Phoolo Ka kurta
(0)
Author:
YashpalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है।</p> <p>‘फूलो का कुर्ता’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘आतिथ्य’, ‘भवानी माता की जय’, ‘शिव-पार्वती’, ‘ख़ुदा की मदद’, ‘प्रतिष्ठा का बोझ’, ‘डरपोक कश्मीरी’, ‘धर्मरक्षा और ज़िम्मेवारी’।
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यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है।</p>
<p>‘फूलो का कुर्ता’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘आतिथ्य’, ‘भवानी माता की जय’, ‘शिव-पार्वती’, ‘ख़ुदा की मदद’, ‘प्रतिष्ठा का बोझ’, ‘डरपोक कश्मीरी’, ‘धर्मरक्षा और ज़िम्मेवारी’।
Book Details
-
ISBN9788180314407
-
Pages127
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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शेषनाथ पाण्डेय के कथा-संकलन ‘इलाहाबाद भी!’ की कहानियाँ हमारे समय का साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं। पूँजी और बाज़ार के वर्चस्व ने इस समय को इस तरह जकड़ रखा है कि मनुष्य अपनी संवेदनाएँ खोकर निरन्तर हिंसक बनता जा रहा है। यह हिंसा जीवन के उन सारे मूल्यों और भावपक्ष को निगलती जा रही है, जिससे एक सुन्दर और मानवीय गरिमा से पूरित संसार का स्वप्न साकार हो सकता था। इस हिंसा को बिना किसी अतिरेक या अतिनाटकीयता के इन कहानियों में अभिव्यक्त करने के लिए इस युवा कथाकार ने मानव-मन की आन्तरिक उथल-पुथल का सहारा लिया है। जीवन के कई ऐसे पक्ष इन कहानियों में उजागर हुए हैं, जिनके आपसी टकराव से मनुष्य के भीतर अन्तर्द्वन्द्व उपजते हैं और असम्भव घटित हो जाता है।
‘इलाहाबाद भी!’ की कहानियाँ यथार्थ की जटिलता से टकराती हैं और अपने सादगी भरे अन्दाज़ में अपने कहन के कारण हमारे भीतर रच-बस जाती हैं। शेषनाथ पाण्डेय गाँव और महानगर दोनों के यथार्थ से परिचित हैं। गाँव से महानगर तक की यात्रा और महानगर में ज़िन्दगी की डोर को थामे रहने के संघर्षों ने उन्हें, जो जीवनानुभव सौंपा है, वह उनकी कहानियों का मूलाधार है। यह सब उनकी कहानियों में इस तरह विन्यस्त है कि उसे अलग करके देख पाना सम्भव नहीं। यथार्थ को रचनात्मक स्पर्श से पुनर्नवा करने का यह हुनर उनकी विशेषता है। इन कहानियों की भाषा सहज और सम्प्रेषणीय है। हिन्दी कहानी का समकालीन परिदृश्य विविधताओं से भरा हुआ है और मुझे भरोसा है कि शेषनाथ पाण्डेय की ये कहानियाँ पाठकों का ध्यान आकर्षित करेंगी।
—हृषीकेश सुलभ
Esop Ki Kahaniyan
- Author Name:
Prantika
- Book Type:

- Description: ईसप की कहानियाँ' (Aesop's Fables) एक प्रसिद्ध कालजयी बाल साहित्य पुस्तक है, जो प्राचीन ग्रीक कथाकार ईसप द्वारा रचित नैतिक कहानियों का संग्रह है। यह किताब हिंदी में, विशेषकर प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित (लेखिका: प्रान्तिका), बच्चों को नीति-शिक्षा, बुद्धिमत्ता और मानवीय मूल्यों को सिखाने के लिए बहुत लोकप्रिय है किताब की मुख्य विशेषताएं:नैतिक शिक्षा (Moral Lessons): हर कहानी के अंत में एक गहरा संदेश होता है।प्रसिद्ध कहानियां: इसमें 'लालची कुत्ता', 'कछुआ और खरगोश', 'अंगूर खट्टे हैं' जैसी कई प्रसिद्ध कहानियां हैं।सरल भाषा: यह हिंदी संस्करण बच्चों के समझने के लिए सरल भाषा में लिखा गया है।प्रकाशन: यह प्रान्तिका द्वारा संकलित और प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है। Esop Ki Kahaniyan एक कालजयी कृति है, जो समाज की गहराइयों में उतरकर उसकी सच्चाइयों को उजागर करती है। Prantika की लेखनी पाठक को न केवल उस समय के सामाजिक ढांचे से परिचित कराती है, बल्कि मानवीय भावनाओं की जटिलताओं को भी उजागर करती है। इस उपन्यास में लेखक ने गरीबी, अन्याय और नैतिक द्वंद्वों को एक ऐसी संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया है जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक प्रतीत होती है। Esop Ki Kahaniyan केवल एक कहानी नहीं, बल्कि समाज का आईना है जो सोचने पर मजबूर करता है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो साहित्य के माध्यम से जीवन और समाज को समझना चाहते हैं। Esop Ki Kahaniyan एक अनुभव है जिसे पढ़ना नहीं, महसूस करना होता है।
Aurat Ka Ghar
- Author Name:
Jasinta Kerketta
- Book Type:

- Description: शहर के सम्पर्क और नए समय के प्रभाव में आदिवासी समाज भी अब ठीक-ठीक वैसा नहीं रहा, जैसा जंगल और प्रकृति ने उसे बनाया था। वह बदल रहा है और अफ़सोस कि अधिकतर विकृति की ओर ज़्यादा बदल रहा है। नागर सभ्यता अपनी तमाम नकारात्मक ऊर्जा के साथ उसे अपनी चपेट में ले रही है। जसिंता केरकेट्टा की ये कहानियाँ जैसे बदलाव की इस प्रक्रिया का जीवन्त दस्तावेज़ हैं। बिना किसी कलागत आग्रह के सरल-सीधी कथा-कहन के साथ वे इन कहानियों में आदिवासी स्त्रियों की असहायता को भी उजागर करती हैं और पुरुषों में बढ़ते ताक़त के नशे की ओर भी संकेत करती हैं। कुछ कहानियों में उन्होंने ऐसे वयस्क मूल्यबोध की ओर भी इशारा किया है जिसको स्वीकार करने में नागर जन की तथाकथित आधुनिकता भी बग़लें झाँकने लगेगी। मसलन ‘रिश्ता’ कहानी में विवाह नामक संस्था को आमूल-चूल पुनर्परिभाषित करते नैना, सूरज और सुरजमुनी के संवाद। संवाद-प्रधान कुछ कहानियों में धर्म-आधारित राजनीति और आदिवासी जीवन पर उसके प्रभाव को लेकर भी अच्छी रोशनी पड़ती है। व्यवस्था और अवधारणा के स्तर पर बहुत सूक्ष्म और रेडिकल बदलावों के संकेत इन कहानियों में कई जगह मिलते हैं। ये कहानियाँ बताती हैं कि आदिवासी समाज में भी भले ही पुरुषों ने स्त्री के लिए कोई सम्मानजनक जगह नहीं रखी, बाहरी दुष्प्रभाव में भले ही बेटे अपनी माँओं-बहनों के साथ हिंसा करने लगे हैं, लेकिन स्त्री अभी भी अपनी संस्कृति, अपनी प्राकृतिक सहजता को लेकर सचेत है, उसे खोने को तैयार नहीं। हिंसा का शिकार होकर भी वह हिंसा को नहीं चुनती। आदिवासी दुनिया के संघर्षों, मूल्यों, पीड़ाओं, उसके सामने मौजूद ख़तरों और बदलावों को दर्शातीं कहानियों का एक रोचक संग्रह।
Bhutaliya Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Nisar Ahmed
- Book Type:

- Description: Hindi Short Story by Nisar Ahmed
Gramakkinar
- Author Name:
Kolakaluri Enoch +1
- Book Type:

- Description: ഗ്രാമക്കിണർ : എഴുത്തുകാരൻ എന്ന നിലയിൽ കൊലകലൂരി ഇനോക്കിനെ അതുല്യനാക്കിയത് 'ഗ്രാമക്കിണർ' എന്ന ഈ കഥാസമാഹാരമാണ്. ഇതിലുള്ള ഒമ്പതിൽ അഞ്ചു കഥകൾ (ഗ്രാമക്കിണർ, വിശപ്പ്, പഴന്തുണിക്കീറ്, വെളിമ്പുറം, തലയില്ലാത്തവൻ) ദളിത് ജീവിതത്തിലെ ചൂഷണവും സഹനവും ചെറുത്തു നിൽപ്പും കേന്ദ്രമാക്കിയുള്ളവയാണ്. ക്ഷുരകർ, ചെരുപ്പുകുത്തികൾ, അലക്കുകാർ, തോട്ടികൾ മുതലായവരുടെ അരികുവൽക്കരിക്കപ്പെട്ട ചരിതങ്ങൾ നിറഞ്ഞ ഈ കഥകളിൽ അവരുടെ പ്രതിഷേധം പ്രകടിപ്പിക്കുവാനുള്ള ധീരമായ സംഘർ ഷങ്ങൾ, കയ്യേറ്റത്തിനെതിരെയുള്ള പ്രതിരോധം, നിശ്ശബ്ദമായ സഹനങ്ങൾ, അറുതിയില്ലാത്ത സർവ്വവ്യാപിയായ സാമൂഹിക അനീതിയോടുള്ള അടിയറവ് ഇവയൊക്കെ നിറയുന്നു. ബാക്കിയുള്ള നാലു കഥകളിൽ ഒരു നാടകനടന്റെ വ്യക്തി ജീവിതം (പുതിയ വീട്), കൗമാരപ്രണയത്തിൽ ഭ്രമിച്ചുപോയ ഒരുവന്റെ ദുരന്തം (കൗമാരഹൃദയം), ജീവിതസംശുദ്ധിക്കായി പ്രതിജ്ഞാബദ്ധനായ ഒരുവന്റെ ധർമ്മസങ്കടങ്ങൾ (മാപ്പപേക്ഷ), ഒരു ഹോട്ടൽ തൊഴിലാളിയുടെ ധീരമായ ജീവിതം (അണഞ്ഞ ജ്വാല) എന്നിവയാണ് പ്രതിപാദ്യം.
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