Photoframe Mein Kaid Hansi
(0)
Author:
Suman BajpaiPublisher:
FlyDreams PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
159
₹ 127.2 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
मन के भीतर न जाने कितनी परतें होती हैं, जिन्हें स्त्री कभी छीलकर अलग कर देती है तो कभी फिर से कई और परतों में ढककर छिपा देती है। लेकिन इस दौरान वह पीड़ा के सागर में लगातार गोते लगाती रहती है। इसके बावजूद वह हर बार किनारे पर आ खड़ी होती है। स्त्री का संघर्ष ही तो है जो उसे टूटने से बचाता है। परिस्थितियाँ कई बार अवरोध बनकर उसके सामने आ खड़ी होती हैं, तब बेशक पहाड़ों-सी दृढ़ता उसमें न आ पाए, गगनचुंबी चोटियों की तरह वह सतर्क रहती है, हर बाधा को पार करने के लिए। वह हारती नहीं है, वह बस निरंतर एक नदी की तरह प्रवाहमान होती रहती है। यह स्त्री पुरुष विरोधी नहीं है, पर अपने हक़ के लिए लड़ना जानती है। स्त्री से हर रिश्ते में एक अहम भूमिका निभाने की अपेक्षा की जाती है क्योंकि पुरुष जानता है कि वही ऐसा कर सकती है और सच में, वह ऐसा करने में सफल होती भी रही है। स्त्री जीवन के विविध पहलुओं पर केंद्रित इन कहानियों में अगर कोई उलझन है तो उसका समाधान भी है। कुछ अछूते विषयों को उजागर और स्त्री की सोच को निरूपित करती हैं इस संग्रह की कहानियाँ।
Read moreAbout the Book
मन के भीतर न जाने कितनी परतें होती हैं, जिन्हें स्त्री कभी छीलकर अलग कर देती है तो कभी फिर से कई और परतों में ढककर छिपा देती है। लेकिन इस दौरान वह पीड़ा के सागर में लगातार गोते लगाती रहती है। इसके बावजूद वह हर बार किनारे पर आ खड़ी होती है। स्त्री का संघर्ष ही तो है जो उसे टूटने से बचाता है। परिस्थितियाँ कई बार अवरोध बनकर उसके सामने आ खड़ी होती हैं, तब बेशक पहाड़ों-सी दृढ़ता उसमें न आ पाए, गगनचुंबी चोटियों की तरह वह सतर्क रहती है, हर बाधा को पार करने के लिए। वह हारती नहीं है, वह बस निरंतर एक नदी की तरह प्रवाहमान होती रहती है। यह स्त्री पुरुष विरोधी नहीं है, पर अपने हक़ के लिए लड़ना जानती है। स्त्री से हर रिश्ते में एक अहम भूमिका निभाने की अपेक्षा की जाती है क्योंकि पुरुष जानता है कि वही ऐसा कर सकती है और सच में, वह ऐसा करने में सफल होती भी रही है। स्त्री जीवन के विविध पहलुओं पर केंद्रित इन कहानियों में अगर कोई उलझन है तो उसका समाधान भी है। कुछ अछूते विषयों को उजागर और स्त्री की सोच को निरूपित करती हैं इस संग्रह की कहानियाँ।
Book Details
-
ISBN9788195141371
-
Pages163
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age11-18 yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Kasturi Mrig
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं।
अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़ने वाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे।
प्रस्तुत संग्रह में ‘कस्तूरी मृग’, ‘माणिक’, ‘तर्पण’, ‘जोकर’, ‘रथ्या’ एवं ‘शर्त’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है।
कलात्मक कौशल के साथ रची गईं ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Bhukhmaroo
- Author Name:
Bama
- Book Type:

- Description: दो जून की रोटी के लिए जिन्हें रोज़ जूझना पड़ता है; उनके लिए अपने भीतर की ताक़त ही सब कुछ है। तमिल भाषा की दलित स्त्री कथाकारों की ये कहानियाँ उन लोगों की ताक़त को स्वर देने की कोशिश करती हैं, उसे और मज़बूत करने की भी। भूख और ग़रीबी के अलावा जातिगत भेदभाव, श्रम का शोषण और प्रकृति के दोहन से उपजी समस्याएँ भी हैं जिनकी सबसे ज़्यादा मार इन्हीं लोगों पर पड़ती है। लेकिन जैसाकि इस संकलन में शामिल उमा देवी की कहानी ‘कमला’ रेखांकित करती है, संघर्ष और बदलाव की शुरुआत भी यही लोग करते हैं। ‘भुखमारू’ संग्रह में शामिल प्रत्येक कहानी एक अलग परिवेश और जीवन के एक अलग पहलू को पाठक के सामने लाती है। बिना किसी फ़ॉर्मूले का अनुकरण किए इन कहानियों में हमें बेहद सजीव पात्र और बहुत नज़दीक से देखे गए विवरण मिलते हैं। इनका प्राकृतिक और सामाजिक परिवेश कथा-पात्रों को भी एक भिन्न आयाम देता है जिससे वे ज़्यादा मौलिक और वास्तविक दिखने लगते हैं। विसंगतियों, उत्पीड़न और अन्याय पर टिके मनुष्य समाज के बरक्स पशु-पक्षियों और जंगल की मौजूदगी इन कहानियों को और विशिष्ट बनाती है। इन कहानियों का चयन और संकलन तमिल भाषा की सुप्रसिद्ध कथाकार बामा ने किया है जिनकी रचनाओं ने देश से बाहर भी अपनी पहचान बनाई है।
Sampurna Kahaniyan : Mridula Garg
- Author Name:
Mridula Garg
- Book Type:

-
Description:
मृदुला गर्ग ने लगभग आधी सदी से अपनी निरंतर ऊर्जस्वित रचनात्मकता के कारण, हिन्दी कथा-साहित्य में अनोखा मुक़ाम हासिल किया है। जीवन के किसी एक पहलू तक ही सीमित रहने के बजाय उन्होंने कथ्य और शिल्प दोनों में लगातार नवोन्मेष किए हैं। ये नवोन्मेष सायास साधी गई और प्रदर्शनप्रिय चमत्कारिकता के रूप में नहीं हैं। ये तो सहज विकास के तौर उनके विषयों के चुनाव और निर्वाह में रच-बस गए हैं। आरंभिक दौर में लिखी गई कितनी क़ैदें और 2014 में लिखी गई सितम के फ़नकार को साथ-साथ पढ़ने से यह बात स्पष्ट हो जाती है।
स्त्री-पुरुष सम्बन्धों पर केन्द्रित कहानियाँ हों या अन्य सम्बन्धों और सरोकारों पर केन्द्रित; मृदुला गर्ग की कहानियों में मन के भीतर और बाहर का संवाद निरंतर लक्ष्य किया जा सकता है। उनकी बहुचर्चित बोल्डनेस केवल स्त्री-पुरुष सम्बन्ध की जटिलता के अनुसंधान तक सीमित नहीं, बल्कि “अपनी मौत के लिए वक़्त और जगह ख़ुद चुनने” तक व्याप्त है। उनकी कहानियों में जीवन का उत्सव है तो इसकी अनिवार्य परिणति का सहज स्वीकार भी। किसी एक पल में किए गए छोटे से काम के अप्रत्याशित रूप से विडंबनापूर्ण परिणामों की पुनर्रचना है तो बदलते सामाजिक पर्यावरण की परिणतियों का अनुसंधान भी।
मृदुला गर्ग की कहानियों में भौगोलिक विस्तार, वर्गीय विविधता और तरह-तरह के पात्रों से मुखामुखम तो है ही कहानी के लिए चुने गए विषयों, पात्रों और स्थितियों और उन्हें कहने के ढंग में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण नवोन्मेष भी हैं। ऐसे नवोन्मेष सघन संवेदना, सूक्ष्म विडम्बना बोध और प्रखर विचारशीलता के ही कारण सम्भव हो पाते हैं। अनोखी बात यह कि इन विशेषताओं का अहसास पाठक के मन में लगभग नामालूम सहजता के साथ उतरता चला जाता है।
हिन्दी कथा-संसार को समृद्ध करने वाला यह अनोखापन ही मृदुला गर्ग के लेखन की विशिष्ट पहचान है।
—पुरुषोत्तम अग्रवाल
Bhikshuni
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं।
अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़नेवाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे।
प्रस्तुत संग्रह में ‘तोमार जे दोक्खिन मुख’, ‘ज्यूडिश से जयन्ती’, ‘भिक्षुणी’, ‘मामाजी’, ‘अनाथ’, ‘भूल’, ‘सती’, ‘मौसी’, ‘प्रतीक्षा’ एवं ‘लाटी’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है।
कलात्मक कौशल के साथ रची गईं ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Yahan Koi Gulmuhar Nahin Hai
- Author Name:
Shaival
- Book Type:

-
Description:
आज़ादी के बाद देश परिवर्तन के दो मुख्य पड़ावों से गुज़रा। पहले पड़ाव के बाद ज़मींदारी गई, नई योजना की तुरही बजी, टांड़-टिकोलों पर नए गढ़ बने। विकास की धारा बहने लगी। इस धारा ने गाँव-क़स्बों को नया स्वरूप दिया। नए छाया अधिपति बने। रंगदार, लठधर और अफ़सरों के बीच नए सत्ता-सम्बन्ध बने। विकास के गढ़ ‘उपनिवेश के मुख्यालय’ बन गए। भूमंडलीकरण दूसरा पड़ाव था, जिसने देश का चेहरा पूरी तरह बदल दिया। ‘रियासत’ छोड़कर गए ज़मींदार एन.आर.आई. बनकर अपने-अपने नए घरों में लौट आए। अपने परिवार के महान इतिहास को संरक्षित रखने और जड़ों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए।...अन्दर की चीज़ें बाहर जाने लगीं, बाहर की चीज़ें अन्दर आने लगीं तो पता लगा, इसके कारण हमारी प्राथमिकताएँ ही बदल गईं। शिक्षा, विकास, आत्मनिर्भरता, मानवीयता, समुदायबोध—सबको लाँघता हुआ पहली सीढ़ी पर कुछ और आ बैठा। नौकरानी अपने महीने भर की कमाई ब्यूटी पार्लर में लुटाने पहुँच गई। कूलर जैसी जड़ मशीन प्राकृतिक जीवन की ऊष्मा खा गई। ज़िन्दगी वही नहीं रही, उसके मायने बदल गए। पुरानी संवेदनाओं का इस्तेमाल भर होने लगा, पर लक्ष्य पूरी तरह बदल गए।
भारतीय समाज यात्रा के मुख्य पड़ावों से जिन बाह्य और अन्दरूनी परिवर्तनों का शिकार हुआ, उन्हें गहराई में जाकर रेखांकित करती हैं ये कहानियाँ। दूसरे लहजे में कहें तो ‘नई लोक-संस्कृति’ की गवाह बनती हैं ये कहानियाँ।
Adhkhaya phal
- Author Name:
Anand Harshul
- Book Type:

- Description: ‘अधखाया फल’ आनंद हर्षुल का तीसरा कहानी-संग्रह है। शिल्प-सजगता और भाषा का अपूर्व सौष्ठव लेखक के इस तीसरे संग्रह की कहानियों में भी भरपूर मौजूद है। यथार्थ के साथ रोमांस के जिस सर्जनात्मक दुस्साहस के लिए आनंद हर्षुल जाने जाते हैं, वह उनके विलक्षण कथा-गद्य में प्रकट हुआ है। यह ऐसा गद्य है जो इन दिनों प्रचलित कथात्मक गद्य की स्थूल रूढ़ियों—विवरणात्मकता, वृत्तान्त के निपट एकरैखिक विन्यास, यथार्थ की सपाट समाजशास्त्रीयता आदि—के बरअक़्स किंचित् स्वैरमूलक, बहुस्तरीय और स्मृतिबहुल रूप ग्रहण करता है। इस रूप में यह कहानी के जाने-पहचाने गद्य का प्रतिलोम जान पड़ता है। आनन्द हर्षुल कहानी की अन्तर्वस्तु को यथार्थवाद के वाचाल मुहावरों में पकड़ने की लोकप्रिय प्रविधि से परहेज़ करते हैं। वे यथार्थ की अन्तर्ध्वनियों को एकाग्रचित्त होकर सुनते हैं और उसकी आन्तरिक विडम्बनाओं पर धीरे-से उँगली रखते हैं। ज़ाहिर है, वे कहीं पहुँचने की आपाधापी में नहीं होते; कहानी उनके तईं यथार्थ के पेंच को आहिस्ता-आहिस्ता खोलने की सतर्कता और धीरज की कला है। कथा के मर्मस्थल तक आनंद दबे पाँव पहुँचते हैं और अनायास उसे उद्घाटित कर देते हैं। उनकी कहानियाँ सनसनी में नहीं, संवेदना में जीती हैं। प्रेम इस संग्रह की ज़्यादातर कहानियों की केन्द्रीय थीम है। यहाँ प्रेम के अनुभव के अलग-अलग रूप-रंग, छवियाँ और आस्वाद हैं—रोमानी उमंग, औत्सुक्य, आन्तरिक उत्ताप से लेकर वंचना और दुःखबोध तक। आनंद ने बहुत मार्मिक ढंग से इन्हें रचा है। उन्होंने अभाव और भूख के मर्म को भी वैसी ही आन्तरिक विकलता के साथ पकड़ा है, जिस तरह प्रेम के मर्म को। इन दोनों तरह के अनुभवों को संवेदनात्मक रूप से मुखर बनाने और प्रभावी ढंग से उजागर करने के लिए वे उनके पार्श्व में निश्छल-निर्बोध मनुष्यता की छवियों का सृजन करते हैं। ग़ौर करें कि आनंद अपने कथा-चरित्रों के कार्यकलाप का चित्रण करते हुए उनके अन्तर्मन में प्रवेश करते हैं और बाहरी दुनिया की घटनात्मकता को उनके अन्तर्जगत की हलचलों से जोड़ते हैं। यहाँ पात्र कथाकार की कठपुतलियाँ नहीं हैं; वे अपने आसपास की निष्ठुर वास्तविकता—अभाव, दु:ख और यंत्रणा—को भीतर तक महसूस करते स्पन्दित मनुष्य हैं। उनके जीवन-यथार्थ को अनुभूति के सूक्ष्म स्तरों पर ग्रहण करने की संवेदनशीलता के चलते भी इस संग्रह की कहानियाँ उल्लेखनीय सिद्ध होंगी।
Hatheli Bhar Kahaniyan
- Author Name:
Kawabata Yasunari
- Book Type:

- Description: दिल्ली विश्वविद्यालय की जापानी साहित्य की छात्राओं द्वारा अनूदित और उनीता सच्चिदानन्द द्वारा सम्पादित पुस्तक है। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित जापान के अग्रणी साहित्यकार कावाबाता यासुनारी का कहानी-संग्रह ‘हथेली भर कहानियाँ’ कथा साहित्य के क्षेत्र में एक अनोखा प्रयोग है। इसे कथा-साहित्य का ‘हाइकू’ कहें तो गलत न होगा। ‘हथेली भर कहानियाँ’ का कोई प्लॉट नहीं, शुरू या अंत नहीं, बस जीवन की सामान्य अनुभूतियों की एक अविरल धारा है जो हर मुश्किलें लाँघती, चलती ही जाती है लेकिन मनुष्य इन अनुभूतियों से सदा अनभिज्ञ रहता है।
Sarla Madam Ke Missed Call
- Author Name:
Dr. Kamal Chaturvedi
- Book Type:

- Description: Book
Uttami ki Maa
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी
है।‘उत्तमी की माँ’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘उत्तमी की माँ’, ‘नमक हराम’, ‘पतिव्रता’, ‘आत्म-अभियोग’, ‘करुणा’, ‘भगवान् के पिता के दर्शन’, ‘न कहने की बात’, ‘भगवान का खेल’, ‘करवा का व्रत’, ‘नक़ली माल’ और ‘पाप का कीचड़’।
Kitne Sharon Mein Kitni Baar
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

-
Description:
‘बेघर’, ‘नरक-दर-नरक’, ‘दौड़’ जैसे अविस्मरणीय उपन्यासों एवं कई उत्कृष्ट कहानियों की रचनाकार ममता कालिया गद्य-लेखन की नई भूमिका में हैं। वे उन शहरों को याद कर रही हैं जहाँ वह रहीं और जहाँ की छवियों को कोई हस्ती मिटा नहीं सकी। ज़ाहिर है कि यह महज़ याद नहीं है, यह है—जीवन्त गद्य द्वारा अपने ही छिपे हुए जीवन की खोज और उसका उत्सव। इस गद्य-शृंखला ने अपनी हर अगली क़िस्त में ज़्यादा पाठक, सम्मान और लोकप्रियता अर्जित की। ‘कितने शहरों में कितनी बार’ ने निश्चय ही हिन्दी गद्य को समृद्धि, गरिमा और ऊँचाई दी है।
—अखिलेश
‘कितने शहरों में कितनी बार’ में दिल्ली को जाना। इसमें रवि सचमुच नायक हैं और आपके लिखने का ढंग इतना नायाब कि उदासी और वियोग की बात आते ही दिल्ली में पीली, मैली धूल उड़ना शुरू हो जाती है—हर चीज़ को किसकिसा बनाती हुई। इतने शेड्स हैं और जीवन की इतनी तस्वीरें कि यह आपका वृत्तान्त-भर नहीं, हमारे समय की कथा, गल्प और कहानी होने लगती है। मेरे लिए आपकी यह सृजनात्मकता बहुत प्रिय और मूल्यवान सिद्ध हुई है।
—कुमार अम्बुज
आपके संस्मरण ‘कितने शहरों में कितनी बार’—दिल्ली से पता चला कि रवीन्द्र जी कितने साहसी हैं। ट्रेन के नीचे से अँगूठी उठा लाए। यह पूरी लेखमाला आपकी आत्मकथा बन जाएगी जैसे ‘ग़ालिब छुटी शराब’ है। इन लेखों की रोचकता इनकी सच्चाई में निहित है। इनमें आपका संघर्ष भी भरा हुआ है। बधाई लें।
—सरजूप्रसाद मिश्र
अभी-अभी ‘तद्भव’ में ‘कितने शहरों में कितनी बार’ पढ़कर ख़त्म किया। आपकी बेबाकी और वह अनायास फक्कड़पन, न केवल ज़िन्दगी की खानाबदोशी बल्कि उसको उकेरने का ढंग—आपके इस सृजनात्मक रिपोर्ताज़ ने मेरा मन मोह लिया।
—सुदर्शन प्रियदर्शिनी
‘तद्भव’ के नए अंक में आपका संस्मरणात्मक लेख पढ़ा। आपका लेख अद्भुत है। आपकी शैली और भाषा पूरे समय बाँधे रहती है।
—अनन्त विजय
Pataal Pani
- Author Name:
Madan Mohan
- Book Type:

- Description: Short Stories
Dahan (lok)
- Author Name:
Manoj Rupada
- Book Type:

-
Description:
मनोज रूपड़ा की कहानियाँ बाजदफे आपके पढ़ने की गति को धीमा करती हैं। ऐसा गत्यावरोध संरचनात्मक स्तर पर किन्हीं भारी-भरकम, क्लिष्ट वाक्य-विन्यास से प्रसूत नहीं, न ही अर्थागम के स्तर पर ही। बात दरअसल कुछ और है। एक बार शुरू करने के बाद आप उन्हें जल्दी खत्म नहीं करना चाहते, खत्म करने से डरते हैं। मनोज के यहाँ आपके वे बिसराये पाप बसर करते हैं, आपके मानस तक जिनकी अवैध आमद बस सपनीले साँवले में ही सम्भव है। मनोज में उन गोपनीय पापों को उनकी नंगी संपूर्णता में रखने का माद्दा है। वस्तुतः मनोज की दो पंक्तियों की सन्ध में सरगोशी करते आपके अतीत के ऐसे पाप ही आपकी पढ़त को बारहाँ बाधित करते हैं।
मनुष्य का यही 'बेसिक इंस्टिंक्ट' मनोज की कहानियों का मूलाधार है। यही मनोज के नायकों को आहत करता है, उन्हें दर-ब-दर करता है, तोड़कर पुनर्नवा - 'रीकंस्ट्रक्ट' और 'रिन्यू' करता है। मनोज अपने नायकों के व्यक्तित्व व उनके अहं को बड़ी निर्ममता से विखंडित करते हैं। वे इसे प्रलय के स्तर तक ले जाते हैं, किन्तु वहाँ से लौटते हुए उनका अनाहत अहं सर्जना के उरूज पर प्रतिष्ठित होता है।
मनोज इस हारे हुए समय में मनुष्य की विजय के इकलौते स्मारक हैं। सँभालकर-सँजोकर रखे जाने वाले कथाकार। कयामत से पहले इनकी कहानियों को बचाकर रख लेना चाहिए, ये अगली दुनिया के निर्माण का ब्लूप्रिंट हैं।
Balabodhini
- Author Name:
Sanjeev Kumar +1
- Book Type:

- Description: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रवर्तक माने जाते हैं। खड़ी बोली हिन्दी को साहित्य के माध्यम के रूप में प्रसारित-प्रचारित करने तथा रचनात्मक स्तर पर इस्तेमाल करने के लिए, साथ ही, अपने समय की बहुसंख्य प्रतिभाओं को अपने विराट मित्रमंडली में शामिल और प्रोत्साहित करने के लिए भी उन्हें याद किया जाता है। सुविदित है कि 1870 के दशक में उनकी प्रकाशन गतिविधियाँ बहुत तेज़ी से बढ़ी और वे उत्तर-पश्चिमी प्रान्तों में केन्द्रीय महत्त्व वाली एक शख़्सियत के रूप में उभरे। उनकी दो साहित्यिक पत्रिकाएँ—‘कविवचनसुधा’ (1868-85) औ‘हरिश्चन्द्र मैगज़ीन’, जिसका नाम बाद में ‘हरिश्चन्द्र चन्द्रिका’ (1873-85) कर दिया गया—उनके जीवनकाल में ही प्रसिद्धि हासिल कर चुकी थीं। इनके साथ-साथ 1874 से 1877 तक उन्होंने महिलाओं की पत्रिका ‘बालाबोधिनी’ भी सम्पादित की थी, जिसका हिन्दी की पहली स्त्री-पत्रिका होने के नाते साहित्यिक इतिहास में विशिष्ट महत्त्व है। पर यह एक विडम्बना है कि भारतेन्दु की सभी जीवनियों में अनिवार्य और सम्मानजनक नामोल्लेख के बावजूद इस पत्रिका की सामग्र अन्तर्वस्तु या ढब-ढाँचे को लेकर वहाँ या अन्यत्र भी कोई विवेचन नहीं मिलाता और न ही इसकी प्रतियाँ कहीं सुलभ हैं। विभिन स्रोतों से इकट्ठा किए गए बालाबोधिनी के अंकों को पुस्तकाकार रूप में हिन्दी जगत् के सामने लाना इसीलिए महत्त्वपूर्ण है। यह सन्तोष की बात है कि अब भारतेन्दु पर या हिन्दी प्रदेश में स्त्री-प्रश्न पर काम करनेवालों के सामने इस प्रथम स्त्री-मासिक का नामोल्लेख भर करने की मजबूरी नहीं रहेगी।
Sannate Ki Goonj
- Author Name:
Shabhu Shikhar
- Book Type:

- Description: Book
Ped Nahi Baithate
- Author Name:
Vinod Kumar Shukla +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: PEN/Nobokov Award recipient Vinod Kumar Shukla is one of the most celebrated writers of Hindi literature. He has authored many good children's books. In these books, there exists a lively, fulfilling world that readers of all ages can enjoy. This collection has some of his beautiful stories that will expand the craft of storytelling. With commonplace sentence structures, he conveys the most unusual of tales. Chandramohan Kulkarni has created a parallel text to the stories through his illustrations. Together, stories and illustrations walk like a river with its two arms. Age group 9-12 years
Upniveshvad Ka Samana
- Author Name:
S. Irfan Habib
- Book Type:

- Description: ‘उपनिवेशवाद का सामना’ लेखों का एक संकलन है जिसे प्रोफ़ेसर इरफ़ान हबीब ने सम्पादित किया है, जिसके लिए उन्होंने विशेष रूप से एक भूमिका भी लिखी है। यह संकलन 1798 में अंग्रेज़ी फ़ौजों से लड़ते हुए टीपू सुलतान की शहादत की दूसरी शताब्दी पर सुलतान को दी गई एक श्रद्धांजलि है। हैदर अली और टीपू सुलतान के शासनकाल में मैसूर के इतिहास पर लिखे गए इन लेखों में वे लेख शामिल हैं जो 1935 में सामान्यत: भारतीय इतिहास कांग्रेस के वार्षिक सत्रों में प्रस्तुत किए गए थे : कुछ लेख ऐसे भी हैं जो विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। ये लेख उन दो शासकों की स्मृति को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं जो उपनिवेशी शासन के घोर विरोधी थे। ये लेख हमें याद दिलाते हैं कि हमारे राष्ट्रवादी इतिहासकारों ने हमारे अतीत को जिस तरह से समझा था उसमें हैदर अली और टीपू सुलतान को सम्मान का स्थान प्राप्त है। इन सुलतानों के योगदान को महत्त्वहीन बतानेवाली एक समकालीन प्रवृत्ति के विरोध में ये लेख विशेष रूप से प्रासंगिक दिखाई पड़ते हैं।
Manus
- Author Name:
Gourinath
- Book Type:

- Description: मानुस की कहानियों में पेड़-पल्लव, नदी-नाले, ताल-तलैया और तालमखाने, बालू के ढूह और विस्तार, रोहू, झींगा, टेंगरा, मांगुर, गरई और अन्है मछलियों की बहार है और इन्हीं के बीच बिना किसी शिकवा-शिकायत के अपने जीवन को भोगते आम गरीब लोग हैं। इन रचनाओं में कहीं रास है तो कहीं हास, कहीं दुःख है तो कहीं सुख-स्वाद।
Sampoorna Kahaniyan : Kashinath Singh
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description: काशीनाथ सिंह कहानी के लिए जिस चीज़ को सबसे ज़रूरी मानते हैं, वह है जीवन्तता। जीवन की ठस प्रतिकृति नहीं, एक रचना जिसमें उसका अपना जीवन धड़कता हो, जो पाठक को थकाए नहीं, यथार्थ के तीखे चित्र दिखाते हुए भी उसे अपने साथ बनाए रखे। उनकी कहानियों में यह स्पन्दन है। अपना देखा-जाना ग्रामीण जीवन और बनारस का अनूठा परिवेश, उसको जीवन्त बनाने वाले पात्र उनकी कहानियों में अपनी समूची मानवीय जटिलता के साथ दिखाई देते हैं। समय के साथ बदलता यथार्थ कहानी के उनके ट्रीटमेंट को भी बदलता रहा है, लेकिन आम आदमी हमेशा उनके कहानीकार को प्रिय रहा है। उसके दुख-दर्द, असमंजस, दुविधाएँ, उसका जीवट और साहस सब मिलकर उनकी कहानियों को सजीव बनाते हैं। विचारधारा उन्हें दृष्टि ज़रूर देती है, लेकिन जीवन के चित्रण में उनकी सीमा नहीं बनती। यह उनकी अभी तक की कहानियों की सम्पूर्ण प्रस्तुति है। ‘काशी का अस्सी’ के लेखक की कथा-रचनाओं का यह विशाल फलक पाठकों को निश्चय ही लम्बे समय तक साथ रहनेवाला अनुभव प्रदान करेगा।
Trishanku
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

-
Description:
साठोत्तरी महिला कथाकारों में मन्नू भंडारी का विशिष्ट स्थान है। मन्नू भंडारी की कथा-यात्रा लगभग चार दशकों में फैली हुई है। 1960 के आसपास ‘नई कहानी’ आन्दोलन से नौवें दशक तक वे लगातार कहानियाँ लिखती रहीं। हिन्दी कहानी के विविध पड़ाव और आन्दोलन उनकी रचनाशीलता को अवरुद्ध नहीं कर पाए। मन्नू जी की कहानियाँ सामाजिक सन्दर्भों में स्त्री-पुरुष सम्बन्धों को व्याख्यायित ही नहीं करतीं, बल्कि मध्यवर्गीय जीवन यथार्थ के विविध पक्षों को शिद्दत से व्यक्त करती हैं।
एक निश्चित कालखंड की कहानियों का प्रतिनिधित्व करती ‘त्रिशंकु’ की इन कहानियों के पात्र जीवन के सिमटते-फैलते दायरों में सम्बन्धों के नकार और नए सिरे से अपने-अपने व्यक्तित्वों को स्वीकारने की ऊहापोह में जीते हैं। इन कहानियों में स्त्री-पुरुष सम्बन्धों के बनने-बिगड़ने की तफ़सीलें ही नहीं, मध्यवर्गीय समाज के मनोलोक की जटिलताएँ भी हैं। स्त्री-पुरुष सम्बन्धों के विविध पक्षों के साथ इस संग्रह की कहानियों में समय-सापेक्ष पारदर्शिता है। सम्बन्धों को ढोते रहने की थकन और प्रेम की प्रवहमान ऊष्मा है। ‘त्रिशंकु’, ‘आते-जाते यायावर’ और ‘दरार भरने की दरार’ जैसी चर्चित कहानियाँ नारी-पुरुष सम्बन्धों को कई कोणों से परिभाषित करती हैं। सहज कथा-विन्यास और शिल्प के संयोजन की दृष्टि से ‘त्रिशंकु’ की कहानियों का हिन्दी कथा साहित्य में स्थायी महत्त्व है।
Dogri Folk Tales
- Author Name:
Shivanath
- Rating:
- Book Type:

- Description: The language of about five million Dogras, Dogri has a rich oral literature and folk tales form a substantial part of it. There are over seven hundred Dogri folk tales which have been collected and printed so far. This volume is the 1st attempt to bring out the English translation of some of these folk tales. The tales in this volume provide a peep into the 'backyard' of Dogra culture. Here gods and goddesses assume human forms and join human beings to drive home some important truth or moral lesson.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book