Begudi
(1)
Author:
R. Lakshminarayana, Kiran NagarkarPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
KannadaCategory:
Contemporary-fiction₹
350
290.5 (17% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Kannada Translation of Award winning book Cuckold by Kiran Nagarkar
Read moreAbout the Book
Kannada Translation of Award winning book Cuckold by Kiran Nagarkar
Book Details
-
ISBN9788126043835
-
Pages695
-
Avg Reading Time23 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Parstree
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description:
प्रख्यात बांग्ला कथाकार विमल मित्र का यह उपन्यास एक ऐसे आदर्शवादी युवक की कहानी है, जो अपने जीवन में कुछ महान कार्य कर दिखाने की आकांक्षा रखता है, लेकिन कई अप्रत्याशित घटनाएँ उसे कुछ और ही बना देती हैं, जिसकी ख़ुद उसने या किसी ने भी कल्पना नहीं की थी। घटनाचक्र में पड़कर वह कई मोड़ों से गुज़रता है, और अन्त में जब वह इच्छित पथ पा लेता है तो उसे बोध होता है कि जीवन की वास्तविकता क्या है। इस क्रम में उसे जीवन के अनेक रूप देखने को मिलते हैं तथा बहुत कुछ बलिदान भी करना पड़ता है। विकृतियों का चरम भोग भोगते हुए उसने कीचड़ में कमल की तरह खिलते सुकृतियों के स्वरूप भी देखे। पात्र और घटनाएँ उपन्यास में इस तरह गुँथे हुए हैं कि सहसा यह कह पाना मुश्किल होगा कि इस उपन्यास की कथा-वस्तु चरित्र द्वारा अनुशासित है अथवा घटनाओं द्वारा। एक की जीवन्तता और दूसरे की सहजता ने कथा को लयात्मक गति व विस्तार दिया है। ‘परस्त्री’ की एक विशेषता यह भी है कि इसकी कथा समकालीन सामाजिक जीवन की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है। यह व्यक्ति के अन्तर्मन के रहस्यों को नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन के यथार्थ को उजागर करती है। सिर से पाँव तक भ्रष्टाचार में डूबे व्यवस्था-तंत्र और उससे त्राण पाने के लिए छटपटाते सामान्यजन की वेदना का अत्यन्त सजीव चित्रण इस उपन्यास में हुआ है।
Is Shahar Mein Ik Shahar Tha
- Author Name:
Jaya Jadwani
- Book Type:

- Description:
विभाजन भारतीय उपमहाद्वीप का ऐसा दारुण जख़्म है जो न जाने कितने दिलों के भीतर मुसलसल टीस रहा है। जया जादवानी का उपन्यास ‘इस शहर में इक शहर था’ विभाजित सिन्ध और उसके लोगों की कसक और पीड़ा का आख्यान है। यह एक जगह से उजड़ और बिखर कर दूसरी जगहों पर जड़ें जमाने की संघर्ष भरी दास्तान भी है जहाँ ऊपरी तौर पर भले ही सब कुछ सहज लगता हो पर उनकी रूह का एक हिस्सा कहीं बहुत पीछे के शहर में फंसा रह गया है। अपनी रूह के इसी गुम हिस्से की तलाश में उपन्यास का वाचक ‘नन्द’ कराची पहुँचता है जहाँ से उसे शिकारपुर जाना है, जहाँ जाने की उसे अनुमति नहीं है। जहाँ उसे अपने ही जैसे बिखरे हुए लोगों से मिलना है, जिन्हें उसकी तलाश में इस तरह से मददगार होना है जैसे वे अपनी ही मदद कर रहे हों। शिकारपुर—जहाँ उसका बचपन बीता है, जहाँ से निकलकर वह बम्बई में रहते हुए दुनिया भर में भटक रहा है। यह स्मृति में धँसी हुई एक ऐसी विलक्षण यात्रा है जहाँ एक बूढ़ा आईने के सामने अपने आपसे सिन्धी में बतिया रहा है; कोई बरसों बाद मिली एक बूढ़ी औरत के साथ रोटी खाते हुए उसकी गोद में रो रहा है, वह श्मशान जहाँ नन्द के लोग जलाए गए, वह गलियाँ जहाँ वे चले, उनमें ठहरते और चलते हुए नन्द अपने पुरखों के तलवों का दुख-दर्द जी रहा है। जहाँ से अपने बचपन के प्यार की एक झलक भर देखकर बिना कुछ कहे वह वापस चला आता है कि बार-बार आने की एक वजह यह भी बनी रहे।
Shahi Shikar
- Author Name:
Abhishek Sighal
- Book Type:

- Description:
Book
Deh Ki Keemat
- Author Name:
Tejendra Sharma
- Book Type:

- Description:
Description Awaited
Shah Aur Maat
- Author Name:
Manjushri
- Book Type:

- Description:
Book
Ret Samadhi
- Author Name:
Geetanjali Shree
- Book Type:

- Description:
अस्सी की होने चली दादी ने विधवा होकर परिवार से पीठ कर खटिया पकड़ ली। परिवार उसे वापस अपने बीच खींचने में लगा। प्रेम, वैर, आपसी नोकझोंक में खदबदाता संयुक्त परिवार। दादी बज़िद कि अब नहीं उठूँगी। फिर इन्हीं शब्दों की ध्वनि बदलकर हो जाती है अब तो नई ही उठूँगी। दादी उठती है। बिलकुल नई। नया बचपन, नई जवानी, सामाजिक वर्जनाओं-निषेधों से मुक्त, नए रिश्तों और नए तेवरों में पूर्ण स्वच्छन्द। कथा लेखन की एक नई छटा है इस उपन्यास में। इसकी कथा, इसका कालक्रम, इसकी संवेदना, इसका कहन, सब अपने निराले अन्दाज़ में चलते हैं। हमारी चिर-परिचित हदों-सरहदों को नकारते लाँघते। जाना-पहचाना भी बिलकुल अनोखा और नया है यहाँ। इसका संसार परिचित भी है और जादुई भी, दोनों के अन्तर को मिटाता। काल भी यहाँ अपनी निरन्तरता में आता है। हर होना विगत के होनों को समेटे रहता है, और हर क्षण सुषुप्त सदियाँ। मसलन, वाघा बार्डर पर हर शाम होनेवाले आक्रामक हिन्दुस्तानी और पाकिस्तानी राष्ट्रवादी प्रदर्शन में ध्वनित होते हैं ‘क़त्लेआम के माज़ी से लौटे स्वर’, और संयुक्त परिवार के रोज़मर्रा में सिमटे रहते हैं काल के लम्बे साए। और सरहदें भी हैं जिन्हें लाँघकर यह कृति अनूठी बन जाती है, जैसे स्त्री और पुरुष, युवक और बूढ़ा, तन व मन, प्यार और द्वेष, सोना और जागना, संयुक्त और एकल परिवार, हिन्दुस्तान और पाकिस्तान, मानव और अन्य जीव-जन्तु (अकारण नहीं कि यह कहानी कई बार तितली या कौवे या तीतर या सड़क या पुश्तैनी दरवाज़े की आवाज़ में बयान होती है) या गद्य और काव्य : ‘धम्म से आँसू गिरते हैं जैसे पत्थर। बरसात की बूँद।’
Maiyadas Ki Madi
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Book Type:

- Description:
‘मय्यादास की माड़ी’ में दाख़िल होने का एक ख़ास मतलब है, यानी पंजाब की धरती पर एक ऐसे कालखंड में दाख़िल होना, जबकि सिक्ख-अमलदारी को उखाड़ती हुई ब्रिटिश-साम्राज्यशाही दिन-ब-दिन अपने पाँव फैलाती जा रही थी।
भारतीय इतिहास के इस अहम बदलाव को भीष्म जी ने एक क़स्बाई कथाभूमि पर चित्रित किया है और कुछ इस कौशल से कि हम जन-जीवन के ठीक बीचोबीच जा पहुँचते हैं। झरते हुए पुरातन के बीच लोग एक नए युग की आहटें सुनते हैं, उन पर बहस-मुबाहसा करते हैं और चाहे-अनचाहे बदलते चले जाते हैं—उनकी अपनी निष्ठाओं, कदरों, क़ीमतों और परम्पराओं पर एक नया रंग चढ़ने लगता है। इस सबके केन्द्र में है दीवान मय्यादास की माड़ी, जो हमारे सामने एक शताब्दी पहले की सामन्ती अमलदारी, उसके सड़े-गले जीवन-मूल्यों और हास्यास्पद हो गए ठाठ-बाट के एक अविस्मरणीय ऐतिहासिक प्रतीक में बदल जाती है। इस माड़ी के साथ दीवानों की अनेक पीढ़ियाँ और अनेक ऐसे चरित्र जुड़े हुए हैं जो अपने-अपने सीमित दायरों में घूमते हुए भी विशेष अर्थ रखते हैं—इनमें चाहे सामन्ती धूर्तता और दयनीयता की पराकाष्ठा तक पहुँचा दीवान धनपत और उसका बेटा हुकूमतराय हो, राष्ट्रीयता के धूमिल आदर्शों से उद्वेलित लेखराज हो, बीमार और नीम-पागल कल्ले हो, साठसाला बूढ़ी भागसुद्धी हो या फिर विचित्र परिस्थितियों में माड़ी की बहू बन जानेवाली रुक्मो हो—जो कि अन्ततः एक नए युग की दीप-शिखा बनकर उभरती है।
वस्तुतः भीष्म जी का यह उपन्यास एक हवेली अथवा एक क़स्बे की कहानी होकर भी बहते काल-प्रवाह और बदलते परिवेश की दृष्टि से एक समूचे युग को समेटे हुए है और उनकी रचनात्मकता को एक नई ऊँचाई सौंपता है।
Samudrantike Novel
- Author Name:
Dhruv Bhatt
- Book Type:

- Description:
बंगाली के यहाँ हम बहुत देर तक रुके रहे। बंगाली ने गीत गाए। मुखिया ने भी भजन गाए। बारिश नहीं हुई तो क्या होगा, ऐसी चिंता व्यक्त की! तब बाबा बोला, ‘‘नहीं, बरसात जरूर आवेगी, जोरों से आवेगी।’’ रात होने को आई, तब हम उठे। बाबा नीचे तक हमें छोड़ने आया। फिर कहने लगा, ‘‘देख मुखी, एक बात मान, तेरे गाँव में जो बच्चे हों, उन सबको थोड़े दिन हवेली भेज दे और मवेशियों को बाँधना नहीं, ऐसे ही खुले छोड़ देना।’’ ‘‘क्यों?’’ एक बाबा ऐसी नई व्यवस्था करने को कहे, यह मेरे लिए कुछ अजीब था। ‘‘क्यों, छोकरे लोग बँगले में रहेगा तो तेरे कु तकलीफ है क्या?’’ ‘‘नहीं, पर गाय-बैलों को क्यों नहीं बाँधना?’’ मैंने पूछा। ‘‘सुन, डराता नहीं हूँ, पर ये अपने अनंत महाराज हैं न, ये दरिया, दो-तीन दिन से ठीक से बात नहीं करते। लगता है महाराज शायद तूफान कर देंगे।’’ —इसी उपन्यास से पारंपरिक, अविज्ञान-सम्मत, आस्था प्रधान समाज और मुनाफाखोर निंदक समाज के बीच के गतिरोध और संघर्ष को संतुलित करता प्रभावी उपन्यास। इसमें लोक है, लोकनायक हैं, जो उपन्यास के ताने-बाने को बुनते हैं। एक प्रभावी, पठनीय उपन्यास।
Mishri
- Author Name:
Anoop Bajpai
- Book Type:

- Description:
"‘मिश्री’ के किरदार उसी प्राचीन धार्मिक नगरी वृंदावन की रज ( मिट्टी) में खेल-कूदकर बडे़ हुए हैं, जहाँ की असंख्य लीलाएँ और कहानियाँ दुनिया भर में सुनी-सुनाई जाती हैं। सँकरी गलियों से निकली कहानी के पात्र खुद को सात समंदर पार भी ले जाते हैं। कहानी में वृंदावन के सभी चटख रंग भी दिखेंगे और परंपरा, आस्था के अनोखे ढंग भी। यही कारण हैं ‘मिश्री’ के किरदार करीब से देखने में अपने और जाने-पहचाने से लगेंगे। ऐतिहासिक कहानियाँ जो हमारे चिंतन में या चेतन में कहीं दबी होती हैं, अकसर नए किरदारों, बदलते परिवेश में नए रूप में सामने आती हैं। किसी कहानी में सभी किरदारों का अपना महत्त्व है, लेकिन ‘मिश्री’ में एक आधुनिक नारी का एकतरफा समर्पण दिखेगा। उसने एक पात्र के तौर पर दमदार पहचान बनाई, लेकिन खुद के लिए तो बिलकुल नहीं। एक अदृश्य प्रेम जिसका मकसद कुछ पाना नहीं बल्कि खो देना है। कहानी के अंत में ‘मिश्री’ सभी पात्रों और लेखक को भी यह अहसास कराने में सफल है कि इस कहानी की पहचान तो उसके नाम से ही है।"
The River of Blood
- Author Name:
Indira Parthsarathy +1
- Book Type:

- Description:
The River of Blood (Kuruthippunal) was first published in Tamil in 1975. As a work of art, the novel stands testimony to the multifaceted personality of its author. The novel is based on the Keezhavenmani carnage of 1967 in which 42 Harijans were burnt to death in landlord-peasant clash. To the agrarian problem, tinged with untouchablity, Indira Parthasarthy gives a psychological dimension, which is the unique aspects of the book. Parthasarthy has beautiful highlighted the degradation in the field of politics and the corruption having assumed the way of life.
Insanity Is The Gift
- Author Name:
Apoorva
- Book Type:

- Description:
Insanity is the Gift? The dreams we dream are often not our own but an accumulation of the surrounding we thrive. Our thoughts and opinions are slave to the experiences we have and the people we meet. But what happens when you finally break through the shell and try to chase a dream that is almost impossible. Insanity is the gift is a coming of age Novel that takes you on a journey through the lens of a bunch of childhood friends who are ambitious, dreamy, confused, authentic and most importantly - insane in their own way. As they go through college and discover themselves through music, love and friendships- not all things go according to plan. It is an story of finding true meaning of the meaninglessness of life. It tries to navigate and drift across contrasting characters to portray the different shades of love, fear, agony, dreams and human connections.
Manthan
- Author Name:
Utkarsh Pandey
- Book Type:

- Description:
WHAT HAPPENS WHEN GODS LOOK UP TO A MERE CHILD AS THE SAVIOUR OF PRITHVI? IS HE THE AVATAR THE WORLD AWAITS? WILL THIS BE THE END OF KALIYUGA? Religion, truthfulness, cleanliness, tolerance, mercy, duration of life, physical strength and memory will all diminish day by day hypnotised by the powerful influence of the Age of Kali. Blessed by Lord Shiva but banished by the other Gods to the depths of the underworld, a Deva seeks revenge. Punished for his valiant sacrifice and betrayed by his own kin, he decides to turn humans against their Gods. He arises as the powerful and invincible Kali, the creator of chaos and turmoil on Prithvi. Adi Parashakti, the Supreme Goddess is left with only two choices… to destroy Prithvi or to summon a power to stand against the might of Kali. As the world most eagerly awaits the Kalki Avatar, signifying the cleansing of the world from all its sorrows, Vasu, born to humble parents, unwittingly finds himself catapulted into the middle of a mighty churning, a MANTHAN, his simple and content life turned upside down. Does the fate of Prithvi rest on the shoulders of a mere boy? Is he the chosen one? The story of a boy who was destined to be God.
Visarjan
- Author Name:
Raju Sharma
- Book Type:

- Description:
अपने पहले उपन्यास ‘हलफ़नामे’ से प्रसिद्धि पानेवाले कथाकार राजू शर्मा का दूसरा उपन्यास है ‘विसर्जन’। हिन्दी संसार में भूमंडलीकरण पर लगभग दो दशकों से चर्चा हो रही है किन्तु उस यथार्थ को बड़े औपन्यासिक ढाँचे में विन्यस्त और प्रकट करने का श्रेय ‘विसर्जन’ के रचनाकार राजू शर्मा के ही हिस्से में जाता है। भूमंडलीकरण ने हमारी दुनिया की शक्ल को बुनियादी तौर पर बदलकर रख दिया है। यह कहना अत्युक्ति न होगी कि उसने मनुष्य के मूल्यों, आस्थाओं, संवेदनाओं, सम्बन्धों के इलाक़े में अब तक के इतिहास की सबसे भारी उथल-पुथल पैदा की है। मनुष्यता पर पड़नेवाले उसके प्रभाव पर केन्द्रित भले ही कुछ रचनात्मक दृष्टान्त हैं, किन्तु भूमंडलीकरण की शक्ति-संरचना का उसी की ज़मीन पर विखंडन पहली बार ‘विसर्जन’ में ही सम्भव हुआ। प्रधानमंत्री, अर्थशास्त्री, प्रशासनिक मशीनरी, गुप्तचरी आदि के ज़रिए राजू शर्मा ‘विसर्जन’ में ऐसा अद्भुत आख्यान रचते हैं कि उत्तर-पूँजीवादी दुनिया के ब्रह्मास्त्र और कवच भूमंडलीकरण का सारा भेद खुल जाता है। राजू शर्मा की रचनात्मक शक्ति इस मायने में भी आश्वस्त करती है कि वे भूमंडलीकरण के क़िले में प्रविष्ट होकर उसकी व्यूह रचना को उजागर करते हैं। ‘विसर्जन’ में मनुष्यता के सम्मुख उपस्थित संकट की गहन खोज और उसका आखेट है, पर यह सब कुछ ऐसे गहरे रचनात्मक धैर्य और सूझ-भरी निस्संगता से मुमकिन किया गया है कि ‘विसर्जन’ सत्य और गल्प, यथार्थ और कला, विचार और संवेदना, प्रतिबद्धता और निष्पक्षता जैसी विपर्यय दिखनेवाली सृजनात्मक सिद्धियों को एक साथ अर्जित करनेवाला उपन्यास बन जाता है। ‘विसर्जन’ अपने अभिनव विषय की व्यापकता एवं गहराई के कारण महत्त्वपूर्ण है, वह इसलिए भी क़ीमती है कि यहाँ सच्चाई का अनुवाद नहीं, उसका ग़ज़ब का पुनर्सृजन है। एक से एक अविस्मरणीय चरित्रों, वृत्तान्तों से सम्पन्न इस कृति में अर्थगर्भिता और व्यंजनाओं का ऐसा अभूतपूर्व वैभव है जो मौजूदा साहित्यिक परिदृश्य में दुर्लभ है। ‘विसर्जन’ न केवल राजू शर्मा की कथायात्रा की अगली मंज़िल है, वरन् उसे हिन्दी उपन्यास की उपलब्धि के रूप में भी स्वीकार किया जाएगा, ऐसी उम्मीद बाँधना उचित ही होगा। —अखिलेश
Kamini Kay Kantare Vol-II
- Author Name:
Mahesh Katare
- Book Type:

- Description:
कामिनी काय कांतारे’ अर्थात कामिनी काया के जंगल में! राजा भर्तृहरि, गृहस्थ भर्तृहरि, प्रेमी भर्तृहरि, कवि भर्तृहरि, वैयाकरण भर्तृहरि, योगी भर्तृहरि! बहुमखी प्रतिभा के धनी विविध रूप-गुणों से संपन्न भर्तृहरि के जीवन पर आधारित यह उपन्यास कामिनी कंचन के बीच से ही नहीं गुजरता, कामिनी काया के जंगल से भी गुजरता है और कथा, इतिहास, मिथक के बल पर एक महान क्लासिक रचना वरिष्ठ कथाकार-उपन्यासकार महेश कटारे की कलम से पूर्णता को प्राप्त करती है। यह उपन्यास न मात्र बेहद पठनीय और रोचकता के लिहाज से महत्त्वपूर्ण है, ज्ञान को दीप्त करने वाली विशिष्ट कृति है। भारतीय परंपरा की थाती। उपन्यासकार के शब्दों में, ''भरथरी गाने वालों की कथा में बीवी की बेवफाई से दुखी राजा भरथरी जोगी बनकर महल, हवेली, राजपाट छोड़कर निकल गए। गुरु गोरखनाथ के कहने पर वह अपनी उसी पत्नी रानी पिंगला से भीख माँगने द्वार पर पहुँचे तो राजा को जोगी के भेष में देख रानी पछाड़ खाकर गिर पड़ी। 'भरथरी’ सुनती स्त्रियों की भीड़ राजा के घर से निकलते ही आँसू बहाने लगती और रानी के पछाड़ खा गिरने पर तो अनेक की 'कीक’ फूट जाती। इस भर्तृहरि से मेरा बचपन का परिचय था। बाद में सरसरी दृष्टि से शतकत्रय भी पढ़े थे तो उस रात मैंने मित्रों को दो-तीन श्लोक सुना डाले। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि भर्तृहरि बहुत बड़ा कवि है। हमारे यहाँ ऐसे लोगों पर बहुत कम काम हुआ है, सो मैं एक उपन्यास लिखूँ।...’’ और अब यह उपन्यास दो खण्डों में आपके सामने है। हिंदी की एक अनमोल कृति के रूप में!...
Mallika ka Rachna-Sansar
- Author Name:
Vasudha Dalmiya
- Book Type:

- Description:
औरतों के प्रति जब कभी पुरानी धारणा की मुठभेड़ आधुनिकता से होती है, तो भारतीय मन मनुष्य और समाज को पुरुषार्थ के उजाले में देखने-दिखाने के लिए मुड़ जाता है। पर हमारी परम्परा में पुरुषार्थ की साधना वही कर सकता है जो स्वतंत्र हो। और स्त्री की बाबत स्मृतियों की राय यही है कि वह बुद्धि और विवेक से रहित है। इसलिए वह स्वतंत्र हुई तो स्वैराचारिणी बनी। बेहतर हो वह पराश्रयी बन कर रहे। प्रसिद्ध साहित्यकार भारतेन्दु की रक्षिता मल्लिका का निजी जीवन और उनका यह दुर्लभ कृतित्व इस धारणा को उसी के धरातल में जाकर प्रखर चुनौती देता है। काशी के एक सम्पन्न परिवार के कुलदीपक की रक्षिता यह बांग्ला मूल की महिला 19वीं सदी के समाज में सामाजिक स्वीकार से वंचित रहीं। फिर भी उनकी नैसर्गिक प्रतिभा और कुछ हद तक भारतेन्दु के साथ रहते हुए उस प्रतिभा के निरन्तर परिष्कार से वह अपने समय के समाज में स्त्री जाति की असली दशा, विशेषकर युवा विधवाओं और किसी भी वजह से समाज की डार से बिछड़ गई औरतों की दुनिया पर निडर रचनात्मक नज़र डाल सकीं। यह आज भी विरल है, तब के युग में तो वह दुर्लभ ही था। —मृणाल पाण्डे
Berige Neeru
- Author Name:
Rajam Krishnan +1
- Book Type:

- Description:
discriptation awaited
The Last Exit
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

- Description:
The Last Exit (Kavve Aur Kala Pani) is a collection of several short stories dealing with personal tensions in the contemporary social context. Some stories exposed the Indian The Last Exit (Kavve Aur Kala Pani) is a compilation of various short stories that explore personal tensions within a modern social context. While some narratives highlight the Indian setting, others delve into European culture; however, the underlying human emotions remain unchanged. The stories in this collection feature a unique approach to introspection and vivid expressions, making the work truly engaging.environment, while some introduced the European culture, but the human emotions are the same. The stories presented in the volume have an innovative form of inner probing and evocative expressions, which makes the work a fascinating read
Durdamya
- Author Name:
Gangadhar Gadgil +1
- Book Type:

- Description:
A truly wonderful book . It explains the life of one of our greatest leader Lokmanya Bal Gangadhar Tilak . A truly inspiring book
Rameau Ka Bhatija
- Author Name:
Denis Diberot
- Book Type:

- Description:
‘रामो का भतीजा’ को अधिकांश विद्वान दिदेरो की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण साहित्यिक रचना मानते हैं। यह दार्शनिक और नीतिशास्त्रीय होने के साथ ही एक सौन्दर्यशास्त्रीय कृति भी है जो अपने समय के तमाम नैतिक-वैधिक-सामाजिक-सौन्दर्यशास्त्रीय मूल्यों पर, प्रस्तरीकृत रूढ़ियों पर अनूठे कोण और मारक ढंग से सवाल उठाती है, जिरह करती है और बिना फ़ैसला सुनाए दो अवस्थितियों के दोनों पक्षों पर सोचने और सापेक्षत: सही-ग़लत की शिनाख़्त करने के लिए पाठक को तर्क एवं दृष्टि देकर खुला छोड़ देती है। इसीलिए इसे द्वन्द्ववाद की अनुपम कृति भी माना जाता। ‘रामो का भतीजा’ में स्वयं दिदेरो और रामो का भतीजा—दो ही मुख्य पात्र सामने हैं जिनके बीच एक लम्बे संवाद के रूप में रचना अन्त तक की यात्रा पूरी करती है। रामो का भतीजा भी तत्कालीन पेरिस का एक वास्तविक चरित्र है। प्रसिद्ध फ़्रांसीसी संगीत-रचनाकार रामो उसका चाचा है। (भतीजा) रामो एक ग़रीब संगीतकार है जो पेरिस के बोहेमियाई जीवन का एक प्रतिनिधि है—पूरी तरह से अनैतिक, बिना किसी उसूल का, मानवद्वेषी चरित्र, जो घूसखोर, धनलोलुप, प्रतिक्रियावादी पत्रकारों का मित्र है और एक ऐसा परजीवी जो धनी अभिजातों के घरों में घुसने की जुगत भिड़ाने में दक्ष है। रामो समाज के नैतिक मानदंडों को ख़ारिज करता है। वह उन्हें एक ऐसी ताक़त मानता है जो उसके लिए बेगानी है, उसके ख़िलाफ़ है और इसलिए बुरी है। अपनी कामनाओं-वासनाओं-आवश्यकताओं की पूर्ति—जीवन में बस इसी एक चीज़ को वह मूल्य के तौर पर स्वीकार करता है। लेकिन रचना का कौशल यह है कि अपने अनैतिक व्यवहार और मानवद्वेषी अभिव्यक्तियों के ज़रिए रामो अपने आसपास की दुनिया को बेनकाब करता जाता है। वह समाज के पाखंडों के मुखौटों को नोच देता है और उसके सारतत्त्व को सामने ला देता है। वह दार्शनिक (जिसका प्रतिनिधित्व संवाद में दिदेरो करता है) के आदर्शों की निर्जीविता और अमूर्तता को भी उजागर करता है। वह स्पष्टत: देख रहा है कि धन समाज की मुख्य शक्ति बनता जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर ग़रीबी भी मौजूद है। इस स्थिति में किसी भी तरह की स्वतंत्रता का बोध भ्रामक है। हर व्यक्ति भाँति-भाँति की मुद्राएँ-मुखौटे ओढ़े हुए है और कोई भी अपने प्रति सच्चा और ईमानदार नहीं है।
I Wish You Were Not Here
- Author Name:
Deepshikha Saw
- Book Type:

- Description:
An aspiring tennis player in her 20’s returns from her tournament only to realise that the world is fighting a pandemic. A lockdown that started as a 21-day thing changes the next two years of her life. Caged within the four walls, she decides to pursue a career completely different from a sportsperson. Observing the world adapt to the unexpected changes, she starts writing diary entries. Reconnecting with old friends, learning new things, and exploring her new self, she keeps herself busy. But with the celebration of the new year, a new variant emerges, and she is left thinking if it is the new normal. Will she ever get to play tournaments again? Will her life be back to normal?
Customer Reviews
Be the first to write a review...
5 out of 5
Book