Sapiens A Graphic History Volume 2
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सेपियन्स भाग दो सभ्यता के स्तम्भ यह अद्भुत चित्र इतिहास... बौद्धिक, मज़ेदार और एक मानवजाति के बतौर हमारी वास्तविकता की गहनतम उद्भावना है - बिग इशू जीवंत, आकर्षक... और मनुष्यता के उलझे हुए इतिहास की इतनी सुगम प्रस्तुति कि कोई भी इसका आनंद ले सकता है -बी.बी.सी. हिस्ट्री मैगज़ीन यह इंसान के आदिम इतिहास से बेहद कल्पनाशील और खिलंदड़े ढंग से गुज़रना है - स्पेक्टेटर ख़ूबसूरत रूपांतरण...यह किताब बेहतरीन चित्रांकन से ज़रिए मानव जाति की कहानी सुनाती है तथा विज्ञान और इतिहास को जोड़कर हमें यह समझने में मदद करती है कि इंसान इस धरती पर बसे कैसे - बी.बी.सी. साइंस फोकस मैगज़ीन यह हमारे दिमाग के जालों को साफ़ करती है और उसे उजाले से भर देती है, जिससे हम दुनिया को नयी नज़रों से देखने लगते हैं - संडे टाइम्स सेपियन्स इतनी दिलचस्प और विचारोत्तेजक इसलिए है क्योंकि यह उलझे और व्यापक इतिहास के कुछ केन्द्रीय विषयों पर बात करती है और इस अद्भुत मानव सभ्यता की पुनर्रचना के लिए तैयार करती है। यह इस बात का एक प्ररिप्रेक्ष्य देती है कि हम कितने कम समय से इस धरती पर हैं - बराक ओबामा हरारी इतनी आसानी से हमें हमारा इतिहास बताते हैं कि एक बार इस किताब को उठाने के बाद रखना मुश्किल होगा। मैं उन सबको यह किताब पढ़ने के लिए कहूँगा जो मनुष्य के इतिहास और उसके भविष्य में रुचि रखते हैं - बिल गेट्स अविश्वसनीय रूप से बेहतरीन किताब - क्रिस इवांस चित्र इतिहास
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सेपियन्स भाग दो सभ्यता के स्तम्भ यह अद्भुत चित्र इतिहास... बौद्धिक, मज़ेदार और एक मानवजाति के बतौर हमारी वास्तविकता की गहनतम उद्भावना है - बिग इशू जीवंत, आकर्षक... और मनुष्यता के उलझे हुए इतिहास की इतनी सुगम प्रस्तुति कि कोई भी इसका आनंद ले सकता है -बी.बी.सी. हिस्ट्री मैगज़ीन यह इंसान के आदिम इतिहास से बेहद कल्पनाशील और खिलंदड़े ढंग से गुज़रना है - स्पेक्टेटर ख़ूबसूरत रूपांतरण...यह किताब बेहतरीन चित्रांकन से ज़रिए मानव जाति की कहानी सुनाती है तथा विज्ञान और इतिहास को जोड़कर हमें यह समझने में मदद करती है कि इंसान इस धरती पर बसे कैसे - बी.बी.सी. साइंस फोकस मैगज़ीन यह हमारे दिमाग के जालों को साफ़ करती है और उसे उजाले से भर देती है, जिससे हम दुनिया को नयी नज़रों से देखने लगते हैं - संडे टाइम्स सेपियन्स इतनी दिलचस्प और विचारोत्तेजक इसलिए है क्योंकि यह उलझे और व्यापक इतिहास के कुछ केन्द्रीय विषयों पर बात करती है और इस अद्भुत मानव सभ्यता की पुनर्रचना के लिए तैयार करती है। यह इस बात का एक प्ररिप्रेक्ष्य देती है कि हम कितने कम समय से इस धरती पर हैं - बराक ओबामा हरारी इतनी आसानी से हमें हमारा इतिहास बताते हैं कि एक बार इस किताब को उठाने के बाद रखना मुश्किल होगा। मैं उन सबको यह किताब पढ़ने के लिए कहूँगा जो मनुष्य के इतिहास और उसके भविष्य में रुचि रखते हैं - बिल गेट्स अविश्वसनीय रूप से बेहतरीन किताब - क्रिस इवांस चित्र इतिहास
Book Details
-
ISBN9789392088780
-
Pages256
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age0-11 yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: अप्पो दीपो भव' पुस्तक शिक्षा की भारतीय संस्कृति के केंद्र में समसामयिक संदर्भो से जुड़ी महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। इसमें राजस्थान के राज्यपाल और विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति, संविधान और संस्कृति-मर्मज्ञ श्री कलराज मिश्र के समय- समय पर दिए गए चिंतनपरक भाषण संकलित हैं। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति से जुड़ी हमारी संस्कृति के आलोक में यह पुस्तक शिक्षा में सीखे गए और शिक्षण संस्थाओं में प्राप्त किए गए ज्ञान से समाज को आलोकित करने की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण विचार-सामग्री लिये हुए है। पुस्तक की बड़ी विशेषता यह भी है कि इसमें प्रवाहपूर्ण भाषा में भारतीय संस्कृति और सभ्यता के साथ शिक्षा से जुड़े हमारे प्राचीन चिंतन और शोध की संस्कृति पर महत्त्वपूर्ण विचार हैं। नई शिक्षा नीति और उससे जुड़े विभिन्न सरोकारों के साथ ही इसमें आत्मनिर्भर भारत की सोच के अंतर्गत विश्वविद्यालयों में रोजगारोन्मुखी शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जुड़े अध्ययन-अध्यापन के भी बहुत से आयामों, सुझावों के साथ मौलिक स्थापनाएँ हैं । पुस्तक में शिक्षा को ज्ञान-हस्तांतरण की सर्वोत्कृष्ट प्रक्रिया बताते हुए लेखक ने भारतीय संविधान में समाहित उदात्त भारतीय जीवन-मूल्यों, वैश्वीकरण में स्थानीय विकास की चुनौतियों और प्रजातंत्र में मतदान के जरिए व्यवहार में जनभागीदारी, सर्वश्रेष्ठ के लिए संकल्पबद्ध होकर युवाओं को कार्य करने, युवाओं में उद्यमिता विकास आदि विषयों पर मौलिक चिंतन है।
Pauranik Parampara Me Striyon Ka Sampattik Adhikar
- Author Name:
Harsh Kumar
- Book Type:

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Description:
हिन्दी साहित्य के इतिहास का आदिकाल उसका स्वरूय-विकास एवं नामकरण विवादास्पद रहा है। इसका आरम्भ छठी शती से बारहवीं शती तक सिद्ध किया गया है। इसे अनेक नाम दिए गए हैं. जैसे- वीरगाथा काल, उदूभवकाल, उत्पत्तिकाल बीज बपन काल, सन्धिकाल, सिद्ध सामन्त काल, चारणकाल आदि। किन्तु अब 'आदिकाल' नाम ही बहुमान्य हो गया है।
प्राचीन हिन्दी भाषा के भी कई नाम सुझाए गए हैं, जैसे—परवर्ती अपभ्रंश प्रकृताभास भाषा, संघाभाषा, हिन्दवी, पुरानी हिन्दी, अवहट्ट अवहंस, देसिलबयनर, डिंगल, पुरानी राजस्थानी गूजरी, पिंगल, भाखा, कोसली, दक्खिनी हिन्दी, देशभाषा आदि। किन्तु अब राहुलजी और गुलेरीजी के द्वारा स्थापित 'पुरानी हिन्दी संज्ञा ही तर्क संगत लगती है।
आदिकाल में सिद्धनाथ, जैन, सन्त, सूफी रामकृष्णाश्रयी भक्त, चारण, लोककवि, नीतिकार वीरकाव्य परम्परा के प्रशस्तिकार, जीवनीकार, शृंगारी कवि, वैयाकरण गद्यकार सभी का योगदान रहा है।
आदि हिन्दी कवि के रूप में पुष्य, पुण्ड, पुष्पदंत, विमलसूरि आदि की अपेक्षा सरहपाद- सरह (स्थितिकाल-750-769) को मागधी-सौरसेनी अपभ्रंश से विकसित 'पुरानी हिन्दी' के सर्वाधिक सन्निकट होने के कारण यह श्रेय देना ज्यादा तथ्याश्रित होगा।
यह उल्लेखनीय है कि साहित्य की प्रायः प्रत्येक प्रवृत्ति के बीज इस अवधि में अंकुरित हुए हैं। इतिहास लेखन करते हुए जिन्हें पहले मध्यकालीन माना गया था, अब उनमें से कुछ आदिकाल में गणनीय हैं।
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