Katha Saptak Lakshmi Sharma
About the book
इस संग्रह की हर एक कहानी अनूठी है। इस संग्रह में शामिल सात कहानियों में अलग ही तरह का आकर्षण है। इन कहानियों में पात्रों का जो चित्रण किया गया है, वो अनुपम है। पात्र सामने खड़े होकर बात करते हैं। मैंने सबसे पहले लक्ष्मी जी का उपन्यास 'स्वर्ग का अंतिम उतार' पढ़ा था। तब से मैं उनके लेखन का कायल हूँ। उपन्यास की जितनी प्रशंसा की जाए कम है, पर यहाँ तो हमें उनकी सात कहानियों के बारे में ही कहना है। इस संग्रह की दो कहानियाँ जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आईं, हालाँकि हर एक कहानी पसंद आई, पर बात उन्नीसा-बीसा जितनी ही है। जो ज्यादा पसंद आई बात उनकी पहले। 'पूस की एक और रात' और 'रानियाँ रोती नहीं।' पूस की एक और रात का जो अंत है वो चौंका देता है, अख़बार की एक ख़बर की शहर की ठंडी रात जिसका पूरा विवरण कहानी में बताया है, पर दूसरी ख़बर चौंका देती है, जिसका ज़िक्र यहाँ कर मैं कहानी को यहीं ख़त्म करना नहीं चाहता। वहीं दूसरी कहानी है 'रानियाँ रोती नहीं'। जिसमें दो काल एक साथ चलते हैं। इतिहास और वर्तमान दोनों में बड़ा अंतर है। गहनों से लदी रानियाँ और जीन्स पहने महिला। बस कपड़ों का ही तो अंतर है। महिलाओं की व्यथा तो वही है। वो रो नहीं सकती, मतलब आवाज़ नहीं उठा सकतीं। उन्हें सहने के लिए धरती पर भेजा है।
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About the Book
इस संग्रह की हर एक कहानी अनूठी है। इस संग्रह में शामिल सात कहानियों में अलग ही तरह का आकर्षण है। इन कहानियों में पात्रों का जो चित्रण किया गया है, वो अनुपम है। पात्र सामने खड़े होकर बात करते हैं। मैंने सबसे पहले लक्ष्मी जी का उपन्यास 'स्वर्ग का अंतिम उतार' पढ़ा था। तब से मैं उनके लेखन का कायल हूँ। उपन्यास की जितनी प्रशंसा की जाए कम है, पर यहाँ तो हमें उनकी सात कहानियों के बारे में ही कहना है। इस संग्रह की दो कहानियाँ जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आईं, हालाँकि हर एक कहानी पसंद आई, पर बात उन्नीसा-बीसा जितनी ही है। जो ज्यादा पसंद आई बात उनकी पहले। 'पूस की एक और रात' और 'रानियाँ रोती नहीं।' पूस की एक और रात का जो अंत है वो चौंका देता है, अख़बार की एक ख़बर की शहर की ठंडी रात जिसका पूरा विवरण कहानी में बताया है, पर दूसरी ख़बर चौंका देती है, जिसका ज़िक्र यहाँ कर मैं कहानी को यहीं ख़त्म करना नहीं चाहता। वहीं दूसरी कहानी है 'रानियाँ रोती नहीं'। जिसमें दो काल एक साथ चलते हैं। इतिहास और वर्तमान दोनों में बड़ा अंतर है। गहनों से लदी रानियाँ और जीन्स पहने महिला। बस कपड़ों का ही तो अंतर है। महिलाओं की व्यथा तो वही है। वो रो नहीं सकती, मतलब आवाज़ नहीं उठा सकतीं। उन्हें सहने के लिए धरती पर भेजा है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Shivna Prakashan
- Weight
- 290 grams
- ISBN-13
- 9789390593842
- Pages
- 120
- Reading time
- ~4 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 19 × 21 cm
- Language
- Hindi
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