Sant Raidas
(0)
Author:
Yogendra SinghPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
175
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सन्त रैदास का मध्यकालीन हिन्दी भक्ति साहित्य के सर्वाधिक ख्यातिप्राप्त शीर्ष कवियों में महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। सन्त प्रवर की रचनाओं में जो स्फुट पद, साखियाँ तथा एक प्रबन्धात्मक रचना ‘प्रह्लाद चरित’ उपलब्ध हुए हैं, उन्हें पुस्तक में देने की चेष्टा की गई है।</p> <p>सन्त रैदास को अपने समय में पर्याप्त सम्मान तथा ख्याति मिली, किन्तु उनका अन्त्यज वर्ग में जन्म लेना उनको लगातार सामाजिक यातना भी देता रहा। उनके जन्म के समय कुछ दन्तकथाएँ प्रचलित करके उनको पूर्व जन्म में ब्राह्मण सिद्ध करने की चेष्टा की गई। यह प्रयास भी उनके मूल कर्तव्य तथा सम्पूर्ण विचारधारा का प्रत्यावर्त्तन ही था। प्रस्तुत ग्रन्थ में लेखक ने इन सम्पूर्ण बिन्दुओं पर विचार प्रस्तुत करते हुए जहाँ सन्त रैदास के साहित्य की समाजेतिहासिक सन्दर्भों में समीक्षा प्रस्तुत की है वहीं इस ग्रन्थ में सन्त रैदास का साहित्यिक दृष्टि से मूल्यांकन भी प्रस्तुत किया है।</p> <p>सामग्री को संकलित करने में लेखक को विभिन्न मठों, सम्बन्धित सम्प्रदाय के स्थलों, पुस्तकालयों तथा हस्तलिखित प्रतियों के संकलनकर्ताओं से सम्पर्क करना पड़ा और अनेक पाठ–भेद भी मिले। पाठ–भेदों को यथाशक्ति पाद–टिप्पणियों में देने की चेष्टा की गई है। छात्रों, अध्येताओं के लिए एक ज़रूरी पुस्तक।
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सन्त रैदास का मध्यकालीन हिन्दी भक्ति साहित्य के सर्वाधिक ख्यातिप्राप्त शीर्ष कवियों में महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। सन्त प्रवर की रचनाओं में जो स्फुट पद, साखियाँ तथा एक प्रबन्धात्मक रचना ‘प्रह्लाद चरित’ उपलब्ध हुए हैं, उन्हें पुस्तक में देने की चेष्टा की गई है।</p>
<p>सन्त रैदास को अपने समय में पर्याप्त सम्मान तथा ख्याति मिली, किन्तु उनका अन्त्यज वर्ग में जन्म लेना उनको लगातार सामाजिक यातना भी देता रहा। उनके जन्म के समय कुछ दन्तकथाएँ प्रचलित करके उनको पूर्व जन्म में ब्राह्मण सिद्ध करने की चेष्टा की गई। यह प्रयास भी उनके मूल कर्तव्य तथा सम्पूर्ण विचारधारा का प्रत्यावर्त्तन ही था। प्रस्तुत ग्रन्थ में लेखक ने इन सम्पूर्ण बिन्दुओं पर विचार प्रस्तुत करते हुए जहाँ सन्त रैदास के साहित्य की समाजेतिहासिक सन्दर्भों में समीक्षा प्रस्तुत की है वहीं इस ग्रन्थ में सन्त रैदास का साहित्यिक दृष्टि से मूल्यांकन भी प्रस्तुत किया है।</p>
<p>सामग्री को संकलित करने में लेखक को विभिन्न मठों, सम्बन्धित सम्प्रदाय के स्थलों, पुस्तकालयों तथा हस्तलिखित प्रतियों के संकलनकर्ताओं से सम्पर्क करना पड़ा और अनेक पाठ–भेद भी मिले। पाठ–भेदों को यथाशक्ति पाद–टिप्पणियों में देने की चेष्टा की गई है। छात्रों, अध्येताओं के लिए एक ज़रूरी पुस्तक।
Book Details
-
ISBN9788180312335
-
Pages186
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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रामशरण जोशी का लेखन-संसार एक आयामी नहीं, विविध आयामी है। मूलतः पत्रकार होने के बावजूद लेखक जोशी ने अपनी चिन्तन व लेखन-परिधि को निरन्तर विस्तार दिया है। वे पत्रकार होने के साथ-साथ समाजविज्ञानी, सक्रिय समाजकर्मी, मीडिया शिक्षक और सतत हस्तक्षेपधर्मी हैं। सातवें दशक में आदिवासियों, बन्धक श्रमिकों जैसी उत्पीड़ित व उपेक्षित मानवता पर उनका ज़मीनी लेखन हिन्दी जगत में चर्चित रहा है। रीचा ज़िले की ‘लँगड़े गाँव की कहानी’ जैसे उनके अध्ययन की गूँज संसद तक पहुँची। 2009 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘अर्जुन सिंह : एक सहयात्री इतिहास का’ राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हो चुकी है।
रामशरण जोशी एक प्रतिबद्ध लेखक हैं। वामपन्थी होने के बावजूद उन्होंने ‘व्यक्ति, विचार और समाज’ को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा है। प्रस्तुत पुस्तक में उनकी बहुरंगी दृष्टि एवं सरोकारों की छटा उद्घाटित हुई है। जहाँ इसमें बॉलीवुड का अभिनेता है, वहीं समाजशास्त्री, लेखक, पत्रकार, प्रशासक जैसे पात्र भी हैं। इन हैसियतमन्दों के बीच एक अकिंचित्, अजाना पात्र भी मौजूद है—‘छीतर खाँ’। इस पात्र के माध्यम से लेखक ने अल्पसंख्यक वर्ग और भारतीय राज्य के आपसी रिश्तों की सर्जनात्मक रूप में पड़ताल की है। पुस्तक में सम्मिलित विमर्शमूलक समीक्षाओं में प्रसिद्ध समाजशास्त्री
डॉ. पी.सी. जोशी, अंग्रेज़ी के विख्यात पत्रकार शामलाल, मानवशास्त्री व प्रशासक डॉ. कुमार सुरेश सिंह जैसे व्यक्तित्वों के लेखन की थाह भी ली गई है। ‘अपने-अपने नंदीग्राम’, ‘बूधन की मुक्ति का सवाल’, ‘हरसूद की डूब’ जैसे लेखों में विकास की विसंगतियों से साक्षात्कार कराया है।लेखक जोशी ने राजेन्द्र यादव, मनोहर श्याम जोशी, डॉ. श्यामाचरण दुबे, पंकज बिष्ट, इब्बार रब्बी, अरुण प्रकाश, सुदीप बनर्जी जैसे रचनाकारों के साथ अपने सम्बन्धों को आत्मीय लेखन के साथ याद किया है। इस संग्रह में लेखक की 1960 से इस सदी के पहले दशक तक की अनुभव-राशि छितरी हुई है।
Sudhiyan Kuchh Apni, Kuchh Apanon Ki
- Author Name:
Amritlal Nagar
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Awating description for this book
Sansamaran Aur Shradhanjaliyan
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
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संस्मरण और श्रद्धांजलियाँ' रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के संस्मरणात्मक निबन्धों का संकलन है। यह संग्रहणीय इसलिए है कि इन संस्मरणों और श्रद्धांजलियों में देश के प्रख्यात विद्वानों, साहित्यकारों और राजनेताओं के अन्तरंग जीवन की भी झाँकियाँ हैं। उनके व्यक्तित्व के अनेक अनजाने रूप, देश की राजनीति को प्रभावित करनेवाले प्रसंग और वे मानवीय गुण भी उद्घाटित हुए हैं, जिन्होंने इन विभूतियों को सबका श्रद्धास्पद बना दिया।
डॉ. काशीप्रसाद जायसवाल, महापंडित राहुल सांकृत्यायन, राजर्षि टंडन, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, पं. माखनलाल चतुर्वेदी, महाप्राण निराला, पं. बालकृष्ण शर्मा 'नवीन', महादेवी जी, पं. बनारसीदास चतुर्वेदी, पं. किशोरीदास वाजपेयी, आचार्य शिवपूजन सहाय, आचार्य रघुवीर के अतिरिक्त कवि दिनकर के और भी अनेक समकालीन साहित्यकार, जिनके संस्मरण रोमांचित ही नहीं करते, मानवीय मूल्यों के प्रति आस्था भी जगाते हैं।
इस संग्रह में समाविष्ट हैं डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन्, डॉ. जाकिर हुसैन, श्री लालबहादुर शास्त्री, श्रीकृष्ण सिन्हा जैसे राजनेताओं के प्रति राष्ट्रकवि दिनकर की विनम्र श्रद्धांजलि और प्रेरक संस्मरण।
उल्लेखनीय है कि ये संस्मरण, ये श्रद्धांजलियाँ औपचारिकता नहीं, अपनत्व से भरी हैं। इन्हें पढ़ना देश के अतीत में जाना है। एक ऐसा अतीत जो वर्तमान ही नहीं, भविष्य के लिए भी प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगा।
Swami Ramtirth : Jivan Aur Darshan
- Author Name:
Jairam Mishra
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स्वामी रामतीर्थ जैसी दिव्य आध्यात्मिक विभूतियाँ शताब्दियों में यदा-कदा ही अवतीर्ण हुआ करती हैं। बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक वर्षों में स्वामी रामतीर्थ ने अपने आध्यात्मिक तेज से समस्त संसार को अभिभूति कर दिया था। वे मंत्र-द्रष्टा ऋषि और वेदान्त के मूर्तिमान स्वरूप थे। उनकी जीवन-कहानी भारतीय दर्शन और साधना-प्रणाली की जीवन्त कहानी है। तैंतीस वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने जैसी साधना की, वह बहुत कम जीवनों में देखने को मिलती है। वे निष्काम कर्मयोग, राजयोग, भक्तियोग एवं अद्वैत वेदान्त के साकार विग्रह थे। उनके ह्रदय में देशभक्ति, राष्ट्रभक्ति एवं मानव-सेवा की त्रिवेणी अजस्र रूप में प्रवाहित होती थी। उन्होंने अपने व्यक्तित्व की अप्रतिम गरिमा से भारत का गौरव समस्त संसार की दृष्टि में बहुत ऊँचा उठाया। इसमें रंचमात्र सन्देह नहीं कि उनके जीवन, साधना-प्रणाली और आदर्शों से भारत 'श्रेयस' और 'प्रेयस' दोनों प्राप्त कर सकता है। हमारे देश के नवयुवक स्वामी रामतीर्थ के विचारों, उपदेशों एवं शिक्षाओं से बलवती प्रेरणा ग्रहण कर सकते हैं, ऐसी हमारी दृढ़ धारणा है।
Boskiyana
- Author Name:
Gulzar
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गुलज़ार से बातें...'माचिस' के, 'हू-तू' के, 'ख़ुशबू', 'मीरा' और 'आँधी' के बहुरंगी लेकिन सादा गुलज़ार से बातें...फ़िल्मों में अहसास को एक किरदार की तरह उतारनेवाले और गीतों-नज़्मों में ज़िंदगी के जटिल सीधेपन को अपनी विलक्षण उपमाओं और बिम्बों में खोलनेवाले गुलज़ार से उनकी फ़िल्मों, उनकी शायरी, उनकी कहानियों और उस मुअम्मे के बारे में बातें जिसे गुलज़ार कहा जाता है। उनके रहन-सहन, उनके घर, उनकी पसंद-नापसंद और वे इस दुनिया को कैसे देखते हैं और कैसे देखना चाहते हैं, इस पर बातें...यह बातों का एक लम्बा सिलसिला है जो एक मुलायम आबोहवा में हमें समूचे गुलज़ार से रू-ब-रू कराता है। यशवंत व्यास गुलज़ार-तत्त्व के अन्वेषी रहे हैं। वे उस लय को पकड़ पाते हैं जिसमें गुलज़ार रहते और रचते हैं। इस लम्बी बातचीत से आप उनके ही शब्दों में कहें तो 'गुलज़ार से नहाकर' निकलते हैं।
Thackeray Bhaau
- Author Name:
Dhaval Kulkarni
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चचेरे और मौसेरे भाई—राज और उद्धव। सगे लेकिन राजनीतिक सोच में बिल्कुल अलग। एक बाल ठाकरे की चारित्रिक विशेषताओं को फलीभूत करने वाला, उनकी आक्रामकता को पोसनेवाला, दूसरा कुछ अन्तर्मुखी जिसकी रणनीतियाँ सड़क के बजाय काग़ज़ पर ज़्यादा अच्छी उभरती हैं। शिवसेना की राजनीति को आगे बढ़ाने के दोनों के ढंग अलग थे। बाल ठाकरे की ही तरह कार्टूनिस्ट के रूप में कैरियर की शुरुआत करनेवाले राज ने पार्टी के विस्तार के लिए चाचा की मुखर शैली अपनाई। दूसरी तरफ़ उद्धव अपने पिता की छत्रछाया में आगे बढ़ते रहे। राज ठाकरे ने अपनी स्वतंत्र पहचान के लिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का गठन किया, वहीं उद्धव महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी व्यावहारिक सूझ-बूझ के चलते आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं। यह पुस्तक इन दोनों भाइयों के राजनीतिक उतार-चढ़ाव का विश्लेषण है। पहचान की महाराष्ट्रीय राजनीति और शिवसेना तथा उससे बनी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के उद्भव की जटिल सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पृष्ठभूमि का विश्लेषण करते हुए इस पुस्तक में उद्धव सरकार के गद्दीनशीन होने के पूरे घटनाक्रम और उसके अब तक के, एक साल के शासनकाल की चुनौतियों और उपलब्धियों का पूरा ब्यौरा भी दिया गया है।
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