Kal Ke Hastakshar
Author:
ShivaniPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई जमीन बनाई थी जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे। उन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज्यादा पढ़े जानेवाले लेखकों में एक होकर रहीं। कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन कियाक। अपने संपर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने करीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भूरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया। इस पुस्तक में कोयलिया मत कर पुकार, बांधीश ना आर मायार डोरे, ताजमहल, अमरूद या भाभी ललिता, काल के हस्ताक्षर, सीमन्तेर सिन्दूर, एक अनाघ्रात पुष्प, आपबीती, कीर्ति-स्तम्भ, बिन्नू, आमि जे बनलता, भूली कहाँ हूँ, शुचि स्मिता, अरुंधती सुशीला, वह जीवन-भर कविता ही तो लिखती रही आदि रचनाएँ शामिल हैं। आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों की उनकी ये रचनाएँ भी पसंद आएँगी।
ISBN: 9788183611602
Pages: 123
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Kuchh Parav, Kuchh Manjilen
- Author Name:
Hemant Dwivedi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ekkis Bihari Aur Ek Madrasi
- Author Name:
K. Suresh
- Book Type:

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Description:
‘इक्कीस बिहारी और एक मद्रासी’ वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी के. सुरेश के प्रशासनिक दायित्वों के बीच मानवीय सम्बन्धों का दस्तावेज़ है। संग्रह में विविधवर्णी अनुभवों से संयुक्त कुल ग्यारह संस्मरण हैं, जिनमें लेखक की कोमलतम संवेदना के बारीक रेशों के माध्यम से एक प्रशासक के भीतर जाग्रत् मनुष्य से साक्षात्कार होता है।
प्रस्तुत संस्मरणों की विशेषता उनकी शैलीगत रोचकता है। इन्हें पढ़ते हुए कथा में काव्य और काव्य में कथारस के आनन्द के साथ ही व्यंग्यजनित कटाक्ष और उसमें निहित हास्य का भाव पाठक को अन्त तक बाँधे रखता है। ‘इक्कीस बिहारी और एक मद्रासी’ भाषा, प्रान्त और शैलीगत आग्रहों से मुक्त करता हुआ संवेदना के धरातल पर जीवन की समरसता की सिफ़ारिश करता है। इसमें एक संवेदनशील इनसान द्वारा परिस्थितियों के अनुरूप नियति का स्वीकार तथा उसके अनुरूप स्वयं को ढालने के कौशल का भी अंकन
है।प्रस्तुत पुस्तक न केवल शीर्षक के कारण, बल्कि विषयवस्तु और प्रस्तुति शैली की दृष्टि से भी बेहद उपयोगी और महत्त्वपूर्ण है।
Nitish Kumar Aur Ubharta Bihar
- Author Name:
Arun Sinha
- Book Type:

- Description: ‘नीतीश कुमार और उभरता बिहार’ में वरिष्ठ पत्रकार अरुण सिन्हा ने विपरीत परिस्थितियों में बिहार का शासन सँभालने वाले नीतीश बाबू की उस कर्मठ एवं जुझारू कार्यशैली का बेबाक वर्णन किया है, जिसने बिहार को एक नई दिशा दी, एक नई पहचान दी। उन्होंने बिहार के सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में नीतीश कुमार के उदय की कहानी बताई है और 1960 के दशक के आखिर से शुरू हुए समतावादी आंदोलनों तथा इनके फलस्वरूप 1990 में हुए सत्ता-परिवर्तन का विस्तार से वर्णन किया है। नीतीश कुमार शुरू में लालू प्रसाद यादव के साथ भी रहे, लेकिन बाद में उन्होंने अस्मिता की राजनीति को खारिज करते हुए यह महसूस किया कि बिहार को आगे बढ़ना है तो जाति की राजनीति से ऊपर उठना होगा। इस ग्रंथ में भारतीय राजनीति का स्पष्ट और गहन अध्ययन है। इसमें राजनीतिक नाटकबाजी को सामने लाया गया है तथा राज्य के उथल-पुथल भरे सफर की कड़वी सच्चाई और गहन अध्ययन को प्रस्तुत किया गया है। अरुण सिन्हा ने बिहार की राजनीति की जटिलता के बीच नीतीश कुमार के उदय और कानून-व्यवस्था, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार करने को विस्तार से समझाया है। सामंतवाद से जातीय अस्मिता और अंततः विकास के पथ पर आकर बिहार ने भारत की स्वतंत्रता के बाद की यात्रा में स्वयं को आदर्श साबित किया है। नीतीश बाबू के नेतृत्व में बिहार की राजनीति एवं वहाँ हो रहे ताजा विकास को जानने-समझने में सहायक एक उपयोगी पुस्तक।
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