Markande Ki Kahaniyan
(0)
Author:
MarkandeyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
600
480 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
प्रस्तुत संकलन में मार्कण्डेय के अब तक प्रकाशित सात कहानी-संग्रह शामिल हैं। कहना न होगा कि स्वतंत्रता के बाद लिखी गई इन कहानियों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ है। देश-विदेश में भी इनके अनुवादों पर वहाँ के आलोचकों ने लेख एवं समीक्षाएँ लिखी हैं। अत्यन्त सहज वाचन और शिल्पगत नवीनता के कारण इन कहानियों में चिन्हित समकालीन सन्दर्भ भारतीय जीवन की वास्तविकताओं को लोगों के सामने ला खड़ा करते हैं। आदर्श और बाह्य मान्यताओं वाली दृष्टि से देखे जाने के कारण संघर्ष और बदलाव की जो बातें हवा में उठाई जा रही थीं, उनके सामने इन कहानियों ने एक नया दृश्य ला खड़ा किया। अन्धकार, अशिक्षा, ग़रीबी ही नहीं धार्मिक अन्धविश्वास, शोषण और अनाचार के परिवेश को उजागर करने के कारण इन कहानियों को लोगों ने एक उपलब्धि की तरह स्वीकार किया। इस संकलन में ‘पान-फूल’, ‘महुए का पेड़’, ‘हंसा जाई अकेला’, ‘भूदान’, ‘माही’, ‘सहज और शुभ’ तथा ‘बीच के लोग’ नामक पुस्तकें शामिल हैं।
Read moreAbout the Book
प्रस्तुत संकलन में मार्कण्डेय के अब तक प्रकाशित सात कहानी-संग्रह शामिल हैं। कहना न होगा कि स्वतंत्रता के बाद लिखी गई इन कहानियों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ है। देश-विदेश में भी इनके अनुवादों पर वहाँ के आलोचकों ने लेख एवं समीक्षाएँ लिखी हैं। अत्यन्त सहज वाचन और शिल्पगत नवीनता के कारण इन कहानियों में चिन्हित समकालीन सन्दर्भ भारतीय जीवन की वास्तविकताओं को लोगों के सामने ला खड़ा करते हैं। आदर्श और बाह्य मान्यताओं वाली दृष्टि से देखे जाने के कारण संघर्ष और बदलाव की जो बातें हवा में उठाई जा रही थीं, उनके सामने इन कहानियों ने एक नया दृश्य ला खड़ा किया। अन्धकार, अशिक्षा, ग़रीबी ही नहीं धार्मिक अन्धविश्वास, शोषण और अनाचार के परिवेश को उजागर करने के कारण इन कहानियों को लोगों ने एक उपलब्धि की तरह स्वीकार किया। इस संकलन में ‘पान-फूल’, ‘महुए का पेड़’, ‘हंसा जाई अकेला’, ‘भूदान’, ‘माही’, ‘सहज और शुभ’ तथा ‘बीच के लोग’ नामक पुस्तकें शामिल हैं।
Book Details
-
ISBN9788180314711
-
Pages437
-
Avg Reading Time15 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Sampoorana Kahaniyan : Mannu Bhandari
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

-
Description:
कई बार ख़याल आता है कि यदि मेरी पहली कहानी बिना छपे ही लौट आती तो क्या लिखने का यह सिलसिला जारी रहता या वहीं समाप्त हो जाता...क्योंकि पीछे मुड़कर देखती हूँ तो याद नहीं आता कि उस समय लिखने को लेकर बहुत जोश, बेचैनी या बेताबी जैसा कुछ था। जोश का सिलसिला तो शुरू हुआ था कहानी के छपने, भैरव जी के प्रोत्साहन और पाठकों की प्रतिक्रिया से।
अपने भीतरी ‘मैं’ के अनेक-अनेक बाहरी ‘मैं’ के साथ जुड़ते चले जाने की चाहना में मुझे कुछ हद तक इस प्रश्न का उत्तर भी मिला कि मैं क्यों लिखती हूँ? जब से लिखना आरम्भ किया, तब से न जाने कितनी बार इस प्रश्न का सामना हुआ, पर कभी भी कोई सन्तोषजनक उत्तर मैं अपने को नहीं दे पाई तो दूसरों को क्या देती? इस सारी प्रक्रिया ने मुझे उत्तर के जिस सिरे पर ला खड़ा किया, वही एकमात्र या अन्तिम है, ऐसा दावा तो मैं आज भी नहीं कर सकती, लेकिन यह भी एक महत्त्वपूर्ण पहलू तो है ही। किसी भी रचना के छपते ही इस इच्छा का जगना कि अधिक से अधिक लोग इसे पढ़ें, केवल पढ़ें ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ें भी—संवेदना के स्तर पर उसके भागीदार भी बनें यानी कि एक की कथा-व्यथा अनेक की बन सके, बने...केवल मेरे ही क्यों, अधिकांश लेखकों के लिखने के मूल में एक और अनेक के बीच सेतु बनने की यह कामना ही निहित नहीं रहती?
मैंने चाहे कहानियाँ लिखी हों या उपन्यास या नाटक—भाषा के मामले में शुरू से ही मेरा नज़रिया एक जैसा रहा है। शुरू से ही मैं पारदर्शिता को कथा-भाषा की अनिवार्यता मानती आई हूँ। भाषा ऐसी हो कि पाठक को सीधे कथा के साथ जोड़ दे...बीच में अवरोध या व्यवधान बनकर न खड़ी हो। कुछ लोगों की धारणा है कि ऐसी सहज-सरल, बकौल उनके सपाट भाषा, गहन संवेदना, गूढ़ अर्थ और भावना के महीन से महीन रेशों को उजागर करने में अक्षम होती है। पर क्या जैनेन्द्र जी की भाषा-शैली इस धारणा को ध्वस्त नहीं कर देती? हाँ, इतना ज़रूर कहूँगी कि सरल भाषा लिखना ही सबसे कठिन काम होता है। इस कठिन काम को मैं पूरी तरह साध पाई, ऐसा दावा करने का दुस्साहस तो मैं कर ही नहीं सकती, पर इतना ज़रूर कहूँगी कि प्रयत्न मेरा हमेशा इसी दिशा में रहा है।
—भूमिका से
Kissa Jaam Ka
- Author Name:
Nasera Sharma
- Book Type:

-
Description:
ईरान और भारत की सांस्कृतिक घनिष्ठता और साहित्यिक आदान-प्रदान का क्रम अब भी जीवित है और उसका एक नमूना ये खुरासान की लोककथाएँ हैं जिनका फ़ारसी से हिन्दी में अनुवाद पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है। ये केवल अनुवाद मात्र ही नहीं हैं, मौलिक रचनाएँ ही हैं, क्योंकि ये लोककथाएँ खुरासान की बोली में हैं। अनगिनत पीढ़ियों से बहती हुई सरिता की तरह, उस जन समाज की लोककथाएँ, जो कि एक क्षेत्र विशेष में फला और फूला है, उसके आधारभूत विचारधाराओं, सभ्यता तथा संस्कृति की प्रतीक हैं।
खुरासान की प्रस्तुत लोककथाएँ उस क्षेत्र का, जो ईरान की सभ्यता और संस्कृति में बेजोड़ रहा है, एक दर्पण है। इसमें पाठक उस प्राचीन भव्य जन समाज की एक झलक देख सकते हैं। खुरासान एक चौराहे की तरह है जहाँ ईरान की सभ्यता तथा संस्कृति संगठित हुई और जहाँ से अन्य क्षेत्रों में फैली। ‘तूस’, ‘निशापुर’ और ‘मशहद’ के केन्द्र सांस्कृतिक वैभव के प्रतीक रहे और जहाँ पर ‘उमर खैयाम’ और ‘फिरदौसी’ जैसे चिराग़ अब भी जीवित हैं। खुरासान की ये लोककथाएँ, 'निशापुर' और ‘दमगान’ से निकले हुए फ़रोज़ों की तरह भव्य तथा सारगर्भित हैं।
आशा है कि पाठक इन कथाओं को पढ़कर खुरासान के बारे में जो कि ईरान की सभ्यता का स्तम्भ रहा है, ईरान तथा भारत की मैत्री तथा पारस्परिक सांस्कृतिक आधारों का अनुमान कर पाएँगे।
Qissa-Qissa Lucknowaa
- Author Name:
Zilani Bano
- Book Type:

- Description: ्सागोई उर्दू ज़बान का कदीमी फ़न है, जिसे वक़्त के साथ भुला दिया गया था, लेकिन इधर कुछ लोगों की कोशिशों के चलते यह कला वापस मुख्यधारा में आ रही है। हिमांशु बाजपेयी इन्हीं जियालों में एक हैं। इस किताब में उनके लखनऊ से मुतल्लिक क़िस्से हैं जिन्हें उन्होंने लोगों से, बड़े-बूढ़ों से, किताबों से, और कुछ ख़ुद के अपने तजुर्बों से हासिल करके क़लमबंद किया है। कुछ क़िस्से हो सकता है, पहले आपने सुने हों, लेकिन यहाँ हिमांशु ने उन्हें जिस तरह पेश किया है, वह उन्हें उनके क़िस्से बना देता है। एक बात और, लखनऊ के बारे में क़िस्सों की बात आती है तो ध्यान सीधे नवाबों के क़िस्सों की तरफ़ चला जाता है, लेकिन ये क़िस्से आमजन के हैं। लखनऊ की गलियों-मुहल्लों में रहने-सहनेवाले आम लोगों के क़िस्से। इनमें उनके दु:ख-दर्द भी हैं, उनकी शरारतें भी हैं, उनकी हिकमतें और हिमाकतें भी हैं, गरज़ कि वह सब है जो हर आम शख़्स इतिहास द्वारा गढ़े किसी भी नवाब या बादशाह से बड़ी और ज़्यादा काबिले-यक़ीन शय बनता है। बकौल हिमांशु वाजपेयी ‘‘ये क़िस्से लखनऊ की मशहूर तहज़ीब के ‘जनपक्ष’ को उभारते हैं...ज़्यादातर क़िस्से सच्चे हैं। कुछ एक सच्चे नहीं भी हैं...।’’ लेकिन इंसान के रुतबे को बतौर इंसान देखने की उनकी मंशा एकदम सच्ची है। लखनऊ के नवाबों के क़िस्से तमाम प्रचलित हैं, लेकिन अवाम के क़िस्से किताबों में बहुत कम मिलते हैं, जो उपलब्ध हैं, वह भी बिखरे हुए। यह किताब पहली बार उन तमाम बिखरे क़िस्सों को एक जगह बेहद ख़ूबसूरत भाषा में सामने ला रही है, जैसे एक सधा हुआ दास्तानगो सामने बैठा दास्तान सुना रहा हो
Yahan Koi Gulmuhar Nahin Hai
- Author Name:
Shaival
- Book Type:

-
Description:
आज़ादी के बाद देश परिवर्तन के दो मुख्य पड़ावों से गुज़रा। पहले पड़ाव के बाद ज़मींदारी गई, नई योजना की तुरही बजी, टांड़-टिकोलों पर नए गढ़ बने। विकास की धारा बहने लगी। इस धारा ने गाँव-क़स्बों को नया स्वरूप दिया। नए छाया अधिपति बने। रंगदार, लठधर और अफ़सरों के बीच नए सत्ता-सम्बन्ध बने। विकास के गढ़ ‘उपनिवेश के मुख्यालय’ बन गए। भूमंडलीकरण दूसरा पड़ाव था, जिसने देश का चेहरा पूरी तरह बदल दिया। ‘रियासत’ छोड़कर गए ज़मींदार एन.आर.आई. बनकर अपने-अपने नए घरों में लौट आए। अपने परिवार के महान इतिहास को संरक्षित रखने और जड़ों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए।...अन्दर की चीज़ें बाहर जाने लगीं, बाहर की चीज़ें अन्दर आने लगीं तो पता लगा, इसके कारण हमारी प्राथमिकताएँ ही बदल गईं। शिक्षा, विकास, आत्मनिर्भरता, मानवीयता, समुदायबोध—सबको लाँघता हुआ पहली सीढ़ी पर कुछ और आ बैठा। नौकरानी अपने महीने भर की कमाई ब्यूटी पार्लर में लुटाने पहुँच गई। कूलर जैसी जड़ मशीन प्राकृतिक जीवन की ऊष्मा खा गई। ज़िन्दगी वही नहीं रही, उसके मायने बदल गए। पुरानी संवेदनाओं का इस्तेमाल भर होने लगा, पर लक्ष्य पूरी तरह बदल गए।
भारतीय समाज यात्रा के मुख्य पड़ावों से जिन बाह्य और अन्दरूनी परिवर्तनों का शिकार हुआ, उन्हें गहराई में जाकर रेखांकित करती हैं ये कहानियाँ। दूसरे लहजे में कहें तो ‘नई लोक-संस्कृति’ की गवाह बनती हैं ये कहानियाँ।
Maaran Mantra
- Author Name:
Vimal Chandra Pandey
- Book Type:

- Description: समय के चालाक और कुटिल हेर-फेर के बाद बनारस के घोर-घनघोर जीवन को एक ऐसे किस्सागो की जरूरत थी, जो वक्त के साथ उतनी ही बेहयाई और बेरहमी से पेश आने की कुव्वत रखता हो। विमल चन्द्र पाण्डेय इस जरूरत को पूरा करते हैं। उनकी कहानी ‘जिन्दादिल’ का सिर्फ एक वाक्य ही काफी है—‘उनके घरों में पैसे की कमी थी, लेकिन उनके भीतर जीवन की कमी नहीं थी।’ इस छोटी-सी बनारसी अन्दाज की कहानी में ऊँचे तबके के ब्रांडेड जूतों के साथ निचले तबके के डुप्लीकेट जूतों की सीधी टक्कर है। विमल की कहानियों के पाँव अपने ठेठ लोकेल पर टिके हैं, लेकिन आँखें चारों तरफ देखती हैं। इन कहानियों में गजब का आमादापन है, बेधड़क लड़कपन है लेकिन इनके पात्र लम्पट नहीं हैं। अपनी सारी कमजोरियों और बदमाशियों के बावजूद उनके पास एक तेज और सनसनाती वर्ग चेतना है, धधकती हुई भावनाएँ हैं और सुलगती हुई गहराइयाँ भी जो ‘मारण मंत्र’ जैसी कहानी को सम्भव बनाती हैं। उसकी मार्मिकता जितनी विध्वंसक है उतनी ही आत्मघाती भी। प्रेम, रहस्य, वीभत्स तांत्रिक साधना और कामुकता के इस घातक मिश्रण को जाति और वर्ग भेद के कॉम्पलेक्स और ज्यादा जहरीला बना देते हैं। इन कहानियों में फटीचरों, मुफलिसों और गाँजा-चरस या शराब पीने वाले नशेड़ियों का हुजूम जिस धरातल पर खड़ा है, उस धरातल के तापमान को पहचानने की जरूरत है। ये बिखरे और बिफरे हुए लोग जिस स्थायित्व और सम्मान के हकदार हैं वह उन्हें नहीं मिला तो हमारी पूरी सामाजिक संरचनाएँ तार-तार हो सकती हैं। —मनोज रूपड़ा
Pratinidhi Kahaniyan : Premchand
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: भारतीय ग्रामीण जीवन और जनमानस की विभिन्न स्थितियों के अप्रतिम चितेरे मुंशी प्रेमचन्द विश्वविख्यात साहित्यकारों की पंक्ति में आते हैं। उनकी ये प्रतिनिधि कहानियाँ प्रायः पूरी दुनिया की पाठकीय चेतना का हिस्सा बन चुकी हैं। सुप्रसिद्ध प्रगतिशील कथाकार भीष्म साहनी द्वारा चयनित ये कहानियाँ भारतीय समाज और उसके स्वभाव के जिन विभिन्न मसलों को उठाती हैं, ‘आज़ादी’ के बावजूद वे आज और भी विकराल हो उठे हैं, और जैसा कि भीष्म जी ने संकलन की भूमिका में कहा है कि प्रेमचन्द की मृत्यु के पचास साल बाद आज उनका साहित्य हमारे लिए एक चेतावनी के रूप में उपस्थित है। जिन विषमताओं से प्रेमचन्द अपने साहित्य में जूझते रहे, उनमें से केवल ब्रिटिश शासन हमारे बीच मौजूद नहीं है, शेष सब तो किसी-न-किसी रूप में वैसी-की-वैसी मौजूद हैं! वस्तुतः प्रेमचन्द ने हमारे साहित्य में जिस नए युग का सूत्रपात किया था, साहित्य को वे जिस तरह जीवन के निकट अथवा जीवन को साहित्य के केन्द्र में ले आए थे, वह हमारे लिए आज भी प्रासंगिक है।
Aaj Nahi Padhunga
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description: ‘आज नहीं पढ़ूँगा’ कृष्ण कुमार की बाल कहानियों का संकलन है। घर, पड़ोस और स्कूल के आसपास घूमती बच्चों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जुड़ी यह रोमांचक कथा-शृंखला दो दशकों से चर्चा का विषय बनी हुई है। इसकी दो कहानियाँ पहली बार अज्ञेय के ‘नया प्रतीक’ में छपी थीं। बच्चों को उनके अपने मनोलोक की गहराइयों में ले जाने वाली यह किताब मामूली बातों में कौतूहल जगाती है और बार-बार पढ़ने की इच्छा पैदा करती है।
Fuhar
- Author Name:
Yogi Mahajan
- Book Type:

- Description: Fuhar-stories
Mutton Dilruba
- Author Name:
Shubham Upadhyay
- Book Type:

- Description: हिंदी साहित्य जगत में एक बिल्कुल भिन्न स्वर के कहानीकार हैं शुभम उपाध्याय। उनके इस कहानी संग्रह ‘मटन दिलरुबा’ में कुल 18 कहानियाँ हैं। पूरा संग्रह एक नयी तासीर और अनुभवबोध से पाठकों को परिचित कराता है। इनकी कहानियों का सम्बन्ध भारतीय मुस्लिम जीवन से है। हिंदी कहानियों पर होनेवाली तमाम चर्चाओं में यह बात अक्सर उठती रही है कि हिंदी साहित्य में रोजमर्रा के मुस्लिम जीवन और किरदारों पर बहुत कम लिखा गया है। यह सच भी है। ऐसे में शुभम उपाध्याय ने जो कर दिखाया है, वह पूरे साहित्य जगत के लिए शुभ है। 18 सितंबर 1989 को सागर,म.प्र. में जन्मे शुभम उपाध्याय ने इंदौर से बी.ई.(आई.टी.) की डिग्री प्राप्त की. संस्था श्यामलम् द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ युवा सम्मान 2015’ से सम्मानित शुभम ने अब तक अपनी साहित्य यात्रा में नाट्य लेखन, आदिकाव्य और शायरी जैसी विधाओं में प्रमुखता से हस्तक्षेप किया है. शुभम उपाध्याय की पुस्तक “मटन दिलरूबा” ,18 बेहतरीन कहानियों का एक लाजवाब संग्रह है, जो एक नयी तासीर और एक अलग क़िस्म के तिलिस्म से पाठकों का परिचय करवाता है।
Rajnaitik Kahaniyan
- Author Name:
Volga
- Book Type:

- Description: ये कहानियाँ उस राजनीति का पर्दाफ़ाश करती हैं जो भारतीय समाज में स्त्री-शरीर के इर्द-गिर्द बुनी गई हैं। संविधान और क़ानून से लेकर परिवार और व्यक्ति की मानसिकता तक में इस राजनीति के सूत्र गुँथे हैं। लेखिका का मानना है कि शरीर के शोषण से स्त्री को मानसिक रूप से दमित रखना, उसके व्यक्तित्व के विकास को रोककर उसके शरीर को नियंत्रित रखना एक गहरी राजनीति है जो पुरुष-प्रधान समाजों के मूल्यों के साथ गुँथी हुई है। अपना निजी काम समझकर जिसमें स्त्रियाँ अपनी पूरी ऊर्जा उँडेल देती हैं, वे काम दरअसल उनके लिए नहीं होते। समाज की धारणा यह है कि शरीर तथा मन, दो अलग-अलग इकाइयाँ हैं, और वह अवसर के अनुसार कभी मन तो कभी शरीर को अहमियत देने लगता है। लेखिका का कहना है कि हम अपने शरीर से अलग नहीं हैं, अब इस बात को स्पष्ट रूप से कहना अनिवार्य है।
Pratinidhi Kahaniyan : Mridula Garg
- Author Name:
Mridula Garg
- Book Type:

-
Description:
‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से सम्मानित मृदुला गर्ग का कथा-संसार विविधता के अछोर तक फैला हुआ है। उनकी कहानियाँ मनुष्य के सारे सरोकारों से गहरे तक जुड़ी हुई हैं। समाज, देश, राजनीतिक माहौल, सामाजिक वर्जनाओं, पर्यावरण से लेकर मानव मन की रेशे-रेशे पड़ताल करती नज़र आती हैं। इस संकलन की कहानियाँ अपने इसी ‘मूड’ या मिज़ाज के साथ प्रस्तुत हुई हैं।
मृदुला गर्ग की कहानियाँ पाठक के लिए इतना ‘स्पेस’ देती हैं कि आप लेखक को गाइड बना तिलिस्म में नहीं उतर सकते, इसे आपको अपने अनुसार ही हल करना पड़ता है। यही कारण है कि बने-बनाए फ़ॉरमेट या ढर्रे से, ऊबे बग़ैर, आप पूरी रोचकता, कौतूहल और दार्शनिक निष्कर्ष तक पहुँच सकते हैं। गलदश्रुता के लिए जगह न होते हुए भी आपकी आँखें कब नम हो जाएँ, यह आपके पाठकीय चौकन्ने पर निर्भर करता है। यही मृदुला गर्ग की क़िस्सागोई का कौशल या कमाल है, जहाँ लिजलिजी भावुकता बेशक नहीं मिलेगी, पर भावना और संवेदना की गहरी घाटियाँ मौजूद हैं, एक बौद्धिक विवेचन के साथ।
—दिनेश द्विवेदी
Dharohar Kahaniyaan : Acharya Chatursen Shastri
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description: चतुरसेन शास्त्री ने अपनी कहानियों का निर्माण कल्पना और इतिहास के इतने रोमानी धरातल से किया है कि ये कहानियाँ सदा अमर रहेंगी। इन कहानियों के कथानक निर्माण में क्रमबद्ध स्वाभाविक घटनाओं के घटने का प्रमुख हाथ है। इस संयोग से कथानक में नाटकीय विकास होता है। उनकी कथा-सृष्टि सौन्दर्य, प्रेम और बलिदान की रेखाओं से हुई है। उनकी सामाजिक कहानियों में भी इसी तरह कल्पना, नाटकीय स्थितियों, संयोग और आदर्श आदि तत्त्वों का आपस में अद्भुत तादात्म्य उपस्थित हुआ है। —लक्ष्मीनारायण लाल
Thakazhiyude Cherukathakal
- Author Name:
Thakazhi Sivasankara Pillai +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: discriptation awaited
Rekhaon Mein Ruka Aakash
- Author Name:
Premlata
- Book Type:

-
Description:
कुछ अनसुलझे सवाल आदमी के मनो-मस्तिष्क में इतनी मज़बूती से जड़ें जमाए रखते हैं कि उनका हल हमारे सामने होता है लेकिन हम करते नहीं, कर नहीं पाते या हम करना नहीं चाहते और लगे रहते हैं एक अन्तहीन उधेड़बुन में।
हमारा जीवन रिश्तों में बँधा होता है लेकिन जीवन की मौजूदा चुनौतियों और तनावों के चलते रिश्तों को निभाना आज बहुत ही दुष्कर हो गया है।
‘रेखाओं में रुका आकाश’ हमारे अतीत और वर्तमान का कोरा सच है। यथार्थ से जुड़ी हुई ये वो कहानियाँ हैं, जिन्हें हम जीने के लिए अभिशप्त हैं।
इन कहानियों में मनुष्य का जीवन, मन, आशा, निराशा सब कुछ है। प्रेम और व्यक्ति के जीवन में उसकी विभिन्न छायाओं, प्रतिच्छायाओं का अंकन करती हुई ये कहानियाँ हमारी संवेदना को एक नया आकार देती हैं। पात्रों का चयन, भाषा और कहने की शैली का अनूठापन भी इन कहानियों की एक विशेषता है।
Kala Sagar
- Author Name:
Tejendra Sharma
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Akbar Birbal Ki Anokhi Duniya
- Author Name:
Ashok Maheshwari
- Book Type:

- Description: अकबर विनोदप्रिय शासक था। मनोरंजन और ज़िन्दादिली का मुरीद। बीरबल का बुद्धिबल तीव्र था। वह समझ लेता था कि बादशाह अकबर की किस भंगिमा का क्या अर्थ है, और बीरबल अकबर की भंगिमा के अनुरूप अपने आपको ढाल लेता था। इसी विशेषता के कारण बीरबल अकबर का सखा बन गया था। अपनी तेज बुद्धि, मनोरंजक बातें, सूझ-पूर्ण ढंग से समस्याओं को सुलझाने और समयानुकूल निर्णय लेने की दक्षता के कारण बीरबल ने अकबर के दरबार में ही नहीं, बल्कि उसके जीवन और मन में भी स्थान बना लिया था। समय के साथ बीरबल और अकबर के क़िस्से मशहूर होने लगे। अपनी रोचकता, मनोरंजन की क्षमता और हाज़िरजवाबी की मिसाल होने के कारण इन क़िस्सों ने तब से लेकर अब तक की लम्बी यात्रा की है और आज भी रोचकता और आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। अकबर और बीरबल के विविध प्रसंगों को लेकर कही गई ये कहानियाँ जहाँ पाठकों का मनोरंजन करती हैं, वहीं उन्हें समयानुकूल आचरण करने के लिए प्रेरित भी करती हैं।
Pratinidhi Kahaniyan : Mrinal Pande
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

- Description: मृणाल पाण्डे सत्तर के दशक से कहानी-लेखन में सक्रिय हैं, और उन्होंने बिना किसी आन्दोलन का हिस्सा हुए कथाकार के रूप में एक विशिष्ट पहचान अर्जित की है। उनकी कहानियों की दुनिया स्त्रियों, पहाड़ी जीवन के सुख-दुख और आधुनिक समाज में बढ़ते सम्बन्धगत तनावों से बनती है; और उस भाषा से जो अपनी स्वाभाविकता, सम्प्रेषणीयता और पारदर्शिता से पाठक के मन पर अमिट प्रभाव छोड़ जाती है। इस संकलन में शामिल कहानियाँ उनके कथाकार की लगभग सभी विशेषताओं को रेखांकित करते हुए उनके वैचारिक और सामाजिक सरोकारों को भी स्पष्ट करती हैं। इस चयन से गुज़रते हुए पाठकगण न सिर्फ़ इन कहानियों की पठनीयता के क़ायल होंगे, बल्कि पात्रों की ऐसी श्रेणी से साक्षात्कार भी करेंगे जो अपनी ज़मीन और अपने ताने-बाने में बेहद प्रामाणिक और वास्तविक है।
Pratinidhi Kahaniyan : Chitra Mudgal
- Author Name:
Chitra Mudgal
- Book Type:

-
Description:
कुछ लेखक रचना के लिए सामग्री जुटाने में ही अपनी अधिकांश शक्ति व्यय कर देते हैं। उन्हें लगता होगा कि किसी परिघटना से ही महत्त्वपूर्ण या बड़ा जीवन- सत्य व्यक्त किया जा सकता है। चित्रा मुद्गल जीवन के छोटे-छोटे प्रसंगों को चुनती हैं, उनमें व्याप्त तनाव को परखती हैं, उन्हें सामाजिकता के व्यापक धरातल पर ला खड़ा करती हैं। यह एक तरह से अकथनीय को ज़ाहिर करने का हुनर है। उनके लिए परिवार सबसे बड़ा सच है। उनकी अधिकांश कहानियाँ विषम स्थितियों में भी रिश्तों को बचाए रखना चाहती हैं।
चित्रा मुद्गल की सबसे बड़ी शक्ति है, उनकी अनोखी क़िस्सागोई। जैसे कोई धीमी आँच वाले अलाव के पास बैठे श्रोताओं के भीतर कहानी की लौ तेज़ कर रहा हो। अमृतलाल नागर, भगवतीचरण वर्मा, कामतानाथ, विजयदान देथा की भाँति चित्रा जी ने क़िस्सागोई या कथन-रस को नया अर्थ दिया है। उनकी कहानियाँ किसी चौंकानेवाली युक्ति या प्रयोग-विह्वल प्रयत्न से प्रारम्भ नहीं होतीं। जीवन का एक क्षण पकड़कर ये कहानियाँ आगे चल पड़ती हैं। भाषा की तमाम भंगिमाओं, कहावतों, मुहावरों, क्षेत्रीय शब्दों और उच्चारण पद्धति का साथ पाकर इन कहानियों की आन्तरिकता विकसित होती है।
चित्रा मुद्गल की कहानियाँ प्रतिवाद के शिल्प में लिखी गई हैं। उनमें बदलते समय-समाज की आहटें हैं। जो कहानियाँ यथार्थ के किसी खुरदुरे हिस्से पर ख़त्म होती हैं, वे भी स्थितियों के प्रति आक्रोश जगाती हैं।
Murdalok
- Author Name:
Kumar Mithilesh Prasad Singh
- Book Type:

-
Description:
परम्पराएँ, किंवदन्तियाँ और भ्रामक प्रचलित विचारों से मुक्ति दिलाकर समाज को जागरूक, चेतनासम्पन्न और प्रगतिशील धारा से जोड़नेवाला कहानी-संकलन। इस संकलन की हर कहानी की विषयवस्तु का अपना एक धरातल है और हर कहानी अनुभव का एक नया संसार खोलती है। संकलन की कहानियाँ नई दृष्टि, नई सोच को ही प्रतिष्ठापित नहीं करती हैं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी देती हैं। कहानियों के पात्र आम जीवन से उठाए गए हैं जो साधारण जीवन जीते हैं और बहुत से मानदंडों और निषेधों से मुक्त भी
हैं।लेखक ने इनके साथ सदियों से हो रहे जुल्म और अन्याय को भी रेखांकित किया है जो वे सदियों से झेल रहे हैं और उनके लिए एक समतामूलक समाज की आकांक्षा व्यक्त करते हैं। लेखक ने कहानियों को लोकभाषा से अलंकृत कर पात्रों को जीवन्त ही नहीं किया, बल्कि उनकी मर्मभेदी पीड़ा को संवेदनशील अभिव्यक्ति भी दी है। ये कहानियाँ सही और सच्चे अर्थों में साहित्य की उस सार्थक भूमिका का भी निर्वाह करती हैं जिसके तहत साहित्य को समाज का पथप्रदर्शक माना जाता है। समाज के यथार्थ से साक्षात्कार कराते हुए, वर्तमान समाज को बदलने का आह्वान करते हुए सघन संवेदना के धरातल पर सृजित की गई ये कहानियाँ कुरीतियों को पोषित करनेवाले रूढ़िवादी समाज के लिए एक संकेत भी हैं कि अब परिवर्तन आवश्यक नहीं अनिवार्य हो चला है। पाठकगण इन कहानियों के माध्यम से एक नया अर्थ-सन्दर्भ प्राप्त करेंगे।
Salaam
- Author Name:
Omprakash Valmiki
- Book Type:

-
Description:
‘दलित लेखन दलित ही कर सकता है’ को पारम्परिक सोच के ही नहीं, प्रगतिशील कहे जानेवाले आलोचकों ने भी संकीर्णता से लिया है। दलित-विमर्श साहित्य में व्याप्त छद्म को उघाड़ रहा है। साहित्य में जो भी अनुभव आते हैं वे सार्वभौमिक और शाश्वत नहीं होते।
इन सन्दर्भों में ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानियाँ दलित जीवन की संवेदनशीलता और अनुभवों की कहानियाँ हैं, जो एक ऐसे यथार्थ से साक्षात्कार कराती हैं, जहाँ हज़ारों साल की पीड़ा अँधेरे कोनों में दुबकी पड़ी है।
वाल्मीकि के इस संग्रह की कहानियाँ दलितों के जीवन-संघर्ष और उनकी बेचैनी के जीवन्त दस्तावेज़ हैं, दलित जीवन की व्यथा, छटपटाहट, सरोकार इन कहानियों में साफ़-साफ़ दिखाई पड़ते हैं।
ओमप्रकाश वाल्मीकि ने जहाँ साहित्य में वर्चस्व की सत्ता को चुनौती दी है, वहीं दबे-कुचले, शोषित-पीड़ित जन-समूह को मुखरता देकर उनके इर्द-गिर्द फैली विसंगतियों पर भी चोट की है। जो दलित विमर्श को सार्थक और गुणात्मक बनाती है।
समकालीन हिन्दी कहानी में दलित-चेतना की दस्तक देनेवाले कथाकार ओमप्रकाश वाल्मीकि की ये कहानियाँ अपने आप में विशिष्ट हैं। इन कहानियों में वस्तु जगत का आनन्द नहीं, दारुण दुःख भोगते मनुष्यों की बेचैनी है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book