The Ungrateful
(0)
Author:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'Publisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Contemporary-fiction₹
350
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The person achieves his objective without fretting about anyone if he possesses the yearning and resolves to accomplish something for the society, but then there is that segment in our society that always maintains a negative approach towards everything. They especially strive to distract those who strive for society's betterment and create multiple obstacles in their path. A similar incident transpired with Ambuj to deviate him from his goal. At the same time, vicious circles were structured by the adversaries and by the personnel associated with his organisation. While moving through the path of truthfulness and noble feats, a person often passes through the long haul of sinister, shadowy conduits, where he might ramble in the confusion of his choice. Still, when he approaches the end of the dark tunnel, he encounters the golden rays of pleasant morning rays spreading its light. The novel The Ungrateful is another milestone in the powerful writing of famous litterateur Shri Ramesh Pokhriyal 'Nishank', which exposes both the morally upright, virtuous and ruthless and unscrupulous facets of society. It furnishes the hallmark of bonded, shattered, and reconnected associations.
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The person achieves his objective without fretting about anyone if he possesses the yearning and resolves to accomplish something for the society, but then there is that segment in our society that always maintains a negative approach towards everything. They especially strive to distract those who strive for society's betterment and create multiple obstacles in their path. A similar incident transpired with Ambuj to deviate him from his goal. At the same time, vicious circles were structured by the adversaries and by the personnel associated with his organisation.
While moving through the path of truthfulness and noble feats, a person often passes through the long haul of sinister, shadowy conduits, where he might ramble in the confusion of his choice. Still, when he approaches the end of the dark tunnel, he encounters the golden rays of pleasant morning rays spreading its light.
The novel The Ungrateful is another milestone in the powerful writing of famous litterateur Shri Ramesh Pokhriyal 'Nishank', which exposes both the morally upright, virtuous and ruthless and unscrupulous facets of society. It furnishes the hallmark of bonded, shattered, and reconnected associations.
Book Details
-
ISBN9789390923779
-
Pages168
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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उपन्यास का महत्त्व दरअसल आजकल भी इसलिए बना हुआ है कि उपन्यास एक समानान्तर जीवन की परिकल्पना करते हैं। इस सन्दर्भ में असग़र वजाहत के उपन्यास ‘कैसी आगी लगाई’ में जीवन की विशद व्याख्या है, जीवन का विस्तार है और तमाम अन्तर्विरोधों के बीच से मानव-गरिमा और श्रेष्ठता के कलात्मक संकेत मिलते हैं। पिछले तीस साल से कहानियाँ और उपन्यासों के माध्यम से अपनी विशेष पहचान बना चुके असग़र वजाहत ने ‘कैसी आगी लगाई’ में विविधताओं से भरा एक जीवन हमारे सामने रखा है। यह जीवन बिना किसी शर्त पाठक के सामने खुलता चला जाता है। कहीं-कहीं बहुत संवेदनशील और वर्जित माने जानेवाले क्षेत्रों में उपन्यासकार पाठक को बड़ी कलात्मकता और सतर्कता से ले जाता है और कुछ ऐसे प्रसंग सामने आते हैं जो सम्भवतः हिन्दी उपन्यास में इससे पहले नहीं आए हैं। उपन्यास का ढाँचा परम्परागत है लेकिन दर्शक के सामने विभिन्न प्रसंग जिस तरह खुलते हैं, वह अत्यन्त कलात्मक है, एक व्यापक जीवन में लेखक जिस प्रसंग को उठाता है, उसे जीवन्त बना देता है। ‘कैसी आगी लगाई’ में साम्प्रदायिकता, छात्र-जीवन, स्वातंत्र्योत्तर राजनीति, सामन्तवाद, वामपन्थी राजनीति, मुस्लिम समाज, छोटे शहरों का जीवन और महानगर की आपाधापी के साथ-साथ सामाजिक अन्तर्विरोधों से जन्मा वैचारिक संघर्ष भी हमारे सामने आता है। उपन्यास मानवीय सरोकारों और मानवीय गरिमा के कई पक्षों को उद्घाटित करता है। जीवन और जगत के विभिन्न कार्य-व्यापारों के बीच कथा-सूत्र एक ऐसा रोचक ताना-बाना बुनते हैं कि पाठक उनमें डूबता चला जाता है। ‘कैसी आगी लगाई’ उन पाठकों के लिए आवश्यक है जो उपन्यास विधा से अतिरिक्त आशाएँ रखते हैं।
ONCE UPON A TIME
- Author Name:
A Sethumadhavan +1
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Once Upon a time by A. Sethumadhavan, is a novel which surrounds priyamvada, who is an HR professional, and a single parent at the centre of its narrative. The strong undercurrent of this award-winning title is the way woman asserts her independence and deft strokes in the book suggest how a professional woman scores. The novel very beautifully depicts the personal journey of a single parent, where are dilemmas which priyamvada faces, doing a tightrope walk between the labor force and the managements, trying to fill the vacuum in her daughter’s life and consciously attempting to steady her own emotional moorings.
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