Muskurane Ki Wajah Tum Ho
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रनबीर सपने देखता है। उसके पास मोटी तनख्वाह वाली नौकरी है, लेकिन उसकी आकांक्षाएँ ऊँची हैं। वह एक अच्छा प्रेमी है। वह अदा को चाहता है और उसकी खातिर दुनिया के किसी भी आराम को छोड़ सकता है। लेकिन इसके बाद भी, वह खुश नहीं है। उसका वास्तविक पेशा कॉरपोरेट की नौकरी नहीं, बल्कि लेखन है। काफी सोच-विचार के बाद, वह इसमें कूद पड़ता है और अपनी नौकरी को छोड़ पूरी तरह से लिखने के काम में जुट जाता है। वह जब संतुलन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा होता है, तब अदा भी उससे दूरी बढ़ाने लगती है। क्या वह सच में उससे प्यार करती थी, या वह बस एक दिखावा था? इन सारी उलझनों के बीच, पीहू शर्मा उसकी जिंदगी में आती है, जो उसकी अब तक की पहली प्रशंसक, और पूरी तरह से उसके प्यार में डूबी हुई लगती है। अदा के साथ जहाँ रनबीर के संबंध बिगड़ते जाते हैं, वहीं पीहू अपने ऐशो-आराम की जिंदगी को छोड़ उसके साथ रहने चली आती है। क्या यही है वह सच्चा प्यार, जिसका इंतजार रनबीर कर रहा था? आइए, और रनबीर के साथ उस रास्ते पर चलिए, जहाँ ये दुनिया पैसे के लिए मार डालती है और प्यार के लिए जान दे देती है। ‘मुस्कुराने की वजह तुम हो’ प्यार, भाईचारा, भावना, समर्पण, दर्द, और उन गहराइयों की कहानी है, जहाँ तक एक दिल खोए प्यार को पाने के लिए जा सकता है।
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रनबीर सपने देखता है। उसके पास मोटी तनख्वाह वाली नौकरी है, लेकिन उसकी आकांक्षाएँ ऊँची हैं। वह एक अच्छा प्रेमी है। वह अदा को चाहता है और उसकी खातिर दुनिया के किसी भी आराम को छोड़ सकता है। लेकिन इसके बाद भी, वह खुश नहीं है। उसका वास्तविक पेशा कॉरपोरेट की नौकरी नहीं, बल्कि लेखन है।
काफी सोच-विचार के बाद, वह इसमें कूद पड़ता है और अपनी नौकरी को छोड़ पूरी तरह से लिखने के काम में जुट जाता है। वह जब संतुलन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा होता है, तब अदा भी उससे दूरी बढ़ाने लगती है। क्या वह सच में उससे प्यार करती थी, या वह बस एक दिखावा था?
इन सारी उलझनों के बीच, पीहू शर्मा उसकी जिंदगी में आती है, जो उसकी अब तक की पहली प्रशंसक, और पूरी तरह से उसके प्यार में डूबी हुई लगती है। अदा के साथ जहाँ रनबीर के संबंध बिगड़ते जाते हैं, वहीं पीहू अपने ऐशो-आराम की जिंदगी को छोड़ उसके साथ रहने चली आती है। क्या यही है वह सच्चा प्यार, जिसका इंतजार रनबीर कर रहा था?
आइए, और रनबीर के साथ उस रास्ते पर चलिए, जहाँ ये दुनिया पैसे के लिए मार डालती है और प्यार के लिए जान दे देती है।
‘मुस्कुराने की वजह तुम हो’ प्यार, भाईचारा, भावना, समर्पण, दर्द, और उन गहराइयों की कहानी है, जहाँ तक एक दिल खोए प्यार को पाने के लिए जा सकता है।
Book Details
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ISBN9789352666126
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Pages184
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Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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कामिनी काय कांतारे’ अर्थात कामिनी काया के जंगल में! राजा भर्तृहरि, गृहस्थ भर्तृहरि, प्रेमी भर्तृहरि, कवि भर्तृहरि, वैयाकरण भर्तृहरि, योगी भर्तृहरि! बहुमखी प्रतिभा के धनी विविध रूप-गुणों से संपन्न भर्तृहरि के जीवन पर आधारित यह उपन्यास कामिनी कंचन के बीच से ही नहीं गुजरता, कामिनी काया के जंगल से भी गुजरता है और कथा, इतिहास, मिथक के बल पर एक महान क्लासिक रचना वरिष्ठ कथाकार-उपन्यासकार महेश कटारे की कलम से पूर्णता को प्राप्त करती है। यह उपन्यास न मात्र बेहद पठनीय और रोचकता के लिहाज से महत्त्वपूर्ण है, ज्ञान को दीप्त करने वाली विशिष्ट कृति है। भारतीय परंपरा की थाती। उपन्यासकार के शब्दों में, ''भरथरी गाने वालों की कथा में बीवी की बेवफाई से दुखी राजा भरथरी जोगी बनकर महल, हवेली, राजपाट छोड़कर निकल गए। गुरु गोरखनाथ के कहने पर वह अपनी उसी पत्नी रानी पिंगला से भीख माँगने द्वार पर पहुँचे तो राजा को जोगी के भेष में देख रानी पछाड़ खाकर गिर पड़ी। 'भरथरी’ सुनती स्त्रियों की भीड़ राजा के घर से निकलते ही आँसू बहाने लगती और रानी के पछाड़ खा गिरने पर तो अनेक की 'कीक’ फूट जाती। इस भर्तृहरि से मेरा बचपन का परिचय था। बाद में सरसरी दृष्टि से शतकत्रय भी पढ़े थे तो उस रात मैंने मित्रों को दो-तीन श्लोक सुना डाले। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि भर्तृहरि बहुत बड़ा कवि है। हमारे यहाँ ऐसे लोगों पर बहुत कम काम हुआ है, सो मैं एक उपन्यास लिखूँ।...’’ और अब यह उपन्यास दो खण्डों में आपके सामने है। हिंदी की एक अनमोल कृति के रूप में!...
Khari Nadi
- Author Name:
Richa Nagar
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खारी नदी को आप मुमताज़ बेगम की कहानी कहिए, या फिर उनकी कहानी से हिम्मत बटोरती कई कहानियाँ कहिए, आपबीती कहिए, ज़िन्दगी के तजुर्बे कहिए, पर यह कहानी हमें अपने आप से और दुनिया की कठोर सच्चाई से रू-ब-रू कराती है और आगे के रास्ते भी दिखाती है। इसलिए ये महज़ कहानी या आपबीती नहीं रह जाती बल्कि खारी नदी कहलाती है। खारा तो समुन्दर भी होता है, लेकिन इस नदी का खारापन आँसुओं से जुड़ा है। उसके बावजूद इसमें उमंगों की लहरें हैं जो इस कहानी को ख़ास बनाती हैं। हमारे आसपास की दुनिया ने कुछ दस्तूर बना दिए हैं, कुछ ठप्पे बना दिए हैं, जो बस इनसानों पर लगा दिए जाते है, कि ये तो ऐसा ही होगा। एक तयशुदा नज़रिया और तयशुदा सज़ा... लेकिन खारी नदी तो इन सब नज़रियों से परे एक औरत का संघर्ष दिखाती है जो किसी भी वंचित समुदाय की औरत का संघर्ष हो सकता है। खारी नदी में बयाँ की गई मुमताज़ बेगम, नन्दा, और चन्द्रभागा के साथ-साथ तमाम औरतों की आपबीतियाँ हमें झकझोर कर रख देती हैं। हर कहानी किसी एक औरत की नहीं, बल्कि तमाम औरतों का बयान है जो उन पर लगाए गए असंख्य बन्धनों और दुखों को उजागर करता है। और ये सारे बन्धन और दुख कहीं-न-कहीं धर्म और जाति के साथ उलझकर अलग-अलग जगहों पर अपना जाल बिछाए हुए हैं, औरत गाँव-देहात की हो या शहर की, अनपढ़ हो चाहे पढ़ी-लिखी। लेकिन खारी नदी की हर कहानी में एक ज़िन्दा मन भी है, और संघर्ष की तैयारी भी। खारी नदी औरतों के दुख, आँसू और शोषण के साथ-साथ उनकी ज़िन्दगी को बेहतरीन बनाने के लिए किया गया संघर्ष है। उम्मीद है यह संघर्ष पाठक को बहुत कुछ सोचने, समझने, आँकने और उसे जीवन में उतारने पर मजबूर करेगा; एक नया नज़रिया देगा।
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