Main Tumse Kuchh Kahna Chahati Hun
(0)
Author:
Alice MunroPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
299
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Available
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“प्रतिभा का शानदार नमूना...लेखिका की कला का चमत्कार देखकर पाठकों के मुँह से बरबस वाह-वाह निकल पड़ती है। एलिस मनरो हमारी आँखों के सामने ही जीवन की किसी साधारण घटना को एक ऐसे रत्न में परिवर्तित कर देती हैं जो हमें चकाचौंध कर देता है।"</p> <p>—हैमिल्टन स्पेक्टेटर दैनिक</p> <p>“प्रेम, विस्मय, भय से सराबोर यह कहानियाँ मंत्रमुग्ध कर देती हैं...भरपूर प्रतिभा और विशाल पर्स्पेक्टिव की लेखिका।”</p> <p>—लॉस ऐंजल्स टाइम्स</p> <p>“विश्व के अग्रणी समकालीन कहानी लेखकों में गणना किए जाने के लिए एलिस मनरो का</p> <p>ज़ोरदार दावा।”</p> <p>—न्यूयॉर्क टाइम्स</p> <p>“नारीत्व के विभिन्न पहलुओं का अनूठा अन्वेषण...आज के लेखकों में इससे अधिक</p> <p>ईमानदार, संवेदनशील, भरपूर, हृदयस्पर्शी प्रेरणा का उदाहरण मिल पाना कठिन होगा।”</p> <p>—मिज पत्रिका</p> <p> “हमारे युग के महानतम कहानी लेखकों में से एक।”</p> <p>—ग्लोब एंड मेल
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“प्रतिभा का शानदार नमूना...लेखिका की कला का चमत्कार देखकर पाठकों के मुँह से बरबस वाह-वाह निकल पड़ती है। एलिस मनरो हमारी आँखों के सामने ही जीवन की किसी साधारण घटना को एक ऐसे रत्न में परिवर्तित कर देती हैं जो हमें चकाचौंध कर देता है।"</p>
<p>—हैमिल्टन स्पेक्टेटर दैनिक</p>
<p>“प्रेम, विस्मय, भय से सराबोर यह कहानियाँ मंत्रमुग्ध कर देती हैं...भरपूर प्रतिभा और विशाल पर्स्पेक्टिव की लेखिका।”</p>
<p>—लॉस ऐंजल्स टाइम्स</p>
<p>“विश्व के अग्रणी समकालीन कहानी लेखकों में गणना किए जाने के लिए एलिस मनरो का</p>
<p>ज़ोरदार दावा।”</p>
<p>—न्यूयॉर्क टाइम्स</p>
<p>“नारीत्व के विभिन्न पहलुओं का अनूठा अन्वेषण...आज के लेखकों में इससे अधिक</p>
<p>ईमानदार, संवेदनशील, भरपूर, हृदयस्पर्शी प्रेरणा का उदाहरण मिल पाना कठिन होगा।”</p>
<p>—मिज पत्रिका</p>
<p> “हमारे युग के महानतम कहानी लेखकों में से एक।”</p>
<p>—ग्लोब एंड मेल
Book Details
-
ISBN9789386863553
-
Pages215
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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उनमें हमको 60 से 90 तक के युग के निरन्तर बदल रहे पर पितृसत्ताक मूल्यों के पक्षधर भारतीय राज समाज की घरेलू तथा कामकाजी औरतों के जीवन की कई अनकही सचाइयों का बेबाक दर्शन होता है, जो सामान्यत: पुरुष लेखकों ने बहुत कम पकड़ा है। पकड़ा भी है तो सेक्स या मातृत्व के भावुक चित्रण तक ही सीमित होकर।
विचार और संशय, श्रद्धा और बुद्धि के बीच पाठक को निरन्तर चलायमान रखती शिवानी की इन कहानियों में हम आज भी कथा की चौखट लाँघकर मानव जीवन की सनातनता को छू सकते हैं।
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