Colorblind Balam
(0)
Author:
Mohit SharmaPublisher:
FlyDreams PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
149
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अक्सर कुछ बातें छूट जाती हैं... कब? जब काम की जल्दबाजी में किसी अपने के साथ चल रही चाय... थोड़ी छोड़नी पड़ती है। जब किसी खूबसूरत अनजान राह पर उतरने के ख्याल भर को दुनिया की बंदिशें रोक देती हैं। जब किसी के पास रहने की आदत के बीच एक दिन वह हमेशा के लिए चला जाता है। जब बरसों किसी से बताने को मन के किसी कोने में संभाल के रखी बातों से ज़रूरी कुछ आन पड़ता है... बड़ी बातों का लिहाज कर छोटी बातें घूंघट कर लेती हैं। समय के साथ... यूं ये कुछ बातें कई बन जाती हैं। बस इन्हीं कुछ या कई बातों को 'कलरब्लाइंड बालम' संग्रह में पिरोया है। ज़रा ठहर कर पढ़े शायद इससे कोई छूटी बात आपको भी याद आ जाए...
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अक्सर कुछ बातें छूट जाती हैं... कब? जब काम की जल्दबाजी में किसी अपने के साथ चल रही चाय... थोड़ी छोड़नी पड़ती है। जब किसी खूबसूरत अनजान राह पर उतरने के ख्याल भर को दुनिया की बंदिशें रोक देती हैं। जब किसी के पास रहने की आदत के बीच एक दिन वह हमेशा के लिए चला जाता है। जब बरसों किसी से बताने को मन के किसी कोने में संभाल के रखी बातों से ज़रूरी कुछ आन पड़ता है... बड़ी बातों का लिहाज कर छोटी बातें घूंघट कर लेती हैं। समय के साथ... यूं ये कुछ बातें कई बन जाती हैं। बस इन्हीं कुछ या कई बातों को 'कलरब्लाइंड बालम' संग्रह में पिरोया है। ज़रा ठहर कर पढ़े शायद इससे कोई छूटी बात आपको भी याद आ जाए...
Book Details
-
ISBN9788194642916
-
Pages147
-
Avg Reading Time5 hrs
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Age11-18 yrs
-
Country of OriginIndia
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प्रियदर्शन की कहानियों में रिश्तों का एक अनवरत खेल दिखाई पड़ता है—अनजाने लोग एक-दूसरे के क़रीब आ जाते हैं, अकेले लोग एक-दूसरे का सहारा बन जाते हैं। लेकिन ये कहानियाँ सदाशयी मनुष्यता की नीतिकथाएँ नहीं हैं, इनमें हमारे जटिल समय के घात-प्रतिघात से बन रही अनेकरैखिक विडम्बनाएँ दिखाई पड़ती हैं जिनमें इनसान कुछ खो रहा है, कुछ खोज रहा है। इन कहानियों में कहीं अपनी खो चुकी माँ को खोजती बेटी है, कहीं अपने बेटे को पहचानने की कोशिश करता एक पिता है। कहीं प्रेम है जो अनकहा रह जाता है तो कहीं टूटन है जो अनपहचानी रह जाती है। कहीं कोई पुरानी कसक सिर उठाती है तो कहीं कोई नई पीड़ा रास्ता खोजती है। कहीं आत्मीयता हाथ पकड़ती है तो कहीं अजनबीयत सहारा बनती है। लेकिन ये कुछ चरित्रों के निजी अवसाद या प्रेम या उनकी टूटन की कहानियाँ नहीं हैं, इनमें हमारा वह समय और समाज भी पढ़ा जा सकता है जो हाल के वर्षों में इतनी तेज़ी से बदला है कि उससे तुक-ताल बिठाने की कोशिश में हमारी चूलें उखड़ती लग रही हैं। इन कहानियों में वे राजनीतिक विद्रूप भी दिखते हैं जिन्होंने हमारे समाज को ज़ख़्मी किया है और वह इनसानी हक़ीक़त भी जो ऐसे ज़ख़्मों के लिए मलहम का काम करती है।
भाषा इन कहानियों की जान है—बेहद पारदर्शी और तरल, चरित्रों की गहन पड़ताल के बीच बनती हुई। यह एक आधुनिक भाषा है जिसमें बोलचाल की सहजता भी है और लालित्य का संस्कार भी। अपनी सीमाओं की पहचान भी और इन सीमाओं के पार जाने की शक्ति भी। दरअसल जीवन की बेहद मामूली और आम तौर पर अनदेखी रह जानेवाली घटनाओं के बीच बनती ये कहानियाँ पाठक को सिर्फ़ बाँधती ही नहीं, अपने साथ जोड़ती भी हैं—यह अनायास नहीं है कि वह इन कहानियों में अपनी कहानी खोजने लगता है।
Kathakram
- Author Name:
Badrinath Kapoor
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प्रस्तुत पुस्तक में सुप्रसिद्ध वैयाकरण एवं कोशकार डॉ. बदरीनाथ कपूर द्वारा लिखित रोचक कथाएँ संकलित हैं। इनमें दो पौराणिक वृत्तांत हैं—‘शकुंतला’ और ‘गौतम बुद्ध’। ये बँगला के प्रसिद्ध कथाकार तथा चित्रकार अवींद्र कुमार ठाकुर की अनूठी कृतियाँ हैं, जो अपनी चित्रमयता के लिए जानी जाती हैं। इनका छायानुवाद इस पुस्तक में है। दो यात्रा-वृत्तांत हैं—‘उत्तराखंड की ओर’ और ‘सूर्योदय के देश में’। जीवन के कथा-क्रम से जुड़ी कथाओं और यात्रा-वृत्तों का रोचक-पठनीय संकलन।
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