Ghuspaithiye
(0)
Author:
Omprakash ValmikiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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ओमप्रकाश वाल्मीकि के इस संग्रह की तमाम कहानियाँ दलित सन्दर्भों से जुड़ी हुई हैं। यह दलित जीवन का यथार्थ है जिसे कहानीकार ने इन कहानियों में निहायत ही संजीदगी से, यथार्थ के प्रति वस्तुनिष्ठ रहते हुए, कहानी के रचना-विधान की संगति में दृष्टिकोण के समूचे खुलेपन के साथ चित्रित किया है। ये बेधक और मार्मिक कहानियाँ हैं। व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश, कथा-विन्यास के अनुरूप तर्क और विचार, अनुभवजन्य ये कहानियाँ दलितों के सुख-दुःख, उनकी मुखरता और संघर्ष की कहानियाँ हैं। वस्तुगत यथार्थ की संगति में जिस रचनात्मक कौशल के साथ इन कहानियों को ओमप्रकाश वाल्मीकि इस बिन्दु तक लाए हैं, वह उनके कहानीकार की ताक़त का साक्ष्य है। इन कहानियों में दलित और स्त्री की पीड़ाएँ मिलकर एक हो गई हैं। ओमप्रकाश वाल्मीकि में विवश, आन्तरिक घृणा का यह विस्फोट सृजनात्मक ऊर्जा का स्रोत है। ये कहानियाँ सिर्फ़ दलित लेखन के दायरे की ही कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उनमें उनकी रचना-सामर्थ्य और उनकी सोच के जो पहलू उभरे हैं, वे उन्हें हिन्दी की यथार्थवादी कहानी की परम्परा का कहानीकार सिद्ध करते हैं। ओमप्रकाश वाल्मीकि कहानी के शिल्प, अन्तर्वस्तु, सौन्दर्य तथा पाठक पर उसके समग्र प्रभाव का ध्यान रखनेवाले रचनाकार हैं।
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ओमप्रकाश वाल्मीकि के इस संग्रह की तमाम कहानियाँ दलित सन्दर्भों से जुड़ी हुई हैं। यह दलित जीवन का यथार्थ है जिसे कहानीकार ने इन कहानियों में निहायत ही संजीदगी से, यथार्थ के प्रति वस्तुनिष्ठ रहते हुए, कहानी के रचना-विधान की संगति में दृष्टिकोण के समूचे खुलेपन के साथ चित्रित किया है। ये बेधक और मार्मिक कहानियाँ हैं।
व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश, कथा-विन्यास के अनुरूप तर्क और विचार, अनुभवजन्य ये कहानियाँ दलितों के सुख-दुःख, उनकी मुखरता और संघर्ष की कहानियाँ हैं।
वस्तुगत यथार्थ की संगति में जिस रचनात्मक कौशल के साथ इन कहानियों को ओमप्रकाश वाल्मीकि इस बिन्दु तक लाए हैं, वह उनके कहानीकार की ताक़त का साक्ष्य है। इन कहानियों में दलित और स्त्री की पीड़ाएँ मिलकर एक हो गई हैं। ओमप्रकाश वाल्मीकि में विवश, आन्तरिक घृणा का यह विस्फोट सृजनात्मक ऊर्जा का स्रोत है।
ये कहानियाँ सिर्फ़ दलित लेखन के दायरे की ही कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उनमें उनकी रचना-सामर्थ्य और उनकी सोच के जो पहलू उभरे हैं, वे उन्हें हिन्दी की यथार्थवादी कहानी की परम्परा का कहानीकार सिद्ध करते हैं।
ओमप्रकाश वाल्मीकि कहानी के शिल्प, अन्तर्वस्तु, सौन्दर्य तथा पाठक पर उसके समग्र प्रभाव का ध्यान रखनेवाले रचनाकार हैं।
Book Details
-
ISBN9788183618236
-
Pages99
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘नाक’ के प्रसंग लगभग हर सभ्यता और संस्कृति से जुड़े हैं। ‘नाक बनी मुसीबत’ एक व्यंग्यात्मक कहानी है। संग्रह की बाक़ी कहानियाँ गम्भीर हैं। ‘नन्हे का भगवान’ अध्यात्म से प्रभावित है तो ‘किनोसाकी से’ ज़िन्दगी और मौत की कशमकश पर शिगा नाओया का जीवन-दर्शन है। ‘एक और काली बिल्ली’ मनुष्य और जानवर के उभरते आत्मीय सम्बन्ध की भावनात्मक गाथा है जो जापान की समसामयिक रचनाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
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