Ganga-Snan
About the book
‘गंगा-स्नान’ डॉ. जगदीश प्रसाद सिंह की महत्त्वपूर्ण पुस्तक है जिसमें उनकी बाईस कहानियाँ संकलित हैं। संग्रह की सभी कहानियाँ यथार्थवादी परम्परा की हैं और प्रत्येक कहानी में कुछ ऐसे प्रश्न उठाए गए हैं जिनका सम्बन्ध व्यक्ति या समाज या दोनों के वर्तमान और भविष्य से है। लेकिन इनमें प्रश्नों के उत्तर देने का या भविष्य के लिए दिशा-संकेत करने का कोई प्रयास नहीं है। इनका संसार वैश्वीकरण के युग में तेज़ी से बदलते मूल्यों का संसार है, जहाँ उचित और अनुचित के निर्णय का सर्वमान्य मापदंड स्वार्थों की पूर्ति है। ये कहानियाँ पाठक के मस्तिष्क को झकझोरने और इनमें उठे प्रश्नों के उत्तर खोजने के लिए विवश करने का काम करती हैं। लेखक ने इन कहानियों के माध्यम से मानव-मन की विभिन्न छवियों का जो कोलाज रचा है, वह अनूठा है। शीर्षक कथा ‘गंगा-स्नान’ में एक शहीद की विधवा पत्नी के दु:ख-दर्द और अपने ही परिवार में हो रहे शोषण की मर्मस्पर्शी कथा कही गई है। इस पुस्तक में जातिवाद साम्प्रदायिकता, राजनीतिक विद्रूपता, सामाजिक न्याय, शोषण आदि विषयों के सहारे कहानियों का ताना-बाना बुना गया है। संग्रह की सभी कहानियाँ रोचक हैं और पाठक का ध्यान अन्त तक बाँधे रहती हैं।
Read moreAbout the Book
‘गंगा-स्नान’ डॉ. जगदीश प्रसाद सिंह की महत्त्वपूर्ण पुस्तक है जिसमें उनकी बाईस कहानियाँ संकलित हैं।
संग्रह की सभी कहानियाँ यथार्थवादी परम्परा की हैं और प्रत्येक कहानी में कुछ ऐसे प्रश्न उठाए गए हैं जिनका सम्बन्ध व्यक्ति या समाज या दोनों के वर्तमान और भविष्य से है। लेकिन इनमें प्रश्नों के उत्तर देने का या भविष्य के लिए दिशा-संकेत करने का कोई प्रयास नहीं है। इनका संसार वैश्वीकरण के युग में तेज़ी से बदलते मूल्यों का संसार है, जहाँ उचित और अनुचित के निर्णय का सर्वमान्य मापदंड स्वार्थों की पूर्ति है। ये कहानियाँ पाठक के मस्तिष्क को झकझोरने और इनमें उठे प्रश्नों के उत्तर खोजने के लिए विवश करने का काम करती हैं।
लेखक ने इन कहानियों के माध्यम से मानव-मन की विभिन्न छवियों का जो कोलाज रचा है, वह अनूठा है। शीर्षक कथा ‘गंगा-स्नान’ में एक शहीद की विधवा पत्नी के दु:ख-दर्द और अपने ही परिवार में हो रहे शोषण की मर्मस्पर्शी कथा कही गई है। इस पुस्तक में जातिवाद साम्प्रदायिकता, राजनीतिक विद्रूपता, सामाजिक न्याय, शोषण आदि विषयों के सहारे कहानियों का ताना-बाना बुना गया है।
संग्रह की सभी कहानियाँ रोचक हैं और पाठक का ध्यान अन्त तक बाँधे रहती हैं।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 2nd
- Publication year
- 2006
- Weight
- 310 grams
- ISBN-13
- 9788126712717
- Pages
- 168
- Reading time
- ~6 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14.5 × 22 cm
- Language
- Hindi
Customer reviews
Be the first to write a review
Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

