Gokharoo
About the book
पुष्पिता की ये कहानियाँ बौद्धिक आडम्बर के बग़ैर एक मानवीय संसार का अन्वेषण करती हैं और बहुत सफलतापूर्वक अपने कथ्य और सहज गद्य के माध्यम से पढ़नेवाले के भीतर तक उतर जाती हैं। यह इनकी काव्यात्मकता ही है जो उन घटनाओं, परिस्थितियों से सवाल करती है जिन्हें ज़रूरी नहीं समझा जाता पर जिनके मानी बहुत बड़े होते हैं। ‘ठंडे बस्ते में पिघलता लावा’ में सुधा के कर्मठ जीवन के बावजूद उसकी हत्या, प्रशासनिक उदासीनता और सुधा के पी.एफ़. से अपनी जेबें भरने के बाद उसके पति की चुप्पी। प्रेम-विवाह की यह परिणति और व्याप्त भ्रष्टाचार का तांडव यदि इस कहानी में दिखता है तो दूसरी ओर ‘दो शब्द’ में अंकिता का प्रेम के अभाव में ठूँठ-सा व्यक्तित्व। इस संग्रह की कहानियाँ उन चीज़ों की ज़रूरत की कहानियाँ हैं जो हवा, पानी, रोटी, कपड़े की तरह और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी लगती हैं।
Read more₹
395
316 20% off
Available
Format
About the Book
पुष्पिता की ये कहानियाँ बौद्धिक आडम्बर के बग़ैर एक मानवीय संसार का अन्वेषण करती हैं और बहुत सफलतापूर्वक अपने कथ्य और सहज गद्य के माध्यम से पढ़नेवाले के भीतर तक उतर जाती हैं। यह इनकी काव्यात्मकता ही है जो उन घटनाओं, परिस्थितियों से सवाल करती है जिन्हें ज़रूरी नहीं समझा जाता पर जिनके मानी बहुत बड़े होते हैं।
‘ठंडे बस्ते में पिघलता लावा’ में सुधा के कर्मठ जीवन के बावजूद उसकी हत्या, प्रशासनिक उदासीनता और सुधा के पी.एफ़. से अपनी जेबें भरने के बाद उसके पति की चुप्पी। प्रेम-विवाह की यह परिणति और व्याप्त भ्रष्टाचार का तांडव यदि इस कहानी में दिखता है तो दूसरी ओर ‘दो शब्द’ में अंकिता का प्रेम के अभाव में ठूँठ-सा व्यक्तित्व।
इस संग्रह की कहानियाँ उन चीज़ों की ज़रूरत की कहानियाँ हैं जो हवा, पानी, रोटी, कपड़े की तरह और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी लगती हैं।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 2nd
- Publication year
- 2002
- Weight
- 224 grams
- ISBN-13
- 9788171197682
- Pages
- 92
- Reading time
- ~3 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 22 cm
- Language
- Hindi
Customer reviews
Be the first to write a review
Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

