Shaadi ka Joker
Author:
Abdul BismillahPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Reviews
Price: ₹ 236
₹
295
Available
‘शादी का जोकर’ वरिष्ठ कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह का महत्त्वपूर्ण कहानी-संग्रह है। इस संग्रह में सत्रह कहानियाँ हैं। अब्दुल बिस्मिल्लाह ने अपनी रचनाशीलता का प्रस्थान व्यापक सामाजिक सरोकारों से निर्मित किया था। उपन्यासों और कहानियों की सार्थक व यशस्वी रचना-यात्रा करने के बाद उनमें नई तरह की सादगी जगमगाने लगी है।</p>
<p>प्रस्तुत संग्रह की कहानियाँ सक्रिय शब्दों में व्यक्त हुई हैं। लेखक ने आम ज़िन्दगी से झाँकती परेशानी, पशेमानी और कशमकश से इन कहानियों के सूत्र सहेजे हैं। पहली ही कहानी ‘ख़ून' रिश्तों की हिफ़ाज़त करनेवाले शख़्स और बेमुरव्वत दुनिया की दास्तान है। 'त्राहिमाम', 'कैलेंडर', ‘महामारी’, ‘तीसरी औरत’ सरीखी रचनाएँ रेखांकित करती हैं कि पठनीयता और सार्थकता की सहभागिता से स्मरणीय का जन्म होता है।</p>
<p>यह उल्लेखनीय है कि एक नैतिक निष्कपट क़िस्सागोई अब्दुल बिस्मिल्लाह की पहचान है। सामाजिक अविश्वास और उत्पीड़न के प्रसंग को 'शादी का जोकर' में अद्भुत अभिव्यक्ति मिली है। बारिश होने पर गाँव की बरात में आए दिल्ली के कला रसिकों का भागना और कला की दशा का बखान ‘तूफ़ानी पहलवान’ के इन शब्दों में है—‘अब सिर्फ़ बच गई अमराई में दोनों चारपाइयाँ, जो भीगती रहीं उस धारासार वर्षा में और आम के तने से चिपटे खड़े रहे तूफ़ानी पहलवान हाथ जोड़े। भीगती रही काँधे से लटकी उनकी ढोलक और उसकी डोरियों से टपकता रहा बूँद-बूँद पानी टप्प-टप्प...।'</p>
<p>ज़ाहिर है कि 'शादी का जोकर' एक उल्लेखनीय कहानी-संग्रह है। कथा-रस के साथ समकालीन सभ्यता में व्याप्त असमंजस की अभिव्यक्ति इसकी विशेषता है।
ISBN: 9788126724987
Pages: 132
Avg Reading Time: 4 hrs
Age : 18+
Country of Origin: India
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Murari Sharma
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- Description: बाणमूठ कहानी से राष्ट्रीय फलक पर चर्चा में आए कहानीकार मुरारी शर्मा ने अब तक अपने चार कहानी संग्रहों और देबकू एक प्रेम कथा नामक उपन्यास से हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में अपना योगदान सुनिश्चित किया है। इसी क्रम में पाँचवाँ कहानी-संग्रह है 'हवाओं का रुख'। इन कहानियों को पढ़ते हुए इस बात के संकेत मिलते हैं कि कहानीकार की रचना-प्रक्रिया कई स्तरों पर अपनी रचनात्मकता के नए आयाम खोज रही है। इन कहानियों के किरदार भले ही बड़े लोग न हों मगर ये कहानियाँ बड़ी चिन्ताओं की कहानियाँ अवश्य हैं। ये चिंताएँ कहानीकार मुरारी शर्मा की जीवन के प्रति प्राथमिकताओं के दृष्टिकोण को भी स्पष्ट करती हैं। ये कहानियाँ मनुष्य की त्रासद नियतियों की केन्द्रीयता के बावजूद अपने कहानीपन को बनाये रखती हैं इसलिए ये पाठकों को आकर्षित करती हैं। पाठ की रोचकता बनाये रखने में कहानीकार मुरारी शर्मा की समर्थ भाषा और वर्णन शैली भी अनिवार्य भूमिका निभाती नजर आती है। वैसे भी वे लोकभाषा में प्रचलित अनेक शब्दों का प्रयोग करते हुए वर्णन में रोचकता बनाये रखने में सिद्धहस्त हैं, ऐसा आभास उनकी पूर्व प्रकाशित अनेक कहानियों को पढ़ते हुए भी हो जाता है। इन कहानियों में भी लोक प्रचलित अनेक शब्दों, मुहावरों व लोकोक्तियों के प्रयोग भाषाई रोचकता को बनाये रखने में कामयाब रहे हैं। यह भाषा ही इनकी सबसे बड़ी ताकत है जो छोटे-छोटे जीवन प्रसंगों को सामान्य चरित्रों के माध्यम से एक बड़ी कहानी के रूप में सफलतापूर्वक रूपांतरित देने में सक्षम है। —डॉ. विजय विशाल
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