Taarabhaayiya Patra
(0)
₹
130
₹ 110.5 (15% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
ಲೇಖಕ ಎಂ. ಆರ್ ದತ್ತಾತ್ರಿ ಅವರ ಕಾದಂಬರಿ ’ತಾರಾಬಾಯಿಯ ಪತ್ರ’. ತಾರಾಬಾಯಿಯು ವಿಕ್ರಮನ ಅಪ್ಪನ ಪ್ರೇಯಸಿ. ಅವಳು ಬರೆದ ಎರಡು ಪತ್ರದಲ್ಲಿ, ದೇವತೆ, ದೇವಿ ಎಂದೆಲ್ಲ ಬರೆದು, ಹೊಡೆದು ಹಾಕಿ, ಅಕ್ಕ ಎಂಬ ಸಂಬೋಧನೆಯೇ ಉಳಿಯುತ್ತದೆ. ಇವು ಏನೆಲ್ಲ ಭಾವಗಳನ್ನು ಹೇಳುತ್ತವೆ? ಏಕಾಂತದೊಳಗಿನ ಲೋಕಾಂತ, ಮೌನದೊಳಗಣ ಮಾತು, ಸಂವಾದದೊಳಗಿನ ಮೌನವೇ ಕಥಾನಕವಾಗಿದೆ ಇಲ್ಲಿ. ರಂಜನಿಗೆ ಇವನ ಕರೆ ಕೇಳಿತೆ? ಗಂಗಾ ತನ್ನ ಗಾಂಭೀರ್ಯದಿಂದಾಚೆ ಬಂದು ಮತ್ತೆ ಇವರಿಬ್ಬರೂ ಒಂದೇ ಪರಿಧಿಯಲ್ಲಿ ಬರುವರೆ? ರಂಜನಿಯನ್ನು ಕನವರಿಸುತ್ತಲೇ ಗಂಗೆಗೆ ಹಪಹಪಿಸುವ ವಿಕ್ರಮ ಆಯ್ಕೆ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳುವುದು ಯಾರನ್ನು? ಯಾವ ಅಂತಃಕರುಣೆಯ ಕರೆ ವಿಕ್ರಮನೊಳಗಿನ ಪ್ರೀತಿಯನ್ನು ಮತ್ತೆ ಸೋಕುತ್ತಲೇ ಆವರಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತದೆ? ಈ ಎಲ್ಲ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳಿಗೆ ಉತ್ತರ ಕೃತಿಯಲ್ಲಿದೆ.
Read moreAbout the Book
ಲೇಖಕ ಎಂ. ಆರ್ ದತ್ತಾತ್ರಿ ಅವರ ಕಾದಂಬರಿ ’ತಾರಾಬಾಯಿಯ ಪತ್ರ’. ತಾರಾಬಾಯಿಯು ವಿಕ್ರಮನ ಅಪ್ಪನ ಪ್ರೇಯಸಿ. ಅವಳು ಬರೆದ ಎರಡು ಪತ್ರದಲ್ಲಿ, ದೇವತೆ, ದೇವಿ ಎಂದೆಲ್ಲ ಬರೆದು, ಹೊಡೆದು ಹಾಕಿ, ಅಕ್ಕ ಎಂಬ ಸಂಬೋಧನೆಯೇ ಉಳಿಯುತ್ತದೆ. ಇವು ಏನೆಲ್ಲ ಭಾವಗಳನ್ನು ಹೇಳುತ್ತವೆ? ಏಕಾಂತದೊಳಗಿನ ಲೋಕಾಂತ, ಮೌನದೊಳಗಣ ಮಾತು, ಸಂವಾದದೊಳಗಿನ ಮೌನವೇ ಕಥಾನಕವಾಗಿದೆ ಇಲ್ಲಿ.
ರಂಜನಿಗೆ ಇವನ ಕರೆ ಕೇಳಿತೆ? ಗಂಗಾ ತನ್ನ ಗಾಂಭೀರ್ಯದಿಂದಾಚೆ ಬಂದು ಮತ್ತೆ ಇವರಿಬ್ಬರೂ ಒಂದೇ ಪರಿಧಿಯಲ್ಲಿ ಬರುವರೆ? ರಂಜನಿಯನ್ನು ಕನವರಿಸುತ್ತಲೇ ಗಂಗೆಗೆ ಹಪಹಪಿಸುವ ವಿಕ್ರಮ ಆಯ್ಕೆ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳುವುದು ಯಾರನ್ನು? ಯಾವ ಅಂತಃಕರುಣೆಯ ಕರೆ ವಿಕ್ರಮನೊಳಗಿನ ಪ್ರೀತಿಯನ್ನು ಮತ್ತೆ ಸೋಕುತ್ತಲೇ ಆವರಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತದೆ? ಈ ಎಲ್ಲ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳಿಗೆ ಉತ್ತರ ಕೃತಿಯಲ್ಲಿದೆ.
Book Details
-
ISBN9789384908454
-
Pages118
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Bina Muradonwala Diya
- Author Name:
Rekha Jha
- Book Type:

- Description: ‘बिना मुरादों वाला दीया’ रेखा झा का लघु उपन्यास है जिसमें समस्तीपुर जिले के पूसा के साथ उन्होंने अपने बचपन के उन दिनों को याद किया है जिन्हें हम सब अपने जीवन में हमेशा अपनी यादों में जीते रहते हैं। छुम छुम बस में छुम-छुम ड्रेस पहनकर मुन्नी का पूसा जाना, वहाँ अपनी झुंड-भर मासियों की नन्ही बिल्ली बन जाना, और उनके साथ उस बड़ी दुनिया से परिचित होना जो उसके लिए अभी बिलकुल नई है। उसे बताया जाता है कि ‘मजार भी एक तरह का मन्दिर ही होता है। जिस तरह मन्दिर में भगवान होते हैं, मजार में पीर बाबा होते हैं।’ सिर्फ यही नहीं, पूसा में आम और लीची के बाग भी हैं जहाँ इतने किस्म के आम और इतनी किस्म की लीचियां हैं कि मुन्नी को स्कूल जाना भी नहीं अखरता। और फिर गुल्लू मासी तो हैं ही! एक मीठे बचपन की यह मीठी कहानी एक रौ में अपने-आपको पढ़वा लेती है; जिस माधुर्य और जीवन्तता के बारे में यह उपन्यासिका बताती है, वह मिठास और जीवन इसकी अपनी बुनावट का भी हिस्सा है।
Jinhen Jurme Ishq Pe Naaz Tha
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description: यह उपन्यास 'जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था' हमारे चारों ओर पसरते जा रहे अंधकार को चीरकर एक प्रकाश-पुंज की तरह सामने आता है। निराशा के इस जानलेवा समय में पंकज सुबीर की यह कृति हमें हौसला और उम्मीद बँधाती है। इसे पाठ्यक्रमों में सम्मिलित किया जाना चाहिए और युवाओं तक निःशुल्क पहुँचाया जाना चाहिए। आज के पुस्तक और प्रेम विरोधी दौर में ऐसा कुछ किया जाना चाहिए कि 'जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था' उपन्यास घर-घर में पढ़ा जाए। हिन्दी के चर्चित लेखक पंकज सुबीर का तीसरा उपन्यास। पंकज सुबीर के पहले दोनो उपन्यास "ये वो सहर तो नहीं" और "अकाल में उत्सव" बहुत अधिक चर्चित रहे हैं। कई सारे सम्मान इन दोनो उपन्यासों पर प्राप्त हुए। और अब पंकज सुबीर का तीसरा उपन्याास "जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था" प्रकाशित होकर आया है। पंकज सुबीर अपनी अलग तरह की शैली तथा विशिष्ट भाषा के लिए पहचाने जाते हैं। यह उपन्यास भी उसी कड़ी में एक प्रयोग है। यह उपन्यास मानव सभ्यता के पिछले पाँच हज़ार वर्षों की कहानी कहता है। और तलाशने की कोशिश करता है कि आख़िर वो क्या है, जिसके कारण मानव सभ्यता पिछले पाँच हज़ार साल केवल लड़ाई और युद्ध में ही गँवा चुकी है। यह उपन्यास बहुत सूक्ष्मता के साथ पिछले पाँच हज़ार सालों की कहानी का अवलोकन करता है। पाठक को एक ऐसी दुनिया में ले जाता है, जहाँ वर्तमान और भविष्य के संकेत मिलते हैं।
Mujhe Sooraj Chahiye
- Author Name:
Akash Mathur
- Rating:
- Book Type:


- Description: ‘मुझे चाँद चाहिए’ की जगह ‘मुझे सूरज चाहिए’ की सशक्त दावेदारी ठोकती तीन अलग-अलग आयु वर्ग की स्त्रियाँ। जो अपने ही साथ भगवान या तथाकथित भगवान की भी आज़ादी की माँग करती हैं। मुझे चाँद चाहिए ये इच्छा जहाँ एक सादगी भरी सौम्य ऊँचाई की, अस्तित्व की माँग हैं। वहीं मुझे सूरज चाहिए अधिक उग्र किंतु आत्मविश्वास से सूरज को सम्भाल लेने की भावना को इंगित करती है। ये किसी ऐसे फ़रियादी की फ़रियाद भी लगती है जो सहनशक्ति के आख़िरी छोर पर आ पहुँचा है और अब चाँद की शीतलता भरी ऊँचाई नहीं आकाश के भाल पर चमकते सूरज की गर्मी ही उसे ठंडक दे सकती है। आकाश माथुर का लिखा ये उपन्यास शिवना प्रकाशन से आया है। जिसका विमोचन 2024 के विश्व पुस्तक मेला नई दिल्ली में हुआ। इस से पहले उनका उपन्यास ‘उमेदा-एक योद्धा नर्तकी’ सफलता अर्जित कर चुका है और आज भी चर्चित है। इस उपन्यास की कहानी शुरू होती है एक सम्भ्रांत परिवार की मध्य-आयु की एक विधवा के सादे जीवन के साथ जिसे एक भरा-पूरा संयुक्त परिवार बहुत सम्मान के साथ देखता है और पूजता है। साथ ही परिवार की एक पुत्र-वधू और उसकी बेटी के अपने-अपने पीढ़िगत संघर्षों को उपन्यास बहुत संवेदना के साथ चित्रित करता है। मध्य-प्रदेश के ग्रामीण समाज की कुरितियों को बहुत विस्तार से आकाश स्पष्ट करते हैं। ये सामाजिक कुरीतियाँ आख़िर तो स्त्री के मन और तन को रौंद कर की ख़ुद को जीवित रखें हुए हैं। वो फिर चाहे शादी की आटा-साटा प्रथा हो या नातरा। आटा-साटा में जहाँ वार या वधू के ससुराल के ही किसी महिला या पुरुष से घर की किसी महिला या पुरुष की शादी कर दी जाती हैं। यानि ये ज़रुरी नहीं आप ससुराल में जाकर अपनी बहन के ननदोई ही बने, आप उसके दामाद भी बन सकते हैं। जिन अयोग्य पात्रों की शादी ना हो रही हो वहाँ प्रभावी परिवार दूसरे परिवार पर इस तरह का दबाव बना लेता है। जिस में आर्थिक कमजोरी सबसे बड़ा कारण होता है। इसी प्रकार नातरा में दूसरी शादी आपसी सहमति से तलाक़ ले कर ली जाती है और दूसरी शादी के एवज़ में परिवार बड़ी रक़म कमाता है। इसमें स्त्री को एक घर से उठ दूसरे घर जा बसने की पीड़ा से गुजरना पड़ता है। रमा ऐसे ही आटा-साटा की चपेट में आकर अपने ही भाई की विधवा सास बन बैठी थी। एक पढ़ी-लिखी उमंगो से भरी लड़की की एक बूढ़े व्यक्ति से शादी, उसके कौन-कौन से अरमानो को तिरोहित करती है इसका वर्णन लेखक ने बहुत संवेदनशीलता के साथ किया है। जंगल को, प्रकृति को सम्मान देना और पूजना हमारी परम्परा है और ये उसकी जीवनदायिनी शक्ति का सम्मान व आदर है। जिसे पूजते-पूजते हम उसकी पूजा में उसे ही नष्ट करने लगते हैं और कर्मकांडों में फँस कर स्वयं की और भगवान की ग़ुलामी की नीवों को पोषित करते हैं। इस भाव की विवेचना, कारण और निवारण पर लेखक ने खुल कर कलम चलाई है और विस्तार के साथ बहुत ही सुलझी हुई भाषा में इस विषय को बरता है। उसमें जहाँ लेखक पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समाज के उपेक्षा के सवाल उठाते हैं। वहीं वो धर्मांधता पर भी कटाक्ष करने से नहीं चूकते। आकाश के स्त्री पात्र परिस्थितियों के शिकार अवश्य हैं, लेकिन कमज़ोर नहीं हैं। और अंत में सशक्त रूप से अपने हिस्से के सूरज के लिए खड़े होते हैं। यहाँ अच्छी बात ये है कि वे एक दूसरे के दुश्मन नहीं है और बहनापे की सहायता से पित्र-सत्ता और रूढ़ियों के ख़िलाफ़ खड़ी होती हैं। जो आकाश के लेखन को सामयिक बनाता है। उपन्यास की भाषा देशकाल - अनुकूल है और सहज है। अपने पात्रों के साथ। एडिटिंग अच्छी है, इसलिए उपन्यास को बहुत अधिक लम्बाई तक ना खींच कर विषयानुसर लेखक कम में ही अपनी बात रख पाने में समर्थ है। जिसके लिए लेखक को बहुत शुभकामनाएँ। ये एक सामाजिक सरोकारों से भरा उपन्यास है जो भगवान सहित अपने पात्रों की वकालत सफलता से करता नज़र आता है। वन और प्रकृति के कुछ द्रश्य बहुत ही सुंदरता से लिखे गए हैं। वहीं स्त्रियों के सन्दर्भ में एक जगह आकाश लिखते हैं। — ‘महिलाओं की ख़ासियत है कि वे उम्र में छोटी होकर भी अपने से बड़ों पर मातृत्व न्योछावर कर देती हैं। जबकि एक छोटा पुरुष इस तरह का व्यवहार अपने से बड़े पुरुष के साथ नहीं कर सकता। असल में महिलाओं का मूल ही प्रेम है।’ वहींं एक जगह वो लिखते हैं। — ‘स्त्रियों के मन और तन पर उनका अपना अधिकार नहीं है। उस पर भी पुरुष, धर्म, समाज और पता नहीं किस-किस का क़ब्ज़ा है।’ सती को पूजना भी कहीं ना कहीं सती-प्रथा को अभी तक सही मानना ही है, परिवर्तन अपने जीवन में ला सकती है तो स्त्री ही ला सकती हैं, जैसी हिम्मत देता आकाश माथुर का ये नया उपन्यास निश्चय ही पठनीय है।
Kawale and Manas
- Author Name:
Uttam Kamble
- Book Type:

- Description: कावळे आणि माणसं... एक जमिनीवरून चालणारा आणि हवेत उडणारा पक्षी तर दुसरा जमिनीवरून चालणारा आणि कल्पनेचे पंख घेऊन उडणारा... दोघांचं भौतिक जग भिन्न वाटत असलं तरी मानसिक जग जवळपास जाणारं... काही वेळा कावळे माणसासारखं वागतात तर माणसं कावळ्यासारखं... कावळा माणसाचा बाप बनतो पण माणूस कावळ्याचा बाप नाही बनत... ज्या माणसाच्या सहवासात कावळा राहतो त्याचे गुण-दुर्गुण उचलतो... कधी कधी कावळा माणसापेक्षा शहाणा होतो तर कधी कधी असहाय्य माणूस कावळ्यासमोर हात जोडतो... कावळे, माणसं आणि स्मशान यांना शब्दात पकडण्याचा हा एक प्रयत्न... Kawale and Manas : Uttam Kamble कावळे आणि माणसं : उत्तम कांबळे
Dhikku - Award Winning Novel
- Author Name:
Devidasa Kadam +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: The novel Dika, which means "direction" in Konkani, tells the story of a farming family from the lower middle class. It is set in the North Kanara district of Karnataka and offers a vivid portrayal of the socio-cultural life of the region's inhabitants. The plot follows Deepak and his family as they struggle to adapt to a new way of life in their village after the sudden death of Deepak's father, a policeman. Along the way, they encounter various challenges, including problematic villagers, conniving relatives, and blind faith. When Deepak's sister falls in love with a Muslim boy, he must confront societal norms and convince his mother to accept their relationship. Ultimately, Deepak leads his family to a new and free existence, breaking free from the constraints imposed on them by society. This is best exemplified in the novel's closing scene, where Deepak witnesses a lone crow moving eastward, away from its flock, in a new direction.
Pyar Mein Shaheen Bagh
- Author Name:
Rathor Bichitramani Singh
- Book Type:

- Description: ‘प्यार में शाहीन बाग’ राठौर विचित्रमणि सिंह का पहला उपन्यास है जो देश के बदलते हालात को ऐतिहासिक, राजनैतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में देखते हुए प्रेम और घृणा, हिंसा और अहिंसा के मुद्दे को तथ्य और तर्क की कसौटी पर लेकर कसते हैं और अंत में स्वीकार करते हैं कि जानना और समझना मानवीय संबंधों को बहाल करने की कसौटी है। उपन्यास हिमांशु नामक युवक के बचपन से शुरु होता है जहां उसके अवलोकन और समझ की जगह उस पर झूठा सच थोपा जाता है। इससे नफरत की इकहरी दृष्टि लेकर वह शाहीन बाग के आंदोलन को ध्वस्त करने के इरादे से जाता है जहां विष भरे हृदय में प्यार अंकुर उगता महसूस करता है सोफिया से जो गांधी से प्रभावित है। उपन्यास का यह हिस्सा फसाद, गलत प्रचार, दुखद घटनाओं व हत्याओं से पाठक के मन पर गहरा असर डालता है और स्वयं हिमांशु के अंदर की इंसानियत उसकी हैवानियत पर भारी पड़ती है। वह इसी भावना के वेग में आकर असम आंदोलन में शिरकत करता है और कहता है कि जहां-जहां शाहीन बाग उभरेगा, वहां वहां मैं मौजूद रहूंगा। देशप्रेम, आपसी भाईचारा व सकारात्मक व नकारात्मक सोच को बिना किसी लंबी व्याया के लेखक ने समय के सूप से पछोड़ कर अलग व सराहनीय काम किया है। उपन्यास पढ़ा जाना चाहिए जिसके लिए लेखक बधाई का पात्र है।-नासिरा शर्मा
Main Bhi Padhne Jaoongi
- Author Name:
Jyoti Parihar
- Book Type:

- Description: मैं भी पढ़ने जाऊँगी" ज्योति परिहार द्वारा लिखी गई एक बाल-साहित्यिक पुस्तक है, जिसे राधाकृष्ण प्रकाशन ने 2011 में प्रकाशित किया था। यह पुस्तक बच्चों के लिए है और इसकी कुल 28 पृष्ठ हैं।
Mr. Lapata (Tiwari)
- Author Name:
Devendra Pandey
- Book Type:

- Description: इश्क़ बकलोल' और 'बाली श्रृंखला' के लेखक की नई पेशकश "कल ऐसे ही गिरते पड़ते मिले थे, बस से उतरे और मुंह के बल गिरे थे, रास्ते मे भी कई दफा गिरते पड़ते रहें हैं।आज भी ठोकर ही खाते दिखाई दे रहें हैं। लगता है ठोकरों से पुराना रिश्ता है इनका, या ठोकरों का ही अपनापन ज्यादा है इनके लिए।" "शायद आपके गांव का हम शहर वालों से प्यार जताने का यह अपना तरीका है" "हां! जब तक आप इसे अपना नहीं मानेंगे तब तक कहां आपको इस प्यार दुलार का अहसास होगा? जड़ें तो यहीं से है आपकी, जब आपको यहां अपनापन दिखने लगेगा तब आपको इन ठोकरों में भी दुलार ही दिखेगा।" "ऐसे दुलार से दूरी भली।" "आप दूर ही तो हैं।" उसकी इस बात पर वह चाह कर भी मुस्कुरा नही पाया।
Chhayarekha - Award Winning Novel
- Author Name:
Mousumi Bose +1
- Book Type:

- Description: এই বইটি সময় এবং ঘটনার সারমর্ম ক্যাপচার করে, কীভাবে নির্দিষ্ট লাইন মানুষকে একত্রিত বা বিভক্ত করতে পারে তা চিত্রিত করে। এই লাইনগুলি এক দৃষ্টিকোণ থেকে দৃশ্যমান হতে পারে কিন্তু অন্য দৃষ্টিকোণ থেকে অস্তিত্বহীন। এগুলি কেবল একজন ব্যক্তির স্মৃতিতে থাকতে পারে তবে অন্যদের দ্বারা কল্পনা করা যেতে পারে। আখ্যানটি একটি নির্দিষ্ট গল্প বলার চেষ্টা না করেই বিভিন্ন লোকের স্মৃতির একটি জটিল জাল বুনেছে। পরিবর্তে, এটি পাঠককে জড়িতদের স্মৃতি ব্যবহার করে তাদের নিজস্ব গল্প তৈরি করতে দেয়, যাদের প্রত্যেকেরই ভিন্ন অভিজ্ঞতা রয়েছে। উপন্যাসটি স্বদেশী আন্দোলন, দ্বিতীয় বিশ্বযুদ্ধ, ভারত বিভাজন এবং ঢাকা ও কলকাতায় 1963-64 সালের সাম্প্রদায়িক দাঙ্গা সহ উল্লেখযোগ্য ঐতিহাসিক ঘটনার সময় রচিত।
Gadiwalon Ka Katra
- Author Name:
Aleksandr Kuprin
- Book Type:

- Description: गाड़ीवालों का कटरा जारकालीन रूस की पृष्ठभूमि में वेश्यावृत्ति की ज्वलन्त समस्या का हृदयविदारक चित्र प्रस्तुत करता है। कुप्रिन सामाजिक बीमारियों को छिपाने में विश्वास नहीं रखते थे और मानते थे कि भयंकर से भयंकर सत्य को उजागर करना मनुष्य के हित में है। इसी कारण उन्होंने इस उपन्यास में वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर स्त्रियों की दारुण कथा के जरिये मानव-समाज के अकल्पनीय पतन का ऐसा हाल बयान किया जिसे वेश्यावृत्ति के विषय पर पहला और अन्तिम ईमानदार काम माना जाता है। इस उपन्यास ने प्रेमचन्द को भी गहरे प्रभावित किया था।
Imperfect Maa
- Author Name:
Ankita Jain
- Book Type:

- Description: एक माँ के रूप में ख़ुद को और अपने बच्चे को बेहतर समझने का अवसर देती है यह किताब । पैरेंट्स बनने से पहले मन में अनगिनत संशय, उत्सुकताएँ और भय होते हैं और पैरेंट्स बन जाने के बाद तो हर क्षण कुछ-न-कुछ बदलता रहता है- पल-प्रतिपल नयी चुनौतियाँ सामने आती हैं और सलाह की ज़रूरत महसूस होती है। पहले हम यह सलाह दादी-ताई से लेते थे, आज इंटरनेट से लेते हैं । पर हम सब जानते हैं कि ऐसी सलाहें अक्सर उतनी मददगार नहीं होतीं, कई बार तो उलझन और बढ़ा देती हैं। यह किताब किसी भी तरह के निर्देश देने का दावा नहीं करती। इसके विपरीत, यह स्वीकार करती है कि हर माँ, हर बच्चा और हर परिस्थिति अलग होती है। इसलिए यह केवल अपने अनुभवों को साझा करती है - ताकि आप पढ़ते हुए कभी अपने अनुभवों से जुड़ सकें, और कभी उनसे अलग होकर अपनी स्थितियों को नये नज़रिये से समझ सकें ।
Akaal Me Utsav
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description: ‘‘इस साल उपन्यासों में केवल एक किताब उल्लेखनीय है -पंकज सुबीर का उपन्यास ‘अकाल में उत्सव’। यह गाँव और किसान जीवन के दुख-दर्द कहने वाली रचना है। इस उपन्यास को पढ़कर कहा जा सकता है कि किसान जीवन में आजकल सुख कम और दुख ज़्यादा है। इस उपन्यास में एक किसान की आत्महत्या भी है। शासन-प्रशासन द्वारा उस किसान को पागल घोषित कर अपनी ज़िम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है।’’ -डॉ. मैनेजर पांडेय (शीर्ष आलोचक) ‘जनसत्ता’ समाचार पत्र में ‘साहित्य इस बरस’ चर्चा के अंतर्गत वर्ष 2016 की महत्त्वपूर्ण पुस्तकों की चर्चा करते हुए।
Manthan
- Author Name:
Utkarsh Pandey
- Book Type:


- Description: WHAT HAPPENS WHEN GODS LOOK UP TO A MERE CHILD AS THE SAVIOUR OF PRITHVI? IS HE THE AVATAR THE WORLD AWAITS? WILL THIS BE THE END OF KALIYUGA? Religion, truthfulness, cleanliness, tolerance, mercy, duration of life, physical strength and memory will all diminish day by day hypnotised by the powerful influence of the Age of Kali. Blessed by Lord Shiva but banished by the other Gods to the depths of the underworld, a Deva seeks revenge. Punished for his valiant sacrifice and betrayed by his own kin, he decides to turn humans against their Gods. He arises as the powerful and invincible Kali, the creator of chaos and turmoil on Prithvi. Adi Parashakti, the Supreme Goddess is left with only two choices… to destroy Prithvi or to summon a power to stand against the might of Kali. As the world most eagerly awaits the Kalki Avatar, signifying the cleansing of the world from all its sorrows, Vasu, born to humble parents, unwittingly finds himself catapulted into the middle of a mighty churning, a MANTHAN, his simple and content life turned upside down. Does the fate of Prithvi rest on the shoulders of a mere boy? Is he the chosen one? The story of a boy who was destined to be God.
Bida Ki Raat
- Author Name:
Amarkant
- Book Type:

- Description: यथार्थवादी कथाकार अमरकान्त के इस चर्चित उपन्यास के केन्द्र में आज़ादी के बाद का भारतीय मुस्लिम समाज, उसकी संस्कृति, उसकी सोच और उसके सामाजिक-पारिवारिक मरहले हैं। मुस्लिम महिलाओं के हालात पर लेखक ने इस उपन्यास में ख़ासतौर पर अपना ध्यान केन्द्रित किया है। भारत और पाकिस्तान का बँटवारा इस कथा में बार-बार विचार के केन्द्र में आता है और वह माहौल भी जो बँटवारे के वक़्त विशेष तौर पर उन इलाक़ों में मौजूद था जहाँ हिन्दू-मुस्लिम बरसों से साथ रहते आए थे। उपन्यास का एक पात्र मुनीर अहमद इन हालात के मद्देनज़र कहता है कि आज़ादी के पहले मज़हब और जात-पाँत के अलगाव तो थे, मगर सभी अपनी-अपनी हद में रहते हुए आज़ादी की लड़ाई में शामिल थे, लेकिन आज़ादी के बाद यह चीज़ गायब हो गई। साम्प्रदायिक दंगों के दौरान आम लोगों की स्थितियाँ भी इस उपन्यास में दिखाई देती हैं। इस उपन्यास के बारे में मशहूर है कि अमरकान्त जी ने इसकी पांडुलिपि को तब तक छपने नहीं दिया था जब तक इस्लामी समाज और धार्मिक पहलुओं के जानकार लोगों को इसे पढ़वा नहीं लिया। भारतीय मुस्लिम समाज के सांस्कृतिक, सामाजिक व आर्थिक मसलों पर केन्द्रित एक महत्त्वपूर्ण उपन्यास।
Kamkaji Mahila Hostel
- Author Name:
Kalpna Varma
- Book Type:

- Description: जरूरी नहीं कि तूफान से सब कुछ अस्त-व्यस्त ही हो जाए। तूफान से रास्ता साफ भी होता है। यह सकारात्मकता मेरे भीतर उठते तूफानों से दृश्यों को साफ करने का काम करती है, शब्दों की ताकत से परिचय कराती है। शब्द घाव भी करते हैं और घाव को भरते भी हैं, क्योंकि शब्दों का अपना तापमान होता है, उनमें कूलिंग और हीटिंग का सन्तुलन बनाना लेखकीय दायित्व होता है। इसलिए जब भी मैं कहने के लिए उतावली हुई हूँ शब्दों का चयन मैंने संभल कर किया है। भावनाओं, संवेदनाओं और अनुभवों ने जो तानाबाना बुना उससे कहानी को आकार दिया है। कहानियों में ठहरे हुए पलों की कहानी है, उम्र से परे वैचारिक मित्रता है, जिन्दगी के बदलते हुए दृश्य हैं, जानने-मानने-चाहने जैसे विरोधाभास हैं। गलत दिशा में भाग रही भीड़ का हिस्सा न बनकर मैंने सही दिशा मे अकेले चलने को बेहतर माना है।
Mahamaya
- Author Name:
Sunil Chaturvedi
- Book Type:

- Description: कमलेश्वर ने जब कहा कि ईश्वर ने आदमी के जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा घेर रखा है तब उनका इशारा संभवत: उस विराट कारोबार की तरफ भी था जो धर्म के नाम पर फल-फूल रहा है। धर्म और अध्यात्म अगर इस देश के समृद्ध वर्ग के लिए प्रतिष्ठा मूल्य रहे हैं तो आम आदमी के लिए श्रद्धा एवं आस्था के केन्द्र! कुम्भ, सिंहस्थ और अन्य धार्मिक समागमों में लाखों की संख्या में उमडऩे वाली भीड़ इसी का प्रमाण है। इसी बीच पिछले तीन-चार दशकों में दर्जनों नए-पुराने छोटे-बड़े अवतार, महात्मा, धर्माचार्य, बाबा, योगी, प्रवचनकार उभरे और उनके करोड़ों की सम्पत्ति वाले विशाल मठ, संस्थान, प्रतिष्ठान वगैरह बड़े हुए है। उन्हें थैलीशाहों-राजनेताओं का संरक्षण प्राप्त रहा है। बहुत सारे धार्मिक संस्थानों, प्रतिष्ठानों की बाहरी दुनिया अगर कर्मकाण्डों, अंधश्रद्धा एवं तर्कातीत विश्वासों पर खड़ी है तो भीतरी दुनिया रहस्यमयी अंधेरी, बंद और गंदगी से बजबजाती सुरंगों एवं षड्यंत्र कक्षों वाले तह$खानों से बनी है। सुनील चतुर्वेदी ने इस दुनिया के बाहर-भीतर को बहुत नजदीक से देखा, समझा और अनुभव किया है। 'महामाया' उपन्यास इसी सबका एक तरह का सर्जनात्मक एवं कथात्मक दस्तावेज है। सुनील चतुर्वेदी पत्रकार रहे हैं, व्यंग्यकार भी! इसके अलावा साक्षरता, जल संरक्षण जैसे राष्ट्रीय अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। इस सबसे उनकी दृष्टि में जो पैनापन व गहराई आए हैं उन्हें इस उपन्यास में देखा जा सकता है। यह बात उपन्यास को महत्त्वपूर्ण बनाती है।
Peer Nawaz
- Author Name:
Raju Sharma
- Book Type:

- Description: राजू शर्मा मन:स्थितियों की महीन डिटेल्स से अपने कथा-पात्रों का व्यक्तित्व रचते हैं। कहानी को सरपट इतिसिद्धम तक ले आनेवाले कथाकारों से अलग उनकी कहानी एक पूरा वातावरण बुनती हुई चलती है, असंख्य सच्चाइयों का एक विस्तृत ताना-बाना जिसका हर रेशा किसी साधारण कथाकार के लिए एक अलग कहानी या उपन्यास का विषय बन जाए। इसी गझिन बुनावट में उनका कथा-रस निवास करता है जिसमें पाठक उनके पात्रों के साथ अपने ख़ुद के मन की कई परतों को भी आकार लेते महसूस करता है। यह कथा जतिन की है जिसके साथ कथावाचक राघव का रिश्ता कुछ इस तरह से जटिल है: 'एक क्षण के लिए कल्पना कीजिए कि अचानक एक अजनबी सामने प्रकट होता है, जो तीस साल पहले तुम्हारा कॉलेज का सहपाठी था, आम दोस्ती थी...स्वाभाविक था तुम उसे भूल गए। अब वह सामने खड़ा है और एक निरीह नग्नता से अपना नाम, पता बतला रहा है। जैसे ही तुमने उसे पहचाना, एक स्मरण ने तुम्हें बाँध लिया : एक तस्वीर, अधखुले दरवाज़े का एक फ्रेम, जिसके पीछे यही शख़्स तुम्हारी प्रेमिका को बाँहों में बाँधे चूम रहा था।’ सालों बाद हुई इस मुलाक़ात के बाद धीरे-धीरे उसका एक नया रूप सामने आता है। वह बताता है कि उसे कहानी लिखने का वायरस लग गया। वह कहानियाँ लिखता है जो सच हो जाती हैं। वह उसे अपनी कहानियाँ सुनाता है और फिर कहता है... ‘डॉ. राघव रे, प्लीज़ सेव मी, आई एम सिंकिंग।’ ‘उसकी मनोदशा सामान्य नहीं थी, वह बीमार था और नहीं भी था। पर उसका स्वास्थ्य बिगड़ता चला गया...अन्त में एक वक़्त आया जब जतिन गम्भीर हालत में अस्पताल में भरती हुआ।’ लेकिन फिर एक दिन वह अस्पताल से ग़ायब हो गया...
The Last Fliker
- Author Name:
Gurdial Singh +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Long ago Dharam Singh's father had brought Thola to this village. He treated him as his own brother and had even gifted four bighas of land to him. After Thola's death, Dharam Singh took sole responsibility of his son Jagsir and his mother Nondi. Over the years however, things changed. The tragedy of Jagsir is not confined to this. It is also a tragedy of unfulfilled love of Bhani, Nikka's wife. Through his long years of loneliness, it is opium which somewhat alleviates the storm raging inside him.
Samudrantike Novel
- Author Name:
Dhruv Bhatt
- Book Type:

- Description: बंगाली के यहाँ हम बहुत देर तक रुके रहे। बंगाली ने गीत गाए। मुखिया ने भी भजन गाए। बारिश नहीं हुई तो क्या होगा, ऐसी चिंता व्यक्त की! तब बाबा बोला, ‘‘नहीं, बरसात जरूर आवेगी, जोरों से आवेगी।’’ रात होने को आई, तब हम उठे। बाबा नीचे तक हमें छोड़ने आया। फिर कहने लगा, ‘‘देख मुखी, एक बात मान, तेरे गाँव में जो बच्चे हों, उन सबको थोड़े दिन हवेली भेज दे और मवेशियों को बाँधना नहीं, ऐसे ही खुले छोड़ देना।’’ ‘‘क्यों?’’ एक बाबा ऐसी नई व्यवस्था करने को कहे, यह मेरे लिए कुछ अजीब था। ‘‘क्यों, छोकरे लोग बँगले में रहेगा तो तेरे कु तकलीफ है क्या?’’ ‘‘नहीं, पर गाय-बैलों को क्यों नहीं बाँधना?’’ मैंने पूछा। ‘‘सुन, डराता नहीं हूँ, पर ये अपने अनंत महाराज हैं न, ये दरिया, दो-तीन दिन से ठीक से बात नहीं करते। लगता है महाराज शायद तूफान कर देंगे।’’ —इसी उपन्यास से पारंपरिक, अविज्ञान-सम्मत, आस्था प्रधान समाज और मुनाफाखोर निंदक समाज के बीच के गतिरोध और संघर्ष को संतुलित करता प्रभावी उपन्यास। इसमें लोक है, लोकनायक हैं, जो उपन्यास के ताने-बाने को बुनते हैं। एक प्रभावी, पठनीय उपन्यास।
Shamana Thayi
- Author Name:
Sane Guruji +1
- Book Type:

- Description: DESCRIPTION AWAITED
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book