Mujhe Kuchh Kahana Hai….
Author:
Khwaja Ahmad AbbasPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
बहुत कम लोग जानते हैं कि फ़िल्मकार-कहानीकार ख़्वाजा अहमद अब्बास की क़लम की दुनिया कितनी बड़ी थी। सत्तर साल की अपनी ज़िन्दगी में उन्होंने 70 ही किताबें भी लिखीं और असंख्य अख़बारों और रिसालों में आलेख भी। हर बुधवार को 'ब्लिट्ज' में उनका स्तम्भ, अंग्रेज़ी में 'द लास्ट पेज' और उर्दू में 'आज़ाद क़लम' शीर्षक से, छपता था। और आपको जानकर हैरानी होगी कि इसे उन्होंने चालीस साल लगातार लिखा, जिसमें दोनों ज़बानों के विषय भी अक्सर अलग होते थे। कहते हैं कि ये दुनिया में अपने ढंग का एक रिकॉर्ड है।</p>
<p>आपके हाथों में जो है वह उनकी कहानियों का संकलन है। इस संकलन की सभी 17 कहानियों को उनकी नातिन और उनके साहित्य की अध्येता ज़ोया ज़ैदी ने संगृहीत किया है। इनमें कुछ कहानियाँ पहली बार हिन्दी में आ रही हैं। डॉ. ज़ैदी का कहना है कि अब्बास साहब ऐसे व्यक्ति थे जिनके ''जीवन का लक्ष्य होता है, एक उद्देश्य जिसके लिए वे जीते हैं। एक मक़सद मनुष्य के समाज में बदलाव लाने का, उसकी सोई हुई आत्मा को जगाने का।''</p>
<p>यही काम उन्होंने अपनी कहानियों, फ़िल्मों और अपने स्तम्भों में आजीवन किया। आमजन से हमदर्दी, मानवीयता में अटूट विश्वास, स्त्री की पीड़ा की गहरी पारखी समझ और भ्रष्ट नौकरशाही से एक तीखी कलाकार-सुलभ जुगुप्सा, वे तत्त्व हैं जो इन कहानियों में देखने को मिलते हैं। डॉ. ज़ैदी के शब्दों में, ये कहानियाँ अब्बास साहब की आत्मा का दर्पण हैं। इन कहानियों में आपको वो अब्बास मिलेंगे जो इनसान को एक विकसित और अच्छे व्यक्ति के रूप में देखना चाहते थे।</p>
<p>इस किताब का एक ख़ास आकर्षण ख़्वाजा अहमद अब्बास का एक साक्षात्कार है जिसे किसी और ने नहीं, कृश्न चन्दर ने लिया था।
ISBN: 9788126728909
Pages: 264
Avg Reading Time: 9 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Imli Ka Chatkara
- Author Name:
Yojna Sah Jain
- Book Type:

- Description: This Book Doesn’t have any Description
Bolta Lihaph
- Author Name:
Vishnu Nagar +1
- Book Type:

- Description: इस संग्रह में हिन्दी के श्रेष्ठ कथाकारों द्वारा लोकप्रिय मासिक 'कादम्बिनी' के ‘कथा-प्रतिमान’ स्तम्भ के लिए चयनित विश्व-साहित्य की श्रेष्ठ कहानियाँ संकलित हैं। चयनकर्ता कथाकारों ने इसमें अपनी पसन्द के कारणों का ज़िक्र करते हुए इन कहानियों की विशिष्टताओं का भी वर्णन किया है, जिससे इस संग्रह की उपयोगिता बढ़ गई है। विभिन्न कालखंडों में रची गई ये कहानियाँ अपनी रचनात्मक विशिष्टता के लिए चर्चित रही हैं। इस संग्रह में शामिल कथाकारों की कहानी-कला का मर्म मानव-जीवन के मूल्यों को लेकर उनकी सतत दुविधा और विस्मय का भाव है जो हमारे मन में मानव जीवन की असारता या क्षुद्रता के प्रति खीज नहीं उपजाते बल्कि एक गहरी हलचल मचाए रखते हैं। यही कारण है कि ये कहानियाँ आज भी हमें उतनी टटकी और अन्तरंग महसूस होती हैं जितनी अपने समकालीन पाठकों के लिए रही होंगी। विश्व के समर्थ कहानीकारों और उनकी विशिष्ट कथा कृतियों को सुलभ कराने का हमारा यह विनम्र प्रयास निश्चय ही आपको पसन्द आएगा और प्रेरणादायक लगेगा, ऐसा हमारा विश्वास है।
Sampoorna Balrachanayen
- Author Name:
Amritlal Nagar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kashmir Ek Prem Katha
- Author Name:
Maharaj Krishna Santoshi
- Book Type:

- Description: 'कश्मीर एक प्रेम कथा' महाराज कृष्ण संतोषी का एक ऐसा कहानी-संग्रह है जिसमें अपने जड़ से कटने के दर्द विभिन्न रूपों और संदर्भों में अभिव्यक्त होता है। विस्थापन का दर्द छिन्नमूल होने का दर्द है जिससे वह आदमी प्राय: नहीं समझ सकता जिसके जीवन में इस तरह की पीड़ा का प्रत्यक्ष अनुभव न जुड़ा हो। चिनार के पेड़ और पत्ते किन-किन क्षणों और कितने संदर्भों में कश्मीर छोड़ चुके एक इंसान के स्वप्न में आते और वर्तमान परिवेश की विडंबनाओं के चलते ठहर भी न पाते यह एक प्रवासी कश्मीरी का कभी न समाप्त होने वाला दर्द है। इस संग्रह की तमाम कहानियों में मानवीय संवेदनाओं के सघन रेशों के साथ जड़ से जुड़ी हुई स्मृति के तार रह-रहकर झंकृत होते रहते हैं। यहाँ किसी बूढ़े का दर्द हो या किसी अल्पसंख्यक या इतिहास में विस्मृत पात्रों के दंश—सबकुछ कहानी में बेहद सहज ढंग से आते हैं और कहानी-कला का निर्वाह करते हुए पाठक मन में देर तक बसे रहने की कुव्वत रखते हैं।
Peeli Parchi
- Author Name:
Shivendu Shrivastav
- Book Type:

- Description: collection of stories
Gold Nuggets
- Author Name:
Bh. Krishnamurti +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: The stories trace the impact of all the important socia-political movements that have swept scross the Telugu land in the post-independence era; socialism, communism, feminism, civil rights movements and dalit movemenmt. Thelives of Thelugu people of all strata are reprensentaed here in a rich literary mosaic.
Varnamaya
- Author Name:
Vasudhendra
- Book Type:

- Description: ವಸುಧೇಂದ್ರರ ಎರಡು ನೀಳ್ ಪ್ರಬಂಧಗಳ ಜೊತೆಗೆ, ಹಲವು ಸ್ವಾರಸ್ಯಕರ ಸುಲಲಿತ ಪ್ರಬಂಧಗಳು. ಕಥೆಗಾರ, ಬರಹಗಾರರಾದ ವಸುಧೇಂದ್ರ ಅವರ ಸುಲಲಿತ ಪ್ರಬಂಧಗಳ ಸಂಕಲನ ’ ವರ್ಣಮಯ’. ಈ ಪ್ರಬಂಧ ಸಂಕಲನದಲ್ಲಿ ಬರುವ ನಂಜುಂಡಿ ಮತ್ತು ಗೌರಮ್ಮ ಎಂಬ ಬರಹಗಳಲ್ಲಿ ಲೇಖಕರು ತಮ್ಮ ಸುತ್ತಲಿನ ಸಮಾಜದ ಎಷ್ಟೋ ಮಜಲುಗಳನ್ನು ಕೆಳ, ಮಧ್ಯಮ ಹಾಗೂ ಮೇಲಿನ ವರ್ಗದ ಜನರುಗಳ ನಡುವೆ ಮುಖಾಮುಖಿಯಾಗಿಸುತ್ತಾ ಅವರ ನಡವಳಿಕೆಗಳನ್ನು ಹಾಸ್ಯ ಪ್ರಜ್ಷೆಯೊಂದರಲ್ಲಿಓದುಗರಿಗೆ ಪರಿಚಯಿಸಿದ್ದಾರೆ. ತಾಯಿ ದೇವರಲ್ಲ, ಅಮ್ಮ ಎನ್ನುವ ಸಂಭ್ರಮ, ಹಗ್ಗದ ಹಾವು, ಬರಹಗಳು ಲೇಖಕರ ಮನೆಯ ಅನುಭವ ಚಿತ್ರಣವನ್ನು ನೀಡುವಂತದ್ದಾಗಿದೆ.
Baghin Ki Sawari
- Author Name:
Chandrakishore Jaiswal
- Book Type:

- Description: ‘बाघिन की सवारी’ संग्रह की कहानियाँ जीवन और समाज का एक वृहद ‘स्पेक्ट्रम’ पाठक के सामने रखती हैं। एक के बाद एक कहानी से गुजरते हुए हम कहीं गहन करुणा से आप्लावित होते हैं तो कहीं अपनी दुनिया की विसंगतियों से क्षुब्ध। कहीं किसी पात्र की असहायता हमें भिगो देती है तो कहीं किसी का संकल्प हमें आजादी की एक दिशा दे जाता है। ‘सहेलियाँ’ शीर्षक कहानी में दो सखियों की तरह प्रेम और विवाह जैसे विषयों पर खुलकर बतियातीं माँ वत्सला और बेटी गुंजन ऐसे ही पात्र हैं जो धीरे-धीरे बदलते हमारे समय को परम्परा की धारा से एकदम नहीं तोड़ना चाहते और नई सम्भावनाओं—परिवर्तनों से मुँह भी नहीं फेरते। वहीं ‘बेटा का घर’ कहानी के हताश माँ-पिता अपने परिवार में मगन बेटे के व्यवहार और अपनी विवशताओं को सोच आँख गीली कर लेते हैं, और पाठक को मौजूदा समय के प्रति सचेत कर जाते हैं। वृद्धावस्था और उससे जुड़े दुखों पर ये कहानियाँ बार-बार दृष्टिपात करती हैं। यह ऐसा विषय है जिस पर चन्द्रकिशोर जायसवाल अकसर लौटे हैं। इस संग्रह में ‘रोवनहार’ शीर्षक कहानी पूरी तरह इसी विषय पर केन्द्रित है जहाँ चार बेटों और बहुओं-पोतों से भरे घर में रामजनम चौधरी को वास्तविक लगाव अपने किराएदार की बच्ची से मिलता है, उन्हें लगता है कि उनके मरने पर और भले कोई न रोए वह जरूर रोएगी। संग्रह की शीर्षक कथा ‘बाघिन की सवारी’ सत्ता और सुख से मोहभंग और लगाव की लम्बी कहानी है जिसमें हमारी मुलाकात जवानी में साधु बने एक ऐसे व्यक्ति से होती है जो बीस साल बाद वापस, कदम-दर-कदम चलते हुए समाज और उसके सत्ता-व्यूह में दाखिल होता है।
Paap Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Paarmita Shatpathi
- Book Type:

-
Description:
पारमिता शतपथी ओड़िया की प्रतिष्ठित, चर्चित और सम्मानित कथाकार हैं जिनकी कई रचनाएँ हिन्दी और अंग्रेज़ी समेत अन्य भारतीय भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं। इस संकलन में उनकी कुछ चर्चित कहानियाँ शामिल हैं जिन्हें उनके तीव्र यथार्थबोध, संवेदना और समाज की गहरी समझ के लिए जाना गया।
पारमिता शतपथी की कथा-शैली इतनी दिलचस्प और घटना-क्रम के ब्यौरे इतने सूक्ष्म होते हैं कि किसी भी कहानी को एक बार शुरू करने पर आप पढ़ते ही चले जाते हैं। उदाहरण के लिए संग्रह की पहली ही कहानी 'पाप' को लिया जा सकता है। दस-ग्यारह साल के बच्चे पर केन्द्रित यह कहानी जिसमें वह भूख के मारे एक मुर्गी को मार देता है और परिणामस्वरूप अपने पूरे परिवार को मौत तक पहुँचा देता है, एक स्तब्धकारी वृत्तान्त है। कहानी का सिर्फ़ अन्त ही नहीं, जहाँ अपनी माँ और बहनों की मृत्यु की जवाबदेही वह बच्चा महसूस करता है, वहीं भूख और ग़रीबी के विवरणों से भी यह कहानी आतंकित करती है।
उल्लेखनीय यह है कि वे आधुनिक समाज के निम्न तबक़े के दु:ख-तकलीफ़ों के साथ मध्यवर्ग के उथलेपन की भी गहरी समझ रखती हैं। ‘दलाल' ऐसी ही कहानी है जिसमें एक व्यक्ति अपने सामान्य चालाकियों से अकूत सम्पत्ति अर्जित करता है लेकिन अन्त में एक चतुर लड़की के हाथों ठगा जाता है।
पारमिता अपनी कहानियों में समाज के वंचित-दुर्बल लोगों का पक्ष लेते हुए साफ़ दिखाई देती हैं और खाए-पिए-अघाए लोगों के प्रति उनकी घृणा भी स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है। मसलन, 'दलाल' कहानी में उन्होंने नायक को शुरू से अन्त तक वह आदमी कहकर ही सम्बोधित किया है, उसे कोई नाम तक नहीं दिया।
राजेन्द्र प्रसाद मिश्र द्वारा मूल ओड़िया से अनूदित इन कहानियों को पढ़ते हुए ऐसा नहीं लगता कि अनुवाद पढ़ रहे हैं।
Katha Saptak - Divya Mathur
- Author Name:
Divya Mathur
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Andhera
- Author Name:
Akhilesh
- Book Type:

- Description: ‘वजूद’, ‘यक्षगान’, ‘ग्रहण’ और ‘अँधेरा’ महज़ चार लम्बी कहानियाँ नहीं हैं—ये हमारे कथा साहित्य की विरल उपलब्धियाँ हैं। इन्हीं चारों कहानियों से तैयार हुआ है अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और बहुचर्चित कथाकार अखिलेश का नया कहानी-संग्रह ‘अँधेरा’। अखिलेश हिन्दी की ऐसी विशिष्ट प्रतिभा हैं जिनके लेखन को लेकर साहित्य-जगत उत्सुक और प्रतीक्षारत रहता है। अखिलेश की रचनात्मकता के प्रति गहरे भरोसे का ही नतीजा है कि उनकी रचनाएँ साहित्य की दुनिया में ख़ास मुक़ाम हासिल करती हैं। निश्चय ही इस अनोखे विश्वास के निर्माण में ‘अँधेरा’ की कहानियों की अहम भूमिका है। ‘अँधेरा’ में शामिल चारों कहानियाँ लगातार चर्चा के केन्द्र में रही हैं। इन्हें जो ध्यानाकर्षण—जो शोहरत मिली है, वह कम रचनाओं को नसीब होती है। इनके बारे में अनेक प्रकार की व्याख्याएँ, आलेख, टिप्पणियाँ और विवाद समय-समय पर प्रकट हुए हैं। पर इन सबसे ज़्यादा ज़रूरी बात यह है कि चारों कहानियों पर पाठकों ने भी मुहर लगाई है। हमारे युग की मनुष्य विरोधी शक्तियों से आख्यान की भिड़न्त, भाषा की शक्ति, शिल्प का वैविध्य तथा उत्कर्ष, प्रतिभा की विस्फोटक सामर्थ्य—ये सभी कुछ कोई एक जगह देखना चाहता है तो उसे अखिलेश का कहानी-संग्रह ‘अँधेरा’ अवश्य पढ़ना चाहिए। ‘अँधेरा’ की कहानियों की ताक़त है कि वे अपने कई-कई पाठ के लिए बेचैन करती हैं। यही नहीं, वे प्रत्येक अगले पाठ में नई व्यंजना, नए अर्थ, नए सौन्दर्य से जगमगाने लगती हैं। इसी बिन्दु पर ‘अँधेरा’ की कहानियाँ न केवल पढ़े जाने और एकाधिक बार पढ़े जाने की इच्छा जगाती हैं, बल्कि सहेजकर रखे जाने की ज़रूरत भी पैदा करती हैं।
Fasadat Ke Afsane
- Author Name:
Zubair Razvi
- Book Type:

-
Description:
1947 से अब तक हमारी राजनीति फ़सादात करानेवाले को पहचानने में, उसे नंगा करने में आगे नहीं आई। कारण ये कि फ़सादात कराना सारे देश की राजनीति के दाँव-पेच का अंग बन चुका है। राजनीति से जुड़े सारे दल एक दूसरे को इल्ज़ाम देते रहते हैं लेकिन फ़सादात की जाँच करनेवाले कमीशन कुछ और कहते हैं। इन सबसे अलग फ़सादात का जो चेहरा अपने असली रूप में हमारे सामने आता है वो केवल साहित्यकार, रचनाकार के ज़रिए ही आता है। लेखक और रचनाकार ही ने फ़सादात के बारे में सच-सच लिखा है। उसी ने फ़सादात के मुजरिम को पहचाना है। दु:ख झेलनेवाले के दु:ख को समझा है।
इस संग्रह में कुछ अफ़साने तो वो हैं जो बँटवारे के फ़ौरन बाद होनेवाले साम्प्रदायिक दंगों पर लिखे गए और कुछ वो हैं जो बाबरी मस्जिद के गिराए जाने से पहले और उसके बाद होनेवाले फ़सादात पर लिखे गए। इनमें कई अफ़साना-निग़ार ऐसे भी हैं जो ख़ुद इस तूफ़ान से गुज़रे थे। फ़सादात के कारण बदलते रहे और साथ ही उनके बारे में लेखक का रवैया भी बदलता रहा, फ़सादात का अधिकतर शिकार बननेवाला समुदाय लेखक की सारी सहानुभूति समेटने लगा। वे राजनैतिक दल भी पहचान लिए गए जो फ़सादात की आग लगाते रहते हैं। पहले के अफ़सानों में हिन्दू मुसलमान की और मुसलमान हिन्दू की जानो-माल की हिफ़ाज़त करते हैं लेकिन बाद के फ़सादात में लेखक ने ये महसूस किया कि फ़सादात जब भी भड़कते हैं तो हिन्दू-मुसलमान के मेल-जोल में एक फ़ासला-सा आ जाता है। इस ट्रेजिडी की गूँज ‘नींव की ईंट’, ‘सिंघारदान’, ‘ज़िन्दा दरगोर’ जैसे अफ़सानों में सुनाई देती है।
फ़सादात ने हमारे जीवन और सायकी में एक मुस्तक़िल दहशत और लूटे जाने का ख़ौफ़ और भय पैदा कर दिया है। इस भय, डर और ख़ौफ़ की सायकी को ‘बग़ैर आसमान की ज़मीन’, ‘आदमी’ और ‘खौफ़’ जैसे अफ़सानों में महसूस किया जा सकता है।
Sookha Tatha Anya Kahaniyan
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

-
Description:
निर्मल वर्मा की ‘सूखा’ कहानी ने अपने समय में कई तरह की बहसों को जन्म दिया था जिनमें एक यह भी थी कि इस कहानी के रूप में निर्मल जी ने एक नई कथा-भूमि, अनुभव के एक नये इलाक़े में प्रवेश किया है।
इस संग्रह (प्रथम प्रकाशन 1995) की अन्य कई कहानियों को भी अध्येताओं और पाठकों ने इसी दृष्टि से देखा। ये निर्मल जी की कथा-यात्रा में नये मोड़ का संकेत देती हैं।
‘सूखा’ में मध्यवर्गीय ज़िन्दगी के अंधकार, घुटन और भावनात्मक सूखे को उन्होंने गहरी संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया है।
निर्मल जी की कथा संवेदना शुरू से ही विशिष्ट रही है। वे नई कहानी के प्रथम नागरिक हैं। छठे दशक में हिन्दी कहानी को नया रूप देने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका रही। कहानियों के सर्वथा नये कथ्य और शिल्प के द्वारा उन्होंने हिन्दी कहानी को एक नई ज़मीन दी, जिसे यथार्थ के सूक्ष्मतर पक्ष को अंकित करने की सामर्थ्य के लिए जाना गया। मानव-सम्बन्धों के कई रूप उन्होंने सबसे पहले रेखांकित किये, जिसके केन्द्र में उनके भीतर निहित ऊब, वितृष्णा और संत्रास था। इसके लिए जिस साहस की ज़रूरत थी, उसे उन्होंने अकसर तीखी आलोचनाओं के सामने भी नहीं छोड़ा।
उनकी कहानियों में हम अपना ही जीवन बार-बार घटित होता हुआ देखते हैं और हर बार नये सिरे से जीवन-स्थितियों की पहचान गहरी होती चलती है।
Yahan Hathi Rahte The
- Author Name:
Geetanjali Shree
- Book Type:

-
Description:
कुछ ज़्यादा ही तेज़ी से बदलते हमारे इस वक़्त को बारीकी से देखती प्रख्यात कथाकार गीतांजलि श्री की ग्यारह कहानियाँ हैं यहाँ। नई उम्मीदें जगाता और नए रास्ते खोलता वक़्त। हमारे अन्दर घुन की तरह घुस गया वक़्त भी। सदा सुख-दु:ख, आनन्द-अवसाद, आशा-हताशा के बीच भटकते मानव को थोड़ा ज़्यादा दयनीय, थोड़ा ज़्यादा हास्यास्पद बनाता
वक़्त।विरोधी मनोभावों और विचारों को परत-दर-परत उघाड़ती हैं ये कहानियाँ। इनकी विशेषता—कलात्मक उपलब्धि है—भाषा और शिल्प का विषयवस्तु के मुताबिक़ ढलते जाना। माध्यम, रूप और कथावस्तु एकरस-एकरूप हैं यहाँ। मसलन, ‘इति’ में मौत के वक़्त की बदहवासी, ‘थकान’ में प्रेम के अवसान का अवसाद, ‘चकरघिन्नी’ में उन्माद की मनःस्थिति, या ‘मार्च माँ और साकुरा’ में निश्छल आनन्द के उत्सव के लिए इस्तेमाल की गई भाषा ही क्रमशः बदहवासी, अवसाद, उन्माद और उत्सव की भाषा हो जाती है।
पर अन्ततः ये दु:ख की कहानियाँ हैं। दु:ख बहुत, बार-बार और अनेक रूपों में आता है इनमें। ‘यहाँ हाथी रहते थे’ और ‘आजकल’ में साम्प्रदायिक हिंसा का दु:ख, ‘इतना आसमान’ में प्रकृति की तबाही और उससे बिछोह का दु:ख, ‘बुलडोज़र’ और ‘तितलियाँ’ में आसन्न असमय मौत का दु:ख, ‘थकान’ और ‘लौटती आहट’ में प्रेम के रिस जाने का दु:ख। एक और दु:ख, बड़ी शिद्दत से, आता है ‘चकरघिन्नी’ में। नारी स्वातंत्र्य और नारी सशक्तीकरण के हमारे जैसे वक़्त में भी आधुनिक नारी की निस्सहायता का दु:ख।
हमारी ज़िन्दगी की बदलती बहुरूपी असलियत तक बड़े आड़े-तिरछे रास्तों से पहुँचती हैं ये कहानियाँ। एक बिलकुल ही अलग, विशिष्ट और नवाचारी कथा-लेखन से रू-ब-रू कराते हुए हमें।
Log Bistron Per
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description: खाँटी माटी के कथाकार हैं काशीनाथ सिंह। कथा साहित्य में ‘अकहानी’, ‘सचेतन कहानी’, ‘समान्तर कहानी’ आदि आन्दोलनों के काल से गुज़रे काशीनाथ सिंह ने भीड़ में होते हुए अपनी लीक स्वयं बनाई है। जो लोक रचा है उसका यथार्थ अपनी भाषा, शिल्प, कथ्य और दृष्टि में विश्वसनीय तो है ही, विलक्षण भी है। एक सेवानिवृत्त व्यक्ति की नज़र से देखी-लिखी गई कहानी ‘सुख’ सामाजिक यथार्थ को व्यक्त करनेवाली एक अलग कहानी है तो ‘संकट’ एक ऐसे फौजी चरित्र की कथा जो अपनी वासना की पूर्ति न होने पर कई मानसिक तनावों में घिरता और घेरते चला जाता है। ‘एक बूढ़े की कहानी’ एक नाबालिग लडक़ी से बलात्कार की बेहद मार्मिक कथा है। ‘चोट’ में जाति के अहं को जिस पैनी दृष्टि के साथ रचा गया है, वह बदलते युग में वर्ण से जुड़ी कई गिरहों को खोलने में मदद करती है। जबकि ‘सुबह का डर’ मनुष्यता और पुलिसिया आतंक के बीच फँसे लोगों के डर के संजाल की कहानी है। देखें तो, काशीनाथ सिंह के दो संग्रहों ‘लोग बिस्तरों पर’ और ‘सुबह का डर’ से शामिल कहानियों की इस एक जिल्द में ‘बैलून’ जैसी प्रेम कहानी है तो मौत के प्रति चिन्ता और चिन्तन के खोखलेपन से पर्दा हटाती ‘चायघर में मृत्यु’ जैसी कहानी भी। ‘आखिरी रात’ में दाम्पत्य जीवन के आर्थिक तनाव की कथा है, ‘अपने घर का देश’ में बदलते मूल्यों का गहन अंकन तो निरन्तर छीजती संवेदना का एक त्रासद रूप रचती पुस्तक की शीर्षक कहानी ‘लोग बिस्तरों पर’। निस्सन्देह, काशीनाथ सिंह का यह कहानी-संग्रह महत्त्वपूर्ण ही नहीं, अपने समय की एक दस्तावेज़ भी है।
Beetate Huye
- Author Name:
Madhu Kankariya
- Book Type:

- Description: हमारे समाज में प्रचलित रूढ़ मान्यताओं के बरक्स मानवीय स्वतंत्रता का सवाल सदा ही अनदेखा किया जाता रहा है लेकिन मधु कांकरिया की कहानियाँ सिर्फ़ परम्परागत मान्यताओं की ही नहीं, अधुनिकता के आवरण में लिपटे जीवन-मूल्यों की भी पड़ताल करती हैं और हमारे सामने कई सुलगते हुए सवाल खड़ी कर सोच को रचनात्मक आयाम प्रदान करती हैं। चाहे नक्सलवादी आन्दोलन पर आधारित ‘लेकिन कामरेड’ हो, दाम्पत्य जीवन में परस्पर विश्वास को रेखांकित करती ‘चूहे को चूहा ही रहने दो’ हो या बच्चे के स्कूल में दाख़िले के लिए एक स्त्री की व्यथा-कथा हो; मधु काँकरिया कहीं भी विचार और संवेदना के स्तर पर पाठकों को निराश नहीं करतीं, बल्कि कथारस के प्रवाह में बहाए चलती हैं। औपन्यासिक विस्तार की सम्भावना से युक्त ये कहानियाँ भाषा, शिल्प एवं विचार-तत्त्व के अनूठेपन और भाव एवं विचार के अद्भुत सन्तुलन के कारण निश्चय ही उल्लेखनीय बनी रहेंगी, ऐसा हमारा विश्वास है।
Dafa 604
- Author Name:
Apoorv Agarwal
- Book Type:

- Description: किसी भी समाज की कोई भी इकाई समाज के नैतिक मूल्यों, मान-मर्यादाओं और अनुशासन के मानदंडों का प्रतिबिम्ब होती है। फिर चाहे यह न्यायपीठों, न्यायाधीशों, या सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा की प्रतिज्ञा लेनेवाले क़ानूनविद् ही क्यों न हों, जिन्हें समाज ने लोकतंत्र का प्रमुख आधार-स्तम्भ माना है। प्रस्तुत कहानियाँ हमें इसी क़ानूनी दाँव-पेच की जीती-जागती दुनिया में ले जाती हैं, जहाँ एक न्यायाधीश न्याय-परायणता निभाने के लिए अपने सर्वस्व की बलि दे देता है, तो दूसरा, सामाजिक बुराइयों के आगे घुटने टेक पूरे पेशे की पवित्रता भंग कर देता है। हिन्दी साहित्य की ये श्रेष्ठ कहानियाँ हमें उन पेचदार क़ानूनविदों से भी मिलवाती हैं, जिनके लम्बे होशियार हाथों में क़ानून की लगाम है। ‘दफ़ा 604’ उन्हीं की क़ानून-पटुता की सच्चाई उकेरती कहानियों का संग्रह है, जिसमें मानव-चरित्र के कई राग-रंग आलोकित होते हैं।
Main Hawa Pani Parinda Kuchh Nahin
- Author Name:
Rajesh Joshi
- Book Type:

-
Description:
यह एक कवि का गल्प है, सो ज़ाहिर है इसमें कल्पना की उड़ान भी है, और ज़मीन का खुरदरापन भी। ये कहानियाँ जिनके बारे में ख़ुद लेखक का कहना है कि बहुत अनुशासित ढंग से नहीं लिखी गईं, अपने आयतन में मध्यवर्गीय जीवन की कठोर सीमाओं को रेखांकित करते हुए उन फ़ंतासियों तक जाती हैं जिनमें एक बड़े जीवन-बोध की संभावनाएँ खुलती हैं।
संग्रह की पहली कहानी ‘मैं हवा पानी परिंदा कुछ नहीं’, जिसका नायक अपने पक्षी-प्रेम के चलते सहसा एक चिडि़या में बदल जाता है, फ़ंतासी के फ्रेम में समय तथा सत्ता-संरचना के कई कँटीले पहलुओं को रेखांकित करती है। इसी तरह ‘साँप’ भी जिसमें मध्यवर्गीय आकांक्षाओं और उनके सभ्यतागत विस्तार को एक साँप के रूपक में उसकी तमाम भयावहताओं के साथ साकार कर दिया गया है।
मँझोले शहरों का साँवला-सा माहौल इन कहानियों में अपने तमाम शेड्स के साथ मौजूद है जिसे राजेश जी की चुटीली कहन ने और जीवन्त कर दिया है। ‘सोमवार’ कहानी के विवरण इस लिहाज़ से विशेष तौर पर पढ़ने लायक़ है और इसमें चित्रित किया गया जीवन भी जो अपने देश और काल की छवियों को एक सजीव कोलाज में ढाल देता है।
कविता के पंखों पर उड़ता हुआ गद्य इन सभी कहानियों की उपलब्धि है। इन कहानियों को पढ़ते हुए हम सिर्फ़ कथा-सूत्र के साथ नहीं चलते, उसकी बिम्ब-योजना हमें अनुभव के एक समानान्तर लोक में भी प्रक्षेपित करती जाती है; जिससे एक वृहत्तर यथार्थ हमारी पहुँच में होता है।
Bapu Katha Chaudas
- Author Name:
Madhukar Upadhyay
- Book Type:

- Description: Mahatma Gandhi's life story in Hindi by Madhuker Upadhyay.
Game Hasti Ka Ho Kis Se…!
- Author Name:
Vijay Mohan Singh
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी के सुपरिचित कहानीकार तथा कथा समीक्षक डॉ. विजयमोहन सिंह का यह चौथा कहानी-संग्रह है। संग्रह की अधिकांश कहानियाँ उस मुहावरे से बाहर का पाठ प्रस्तुत करती हैं जिन्हें हम सामान्यतः ‘आधुनिक कहानी’ कहते हैं। न केवल शिल्प तथा भाषा के स्तर पर बल्कि कथानक और ट्रीटमेंट के स्तर पर भी ये कहानियाँ परिचित तथा रूढ़ मुहावरों से पृथक् अपनी निजी कथा भाषा का निर्माण करती हैं। कुछ कहानियों में संस्कृतनिष्ठ शब्दावली का प्रयोग एक विशेष प्रकार की व्यंजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए किया गया है जो परम्परागत इतिवृत्तात्मक शैली को एक नए सन्दर्भ प्रदान करता है।
‘अंगरक्षक’ जैसी कहानी एक ऐसी सामाजिक विडम्बना को प्रस्तुत करती है जो समकालीन परिवेश में स्त्री की क्रूर नियति को सामने लाती है। प्रायः सर्वत्र व्याप्त एक अन्तर्निहित गूढ़ व्यंग्य इन कहानियों की केन्द्रीय विशेषता है। इन कहानियों के बारे में स्वयं लेखक का कहना है कि मेरी कहानियों की जो शृंखला पिछले दो दशकों से चली आ रही है, ये कहानियाँ उसके विराम की कहानियाँ हैं क्योंकि उस ‘सामन्ती अवशेष’ का जितना उत्खनन मैं कर सकता था, कर चुका—‘एक बँगला बने न्यारा’ से लेकर इन कहानियों तक।
संग्रह का शीर्षक ग़ालिब के इस विख्यात शे’र का अंश है जो इस संग्रह की एक कहानी का शीर्षक भी है। आज़ादी के बाद के परिवर्तित होते हुए सामाजिक-राजनैतिक परिवेश में उससे असम्पृक्त तथा उसके अपने को अजनबी अकेला और उखड़ा हुआ महसूस करनेवाला सामन्त वर्ग का प्रतिनिधि कहानी के नायक को सहसा अपने अस्तित्व की निरर्थकता का बड़ी शिद्दत से एहसास होने लगता है जिसकी परिणति आत्महत्या में होती है। कहने की आवश्यकता नहीं कि मूलतः यह ‘आत्महत्या’ या अन्त एक पूरे युग का अन्त है जो आज अप्रासंगिक तथा निरर्थक हो चुका है।
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...