Vahan tak pahuchane ki daur
(0)
Author:
Rajendra YadavPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
495
396 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
राजेन्द्र यादव अपने दौर के विशिष्ट और महत्त्वपूर्ण रचनाकार ही नहीं, नई कहानी आन्दोलन के प्रतिनिधि लेखक भी हैं। विगत कुछ वर्षों में राजेन्द्र यादव का रचनात्मक लेखन बहुत ही सीमित रहा है, परन्तु उनकी सक्रियता सदा बनी रही है। अपने लेखों, बहसों व ‘हंस’ के माध्यम से वह एक रचनात्मक माहौल तैयार करने की दिशा में ही सक्रिय नहीं रहे हैं, बल्कि लगभग सभी सामयिक, राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं में एक जीवन्त हस्तक्षेप करते रहे हैं।</p> <p>वैसे भी किसी लेखक की सार्थकता अन्ततः इस बात में नहीं है कि उसने कितना लिखा, बल्कि इस बात में है कि उसने क्या लिखा और समाज तथा साहित्य विशेष के सन्दर्भ में उस लेखन का महत्त्व व भूमिका क्या रही। राजेन्द्र यादव की कहानियाँ बदलते सन्दर्भों में अपनी सार्थकता तथा ‘रिलीवेंस’ खोजते पात्रों के ऊहापोह, द्वन्द्व व आत्म-संघर्ष का लेखा-जोखा हैं। चूँकि राजेन्द्र यादव के पात्र अधिकांशतः मध्यवर्ग से सम्बन्धित हैं, सम्भवतः इसीलिए उनमें एक विशिष्ट क़िस्म की बौद्धिक ऊर्जा का भास है। यह वह वर्ग है, जो अपने कार्य-कलाप और मानसिकता से बदलते यथार्थ का गहरा अहसास ही नहीं कराता, बल्कि इस बात का भी संकेत देता है कि यह समाज आख़िर जानेवाला किस दिशा में है।</p> <p>राजेन्द्र यादव की कहानियों को पढ़ना, नई कहानी की सामान्य प्रवृत्ति के अलावा कहीं आगे जाकर एक सजग और संवेदनशील रचनालोक से गुज़रना है, जिसमें भावुकता का अनियंत्रित व असन्तुलित प्रवाह न होकर (जो नई कहानी के रचनाकारों में दोष की हद तक है) एक सजग व नियंत्रित ‘इंटरप्ले’ देखने को मिलता है और यह किसी सिद्धहस्त रचनाकार की क़लम से ही सम्भव हो सकता है।
Read moreAbout the Book
राजेन्द्र यादव अपने दौर के विशिष्ट और महत्त्वपूर्ण रचनाकार ही नहीं, नई कहानी आन्दोलन के प्रतिनिधि लेखक भी हैं। विगत कुछ वर्षों में राजेन्द्र यादव का रचनात्मक लेखन बहुत ही सीमित रहा है, परन्तु उनकी सक्रियता सदा बनी रही है। अपने लेखों, बहसों व ‘हंस’ के माध्यम से वह एक रचनात्मक माहौल तैयार करने की दिशा में ही सक्रिय नहीं रहे हैं, बल्कि लगभग सभी सामयिक, राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं में एक जीवन्त हस्तक्षेप करते रहे हैं।</p>
<p>वैसे भी किसी लेखक की सार्थकता अन्ततः इस बात में नहीं है कि उसने कितना लिखा, बल्कि इस बात में है कि उसने क्या लिखा और समाज तथा साहित्य विशेष के सन्दर्भ में उस लेखन का महत्त्व व भूमिका क्या रही। राजेन्द्र यादव की कहानियाँ बदलते सन्दर्भों में अपनी सार्थकता तथा ‘रिलीवेंस’ खोजते पात्रों के ऊहापोह, द्वन्द्व व आत्म-संघर्ष का लेखा-जोखा हैं। चूँकि राजेन्द्र यादव के पात्र अधिकांशतः मध्यवर्ग से सम्बन्धित हैं, सम्भवतः इसीलिए उनमें एक विशिष्ट क़िस्म की बौद्धिक ऊर्जा का भास है। यह वह वर्ग है, जो अपने कार्य-कलाप और मानसिकता से बदलते यथार्थ का गहरा अहसास ही नहीं कराता, बल्कि इस बात का भी संकेत देता है कि यह समाज आख़िर जानेवाला किस दिशा में है।</p>
<p>राजेन्द्र यादव की कहानियों को पढ़ना, नई कहानी की सामान्य प्रवृत्ति के अलावा कहीं आगे जाकर एक सजग और संवेदनशील रचनालोक से गुज़रना है, जिसमें भावुकता का अनियंत्रित व असन्तुलित प्रवाह न होकर (जो नई कहानी के रचनाकारों में दोष की हद तक है) एक सजग व नियंत्रित ‘इंटरप्ले’ देखने को मिलता है और यह किसी सिद्धहस्त रचनाकार की क़लम से ही सम्भव हो सकता है।
Book Details
-
ISBN9788171190409
-
Pages164
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Main Hindu Hoon
- Author Name:
Asghar Wajahat
- Book Type:

-
Description:
असग़र वजाहत उन विरले कहानीकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने पूरी तरह अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखते हुए भाषा और शिल्प के सार्थक प्रयोग किए हैं। उनकी कहानियाँ एक ओर आश्वस्त करती हैं कि कहानी की प्रेरणा और आधारशिला सामाजिकता ही हो सकती है तो दूसरी ओर यह भी स्थापित करती हैं कि प्रतिबद्धता के साथ नवीनता, प्रयोगधर्मिता का मेल असंगत नहीं है। ‘मास मीडिया’ से आक्रान्त इस युग में असग़र वजाहत की कहानियाँ बड़ी ज़िम्मेदारी से नई ‘स्पेश’ तलाश कर लेती हैं। राजनीति और मनोरंजन द्वारा मीडिया पर एकाधिकार स्थापित कर लेनेवाले समय में असग़र की कहानियाँ अपनी विशेष भाषा और शिल्प के कारण अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई हैं।
‘मैं हिन्दू हूँ’ में असग़र न केवल अपनी गति बनाए हुए हैं बल्कि उनके रचना-संसार में संवेदना के धरातल पर कुछ परिवर्तन भी आए हैं। हास्य, व्यंग्य और खिलंदड़ापन के साथ-साथ अब उनकी कहानी में गहरा अवसाद और दु:ख शामिल हो गया है। बहुआयामी जटिल यथार्थ और आम आदमी की पीड़ा को व्यक्त करने के लिए वे नए ‘हथियारों’ की तलाश में दिखाई पड़ते हैं।
विषय की विविधता के बावजूद उनकी कहानियों में साम्प्रदायिकता की समस्या तथा सामाजिक अवमूल्यन का अपना अलग महत्त्व है। उनकी कहानियाँ दरअसल उन लोगों की कहानियाँ हैं जो समाज के हाशिये पर पड़े हैं, लेकिन बड़े सामाजिक सन्दर्भों से जुड़ने का जतन करते रहते हैं। इन कहानियों में असग़र कल्पना और फैंटेसी के सम्मिश्रण से एक ऐसी भाव-भूमि की संरचना करते हैं जो कहानी को विस्तार देती है। उनकी कहानियाँ पाठकों से माँग करती हैं कि शब्दों और वाक्यों के समान्तर रचे गए अनकहे संसार की परतें भी खोलते रहें।
रोचकता की तमाम शर्तों पर पूरा उतरते हुए असग़र वजाहत की कहानियाँ गम्भीर विश्लेषणात्मक रवैये की माँग करती हैं।
Contemporary Indian Short Stories Series III
- Author Name:
Sahitya Akademi
- Rating:
- Book Type:

- Description: This sheaf of nineteen short stories, written by different authors, represents a cross-section of contemporary Indian short fiction. Eighteen stories are translations from eighteen modern Indian languages, and one is a specimen of Indian creative writing in English. Selected by the Sahitya Akademi's Advisory Boards of various languages, these stories, provide fascinating glimpses into the panorama of Indian life, with its baffling variety, its rich contrasts of the simple and the sophisticated, the ancient and the modern. Here is evidence, if such were needed that Indian literature is one though written in many languages its oneness consisting not of a stale uniformity but of a rich variety. This is the third volume of Sahitya Akademi series of such representative anthologies in English of contemporary Indian short story.
Shabdon Ka Khakrob
- Author Name:
Raju Sharma
- Book Type:

-
Description:
यह पहला प्रकाशित संकलन है राजू शर्मा की कहानियों का। इसमें जो कहानियाँ
संगृहीत हैं, वे एक लम्बे समयान्तर के बीच लिखी गई हैं। मसलन ‘चिट्ठी के मार्फ़त’ और ‘मुक़दमा’
अस्सी के मध्य की कहानियाँ हैं। इसके बाद ‘रिवर्स स्वीप’, ‘कूड़े का ढेर' और ‘मोटी बातें' 1993 के
आसपास की हैं। लम्बी कहानी ‘शब्दों का ख़ाकरोब’ 1995 के बाद की कहानी है और तभी के समय
को रेखांकित करती है।
लगभग सभी कहानियाँ एक विशेष ढंग से अपने समय और समस्या का अंकन और आकलन करती
हैं। कहानियों का ज़ोर उन सामाजिक और आर्थिक संरचनाओं पर है जो इंसान की मजबूरी, उसकी
स्वायत्तता का सिकुड़ता दायरा और उसकी देर-सवेर की विकृतियों और विषमताओं को जन्म देती हैं।
और उसे एक अजनबी पहचान प्रदान करती हैं। ‘मोटी बातें’ का लगातार फूलता मन्नीलाल और ‘रिवर्स
स्वीप’ के उलटी दृष्टि प्राप्त ओझा जी ऐसे दो उदाहरण हैं।
‘शब्दों का ख़ाकरोब’ एक लम्बी, पूर्णत: राजनैतिक व नायाब कहानी है। यह एक रचनात्मक रूपक की
तरह उद्घाटित होता एक घटना-निबन्ध है। वर्तमान बल्कि ताज़ा राजनीति के नाटकीय मोड़, साझा
राजनीति के नए अनुभव, राजनीति की अनिवार्यता व उसकी मजबूरी, राजनैतिक दुराचरण की
अभिशप्तता व उसके गहरे, दूसरे अर्थ—इस तरह के बहुत से सवालों, भव्यताओं, अजूबियत व
चमत्कारी प्रभावों को समेकित करती है यह लम्बी कहानी। यह एक ऐसी कृति है जो राजनीति की
आन्तरिक जटिलता को बड़ी सूक्ष्मता से पकड़ती है।
इस संग्रह की हर कहानी सामाजिक यथार्थ का कोई न कोई पक्ष नए तरीक़ों से प्रस्तुत करती है।
परन्तु ‘शब्दों का ख़ाकरोब’ एक ऐसी कहानी है जिस पर विशेष रूप से चर्चा होगी व होनी चाहिए।
Indian Short Stories 1900 To 2000
- Author Name:
E. V. Ramakrishnan
- Rating:
- Book Type:

- Description: The 43 stories collected from 21 languages in this anthology showcase the rich diversity and intricacies of life in India. They range from the turmoil and mass hysteria of partition to the suppressed anger and self-pity of those ensnared in fractured homes. These narratives reveal both the external and internal experiences of Indian society. The sacred and the profane, as well as the elite and the subaltern, feature prominently in these complex narratives, serving as metaphors for self-reflection. Collectively, these stories chart a transformative century in which our country emerged as a unified nation. The evocative imagery from the troubled depths of the 20th century is both unsettling and enlightening.
Pratinidhi Kahaniyan : Nirmal Verma
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

- Description: निर्मल वर्मा मनुष्य-जीवन की ऐकांतिक अनुभूतियों के रचनाकार हैं। व्यक्ति और समाज का बाहरी एवं स्थूल यथार्थ उनकी कहानियों में नीरस विवरणों के रूप में नहीं आता, वे यथार्थ के उन सिरों को उभारते हैं, जिनसे हमारा साबिका अत्यन्त निजी क्षणों में पड़ता है और जिनका सरोकार समाज में निरन्तर अकेले होते जा रहे व्यक्ति के अन्तर्मन से है। वे उसके आन्तरिक कोलाहल और हाहाकार के चित्रण से ही अपने इस त्रासद समय पर टिप्पणी करते हैं। इसके लिए उन्हें किसी घटना का सहारा नहीं चाहिए, चाहिए सिर्फ़ एक परिवेश और उसकी धड़कनों को अनुभूत कर सकनेवाला एक संवेदनशील हृदय। निर्मल जी की प्रायः प्रत्येक कहानी इसी रचनात्मक ज़रूरत से उपजी है—एक विशेष मूड और मनःस्थिति के आद्यन्त निर्वाह से परिपूर्ण, जिसे हम अपने भीतर महसूस करते हैं। यह निर्मल वर्मा की सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली कहानियों की प्रस्तुति है। जाहिर है ऐसी और भी कहानियाँ हैं जिन्हें इस संकलन में होना चाहिए था क्योंकि उनकी लगभग हर कहानी को उनके पाठकों ने विशेष मानकर ही पढ़ा है। नई हिन्दी कहानी को जैसी कलात्मक अर्थवत्ता उन्होंने दी वह उनका ऐतिहासिक अवदान है।
Khaki Mein Insan
- Author Name:
Ashok Kumar
- Book Type:

-
Description:
इस किताब में ग्रामीण परिवेश से उठकर आई.आई.टी. दिल्ली से शिक्षा प्राप्त कर भारतीय पुलिस सेवा में आए एक अधिकारी द्वारा कुछ वास्तविक घटनाओं पर आधारित कहानियों के ज़रिए यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि अच्छी पुलिस व्यवस्था से सचमुच ग़रीब व असहाय लोगों की ज़िन्दगी में फ़र्क़ लाया जा सकता है।
पुस्तक में आज के समय के ज्वलन्त मुद्दों, जैसे—आतंकवाद, अमीर-ग़रीब के बीच बढ़ती खाई, महिलाओं के प्रति अपराध, समय के साथ बदलते व टूटते हुए मानवीय मूल्य, भू-माफ़ियाओं का बढ़ता हुआ जाल, अपराधियों के बढ़ते हुए हौसले आदि का सटीक एवं यथार्थ चित्रण किया गया है।
पुस्तक में दर्शाया गया है कि यद्यपि वर्तमान व्यवस्था में कुछ ख़ामियाँ आ गई हैं, फिर भी यदि ऊँचे पदों पर बैठे लोगों में दृढ़ इच्छाशक्ति हो, इंसानियत के नज़रिए से सोचने की क्षमता हो और कुछ कर दिखाने का जज़्बा हो तो यही व्यवस्था, यही सिस्टम लोगों की मदद करने में बहुत ही कारगर सिद्ध हो सकता है।
भारतीय पुलिस की जड़ें ब्रिटिश साम्राज्य की इम्पीरियल पुलिस से निकली हैं। पुस्तक में थानों की कार्यप्रणाली में बदलाव लाकर जन-समस्याओं की जड़ तक पहुँचने और पुलिस व्यवस्था को लोकतंत्र की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप बनाने के तौर-तरीक़ों का भी जीवन्त उल्लेख किया गया है।
Rat Baki Evam Anya Kahaniyan
- Author Name:
Ranendra
- Book Type:

-
Description:
रणेन्द्र की कहानियाँ ‘मार्जिनालाइजेशन’ की प्रक्रिया का ‘मेटाफ़र’ रचती हैं। आदिवासी इनके यहाँ ‘कन्सर्न’ के रूप में मौजूद हैं। इस संग्रह की कहानियों से गुज़रते हुए इनके सरोकारों की शिनाख़्त की जा सकती है और कहा जा सकता है कि ये यथार्थ की आँच पर सीझती जीवन की कहानियाँ हैं। इन कहानियों के पात्रों की बेबसी और विफलता जिस त्रासदी को रचते हैं, वह व्यवस्थाजन्य है। व्यवस्था की उस क्रूरता और उदासीनता से उस अयाचित यातना (अनडिजर्ब्ड सफ़रिंग) का जन्म होता है जिसकी गहरी छाप कहानियों को पढ़ने के बाद भी दिलो-दिमाग़ पर क़ाबिज़ रहती है।
ये कहानियाँ ऐसे इलाक़े से सिर उठाने की जुर्रत करती हैं जहाँ अशिक्षा, ग़रीबी और बदहाली के घने जंगलों में व्यवस्था के हिंसक नरभक्षी मनमाना शिकार किया करते हैं।
रणेन्द्र का यथार्थबोध जीवन-जगत के प्रत्यक्ष अनुभवों से जन्मा और विकसित हुआ है। इस कारण यथार्थ की जटिलता और उसकी संश्लिष्टता को परत-दर-परत उघाड़ते हुए वे जब यथार्थ के प्रकृत रूप का प्रत्यक्षीकरण करते हैं तो कोई-कोई कहानी कहीं-कहीं औपन्यासिकता का भी आभास कराती है। इनकी कहानियों में प्रकृति, संस्कृति और मिथक जहाँ एक ओर मिलकर एक ‘देशज क़िस्म का जादुई यथार्थवाद’ रचते जान पड़ते हैं तो वहीं दूसरे स्तर पर प्रेम एवं अन्तरंगता के क्षणों में ऐन्द्रिकता के चित्रण में प्रयुक्त होनेवाली बिम्बात्मकता, काव्यात्मकता की प्रतीति कराती है।
रणेन्द्र की कहानियाँ सम्भावनाओं और संसाधनों से परिपूर्ण उस प्रदेश की कहानियाँ हैं जहाँ बंजरता धीरे-धीरे अपने पाँव पसार रही है। अपने समय के लकवाग्रस्त होने और समाज के बंजर होने की प्रक्रिया को रणेन्द्र ने पूरी शिद्दत और ईमानदारी से इतिहास में दर्ज करने का काम किया है।
Paanch Chor
- Author Name:
Niimi Nankichi
- Book Type:

-
Description:
जापान के आधुनिक बाल साहित्यकार नीइमी नानकिचि की अनूदित चार रचनाओं के प्रस्तुत संकलन में सतत स्वच्छ और निर्मल हृदय की परिकल्पना की गई है, जिसे नानकिचि ने लोमड़ी और मनुष्य के दो अलग–अलग प्रसंगों में अभिव्यक्त किया है।
‘पाँच चोर’ में जहाँ चोर के हृदय परिवर्तन और ‘दादाजी की लालटेन’ में मानव समाज के विकास की दास्तान है, वहीं जापान की परम्परा और संस्कृति के ताने–बाने का भी सजीव चित्रण किया गया है।
अनुवाद सरल, प्रवाहपूर्ण और बाल सुलभ है।
Yugaadi
- Author Name:
Vasudhendra
- Book Type:

- Description: ವಸುಧೇಂದ್ರರ ಈ ಕಥಾಸಂಕಲನಕ್ಕೆ ಹಲವು ಪ್ರಶಸ್ತಿಗಳು ಸಂದಿವೆ. ಮುಖ್ಯವಾಗಿ ಡಾ. ಯು ಆರ್ ಅನಂತಮೂರ್ತಿ ಪ್ರಶಸ್ತಿ ಹಾಗೂ ವರ್ಧಮಾನ ಉದಯೋನ್ಮುಖ ಪ್ರಶಸ್ತಿಗಳು ಈ ಸಂಕಲನಕ್ಕೆ ದಕ್ಕಿವೆ.
Gyarah Rupye Ka Fountain Pen
- Author Name:
Amit Dutta +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: अमित दत्ता की कहानियों का संग्रह सभी पाठकों को पसंद आएगा। ये कहानियां हैं बचपन की, प्यार की, फिल्मों की. इनमें से प्रत्येक कहानी पाठक को बांधे रखती है। तपोशी घोषाल के चित्र इस पुस्तक को एक आकर्षक दृश्य बनाते हैं। चित्रों में रंगों और विवरणों का प्रयोग समृद्ध है। Age 12+
Phoolo Ka kurta
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है।
‘फूलो का कुर्ता’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘आतिथ्य’, ‘भवानी माता की जय’, ‘शिव-पार्वती’, ‘ख़ुदा की मदद’, ‘प्रतिष्ठा का बोझ’, ‘डरपोक कश्मीरी’, ‘धर्मरक्षा और ज़िम्मेवारी’।
Hanuman in Hamburg
- Author Name:
Vadakkke Koottala Narayanankutty Nair
- Book Type:

- Description: Selections from the fictional works of V. K. N. translated into in English by the author and edited with an introduction by E. V. Ramakrishnan. Sahitya Akademi 2014
Jeev Janawar
- Author Name:
Sagar Sarhadi
- Book Type:

-
Description:
प्रसिद्ध फ़िल्मकार और उर्दू के मशहूर लेखक सागर सरहदी का इन कहानियों की दुनिया जिन किरदारों से बनी है, उनमें फ़िल्मी परिवेश के किरदार तो हैं, पर पूरे संकलन में वे मामूली जगह घेरते हैं। बाक़ी में हैं मुम्बई शहर के तलछट, निम्नवर्गीय, निम्न-मध्यवर्गीय, शिक्षक, वकील और पंजाब के ग्रामीण।
इन कहानियों में एकाकीपन, यथास्थिति के ख़िलाफ़ खीज और ग़ुस्सा है। जहाँ वे अपने किरदारों को सहानुभूति देते हैं, वहीं उनके दोमुँहेपन, निष्क्रियता और सहनशीलता को अपने तंज़ का निशाना बनाते हैं। कई कहानियों में ‘मैं’ अपनी कहानी कहता है। लेकिन यह ‘मैं’ अपने को छिपाता या ढकता नहीं, बल्कि अनावृत करता है। ख़ुद पर बेरहमी से तंज़ करता है। जहाँ यह ‘मैं’ परोक्ष है, वहाँ भी उसकी उपस्थिति प्रभावशाली है।
सागर सरहदी गद्य की भाषा में कविता करने से बाज आते हैं। वे कहानियों में बिम्ब कविता के अन्दाज़ में नहीं लाते, बल्कि वे ज़िन्दगी के क़तरों से बिम्ब का काम लेते हैं। उनके पास कहानियाँ कहने का फ़लसफ़ाई अन्दाज़ है जो आज की कहानियों में कम दीखता है। लेकिन यह अन्दाज़ आसमानी फ़लसफ़े की तरह हवा में नहीं इतराता, बल्कि वे फ़िजिक्स से शुरू होकर मेटाफ़िजिक्स की तरफ़ बढ़ते हैं। पहले वे अपने घने पर्यवेक्षण से हमें क़ायल करते हैं, फिर उस विवरण को फ़लसफ़े की ऊँचाई पर ले जाते हैं। ‘जीव जनावर’ में अमानवीयता के विरुद्ध सघन चीख़ है।
Peddibhotla Subbaramaiah Short Stories
- Author Name:
Peddibhotla Subbaramaiah
- Rating:
- Book Type:

- Description: Peddibhotla Subbaramaiah's short stories are the English translations of the Telugu book Peddibhotla Subbaramaiah Kathalu, which has won the Sahitya Akademi Award. This collection features thirty-four stories exploring diverse themes, subtle and sensitive issues, unique events, and various incidents. These stories vividly reflect society, social realism, and social awareness. Each story reveals a different aspect of social reality, demonstrating keen and insightful observations of society. The collection primarily focuses on middle-class struggles, jealousy, and everyday life.
Nazar Battoo
- Author Name:
Jyoti Jain
- Book Type:

- Description: Book
Khel-Khel Mein
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

- Description: पहले विश्वयुद्ध के बाद जब पूर्वी एशिया के अनेक देश स्वतंत्र होने के बावजूद प्रतिगामी रास्तों पर मुड़ गए, उस समय भी चेकोस्लोवाकिया ने अपनी लोकतांत्रिक और मानववादी मनोभूमि को सुरक्षित बनाए रखा। बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में चेकोस्लोवाकिया की राजधानी प्राग यहूदी विद्वानों, जर्मन लेखकों और रूसी क्रान्तिकारियों की शरण-स्थली बन गई थी। प्राग की अनूठी गरिमा और संवेदनशीलता ने वहाँ बसने वाले जर्मन और यहूदी लेखकों की मनीषा को एक बिरले रंग और लय में ढाला था। निर्मल वर्मा ने अपने युवा वर्ष प्राग में गुज़ारे थे। उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ़ ओरिएंटल स्टडीज के निमन्त्रण पर वहाँ रहकर न केवल चेक भाषा सीखी, बल्कि तत्कालीन चेक साहित्य से हिन्दी जगत को सीधे परिचित करवाया। उन्हीं की पहल पर चेक साहित्य के मूर्धन्य लेखकों—कारेल चापेक, बोहुमिल हराबाल—के अलावा तब के युवा लेखकों, मिलान कुन्देरा और जोसेफ़ श्कवोरस्की की रचनाएँ हिन्दी में आईं, वह भी उस समय जब यूरोप में भी वे अभी अल्पज्ञात ही थे। यही इस संग्रह की ऐतिहासिक भूमिका है।
SILAS MARNER (CLASS XII)
- Author Name:
George Eliot
- Book Type:

- Description: Silas Marner: the weaver of Raveloe is a novel by George Eliot, published in 1861. An outwardly simple tale of a linen weaver, it is notable for its strong realism and its sophisticated treatment of a variety of issues ranging from religion to industrialisation to community. The novel is set in the early years of the 19th century. Silas Marner, a weaver, is a member of a small calvinist congregation in lantern Yard, a slum street in an unnamed city in northern England. He is falsely accused of stealing the congregation's funds while watching over the very ill Deacon. Two clues are given against Silas: a pocket-knife and the discovery in his own house of the bag formerly containing the money. There is the strong suggestion that Silas' Best friend, William Dane, has framed him, since Silas had lent his pocket-knife to William shortly before the crime was committed. Silas is proclaimed guilty.
Photo Uncle
- Author Name:
Prem Bhardwaj
- Book Type:

-
Description:
प्रेम भारद्वाज का कहानीकार मूलत: काव्यात्मक संवेदना से समृद्ध है। वे कहानी को न दूर बैठकर देखते हैं और न फ़ासला रखकर सुनाते हैं। महसूस करते हुए वे अपने समूचे वजूद के साथ उसमें डूब जाते हैं, और जब अपने कथ्य को लेकर पाठक के सामने उपस्थित होते हैं तो जैसे अपने पात्रों की पीड़ा को आपादमस्तक ओढ़कर स्वयं को ही प्रस्तुत करते हैं।
इस संग्रह में शामिल लगभग सभी कहानियाँ प्रेम भारद्वाज के बतौर एक संवेदनशील रचनाकार महसूस किए गए दर्द की छटपटाहट-भरी अभिव्यक्ति हैं। वह दर्द जो उन्होंने अपने आसपास, अपने समाज में, अपनी पढ़ी-लिखी और सरोकारों का व्यापार करनेवाली दुनिया में देखे और जाने हैं।
संकलन की शीर्षक कथा ‘फोटो अंकल’ को इस समय के कला-साहित्य और उसके समाज के अन्दरूनी अन्तर्विरोध के पोस्टमार्टम की तरह पढ़ा जा सकता है। कला अपने विषय का उपभोग कर अमर हो जाए, या विषय की विडम्बनाओं का हिस्सा होकर विलुप्त हो जाए, यह सवाल हमेशा से रचनाकार-मन को मथता रहा है। इस कहानी में लेखक ने इसे अपने आपसे एक बहस की तरह उठाया है, और पुन: उस घाव को कुरेद दिया है जो सच्चे कलाकार को अपनी ही निगाह में अपराधी किए रहता है।
संग्रह में शामिल अन्य कहानियाँ भी आज के समाज को कई-कई कोणों से देखने और दिखाने का सफल उद्यम करती हैं।
Kasturi Mrig
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं।
अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़ने वाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे।
प्रस्तुत संग्रह में ‘कस्तूरी मृग’, ‘माणिक’, ‘तर्पण’, ‘जोकर’, ‘रथ्या’ एवं ‘शर्त’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है।
कलात्मक कौशल के साथ रची गईं ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Katha Saptak - Anju Sharma
- Author Name:
Anju Sharma
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book