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Gokharoo

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पुष्पिता की ये कहानियाँ बौद्धिक आडम्बर के बग़ैर एक मानवीय संसार का अन्वेषण करती हैं और बहुत सफलतापूर्वक अपने कथ्य और सहज गद्य के माध्यम से पढ़नेवाले के भीतर तक उतर जाती हैं। यह इनकी काव्यात्मकता ही है जो उन घटनाओं, परिस्थितियों से सवाल करती है जिन्हें ज़रूरी नहीं समझा जाता पर जिनके मानी बहुत बड़े होते हैं। ‘ठंडे बस्ते में पिघलता लावा’ में सुधा के कर्मठ जीवन के बावजूद उसकी हत्या, प्रशासनिक उदासीनता और सुधा के पी.एफ़. से अपनी जेबें भरने के बाद उसके पति की चुप्पी। प्रेम-विवाह की यह परिणति और व्याप्त भ्रष्टाचार का तांडव यदि इस कहानी में दिखता है तो दूसरी ओर ‘दो शब्द’ में अंकिता का प्रेम के अभाव में ठूँठ-सा व्यक्तित्व। इस संग्रह की कहानियाँ उन चीज़ों की ज़रूरत की कहानियाँ हैं जो हवा, पानी, रोटी, कपड़े की तरह और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी लगती हैं।

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पुष्पिता की ये कहानियाँ बौद्धिक आडम्बर के बग़ैर एक मानवीय संसार का अन्वेषण करती हैं और बहुत सफलतापूर्वक अपने कथ्य और सहज गद्य के माध्यम से पढ़नेवाले के भीतर तक उतर जाती हैं। यह इनकी काव्यात्मकता ही है जो उन घटनाओं, परिस्थितियों से सवाल करती है जिन्हें ज़रूरी नहीं समझा जाता पर जिनके मानी बहुत बड़े होते हैं।

‘ठंडे बस्ते में पिघलता लावा’ में सुधा के कर्मठ जीवन के बावजूद उसकी हत्या, प्रशासनिक उदासीनता और सुधा के पी.एफ़. से अपनी जेबें भरने के बाद उसके पति की चुप्पी। प्रेम-विवाह की यह परिणति और व्याप्त भ्रष्टाचार का तांडव यदि इस कहानी में दिखता है तो दूसरी ओर ‘दो शब्द’ में अंकिता का प्रेम के अभाव में ठूँठ-सा व्यक्तित्व।

इस संग्रह की कहानियाँ उन चीज़ों की ज़रूरत की कहानियाँ हैं जो हवा, पानी, रोटी, कपड़े की तरह और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी लगती हैं।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2002
Weight
224 grams
ISBN-13
9788171197682
Pages
92
Reading time
~3 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

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