Stree Tatha Anya Kahaniyan

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Author:

S. K. Pottekat

Language:

Hindi

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साहित्य अकादेमी’ और ‘ज्ञानपीठ’ सहित अनेक पुरस्कारों-सम्मानों से विभूषित मलयालम कथाकार एस.के. पोट्टेक्काट की यह पुस्‍तक ‘स्‍त्री तथा अन्‍य कहानियाँ’ उनकी कुछ चर्चित कहानियों का संकलन है। ‘स्त्री’ इनमें सर्वाधिक पढ़ी जानेवाली और प्रशंसित कहानियों में से एक है।</p> <p>प्रेम, कामना, समर्पण और विश्वास जैसे मनोभावों को गहरे तक अनुभूत करानेवाली लम्बी कहानी ‘स्त्री’ प्रेम के साथ मानव व्यवहार की कई जटिल परतों को भी खोलती है। यह विशेषता पोट्टेक्काट की लगभग सभी रचनाओं में देखने को मिलती है। इसी संग्रह में शामिल कहानी ‘हमीद ख़ान’ दक्षिण भारत में साम्प्रदायिक सद्भाव और अविश्वास दोनों को बहुत छोटे कलेवर, लेकिन अत्यन्त प्रभावशाली ढंग से रेखांकित करती है।</p> <p>इसी तरह ‘पदचाप’ शीर्षक कहानी पति-पत्नी के सम्बन्धों के साथ-साथ नियति की आकस्मिकता का वर्णन करती है। कहने की आवश्यकता नहीं कि पोट्टेक्काट का जीवन अनुभव अत्यन्त व्यापक है। वे यात्रा-प्रेमी भी थे जिसके चलते न सिर्फ़ उनकी अनुभूतियों का क्षेत्र बहुत व्यापक है, बल्कि उनकी कहन में भी कहीं दोहराव नहीं दिखाई देता।</p> <p>मलयालम से यह अनुवाद भी कहीं कृत्रिमता का आभास नहीं देता है।

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ISBN
9788180311864
Pages
120
Avg Reading Time
4 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

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About the Book

साहित्य अकादेमी’ और ‘ज्ञानपीठ’ सहित अनेक पुरस्कारों-सम्मानों से विभूषित मलयालम कथाकार एस.के. पोट्टेक्काट की यह पुस्‍तक ‘स्‍त्री तथा अन्‍य कहानियाँ’ उनकी कुछ चर्चित कहानियों का संकलन है। ‘स्त्री’ इनमें सर्वाधिक पढ़ी जानेवाली और प्रशंसित कहानियों में से एक है।</p>
<p>प्रेम, कामना, समर्पण और विश्वास जैसे मनोभावों को गहरे तक अनुभूत करानेवाली लम्बी कहानी ‘स्त्री’ प्रेम के साथ मानव व्यवहार की कई जटिल परतों को भी खोलती है। यह विशेषता पोट्टेक्काट की लगभग सभी रचनाओं में देखने को मिलती है। इसी संग्रह में शामिल कहानी ‘हमीद ख़ान’ दक्षिण भारत में साम्प्रदायिक सद्भाव और अविश्वास दोनों को बहुत छोटे कलेवर, लेकिन अत्यन्त प्रभावशाली ढंग से रेखांकित करती है।</p>
<p>इसी तरह ‘पदचाप’ शीर्षक कहानी पति-पत्नी के सम्बन्धों के साथ-साथ नियति की आकस्मिकता का वर्णन करती है। कहने की आवश्यकता नहीं कि पोट्टेक्काट का जीवन अनुभव अत्यन्त व्यापक है। वे यात्रा-प्रेमी भी थे जिसके चलते न सिर्फ़ उनकी अनुभूतियों का क्षेत्र बहुत व्यापक है, बल्कि उनकी कहन में भी कहीं दोहराव नहीं दिखाई देता।</p>
<p>मलयालम से यह अनुवाद भी कहीं कृत्रिमता का आभास नहीं देता है।

Book Details

  • ISBN
    9788180311864
  • Pages
    120
  • Avg Reading Time
    4 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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