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Ghuspaithiye

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ओमप्रकाश वाल्मीकि के इस संग्रह की तमाम कहानियाँ दलित सन्दर्भों से जुड़ी हुई हैं। यह दलित जीवन का यथार्थ है जिसे कहानीकार ने इन कहानियों में निहायत ही संजीदगी से, यथार्थ के प्रति वस्तुनिष्ठ रहते हुए, कहानी के रचना-विधान की संगति में दृष्टिकोण के समूचे खुलेपन के साथ चित्रित किया है। ये बेधक और मार्मिक कहानियाँ हैं। व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश, कथा-विन्यास के अनुरूप तर्क और विचार, अनुभवजन्य ये कहानियाँ दलितों के सुख-दुःख, उनकी मुखरता और संघर्ष की कहानियाँ हैं। वस्तुगत यथार्थ की संगति में जिस रचनात्मक कौशल के साथ इन कहानियों को ओमप्रकाश वाल्मीकि इस बिन्दु तक लाए हैं, वह उनके कहानीकार की ताक़त का साक्ष्य है। इन कहानियों में दलित और स्त्री की पीड़ाएँ मिलकर एक हो गई हैं। ओमप्रकाश वाल्मीकि में विवश, आन्तरिक घृणा का यह विस्फोट सृजनात्मक ऊर्जा का स्रोत है। ये कहानियाँ सिर्फ़ दलित लेखन के दायरे की ही कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उनमें उनकी रचना-सामर्थ्य और उनकी सोच के जो पहलू उभरे हैं, वे उन्हें हिन्दी की यथार्थवादी कहानी की परम्परा का कहानीकार सिद्ध करते हैं। ओमप्रकाश वाल्मीकि कहानी के शिल्प, अन्तर्वस्तु, सौन्दर्य तथा पाठक पर उसके समग्र प्रभाव का ध्यान रखनेवाले रचनाकार हैं।

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ओमप्रकाश वाल्मीकि के इस संग्रह की तमाम कहानियाँ दलित सन्दर्भों से जुड़ी हुई हैं। यह दलित जीवन का यथार्थ है जिसे कहानीकार ने इन कहानियों में निहायत ही संजीदगी से, यथार्थ के प्रति वस्तुनिष्ठ रहते हुए, कहानी के रचना-विधान की संगति में दृष्टिकोण के समूचे खुलेपन के साथ चित्रित किया है। ये बेधक और मार्मिक कहानियाँ हैं।

व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश, कथा-विन्यास के अनुरूप तर्क और विचार, अनुभवजन्य ये कहानियाँ दलितों के सुख-दुःख, उनकी मुखरता और संघर्ष की कहानियाँ हैं।

वस्तुगत यथार्थ की संगति में जिस रचनात्मक कौशल के साथ इन कहानियों को ओमप्रकाश वाल्मीकि इस बिन्दु तक लाए हैं, वह उनके कहानीकार की ताक़त का साक्ष्य है। इन कहानियों में दलित और स्त्री की पीड़ाएँ मिलकर एक हो गई हैं। ओमप्रकाश वाल्मीकि में विवश, आन्तरिक घृणा का यह विस्फोट सृजनात्मक ऊर्जा का स्रोत है।

ये कहानियाँ सिर्फ़ दलित लेखन के दायरे की ही कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उनमें उनकी रचना-सामर्थ्य और उनकी सोच के जो पहलू उभरे हैं, वे उन्हें हिन्दी की यथार्थवादी कहानी की परम्परा का कहानीकार सिद्ध करते हैं।

ओमप्रकाश वाल्मीकि कहानी के शिल्प, अन्तर्वस्तु, सौन्दर्य तथा पाठक पर उसके समग्र प्रभाव का ध्यान रखनेवाले रचनाकार हैं।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
4th
Publication year
2016
Weight
122 grams
ISBN-13
9788183618236
Pages
99
Reading time
~3 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

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