🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Dr. Zakir Hussain

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

डॉ. ज़ाकिर हुसैन स्मृति व्याख्यान-माला का आयोजन हर वर्ष ज़ाकिर हुसैन कॉलेज में किया जाता है और इसका उद्देश्य महान शिक्षाविद्, राष्ट्रवादी नेता और भारत के राष्ट्रपति ज़ाकिर साहब के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। आधुनिक भारत में उच्च शिक्षा के लिए देहली कॉलेज के ऐतिहासिक अवदान और समकालीन महत्त्व को ज़ाकिर साहब बख़ूबी समझते थे। यह व्याख्यान-माला स्वतंत्रता-पूर्व और स्वातंत्र्योत्तर भारत में कॉलेज के प्रशासन में ज़ाकिर साहब द्वारा निभाई गई अहम भूमिका का अभिनन्दन करती है। कहा जाता है कि बीसवीं सदी ‘इतिहास के अन्त’ और विचारधारा तथा कई निश्चितताओं की समाप्ति के साथ ख़त्म हुई। लेकिन इसके साथ ही यह विचार भी पैदा हुआ कि तमाम निश्चितताओं की घोषित समाप्ति अपने आप में एक कट्टरवाद की शक्ल अख़्तियार कर गई, और इसीलिए नए और पुराने ज्ञान को ग़ौर से परखने की आवश्यकता और बढ़ गई। इस पुस्तक में संकलित बारह व्याख्यान ठीक यही काम करते हैं, यानी वे ऐसे कई विचारों को प्रश्नांकित करते हैं जो समकालीन बौद्धिकता का रूपाकार तय कर रहे हैं और ऐसे तमाम सवालों से जूझते हैं जो हमारे मौजूदा जीवन के केन्द्र में स्थित हैं: मसलन—राष्ट्र-राज्य, पूँजीवाद, आधुनिकता, वैश्वीकरण और भाषा, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास से जुड़े अन्य अनेक बिन्दु। इन व्याख्यानों के सभी लेखक अपने-अपने क्षेत्र के अधिकारी विद्वान हैं। अपने विषयों से वे गहरे जुड़े हैं लेकिन उनकी दृष्टि वैश्वीकरण और जनतंत्रीकरण जैसी व्यापक प्रक्रियाओं तक भी जाती है।

Read more

₹ 550

440 20% off

Unavailable

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

This Book is out of stock
Frequently bought together
Dr. Zakir Hussain This book ₹440
Match Point - A Shuttler's Story Sanjay Sharma ₹149
Yesterday’s Train to Nowhere Krishna Rau ₹149
3 books selected ₹848 ₹738
This Book is out of stock

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

डॉ. ज़ाकिर हुसैन स्मृति व्याख्यान-माला का आयोजन हर वर्ष ज़ाकिर हुसैन कॉलेज में किया जाता है और इसका उद्देश्य महान शिक्षाविद्, राष्ट्रवादी नेता और भारत के राष्ट्रपति ज़ाकिर साहब के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। आधुनिक भारत में उच्च शिक्षा के लिए देहली कॉलेज के ऐतिहासिक अवदान और समकालीन महत्त्व को ज़ाकिर साहब बख़ूबी समझते थे। यह व्याख्यान-माला स्वतंत्रता-पूर्व और स्वातंत्र्योत्तर भारत में कॉलेज के प्रशासन में ज़ाकिर साहब द्वारा निभाई गई अहम भूमिका का अभिनन्दन करती है।

कहा जाता है कि बीसवीं सदी ‘इतिहास के अन्त’ और विचारधारा तथा कई निश्चितताओं की समाप्ति के साथ ख़त्म हुई। लेकिन इसके साथ ही यह विचार भी पैदा हुआ कि तमाम निश्चितताओं की घोषित समाप्ति अपने आप में एक कट्टरवाद की शक्ल अख़्तियार कर गई, और इसीलिए नए और पुराने ज्ञान को ग़ौर से परखने की आवश्यकता और बढ़ गई। इस पुस्तक में संकलित बारह व्याख्यान ठीक यही काम करते हैं, यानी वे ऐसे कई विचारों को प्रश्नांकित करते हैं जो समकालीन बौद्धिकता का रूपाकार तय कर रहे हैं और ऐसे तमाम सवालों से जूझते हैं जो हमारे मौजूदा जीवन के केन्द्र में स्थित हैं: मसलन—राष्ट्र-राज्य, पूँजीवाद, आधुनिकता, वैश्वीकरण और भाषा, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास से जुड़े अन्य अनेक बिन्दु। इन व्याख्यानों के सभी लेखक अपने-अपने क्षेत्र के अधिकारी विद्वान हैं। अपने विषयों से वे गहरे जुड़े हैं लेकिन उनकी दृष्टि वैश्वीकरण और जनतंत्रीकरण जैसी व्यापक प्रक्रियाओं तक भी जाती है।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
1999
Weight
580 grams
ISBN-13
9788171787678
Pages
415
Reading time
~14 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp