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ವ್ಯಕ್ತಿಗಳಿಗೆ ಏಕಕಾಲಕ್ಕೆ ವ್ಯಕ್ತಿತ್ವ ಮತ್ತು ಚೈತನ್ಯತತ್ವದ ರೂಪ ನೀಡುವುದು ಆಶಾ ಬಗೆ ಅವರ ಕಥಾಸೃಷ್ಟಿಯ ಒಂದು ಮಹತ್ವದ ವೈಶಿಷ್ಟ್ಯ, ಬದುಕಿನ ಬಗೆಗಿನ ಶ್ರದ್ಧೆಯನ್ನು ಬಲಿಷ್ಠಗೊಳಿಸುವ ಮತ್ತು ಮನುಷ್ಯ ಜೀವನದಲ್ಲಿಯ ಸೌಂದರ್ಯದ ದರ್ಶನ ಮಾಡಿಸುವಂಥ ಬರವಣಿಗೆಯನ್ನು ಅವರ ಕಥೆ- ಕಾದಂಬರಿಗಳಲ್ಲಿ ಕಾಣಬಹುದು. ಆಶಾ ಬಗೆ ಕಥೆಗಾರ್ತಿಯಾಗಿ, ಕಾದಂಬರಿಗಾರ್ತಿಯಾಗಿ ಮರಾಠಿ ಕಥಾ ಪ್ರಪಂಚದಲ್ಲಿ ಅಗ್ರಗಣ್ಯ ಸ್ಥಾನವನ್ನು ಪಡೆದವರು. 'ಮಾರವಾ', 'ದರ್ಪಣ' ದಂತಹ ಕಥಾ- ಸಂಗ್ರಹಗಳು, 'ಭೂಮಿ', 'ಸೇತು', 'ಮುದ್ರಾ' ದಂತಹ ಕಾದಂಬರಿಗಳನ್ನು ರಚಿಸಿ ಮರಾಠಿಯ ಸಹೃದಯ ಓದುಗರ ಗಮನವನ್ನು ಸೆಳೆದಿದ್ದಾರೆ. ಮನದೊಳಗೆ ಮೂಡಿದ ವಿಚಾರವನ್ನು ಖಚಿತವಾಗಿ ಮಾಡಿ ತೋರಿಸುವ, ಯಾರ ಎದುರಿಗೂ ಕೈ ಒಡ್ಡದೆ, ಯಾರಿಗೂ ತಲೆಬಾಗದೆ, ಮಣಿಯದೆ ಛಲದಿಂದ ತನ್ನ ಹಾದಿಯನ್ನು ತಾನೇ ರೂಪಿಸಿಕೊಂಡ, ಭೂಮಿಯ ಧಾರಣಶಕ್ತಿಯನ್ನೂ ಸಹನೆಯ ಗುಣವನ್ನೂ ಪಡೆದ ಮೈಥಿಲಿಯು ತನ್ನ ಸ್ವಂತ ಆಸ್ಮಿತೆ ಗಾಗಿ, ಅಸ್ತಿತ್ವಕ್ಕಾಗಿ ನಡೆಸಿದ ಹೋರಾಟ ಅನನ್ಯ ಮತ್ತು ಅವಿಸ್ಮರಣೀಯ. ಇದೇ ಈ 'ಭೂಮಿ' ಕಾದಂಬರಿಯ ವಿಶೇಷತೆ. ಚಂದ್ರಕಾಂತ ಪೋಕಳೆಯವರು ಕನ್ನಡದ ಪ್ರಸಿದ್ಧ ಭಾಷಾಂತರಕಾರರಲ್ಲಿ ಒಬ್ಬರು. ಕನ್ನಡ ಮರಾಠಿಯ ಸೇತುವೆಯಾಗಿ 30 ವರ್ಷಗಳಿಂದ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸುತ್ತಿರುವ ಅವರು ಈವರೆಗೆ ತೊಂಬತ್ತು ಮರಾಠಿ ಕೃತಿಗಳನ್ನು ಕನ್ನಡಕ್ಕೆ ತರ್ಜುಮೆ ಮಾಡಿದ್ದಾರೆ. ಅವರು ಎರಡು ಬಾರಿ ಕರ್ನಾಟಕ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿಯ ಪ್ರಶಸ್ತಿ, ಕುವೆಂಪು ಭಾಷಾ ಭಾರತಿ ಗೌರವ ಪ್ರಶಸ್ತಿ ಮತ್ತು ಕೇಂದ್ರ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿಯ ಅನುವಾದ ಪ್ರಶಸ್ತಿಗೆ ಭಾಜನರಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಪ್ರಸ್ತುತ 'ಭೂಮಿ' ಕಾದಂಬರಿಯನ್ನು ಕನ್ನಡದ್ದೇ ಕೃತಿ ಎಂಬಂತೆ ಅನುವಾದಿಸಿದ್ದಾರೆ.
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ವ್ಯಕ್ತಿಗಳಿಗೆ ಏಕಕಾಲಕ್ಕೆ ವ್ಯಕ್ತಿತ್ವ ಮತ್ತು ಚೈತನ್ಯತತ್ವದ ರೂಪ ನೀಡುವುದು ಆಶಾ ಬಗೆ ಅವರ ಕಥಾಸೃಷ್ಟಿಯ ಒಂದು ಮಹತ್ವದ ವೈಶಿಷ್ಟ್ಯ, ಬದುಕಿನ ಬಗೆಗಿನ ಶ್ರದ್ಧೆಯನ್ನು ಬಲಿಷ್ಠಗೊಳಿಸುವ ಮತ್ತು ಮನುಷ್ಯ ಜೀವನದಲ್ಲಿಯ ಸೌಂದರ್ಯದ ದರ್ಶನ ಮಾಡಿಸುವಂಥ ಬರವಣಿಗೆಯನ್ನು ಅವರ ಕಥೆ- ಕಾದಂಬರಿಗಳಲ್ಲಿ ಕಾಣಬಹುದು. ಆಶಾ ಬಗೆ ಕಥೆಗಾರ್ತಿಯಾಗಿ, ಕಾದಂಬರಿಗಾರ್ತಿಯಾಗಿ ಮರಾಠಿ ಕಥಾ ಪ್ರಪಂಚದಲ್ಲಿ ಅಗ್ರಗಣ್ಯ ಸ್ಥಾನವನ್ನು ಪಡೆದವರು. 'ಮಾರವಾ', 'ದರ್ಪಣ' ದಂತಹ ಕಥಾ- ಸಂಗ್ರಹಗಳು, 'ಭೂಮಿ', 'ಸೇತು', 'ಮುದ್ರಾ' ದಂತಹ ಕಾದಂಬರಿಗಳನ್ನು ರಚಿಸಿ ಮರಾಠಿಯ ಸಹೃದಯ ಓದುಗರ ಗಮನವನ್ನು ಸೆಳೆದಿದ್ದಾರೆ.
ಮನದೊಳಗೆ ಮೂಡಿದ ವಿಚಾರವನ್ನು ಖಚಿತವಾಗಿ ಮಾಡಿ ತೋರಿಸುವ, ಯಾರ ಎದುರಿಗೂ ಕೈ ಒಡ್ಡದೆ, ಯಾರಿಗೂ ತಲೆಬಾಗದೆ, ಮಣಿಯದೆ ಛಲದಿಂದ ತನ್ನ ಹಾದಿಯನ್ನು ತಾನೇ ರೂಪಿಸಿಕೊಂಡ, ಭೂಮಿಯ ಧಾರಣಶಕ್ತಿಯನ್ನೂ ಸಹನೆಯ ಗುಣವನ್ನೂ ಪಡೆದ ಮೈಥಿಲಿಯು ತನ್ನ ಸ್ವಂತ ಆಸ್ಮಿತೆ ಗಾಗಿ, ಅಸ್ತಿತ್ವಕ್ಕಾಗಿ ನಡೆಸಿದ ಹೋರಾಟ ಅನನ್ಯ ಮತ್ತು ಅವಿಸ್ಮರಣೀಯ. ಇದೇ ಈ 'ಭೂಮಿ' ಕಾದಂಬರಿಯ ವಿಶೇಷತೆ.
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Book Details
-
ISBN9789355480736
-
Pages340
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIN
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- Description: ఎన్ని పాకిస్తానులు? ఈ నవలలో నాయకుడో, మహానాయకుడో ఎదురుగాలేడు. అందువల్ల కాలాన్నే నాయకుడుగా, మహానాయకుడుగా, విలన్గా ఊహించుకున్నాడు రచయిత శ్రీకమలేశ్వర్. "ఆగ్రా నా రాజధాని. ఆలోచించండి. ఆసమయంలో హిందువులు కృష్ణుణ్ని దేవునిగా, అవతార పురుషునిగా కొలిచేవారు. అతని జన్మస్థానం మధుర. నా రాజధాని ఆగ్రానుండి కేవలం యాభై కిలోమిటర్ల దూరం. కూల్చాలనుకొంటే కృష్ణుని జన్నస్థానం కూల్చలేనా? పరుగెత్తి పరుగెత్తి అయోధ్యవరకు వెళ్లి రాముని జన్మస్థానాన్ని ఎందుకు కూలుస్తా? నలుగురు పిచ్చోళ్ల గురించి నేను తెలుసుకున్న సమాచారం గురించి విన్నవిస్తాను వినండి. అందరికంటే పెద్ద పిచ్చోడు మహాత్మాగాంధీ. రెండో పిచ్చోడు నేతాజీ సుభాష్ చంద్రబోసు. మూడో పిచ్చోడు ఖాన్ అబ్దుల్ గఫార్ ఖాన్. నాలుగో పిచ్చోడు ఒక అదీబ్". వయోవృద్ధ బోధివృక్షం మాట్లాడ సాగింది - ఆర్యుల వర్ణవాదం అప్రాకృతికమైన సిద్ధాంతం. ఎందుకంటే బ్రాహ్మణుల భార్యలు కూడా నెలనెలా బహిష్టుతో బాధ పడుతున్నవారే. వాళ్లూ గర్భవతులవుతున్నారు. వాళ్లూ పిల్లల్ని కంటున్నారు. వాళ్లకు పాలిస్తూ పోషిస్తున్నారు. బ్రాహ్మణులు స్త్రీల గర్భంలో జన్మించినప్పటికీ బ్రహ్మనోటిలో జన్మించామని వాదిస్తారు. బ్రహ్మనోటిలో గర్భాశయం ఎక్కడుంది? రాత్రిసమయంలో ఔరంగజేబు తన విశ్వసనీయుడైన హంతకుడు నజర్ కుతీ బేగును పిలిపించారు. ఆ గూనివాడు వచ్చి నమస్కరిస్తే, "ఖవాసుపుర భవనంలోకి వెళ్లి, సిపిహర్షికోను తండ్రి నుండి వేరు చేయి. ఆ కాఫిర్ దారాషికో తలనరికి, ఆ తల తెచ్చి నాకు చూపించు" అన్నారు ఔరంగజేబు. హంతకుడు నజర్ బేగును చూసి, "ఈ వేళప్పుడు నువ్వు ఇక్కడకు ఎందుకు వచ్చావు?" అన్నాడు దారాషికో. “సిపిహర్షికోను నీనుండి వేరు చేయమని ఉత్తర్వు". అన్నాడు నజర్ బేగు. ఈ మాట విన్న సిపిహర్ షికో జాగరూకుడయ్యాడు. “మమ్మల్ని చంపడానికి నిన్ను పంపారా?" దార కఠినంగా అడిగాడు. హంతకులిద్దరూ బయట నిరీక్షిస్తున్న సైనికులకు సిపిహర్షికోను అప్పగించి దారాషికో ఉన్న గదిలోకి వెళ్ళి తలుపు మూశారు. బయట సిపిహర్షికో వేస్తున్న కేకలు వినిపిస్తున్నాయి. అప్పుడే కోర్టు మీద చీకటి అలముకోసాగింది.
Khuli Hava
- Author Name:
Shakti Trivedi
- Book Type:

- Description: कुछ दिन इसी प्रकार और बीत गए। अभिवादनों का आदान-प्रदान हो गया। और एक दिन जब सायंकाल को दीये जल चुके थे, तभी अलका लौट रही थी। ऊपर से मणिकलाल ने धीरे से कहा— ‘‘भाभी?’’ वह ठिठक गई और उसने भी धीरे से कहा, ‘जी’। ‘‘आप से एक-दो मिनट बात करना चाहता हूँ?’’ मणिकलाल ने नम्रता भरे शब्दों से कहा। ‘‘इस समय?’’ अलका ने घूँघट में से ही पूछा। ‘‘हाँ। अभी! केवल दो मिनट! आप तनिक मेरे पास इधर आ जाए!’’ ‘‘क्या बात है यहीं कह दीजिए!’’ अलका ने वहीं खड़े-खड़े कहा। ‘‘भाभी ये रास्ता है यहाँ ठीक नहीं है, आप डरिए नहीं। तनिक इधर आ जाओ।’’ कहकर वह द्वार से भीतर को बैठक में चला गया। अलका ने मन-ही-मन सोचा कदाचित् आज ही वह दिन आ गया, जिसकी उसे आशंका थी। उसने सोचा ‘नहीं!’ इसके प्रस्ताव को ठुकरा दो, इसे स्पष्ट मना कर दो। पर उन वस्त्रों और खाद्य पदार्थों के दबाव ने उसे ऐसा नहीं करने दिया और वह अपने स्थान से थोड़ी सी हटकर बैठक के द्वार के निकट खड़ी हो गई बोली—‘‘कहिए?’’ ‘‘देखिए, आप घबराएँ नहीं, अंदर ही आ जाएँ!
Heart Lamp
- Author Name:
Banu Mushtaq
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- Description: In Heart Lamp, Banu Mushtaq exquisitely captures the everyday lives of women and girls in Muslim communities in southern India. Published originally in the Kannada, these portraits of family and community tensions testify to Mushtaq’s years as a journalist and lawyer, in which she tirelessly championed women’s rights and protested all forms of caste and religious oppression. Written in a style at once witty, vivid, colloquial, moving and excoriating, it’s in her characters – the sparky children, the audacious grandmothers, the buffoonish maulvis and thug brothers, the oft-hapless husbands, and the mothers above all, surviving their feelings at great cost – that Mushtaq emerges as an astonishing writer and observer of human nature, building disconcerting emotional heights out of a rich spoken style. Her opus has garnered both censure from conservative quarters as well India’s most prestigious literary awards; this is a collection sure to be read for years to come.
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