Bahanon Ka Jalsa
About the book
बहनों का जलसा सूर्यबाला की कहानियों का नया संकलन है। अपनी कहानियों के बारे में उनका कहना है : ‘मनुष्य में से मनुष्यता का खारिज होते जाना ही मेरी कहानियों की दुखती रग है।’ और इसे वे सभ्यता की उस दिशा से जोड़ती हैं, जिधर वह जा रही है, जिधर हम जा रहे हैं। बिना किसी आन्दोलन का हिस्सा हुए, और बिना किसी विमर्श का सायास अनुकरण किए, सूर्यबाला ने अपनी कहानियों में पठनीयता और प्रवाह को बरकरार रखते हुए, सभ्यता की संवेदनहीन यात्रा में असहाय चलते पात्रों के अत्यन्त सजीव चित्र खींचे हैं। बेहद साधारण और जीवन में रचे-बसे मध्यवर्गीय चरित्रों के मनोजगत से वे उन पीड़ाओं का संधान करती रही हैं जिनके दायरे में पूरी मानवता आ जाती है। रिश्तों और भावनात्मक निर्भरता के जो धागे भारतीय समाज को विशिष्ट बनाते हैं, उनकी टूटन खासतौर पर उनका ध्यान खींचती है। इस प्रक्रिया में स्त्री कैसे सबसे ज्यादा खोती है, यह भी क्योंकि वही वह धुरी है जिसके इर्द-गिर्द परिवार बसता है, और फिर समाज आकार लेता है। दुखद विसंगतियाँ, विडम्बनाएँ, मन की तहों के भीतर हरदम चलते संघर्ष, इन सबको उनकी कहानियाँ, उनके ही शब्दों में कहें तो, ‘यथासम्भव नेकनीयती के साथ तलाशती और सहेजती रहती है।’ यह नेकनीयती, कह सकते हैं कि उनकी लेखकीय और नागरिक चेतना का सत्व है; और उनकी कहानियों का प्राण भी जिसके चलते वे हर उम्र के पाठकों को प्रिय रही हैं।
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About the Book
बहनों का जलसा सूर्यबाला की कहानियों का नया संकलन है। अपनी कहानियों के बारे में उनका कहना है : ‘मनुष्य में से मनुष्यता का खारिज होते जाना ही मेरी कहानियों की दुखती रग है।’ और इसे वे सभ्यता की उस दिशा से जोड़ती हैं, जिधर वह जा रही है, जिधर हम जा रहे हैं।
बिना किसी आन्दोलन का हिस्सा हुए, और बिना किसी विमर्श का सायास अनुकरण किए, सूर्यबाला ने अपनी कहानियों में पठनीयता और प्रवाह को बरकरार रखते हुए, सभ्यता की संवेदनहीन यात्रा में असहाय चलते पात्रों के अत्यन्त सजीव चित्र खींचे हैं।
बेहद साधारण और जीवन में रचे-बसे मध्यवर्गीय चरित्रों के मनोजगत से वे उन पीड़ाओं का संधान करती रही हैं जिनके दायरे में पूरी मानवता आ जाती है। रिश्तों और भावनात्मक निर्भरता के जो धागे भारतीय समाज को विशिष्ट बनाते हैं, उनकी टूटन खासतौर पर उनका ध्यान खींचती है। इस प्रक्रिया में स्त्री कैसे सबसे ज्यादा खोती है, यह भी क्योंकि वही वह धुरी है जिसके इर्द-गिर्द परिवार बसता है, और फिर समाज आकार लेता है।
दुखद विसंगतियाँ, विडम्बनाएँ, मन की तहों के भीतर हरदम चलते संघर्ष, इन सबको उनकी कहानियाँ, उनके ही शब्दों में कहें तो, ‘यथासम्भव नेकनीयती के साथ तलाशती और सहेजती रहती है।’ यह नेकनीयती, कह सकते हैं कि उनकी लेखकीय और नागरिक चेतना का सत्व है; और उनकी कहानियों का प्राण भी जिसके चलते वे हर उम्र के पाठकों को प्रिय रही हैं।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2023
- Weight
- 135 grams
- ISBN-13
- 9788119028016
- Pages
- 144
- Reading time
- ~5 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 22 cm
- Language
- Hindi
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