31 GREEN HABITS TO SAVE OUR PLANET
(0)
Author:
Shri Rohit Mehra (Irs)Publisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Society-social-sciences₹
250
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Rohit Mehra is an IRS officer of 2004 batch. He is a man of versatile hobbies, passions and creativity. He is an author, blogger and motivational speaker. He is a passionate environmentalist and pioneer of vertical gardens in India. He is known as Greenman and has created more than 40 micro- jungles using the principles of Vruksayurveda and Miyawaki. He has planted nearly 7.50 lakhs plants in nearly 4 years and created more than 550 vertical gardens. He has spearheaded the movement of seed-balls in India and has got made and distributed close to 20 lakhs seed-balls in last 3 years which in itself is a record. He has created 2 mobile applications by the name ‘Sundari’ and ‘Election-Eye’. He has been the guiding force to create a mobile app ‘Tirth-yatra’. He is running a successful blog on personality development by the name ‘Design Your Destiny’. He has also written articles on various topics which have featured in national newspapers.
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Rohit Mehra is an IRS officer of 2004 batch. He is a man of versatile hobbies, passions and creativity. He is an author, blogger and motivational speaker. He is a passionate environmentalist and pioneer of vertical gardens in India. He is known as Greenman and has created more than 40 micro- jungles using the principles of Vruksayurveda and Miyawaki. He has planted nearly 7.50 lakhs plants in nearly 4 years and created more than 550 vertical gardens. He has spearheaded the movement of seed-balls in India and has got made and distributed close to 20 lakhs seed-balls in last 3 years which in itself is a record. He has created 2 mobile applications by the name ‘Sundari’ and ‘Election-Eye’. He has been the guiding force to create a mobile app ‘Tirth-yatra’. He is running a successful blog on personality development by the name ‘Design Your Destiny’. He has also written articles on various topics which have featured in national newspapers.
Book Details
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ISBN9789390900596
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: ‘गीता’ कालजयी ग्रंथ है। यह भक्ति के साथ-साथ कर्म की ओर प्रवृत्त करती है। अपने कर्तव्य-पथ से भटक रहे अर्जुन को श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान देकर ही कर्म-पथ पर प्रवृत्त किया। इसलिए हमारे जीवन में गीता का बहुत व्यावहारिक उपयोग है, महती योगदान है। विद्यार्थी काल में ही गीता का भाव समझ गए तो यह जीवन में पग-पग पर काम आएगा। जीने की कला आ जाएगी। आपत्तियों तथा कष्टकर परिस्थितियों में निराशा नहीं घेरेगी। अपने-पराए और मित्र-शत्रु के मोह से मुक्त होने का ज्ञान हो जाएगा। अधिकांश लोग सेवानिवृत्त होकर गीता पढ़ते हैं। जब सारा जीवन मोह, लोभ, काम, क्रोध और अहंकार की भेंट चढ़ गया, दुःख और संतापों का ताप सह लिया, तिल-तिल कर मरते रहे, फिर गीता पढ़ी तो क्या लाभ हुआ? पाप और पुण्य कर्मों का फल तो भोगना निश्चित ही हो गया! इस पुस्तक को विशेष रूप से छात्रों-विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। गीता के हर अध्याय में जो महत्त्वपूर्ण श्लोक हैं, जिन्हें स्मरण किया जा सके, गाया जा सके, उन्हें संकलित किया गया है। स्पष्ट है कि यह संपूर्ण गीता नहीं है, बल्कि मात्र प्रेरणा है। इसे पढ़कर छात्र सन्मति पाएँ, नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए सन्मार्ग पर चलकर जीवन में सफलता के शिखर पर पहुँचें, यही इस पुस्तक के लेखन का उद्देश्य है। विद्यार्थियों के चरित्र-निर्माण तथा कर्तव्य-पथ पर सतत चलने की प्रेरणा देनेवाली एक अनुपम पुस्तक।
Yadon Se Rachi Yatra : Vikalp Ki Talash
- Author Name:
Puran Chandra Joshi
- Book Type:

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Description:
‘यादों से रची यात्रा’ विश्व में समाजवाद की प्रथम प्रयोग–भूमि रूस का यात्रा–वृत्तान्त है और विश्व के प्रथम समाजवाद के विकास और बाद में विघटन का समाजशास्त्र भी। लेकिन इस यात्रा का महत्त्व रूस तक ही सीमित नहीं है। बीसवीं सदी में रूस के समाजवादी प्रयोग का आकर्षण और प्रभाव विश्वव्यापी था। पश्चिम के संकटग्रस्त पूँजीवादी देशों के लिए रूसी समाजवाद एक सार्थक विकल्प प्रस्तुत कर एक गम्भीर चुनौती बन गया और इस कारण आत्मपरीक्षण और किसी हद तक सुधारों का प्रेरक भी। साथ ही रूस औपनिवेशिक दासता से ग्रस्त एशियाई तथा अन्य देशों के लिए अपनी विशिष्ट परिस्थितियों के अनुकूल गैर–पूँजीवादी विकल्पों की तलाश के लिए एक विश्वसनीय प्रेरणास्रोत भी बना। इस प्रकार पश्चिम और पूर्व दोनों के प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों के लिए रूस यात्रा एक सर्जनात्मक चिन्तन यात्रा बन गई।
लेखक द्वारा अतीत का यह पुनरवलोकन जितना मौलिक है, उतना ही समसामयिक महत्त्व का भी है। यह वर्तमान सन्दर्भ में विश्वास के गहरे संकट के मूल कारणों के प्रश्न को हाशिये से केन्द्र में लाकर वैचारिक यात्रा को सकारात्मक दिशा देता है।
समाजशास्त्र के विकास में यात्रा–वृत्तान्तों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बहुत कम विचार हुआ है। ‘यादों से रची यात्रा : विकल्प की तलाश’ पुस्तक ‘यात्रा’ को समाजशास्त्रीय निरीक्षण और विवेचन से जोड़कर एक नया अर्थ देती है।
Jharkhand Ki Adivasi Kala Parampara
- Author Name:
Manoj Kumar Kapardar
- Book Type:

- Description: प्राकृतिक संपदाओं और सौंदर्य से परिपूर्ण झारखंड कला की दृष्टि से एक समृद्ध राज्य है। दशकों पहले जब हजारीबाग के पास इसको के शैलचित्रों की खोज हुई थी, तब दुनिया ने जाना कि हमारे पूर्वज कितने कुशल चितेरे थे । ऐसी अनेक आकृतियों एवं निशानों से पटी पड़ी है झारखंड की धरती अब शोधकर्ता भी प्रकृति की इस अद्भ्रुत रचना का मर्म समझने में लगे हैं। संताल समाज के लोगों द्वारा सदियों से 'जादोपटिया कला' के प्रति खासा रुझान देखा गया है। इनके चित्रों में जीवन का जितना गहरा सार है, उतना ही गहरा रेखाओं का विस्तार है । यह कला संताली समाज में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होती रही है। झारखंड का जनजातीय समाज इतना हुनरमंद है कि अपनी जरुरत की चीज से लेकर अन्य समाज की जरुरतों को भी पूरा करने में वह सक्षम है। शिल्पकला, चित्रकला और देशी उत्पादों से जरूरत के असंख्य सामान तैयार करने में जनजातीय समाज के कौशल का कोई सानी नहीं है। इनके घरों की दीवारों पर इतनी अद्भ्रुत चित्रकारी होती है कि उसकी मिसाल दुर्लभ है | मिट्टी, गेरू और पत्तों से बने रंण इतने सजीव तरीके से दीवारों पर उभरते हैं कि लगता है, सारा गाँव ही कलाकारों का गाँव है । इनकी कलाकृतियों में सिर्फ हुनर ही नहीं दिखता, बल्कि विभिन्न आकृतियों के माध्यम से समाज को संदेश भी देते हैं कि देखो, हमारा जीवन फूल, पत्ती, पशु-पक्षी और प्रकृति से कितनी गहराई से जुड़ा है।
Uru-Jyotih
- Author Name:
Dr. Vasudeva Sharan Agrawala
- Book Type:

- Description: इस युग की सबसे बड़ी उलझन वैदिक परिभाषाओं की खोज है। सायण ने हमें वेदों के शब्दार्थ से परिचित कराया। सायण की सहायता के बिना इस महासमुद्र में हम न जाने कहाँ होते। किन्तु यज्ञीय कर्मकाण्ड की व्याख्या के लिए मन्त्रों का विनियोग तो वैदिक अर्थों का एक अंश मात्र था। वेद के पश्चिमी विद्वानों ने सायण के प्रदर्शित मार्ग से वेदों का अनुशीलन किया, किन्तु उन्होंने भाषाशास्त्र और तुलनात्मक धर्म-विज्ञान इन दो नए अस्त्रों से वैदिक अर्थों की जिज्ञासा को आगे बढ़ाया। आत्म-विद्या के जिज्ञासुओं के लिए मन्त्रों की भाषा और परिभाषाओं को स्पष्ट करने की आवश्यकता है। हमारी दृष्टि में वेदार्थ को अवगत करने के लिए ऊपर के सभी मतों में सत्य का अंश है। जिस विधि से मन्त्रों पर नया प्रकाश पड़े, जिस अर्थ से आत्म-विद्या का कोई नया क्षेत्र या पहलू प्रकाशित हो, वही दृष्टिकोण, प्रमाण या सामग्री स्वागत के योग्य है। वेद के जिज्ञासु छात्र का मन सब ओर से उन्मुक्त रहता है। उसके मन में चतुर्दिश दीप्तिपटों से प्रकाश और वायु का स्वच्छन्द प्रवेश होता है। वह आलोक का स्वागत करता है और उस महान् व्यापक ज्योति के लिए अपने चक्षु खोलता है, जो पृथिवी और द्युलोक के अन्तराल में भरी हुई है। मित्र और वरुण अथवा ऋत और सत्य नामक सृष्टि के द्वन्द्वात्मक तत्त्व की ही ज्योति हमारे भीतर-बाहर, सब ओर व्याप्त है। इसी को ‘उरु-ज्योतिः’ कहा गया है। भारतीय धर्म, संस्कृति-दर्शन-परंपरा के अप्रतिम हस्ताक्षर श्री वासुदेवशरण अग्रवाल के चिंतनपरक लेखों का संकलन।
Loktantra Ki Maya
- Author Name:
Arvind Mohan
- Book Type:

- Description: मंडल, कमंडल और भूमंडलीकरण ने पिछले ढाई-तीन दशकों में मुल्क की राजनीति और समाज में तेज बदलाव किए हैं। ये बदलाव धनात्मक हैं और ऋणात्मक भी। इनसे शायद ही कोई अछूता बचा हो। राजनीति में पिछड़ों का निर्णयात्मक बढ़त लेना, दलितों और आदिवासियों का दमदार ढंग से उभरना, महिला शक्ति का अपनी उपस्थिति दर्ज कराना, हिंदी का बिना सरकारी समर्थन के उभरना, क्षेत्रीय राजनीति का सत्ता के विमर्श में प्रभावी होना जैसी अनेक प्रवृत्तियाँ अगर हमारे लोकतंत्र की ताकत को बढ़ाती हैं तो जाति, संप्रदाय, व्यक्तिवाद, परिवारवाद और राजनीति में धन तथा बाहुबल का जोर बढ़ना काफी नुकसान पहुँचा रहा है। इस दौर की राजनीति और समाज पर पैनी नजर रखनेवाले एक पत्रकार के आलेखों से बनी यह पुस्तक इन्हीं प्रवृत्तियों को समझने-समझाने के साथ इस बात को रेखांकित करती है कि इन सबमें जीत लोकतंत्र की हुई है और उसमें बाकी बुराइयों को स्वयं दूर करने की क्षमता भी है। अगर देश के सबसे कमजोर और पिछड़ी जमातों की आस्था लोकतंत्र में बढ़ी है तो यह सरकार बदलने से लेकर बाकी कमजोरियों को दूर करने के लिए आवश्यक ताकत और ऊर्जा भी जुटा लेगी।
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