🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Aamader Shantiniketan

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई ज़मीन बनाई थी, जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे। उन्होंने मानवीय संवेदना और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज्‍़यादा पढ़े जानेवाले लेखकों में एक होकर रहीं। कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया। अपने सम्पर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने क़रीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया। इस पुस्तक में ‘गुरुपल्ली’, ‘गुरुदेव की कर्मभूमि’, ‘शान्तिनिकेतन की गुरुपल्ली’, ‘आश्रम के पर्व’, ‘कुछ महत्त्पूर्ण उत्सव’, ‘आश्रम के विकास में गुरुदेव का योग’, ‘गांधीजी और गुरुदेव’, ‘अनेक विभूतियों का आगमन’, ‘श्रीनिकेतन का मेला’, ‘खेलकूद और मनोरंजन’, ‘आश्रमवासियों के लिए गुरुदेव के गीत’, ‘छात्रों का अतिथि-प्रेम’, ‘गुरुदेव की आत्मीयता’, ‘सादा पर कलापूर्ण रहन-सहन’, ‘गुरुर्ब्रह्मा’, ‘ओ रे गृहवासी’, ‘तुई जे पुरुष मानुष रे!’, ‘आश्रम पर काले बदल’ शीर्षक निबन्ध शामिल हैं, जिनका सम्बन्ध लेखिका के शान्तिनिकेतन प्रवास से है। आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसन्द आएँगी!

Read more

₹ 495

396 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Aamader Shantiniketan This book ₹396
Krishnakali Shivani ₹299
Aparajita Shivani ₹495
3 books selected ₹1,289 ₹1,190

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई ज़मीन बनाई थी, जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे। उन्होंने मानवीय संवेदना और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज्‍़यादा पढ़े जानेवाले लेखकों में एक होकर रहीं। कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया। अपने सम्पर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने क़रीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया। इस पुस्तक में ‘गुरुपल्ली’, ‘गुरुदेव की कर्मभूमि’, ‘शान्तिनिकेतन की गुरुपल्ली’, ‘आश्रम के पर्व’, ‘कुछ महत्त्पूर्ण उत्सव’, ‘आश्रम के विकास में गुरुदेव का योग’, ‘गांधीजी और गुरुदेव’, ‘अनेक विभूतियों का आगमन’, ‘श्रीनिकेतन का मेला’, ‘खेलकूद और मनोरंजन’, ‘आश्रमवासियों के लिए गुरुदेव के गीत’, ‘छात्रों का अतिथि-प्रेम’, ‘गुरुदेव की आत्मीयता’, ‘सादा पर कलापूर्ण रहन-सहन’, ‘गुरुर्ब्रह्मा’, ‘ओ रे गृहवासी’, ‘तुई जे पुरुष मानुष रे!’, ‘आश्रम पर काले बदल’ शीर्षक निबन्ध शामिल हैं, जिनका सम्बन्ध लेखिका के शान्तिनिकेतन प्रवास से है। आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसन्द आएँगी!

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
4th
Publication year
2007
Weight
142 grams
ISBN-13
9788183610803
Pages
122
Reading time
~4 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp