Kahin Kuchh Nahin
Author:
Shashibhushan DwivediPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 100
₹
125
Available
‘ख़ामोशी और कोलाहल के बीच की किसी जगह पर वह कहीं खड़ा है। और इस खेल का मज़ा ले रहा है। क्या सचमुच ख़ामोशी और कोलाहल के बीच कोई स्पेस था, जहाँ वह खड़ा था।'</p>
<p>उपर्युक्त पंक्तियाँ बहुचर्चित कथाकार शशिभूषण द्विवेदी की कहानी ‘काला गुलाब’ से हैं। ये ‘काला गुलाब’ जैसी जटिल संवेदना और संरचना की कहानी को 'डिकोड' करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन उसके लेखक शशिभूषण द्विवेदी की रचनाशीलता को समझने का सूत्र भी उपलब्ध कराती हैं। वाक़ई शशिभूषण की कहानियाँ न तो यथार्थवाद और जीवन-जीवन का शोर मचाती हैं, न ही वे कला की चुप्पियाँ चुनती हैं। शशिभूषण इन दोनों के बीच हैं और ख़ामोशी के साथ जीवन के यथार्थ की चहल-पहल, उसकी रंग-बिरंगी छवियों को पकड़ते हैं। साथ ही वे जीवन के कोलाहल के बीच भी उसकी अदृश्य रेखाओं की खोज करते हैं—उसकी चुप ध्वनियों को सुनते हैं। बात शायद स्पष्ट नहीं हो सकी है, इसलिए शशिभूषण की ‘काला गुलाब’ से ही एक अन्य उदाहरण—‘लिखना आसान होता है। लिखते हुए रुक जाना मुश्किल। इसी मुश्किल में शायद ज़िन्दगी का रहस्य है।' लिखते-लिखते रुक जाने की मुश्किल उन्हीं रचनाकारों के सामने दरपेश होती है जो ख़ामोशी की आवाज़ सुनते हैं और कोलाहल की ख़ामोशी भी महसूस करते हैं। लेखक के लिए यह एक कठिन सिद्धि है, लेकिन सुखद है कि शशिभूषण इसे हासिल करते हुए दिखते हैं। बेशक उनकी यह उपलब्धि उन्हें मिले पुरस्कारों से कई-कई गुना महत्त्वपूर्ण है।</p>
<p>—अखिलेश</p>
<p>प्रसिद्ध कथाकार, सम्पादक—‘तद्भव’
ISBN: 9789387462595
Pages: 143
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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मध्यवर्गीय जीवन, उसके सपनों, आदर्शों और संवेदनाओं पर केन्द्रित इन कहानियों में लेखक ने समसामयिक जीवन के मानसिक और मूल्यगत द्वन्द्व को भी अभिव्यक्ति दी है। आधुनिक मानव–मन की चिरन्तन पीड़ा को ये कहानियाँ जितनी सहजता से शब्द देती हैं, वह उल्लेखनीय है।
संग्रह की कुछ कहानियाँ हमारे समाज की मूल्य संरचना को सीधे चुनौती देती हैं, मसलन, ‘माँ’ शीर्षक कहानी। इस कहानी में नायक उस स्त्री को माँ का सम्मान देकर प्रतिष्ठित करता है जिससे कभी उसके पिता ने अवैध शारीरिक सम्बन्ध बनाए थे। ऐसी ही कहानी ‘नई राहें’ है जिसमें एक वीतरागी साधु प्रेम में पड़कर वापस दुनिया में आ जाता है। अन्य कहानियाँ भी हमारे मन को झंकृत कर सोच का एक नया धरातल अन्वेषित करती हैं।
किसी भी वैचारिक झंडाबरदारी से मुक्त इन कहानियों की सहजता, सरलता और प्रवाहमयता इनको विशेष तौर पर पठनीय बनाती है। कहानियों की भाषा पात्रों और उनके परिवेश के पूरी तरह अनुकूल है और अनायास ही पाठकों को अपने साथ बहा ले जाती है।
Teen Nigahon Ki Ek Tasvir
- Author Name:
Mannu Bhandari
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Description:
‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ जैसे कालजयी उपन्यासों की रचयिता मन्नू भंडारी की कहानियाँ अपने मन्तव्य की स्पष्टता, साफ़गोई और भाषागत सहजता के लिए ख़ास तौर पर उल्लेखनीय रही हैं। उनकी कहानियों में जीवन की बड़ी दिखनेवाली जटिल और गझिन समस्याओं की गहराई में जाकर, उनके तमाम सूत्रों को समेटते हुए, एक सरल, सुग्राह्य और पठनीय रचना को आकार दिया जाता है।
इस संग्रह में शीर्षक-कहानी के अलावा शामिल ‘अकेली’, ‘अनथाही गहराइयाँ’, ‘खोटे सिक्के’, ‘हार’ और ‘चश्मे’ आदि सभी कहानियाँ जीवन के विभिन्न सन्दर्भों को एक ख़ास रचनात्मक आलोचना-दृष्टि से देखते हुए पाठक को सोचने और अपने वातावरण को एक नई, ताज़ा निगाह से देखने को प्रेरित करती हैं।
Sapne
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Rajendra Kumar Kanojiya
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Katha Sarang
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Anjum sharma
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