31 GREEN HABITS TO SAVE OUR PLANET
Author:
Shri Rohit Mehra (Irs)Publisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Society-social-sciences0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
Rohit Mehra is an IRS officer of 2004 batch. He is a man of versatile hobbies, passions and creativity. He is an author, blogger and motivational speaker. He is a passionate environmentalist and pioneer of vertical gardens in India. He is known as Greenman and has created more than 40 micro- jungles using the principles of Vruksayurveda and Miyawaki. He has planted nearly 7.50 lakhs plants in nearly 4 years and created more than 550 vertical gardens. He has spearheaded the movement of seed-balls in India and has got made and distributed close to 20 lakhs seed-balls in last 3 years which in itself is a record. He has created 2 mobile applications by the name ‘Sundari’ and ‘Election-Eye’. He has been the guiding force to create a mobile app ‘Tirth-yatra’. He is running a successful blog on personality development by the name ‘Design Your Destiny’. He has also written articles on various topics which have featured in national newspapers.
ISBN: 9789390900596
Pages: 120
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: भारतीय जन-जीवन का एक लम्बा दौर ऐसा भी रहा जिसमें हिन्दू और मुस्लिम धर्मों के अति-साधारण लोग बिना किसी वैचारिक आग्रह या सचेत प्रयास के, जीवन की सहज धारा में रहते-बहते एक साझा सांस्कृतिक इकाई के रूप में विकसित हो रहे थे। एक साझा समाज का निर्माण कर रहे थे, जो अगर विभाजन-प्रेमी ताकतें बीच में न खड़ीं होतीं तो एक विशिष्ट समाज-रचना के रूप में विश्व के सामने आता। हमारे गाँवों, कस्बों और छोटे शहरों में आज भी इसके अवशेष मिल जाते हैं। परम्परा का एक बड़ा हिस्सा तो उसके ऐतिहासिक प्रमाण के रूप में हमारे पास है ही। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत भी उसी विरासत का हिस्सा है जो इस उपन्यास के केंद्र में है। खिलजी शासनकाल में देवगिरी के महान गायक गोपाल नायक और अमीर खुसरो के मेल से जिस संगीत की धारा प्रवाहित हुई, अकबर, मुहम्मद शाह रंगीले और वाजिद अली शाह के दरबारों से बहती हुई वह संगीत के अलग-अलग घरानों तक पहुँची। मैहर के बड़ो बाबा अलाउद्दीन खान की तरह इस उपन्यास के बड़ो नानू उस्ताद मह्ताबुद्दीन खान के यहाँ भी संगीत ही इबादत है। इसीलिए उत्तर प्रदेश के खुर्शीद जोगी और बंगाल के बाउल परम्परा के कमोल उनके घर से दामाद के रूप में जुड़े। लेकिन इक्कीसवीं सदी के भारत में विभाजन-प्रेम एक नशे के तौर पर उभर कर आता है। गुजरात में सदी के शुरू में जो हुआ वह अब यहाँ की सामाजिक-सांस्कृतिक मुख्यधारा का सबसे तेज़ रंग है। इस जहरीले परिवेश में नानू अयूब खान, अब्बू खुर्शीद जोगी, बाबा मदन बाउल और अंत में कमोल कबीर एक-एक कर खत्म कर दिए जाते हैं। बच जाती है एक रुलाई जो खुलकर फूट भी नहीं पाती। हलक तक आकर रह जाती है। यह उपन्यास इसी रुलाई का कोरस है। विभाजन को अपना पवित्रतम ध्येय मानने वाली वर्चस्वशाली विचारधारा के खोखलेपन और उसकी रक्त-रंजित आक्रामकता को रेखांकित करते हुए यह उपन्यास भारतीय संस्कृति के समावेशी चरित्र को हिन्दुस्तानी संगीत की लय-ताल के साथ पुनः स्थापित करने का प्रयास करता है।
Ancestral Indian Impact Development
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: This is a book about the impact of global ancestors in the development of the country. It looks at the contributions of these ancestors to the development of culture, religion, politics, science, and technology. It also looks at how their influence is still felt in modern India, and how it has shaped India's unique culture. Through this book, readers will gain an appreciation for the contributions of India's ancestors and gain an understanding of how their influence has shaped India's development. It is a fascinating look at the history and culture of global, and its contributions to the world.
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