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Bharat Mein Mahila Andolan : Vimarsh Aur Chunautiyan

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भारत में महिला आन्दोलनों ने लम्बी दूरी तय की है और वर्तमान में भी उनकी निरन्तरता बनी हुई है। उन्होंने न केवल महिलाओं के मुददों पर बने मौन को तोड़ा है बल्कि अलग-अलग तबकों की महिलाओं द्वारा छेड़े गए संघर्षों की विशिष्टताओं को समझने के साथ-साथ पितृसत्ता की जटिलताओं और उनके अन्तर्सम्बन्धों के बारे में हमारी समझ को भी गहरा किया है। परिवार, विवाह, समुदाय, जाति, यौनिकता और श्रम को नए सिरे से परिभाषित कर महिलाओं पर होनेवाली हिंसा और उत्पीड़न के तमाम रूपों को उजागर किया है। महिलाओं के अनुभवों, संघर्षों और उनके सामने खड़ी चुनौतियों को लेकर उपलब्ध अकादमिक सामग्री और नारीवादी शोध व अध्ययनों ने सामाजिक विज्ञानों में प्रचलित शब्दों, अवधारणाओं और पद्धतियों की आलोचनात्मक समीक्षा पेश की है और यह सन्तोषजनक है कि अलग-अलग अनुशासनों के पाठयक्रम में उसे स्थान मिला है। लेकिन यह भी सच है कि अब भी हिन्दी में ऐसी सामग्री का अभाव बना हुआ है। ‘भारत में महिला आन्दोलन’ पुस्तक इसी कमी को पूरा करना चाहती है और महिलाओं के आन्दोलनों और अध्ययन के सामने खड़े तमाम मुददों और बहसों पर एक व्यापक नज़रिया पेश करती है।

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भारत में महिला आन्दोलनों ने लम्बी दूरी तय की है और वर्तमान में भी उनकी निरन्तरता बनी हुई है। उन्होंने न केवल महिलाओं के मुददों पर बने मौन को तोड़ा है बल्कि अलग-अलग तबकों की महिलाओं द्वारा छेड़े गए संघर्षों की विशिष्टताओं को समझने के साथ-साथ पितृसत्ता की जटिलताओं और उनके अन्तर्सम्बन्धों के बारे में हमारी समझ को भी गहरा किया है। परिवार, विवाह, समुदाय, जाति, यौनिकता और श्रम को नए सिरे से परिभाषित कर महिलाओं पर होनेवाली हिंसा और उत्पीड़न के तमाम रूपों को उजागर किया है।

महिलाओं के अनुभवों, संघर्षों और उनके सामने खड़ी चुनौतियों को लेकर उपलब्ध अकादमिक सामग्री और नारीवादी शोध व अध्ययनों ने सामाजिक विज्ञानों में प्रचलित शब्दों, अवधारणाओं और पद्धतियों की आलोचनात्मक समीक्षा पेश की है और यह सन्तोषजनक है कि अलग-अलग अनुशासनों के पाठयक्रम में उसे स्थान मिला है। लेकिन यह भी सच है कि अब भी हिन्दी में ऐसी सामग्री का अभाव बना हुआ है।

‘भारत में महिला आन्दोलन’ पुस्तक इसी कमी को पूरा करना चाहती है और महिलाओं के आन्दोलनों और अध्ययन के सामने खड़े तमाम मुददों और बहसों पर एक व्यापक नज़रिया पेश करती है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2023
Weight
495 grams
ISBN-13
9789391950309
Pages
352
Reading time
~12 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22.5 cm
Language
Hindi

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