की। बहुत समय नहीं बीता है, जब सारी दुनिया अचानक कोरोना नाम की इस ख़ौफ़नाक महामारी के सामने असहाय हो गई थी। अमीर-ग़रीब, छोटे-बड़े, सब अचानक ऐसे हालात के सामने आ खड़े हुए जिनसे निबटने का तरीका किसी को नहीं आता था। एक नए ढंग की छुआछूत ने हम सबको अपनों तक से दूर कर दिया। शारीरिक दूरी की जगह सामाजिक दूरी ने ले ली और उन तमाम धागों को उधेड़ दिया, जो सामान्य समय में हमें एक समाज बनाते थे। इस उपन्यास में अलग-अलग पात्रों के हवाले से इस पूरे दौर की एक मुकम्मल तस्वीर प्रस्तुत की गई है। यहाँ एक तरफ़ अगर मौत का भय है, तो दूसरी तरफ़ हमारी सामाजिक-धार्मिक-आर्थिक उलझनें। कहीं पारिवारिक सम्बन्धों की दरकन दिखती है तो कहीं मनुष्यता के अनुकरणीय उदाहरण भी–यह उपन्यास इन सभी पहलुओं को बहुत बारीकी से अंकित करता है। एक प्रेम-कथा भी इस उपन्यास का हिस्सा है जो कोरोना के इसी भयानक दौर में धीर-धीरे परवान चढ़ती है, और कोरोना की चुनौती के साथ सामाजिक भेदभाव की बाधा को भी सफलतापूर्वक पार करती है।
Garibnawaz
- Author Name:
Santosh Choubey
- Book Type:

- Description: ये इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ हैं। यहाँ उत्तर-आधुनिक कहानी के इशारे हैं। ये पॉज़िटिवली हल्की-फुल्की हैं और बे-बोझ एवं प्रसन्न हैं। ये बड़ी बात का आडम्बर नहीं रचती हैं और न फालतू की पीड़ा का स्वाँग भरती हैं। इन कहानियों से हिन्दी में उत्तर-कहानी की शुरुआत हुई मानी जा सकती है। —सुधीश पचौरी संतोष चौबे की कहानियाँ यथार्थ की गहनता और व्याप्ति में जाकर सत्य को आख्यान में रूपान्तरित करने का जतन करती हैं। इस प्रक्रिया में वे कहानी कहने के अनेक अनुशासनों को नकारती हैं और यूँ अपनी तरह के कथानुशासन एवं शिल्प की निर्मिति करती हैं। ‘ग़रीबनवाज़’ की अधिसंख्य कहानियों में साहित्य, कला से जुड़े चरित्र उपस्थित हैं लेकिन कहानियाँ महज़ यहाँ से उड़ान भरती हैं, अन्तत: वे आर्थिक उदारीकरण से उपजी मूल्यहीनता, लालच, कपटीपन और क्षरणशील आधुनिकता का प्रत्याख्यान करती हैं। इन चीज़ों में इतनी निष्ठुरता है कि समाज की तमाम सुन्दरताएँ नष्ट हो रही हैं। संतोष चौबे की कहानियाँ पूँजी, तकनीक एवं ताक़त के सहमेल से उपजी विरूपता से मुठभेड़ करती अन्तत: जीवन के सुन्दरतम के पक्ष में खड़ी होती हैं। —अखिलेश
Homeland
- Author Name:
Dalpat Chauhan +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Dalpat Chauhan's first novel Homeland (Malak in Gujarati) is set in rural northern Gujarat in pre-independence India and tells the tale of a community of Dalits who eke out an existence on the margins of an upper castr village. They belong to the Vankar caste and are considered 'Untouchables' by the upper caste villagers. Many of them because of small loans taken by them or their forefathers from the village landlords are 'bonded' for generations to them and have to provide them with free labour. Their women are sexually harassed and at times raped and murdered. Yet these Vankars are attached to their Malak and are traumatised when they are forced to leave it due to the threat of uppar caste reprisal over the relationship between a young Dalit man and upper castemarried woman. Homeland is writtten in what be termed the postcolonial narrative style, with interior monologues, interventions of the past into the present and alternative voices. The language is a judicious mix of Northern Gujarat rural dialect and standard Gujarati. This gives the novel a very authentic and contemporary edge.
Barho Mas - Award Winning Novel
- Author Name:
Bhalchandra Jha +1
- Book Type:

- Description: बारहो मास उपन्यास साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत मराठी उपन्यास बारोमास मैथिली अनुवाद अछी। एही उपन्यास भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था रीढ़ - हमरा सभक किसानक ओही सभ समस्या पर व्यापक दृष्टि देल गेल अछी जे ओ लोकनि खुजल व्यापार नीति आ भूमण्डलीकरण कारणे भोगी रहलाह अछी। बारह महीनामे समेटल किसानक वेदना-कथाके एहि उपन्यासमे महाराष्ट्रक किसान सुभाराव आ हुनक परिवार इर्द-गिर्द बुनल गेल अछी उपन्यास अन्तमे सुभाराव निपत्ता होयब प्रतीकात्मक रूपसै किसानक मुख्यधारासै “निपत्ता” होयबाक एकटा दुखद परिदृश्य प्रस्तुत करैत अछी।
Hamari Adhoori Kahani…
- Author Name:
Arpit Vageria
- Book Type:

- Description: हर कहानी सुखांत नहीं होती, पर सुखद अंत ही क्या सबकुछ होता है? अरमान एक युवा टेलीविजन राइटर है और ऐसा लगता है, जैसे जीवन में उसने सबकुछ पा लिया है—मनचाही नौकरी, पर्याप्त पैसा और मुंबई में रहने के लिए अच्छी सी जगह। इन सबके बावजूद उसका दिल कहीं-न-कहीं उसके अपने शहर इंदौर में ही बसा है। जीवन के तमाम उतार-चढ़ावों के बीच खुशियाँ मनाती चुलबुली सी सारा, आजकल थोड़ी तनहा सी है और मुंबई में एक जाने-माने टेलीविजन चैनल को ज्वॉइन करने के बाद उसे अपनी जिंदगी को लेकर नए सिरे से सोचने की जरूरत है। अरमान और सारा की मुलाकात फिल्मी अंदाज में होती है और जैसा कि अकसर होता है, दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है। मोहब्बत के इस खुशनुमा अहसास से अरमान की जिंदगी में बाकी सबकुछ पीछे छूट गया है, लेकिन उसे क्या मालूम था कि एक तूफान उनकी तरफ बढ़ रहा है। साथ चलते-चलते, उनका सामना बरसों पहले दफन सच्चाइयों, चौंकाने वाले मोड़ और कठोर फैसलों से होता है। ‘हमारी अधूरी कहानी’ प्यार की एक ऐसी कहानी है, जिसकी कोई सीमा नहीं, जिसका अंत सामान्य से कोसों दूर है, और जो नई शुरुआतों से भरी है, जिसमें प्यार की उम्मीद है।.
Aher
- Author Name:
Sanjeev
- Book Type:

- Description: वरिष्ठ कथाकार संजीव का यह उपन्यास सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश की एक ऐसी गुत्थी हमारे सामने खोलता है, जो जितनी हैरतअंगेज़ है उतनी ही भयावह भी। मनुष्य ने लाखों साल पहले पेट की भूख शान्त करने के लिए शिकार अर्थात् अहेर करना शुरू किया था। लेकिन सभ्यता-संस्कृति के विकास के साथ-साथ उसने न सिर्फ़ तरह-तरह के साधन और कौशल अर्जित किए, बल्कि तमाम तरह की भूख भी इकट्ठा की—कुछ इस क़दर कि उनकी पूर्ति के लिए आज मनुष्य-समाज स्वयं अहेर और अहेरी—शिकार और शिकारी—में बँट चुका है। यह उपन्यास दिखलाता है कि अहेरी बने लोग अपने हिंस्र चेहरे पर संस्कृति, परम्परा, आस्था, विरासत और मर्यादा के मुखौटे चढ़ाए फिर रहे हैं। उनकी असल चिन्ता अपने वर्चस्व को बनाए रखने और अपने हितों को सुरक्षित रखने की है। इस गहन बनैले वक़्त में क्या कोई बदलाव सम्भव है? इसका जवाब उपन्यास के उन किरदारों से मिलता है जो अहेर के थोथे अभियान से अपने गाँव को मुक्त कराने की पहल करते हैं और जल्द ही अकेले पड़ जाते हैं। उन्हें जान देनी पड़ती है। लेकिन उनकी असफलता उनके परिवर्तनकामी स्वप्न का अन्त नहीं है। एक बेहतर मानवीय समाज के निर्माण को अपने लेखन का उद्देश्य माननेवाले संजीव, इस उपन्यास में उस त्रासदी को भी बख़ूबी रेखांकित करते हैं, जिसमें अहेरी बने घूम रहे लोग ख़ुद भी अहेर बन रहे हैं—अपनी ही व्यर्थ हो चुकी मान्यताओं का, वक़्त से बाहर की जा चुकी परम्पराओं का। विरल ग्रामीण परिवेश में विन्यस्त एक असाधारण कथा को समेटे इस उपन्यास की अत्यधिक पठनीयता को रेखांकित करने के लिए किसी ‘जादुई’ अलंकार की आवश्यकता नहीं है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book