Baharhaal, Dhanyavaad
(0)
Author:
Achala BansalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
395
316 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
अचला बंसल अंग्रेज़ी में लिखनेवाली भारतीय कथाकार हैं जिन्हें अंग्रेज़ीभाषी पाठकों में उनकी साफ़गोई और गहरी अन्तर्दृष्टि के लिए जाना जाता है। उन्होंने अक्सर अपनी कहानियों में भारतीय समाज और मन के उन कोनों की पड़ताल की है जहाँ कई बार भारतीय भाषाओं के लेखक भी जाने से चूक जाते हैं। वे उन गिने-चुने अंग्रेज़ी लेखकों में हैं जिन्हें पढ़ने से पता चलता है कि भारतीय अंग्रेज़ी लेखन अपनी दुनिया को सिर्फ़ विदेशी निगाह से नहीं देखता। अचला बंसल ने अपनी कहानियों में न सिर्फ़ उन विडम्बनाओं को बहुत स्पष्ट निगाह से देखा है जिनसे हमारा मध्य और निम्न-मध्य वर्ग गुज़रता है, बल्कि उच्च मध्यवर्गीय समाज की तहों में भी वे बहुत विश्वसनीय ढंग से उतरती हैं। इसके साथ ही अपने पात्रों की मनोवैज्ञानिक पड़ताल भी उनकी कहानियों की एक विशेषता है जिसका बहुत अच्छा उदाहरण इस संग्रह में शामिल कहानी ‘तुरुप का पत्ता’ है। इस कहानी में पुरुष समलैंगिकता में पौरुष की भूमिका को स्त्री के विरुद्ध जाते हुए बहुत महीन ढंग से दिखाया गया है। इस परिस्थिति में जटिल होते रिश्तों में स्त्री की असहायता को शायद ही कभी इतने मार्मिक ढंग से उठाया गया हो। संग्रह में शामिल सभी कहानियाँ हिन्दी के पाठकों के लिए एक भिन्न भावभूमि पर एक भिन्न पाठ-अनुभव उपलब्ध कराती हैं जो न सिर्फ़ अपनी विषयवस्तु में नया है बल्कि ट्रीटमेंट में भी। बेशक सभी कहानियाँ अनूदित हैं लेकिन जानी-मानी कथाकार और अचला जी की बहन मृदुला गर्ग तथा हमारे समय के बहुत संवेदनशील रचनाकार प्रियदर्शन व स्मिता द्वारा किए गए इन अनुवादों में कहीं भी भाषा के स्तर पर अपरिचय जैसा महसूस नहीं होता।
Read moreAbout the Book
अचला बंसल अंग्रेज़ी में लिखनेवाली भारतीय कथाकार हैं जिन्हें अंग्रेज़ीभाषी पाठकों में उनकी साफ़गोई और गहरी अन्तर्दृष्टि के लिए जाना जाता है। उन्होंने अक्सर अपनी कहानियों में भारतीय समाज और मन के उन कोनों की पड़ताल की है जहाँ कई बार भारतीय भाषाओं के लेखक भी जाने से चूक जाते हैं। वे उन गिने-चुने अंग्रेज़ी लेखकों में हैं जिन्हें पढ़ने से पता चलता है कि भारतीय अंग्रेज़ी लेखन अपनी दुनिया को सिर्फ़ विदेशी निगाह से नहीं देखता।
अचला बंसल ने अपनी कहानियों में न सिर्फ़ उन विडम्बनाओं को बहुत स्पष्ट निगाह से देखा है जिनसे हमारा मध्य और निम्न-मध्य वर्ग गुज़रता है, बल्कि उच्च मध्यवर्गीय समाज की तहों में भी वे बहुत विश्वसनीय ढंग से उतरती हैं। इसके साथ ही अपने पात्रों की मनोवैज्ञानिक पड़ताल भी उनकी कहानियों की एक विशेषता है जिसका बहुत अच्छा उदाहरण इस संग्रह में शामिल कहानी ‘तुरुप का पत्ता’ है। इस कहानी में पुरुष समलैंगिकता में पौरुष की भूमिका को स्त्री के विरुद्ध जाते हुए बहुत महीन ढंग से दिखाया गया है। इस परिस्थिति में जटिल होते रिश्तों में स्त्री की असहायता को शायद ही कभी इतने मार्मिक ढंग से उठाया गया हो।
संग्रह में शामिल सभी कहानियाँ हिन्दी के पाठकों के लिए एक भिन्न भावभूमि पर एक भिन्न पाठ-अनुभव उपलब्ध कराती हैं जो न सिर्फ़ अपनी विषयवस्तु में नया है बल्कि ट्रीटमेंट में भी। बेशक सभी कहानियाँ अनूदित हैं लेकिन जानी-मानी कथाकार और अचला जी की बहन मृदुला गर्ग तथा हमारे समय के बहुत संवेदनशील रचनाकार प्रियदर्शन व स्मिता द्वारा किए गए इन अनुवादों में कहीं भी भाषा के स्तर पर अपरिचय जैसा महसूस नहीं होता।
Book Details
-
ISBN9788126730506
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Jeev Janawar
- Author Name:
Sagar Sarhadi
- Book Type:

- Description:
प्रसिद्ध फ़िल्मकार और उर्दू के मशहूर लेखक सागर सरहदी का इन कहानियों की दुनिया जिन किरदारों से बनी है, उनमें फ़िल्मी परिवेश के किरदार तो हैं, पर पूरे संकलन में वे मामूली जगह घेरते हैं। बाक़ी में हैं मुम्बई शहर के तलछट, निम्नवर्गीय, निम्न-मध्यवर्गीय, शिक्षक, वकील और पंजाब के ग्रामीण।
इन कहानियों में एकाकीपन, यथास्थिति के ख़िलाफ़ खीज और ग़ुस्सा है। जहाँ वे अपने किरदारों को सहानुभूति देते हैं, वहीं उनके दोमुँहेपन, निष्क्रियता और सहनशीलता को अपने तंज़ का निशाना बनाते हैं। कई कहानियों में ‘मैं’ अपनी कहानी कहता है। लेकिन यह ‘मैं’ अपने को छिपाता या ढकता नहीं, बल्कि अनावृत करता है। ख़ुद पर बेरहमी से तंज़ करता है। जहाँ यह ‘मैं’ परोक्ष है, वहाँ भी उसकी उपस्थिति प्रभावशाली है।
सागर सरहदी गद्य की भाषा में कविता करने से बाज आते हैं। वे कहानियों में बिम्ब कविता के अन्दाज़ में नहीं लाते, बल्कि वे ज़िन्दगी के क़तरों से बिम्ब का काम लेते हैं। उनके पास कहानियाँ कहने का फ़लसफ़ाई अन्दाज़ है जो आज की कहानियों में कम दीखता है। लेकिन यह अन्दाज़ आसमानी फ़लसफ़े की तरह हवा में नहीं इतराता, बल्कि वे फ़िजिक्स से शुरू होकर मेटाफ़िजिक्स की तरफ़ बढ़ते हैं। पहले वे अपने घने पर्यवेक्षण से हमें क़ायल करते हैं, फिर उस विवरण को फ़लसफ़े की ऊँचाई पर ले जाते हैं। ‘जीव जनावर’ में अमानवीयता के विरुद्ध सघन चीख़ है।
Kahan Se Kahan
- Author Name:
Satish Jayaswal
- Book Type:

- Description:
‘कहाँ से कहाँ’ में संकलित कहानियों में प्रवेश का रास्ता कविता से होकर निकलता है। यह रास्ता घर की तलाश करता है, लेकिन जाकर घर से नहीं मिलता।
पुस्तकें भी समाज को देखती हैं। आलोचक डॉ. राजेन्द्र मिश्र की यह बात सतीश जायसवाल की कहानियों के साथ लागू होकर इस तरह बन जाती है—सतीश की कहानियाँ भी समाज को देखती हैं...कथा त्रयी के एक प्रमुख स्तम्भ—कमलेश्वर का कहना है—सतीश की कहानियों में ‘नैरेशन’ आज भी बचा हुआ है...युवा कथाकार शशांक भी कुछ-कुछ यही बात कहते हैं—सतीश जायसवाल की कहानियों में ‘डिटेल्स’ ख़ूब उभरकर आते हैं? ये ‘डिटेल्स’ किसी एक विषय से बँधे हुए नहीं होते। इनमें ‘कैलिडोस्कोप’ के अँधेरे में खिलनेवाले रंग-बिरंगे फूलों का वैविध्य होता है।
Aakaron Ke Aaspas
- Author Name:
Kunwar Narain
- Book Type:

- Description:
'आकारों के आसपास' की कहानियों को पढ़कर कुछ ऐसा आस्वाद मिलता है जो आम तौर पर आज की कहानियों से सुखद रूप में अलग है। एक तरह से इन कहानियों की दुनिया कोई ख़ास निजी दुनिया नहीं है, इनमें भी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी के ही आम परिचित अनुभवों को पेश किया गया है। मगर उन्हें देखनेवाली नज़र, उसके कोण और इन दोनों के कारण उभरनेवाले रूप और भाषाई संगठन का फ़र्क़ इतना बड़ा है कि इन कहानियों की दुनिया एकदम विशिष्ट और विस्मयकारी जान पड़ती है जिसमें किसी-न-किसी परिचित सम्बन्ध, अनुभव या रूख़ का या तो कोई अन्तर्विरोध या नया अर्थ खुल जाता है, या इसकी कोई नई परत उभर आती है—जैसा अक्सर कविता के बिम्बों से हुआ करता है।
कोई अजब नहीं कि इन कहानियों में यथार्थ और फैंटेसी के बीच लगातार आवाजाही है। फैंटेसी के साथ-साथ कुँवर नारायण अपनी बात कहने के लिए तीखे व्यंग्य के बजाय हलकी विडम्बना या 'आयरनी' का इस्तेमाल अधिक करते हैं। इसी से उनके यहाँ फूहड़ अतिरंजना या अति-नाटकीयता नहीं है, एक तरह का सुरोचिपूर्ण संवेदनशील निजीपन है ।
दरअसल, ये कहानियाँ काफ़ी फैले हुए फ़लक पा अनेक मानवीय नैतिक सम्बन्धों, प्रश्नों और मूल्यों को जाँचने, उधेड़ने और परिभाषित करने की कोशिश करती हैं, किसी क्रान्तिकारी मुद्रा में नहीं, बल्कि असलियत की बेझिझक निजी पहचान के इरादे से।
Ek Mutthi Ret
- Author Name:
Veena Sinha
- Book Type:

- Description:
वीणा सिन्हा की कहानियों में स्त्री-लेखन की पहचान बन चुकी सभी विशेषताएँ हैं, फिर भी उनके सरोकारों को सिर्फ़ स्त्री-लेखन के दायरे में रखकर नहीं परखा जा सकता। उनकी लेखनी स्त्री के बहाने समाज के एक बड़े कैनवस पर चलती है। शहरी मध्यवर्ग से लेकर खाँटी ग्रामीण परिवेश तक को उन्होंने समान कौशल के साथ अंकित किया है। इससे भी महत्त्वपूर्ण विशेषता अपने पात्रों के अन्तस में झाँकने की उनकी क्षमता है जिसके चलते छोटे-छोटे कथानक भी बड़े अनुभव-संसार के वाहक बन जाते हैं। इस संग्रह में शामिल सभी कहानियाँ इस बात की गवाह हैं कि वीणा सिन्हा अपने पात्रों को गढ़ती नहीं हैं, वे अपने आसपास की दुनिया में उनकी तलाश करती हैं और फिर उनके मन की गुफाओं को खोलती हैं। इन कहानियों को समकालीन भारतीय स्त्री के जीवन की प्रतिनिधि कहानियों के रूप में भी चिन्हित किया जा सकता है और भारतीय जीवन-दृष्टि को अभिव्यक्ति देनेवाली गाथाओं के रूप में भी।
Katha Saptak - Suryabala
- Author Name:
Suryabala
- Book Type:

- Description:
7 Short Stories
Matsygandha
- Author Name:
Geetashree
- Book Type:

- Description:
Book
Konkani Kathavali
- Author Name:
S.M. Krishna Rao
- Book Type:

- Description:
Konkani Kathavali
Pratinidhi Kahaniyan : Chandrakanta
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
चन्द्रकान्ता कश्मीर केन्द्रित अपने विपुल कथा-लेखन के लिए हिन्दी जगत में ख़ासी लोकप्रिय हैं। अपनी कहानियों में उन्होंने देश-विभाजन के तत्काल बाद कश्मीर संकट से उपजे हालात से लेकर 'जेहाद' के नाम पर जारी आतंकवाद से झुलसते कश्मीर की आबोहवा और अवाम के दुःख-दर्द का अद्यतन चित्र उकेरा है, जहाँ वे यथास्थिति का चित्रण-भर करके नहीं रुक जातीं अपितु प्यार, ईमान और इंसानियत से लबरेज़ पात्रों का सृजन कर कट्टरता एवं हिंसा के विरुद्ध पुरज़ोर आवाज़ उठाती हैं। कश्मीर ही नहीं, देश-दुनिया की हर उस मानवीय त्रासदी को चन्द्रकान्ता अपनी कहानियों में जगह देती हैं जिससे एक संवेदनशील रचनाकार का मन आहत एवं उद्वेलित होता है। वे उस भ्रष्ट व्यवस्था और मनुष्य विरोधी तंत्र को कठघरे में खड़ा करती हैं, जिसने तेज़ी से बदलते समाज में चतुर्दिक संघर्ष से घिरे मनुष्य की आन्तरिक अनुभूतियों को कहीं गहरे दफ़न कर दिया है। व्यक्ति और व्यवस्था की मुठभेड़ में वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रत्येक विषम परिस्थिति एवं प्रवृत्ति की समीक्षा करती हैं; तत्पश्चात् उन तथ्यों का अन्वेषण करती हैं जिससे मनुष्य की अन्तरात्मा को मरने से बचाया जा सके और इस प्रकार एक बेहतर कल के लिए मनुष्य के स्वप्नों, संवेदनाओं और स्मृतियों को सिरज लेने की चिन्ता चन्द्रकान्ता की कहानियों का प्रस्थान-बिन्दु बन जाती है।
Sampurna Kahaniyan : Shivani : Vols. 1-2
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

- Description:
हिन्दी रचना-परम्परा में ऐसे कम ही लेखक हुए हैं जो साहित्यिक तथा रचनात्मक मूल्यों की स्थापना तथा रक्षा करते हुए जनसाधारण की दैनंदिन रुचि का हिस्सा बनने में भी सफल हुए। विभिन्न कारणों से गम्भीर और लोकप्रिय की जो धाराएँ हिन्दी समाज में समानान्तर बहती रही हैं, कम ही लेखक उनके ऊपर पुल बाँध पाए; और जो ऐसा कर सके उनमें अग्रणी नाम है—गौरा—पन्त ‘शिवानी’।
साहित्य-जगत में केवल शिवानी के नाम से ख्यात इस लेखिका ने अपनी कहानियों को एक ऐसे दरवाज़े की तरह खड़ा किया जिसमें प्रवेश का आकर्षण साधारण मध्यवर्गीय पाठकों को अन्ततः साहित्य के दुर्गम प्रदेशों तक ले गया। उन्होंने अपनी लेखनी के बल पर पाठकों को साहित्य की सत्ता के प्रति उन्मुख और उत्सुक किया।
भारतीयता यानी भारत के सांस्कृतिक-सामाजिक बिम्बों के वाहक मध्यवर्गीय हिन्दी समाज के भीतरी प्रश्नों, अकुलाहटों, आकांक्षाओं और आशा-निराशाओं को शिवानी ने अपनी कहानियों के कलेवर में इस तरह साधा कि तत्कालीन समाज उसमें अपना पूरा-पूरा अक्स देख पाया।
शिवानी की कथा-प्रतिभा को इसलिए भी एक संस्था की तरह देखा जा सकता है कि उन्होंने साहित्य में मन-रंजन के तत्त्व को एक ऊर्ध्वमुखी तथा नवोन्मेषकारी व्यस्तता के सूप में स्थापित किया, और अपने रचनात्मक उद्यम से इस अन्धविश्वास को आधारहीन कर दिया कि मनोरंजक साहित्य समाज का नैतिक और वैचारिक उत्थान नहीं कर सकता।
इस पुस्तक के दो खंडों में संकलित शिवानी का सम्पूर्ण कथा-संसार पाठकों को पात्रों, स्थितियों, स्वप्नों, संघर्षों, विडम्बनाओं और प्रसन्नताओं की ऐसी विराट और लगभग अनन्त दुनिया से परिचित कराएगा जिसमें हमारी आज की ज़िन्दगी के विस्तार भी दिखाई देते हैं।
इस खंड में 37 कहानियाँ संकलित हैं जिनमें उनकी ‘लाल हवेली', ‘विप्रलब्धा’ और ‘अपराधी कौन’ जैसी चर्चित रचनाएँ शामिल हैं।
100 Shabdon Ki Kahaniyan
- Author Name:
Mubashshir Ali Zaidi
- Book Type:

- Description:
जैसा कि नाम से स्पष्ट है इस कहानी-संग्रह में हर कहानी सिर्फ़ सौ शब्दों की है| कहानीकार मुबश्शिर अली ज़ैदी ने उर्दू में सौ शब्दों की कहानी लिखने का सिलसिला आरंभ किया और उसे लोकप्रिय बनाया| इस कहानी-संग्रह में आम ज़िन्दगी के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हुई सौ से अधिक कहानियाँ हैं जिनमें छुपी हुई संवेदना, तंज़, संदेश और हास्य के तत्व न सिर्फ़ हमारे दिल को छूते हैं बल्कि कई बार हमारा ध्यान उन छोटी-छोटी बारीकियों की ओर ले जाते हैं जो हमारी नज़रों के सामने घटित होकर भी हमें नज़र नहीं आ पातीं|
Wah Bhayanak Raat
- Author Name:
Sharatchandra Chatopadhyay
- Book Type:

- Description:
वह भयानक रात बांग्ला के महान कथाशिल्पी शरत् चन्द्र की ऐसी कहानियों का संग्रह है जो खास तौर से किशोर पाठकों के मनोजगत के अनुकूल हैं। इन कहानियों में साहसिकता और रोमांचकता तो है ही, अपार करुणा और उदात्त प्रेम भी है, जिसके दायरे में मनुष्य ही नहीं, एक उपेक्षित कुत्ता भी शामिल है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इन कहानियों के पात्र किसी जादुई दुनिया से नहीं आए हैं, बल्कि ये हमारे आस-पास रहनेवाले लोग हैं, लेकिन इनकी साधारणता में भी ऐसे मानवीय गुणों का समावेश है कि एक बार इनसे परिचित हो जाने पर इन्हें भुला पाना नामुमकिन है।
Jahangir Ki Swarnamudra
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

- Description:
‘जहाँगीर की स्वर्णमुद्रा’ सुविख्यात फ़िल्म-निर्देशक और बांग्ला लेखक सत्यजित राय की बारह कहानियों का महत्त्वपूर्ण संग्रह है।
सत्यजित राय विरल कथा-स्थितियों और मानव-जीवन की विविधता के चितेरे हैं। देशकाल का परिवेश इस चित्रण में एक विराट फलक का कार्य करता है और उनकी अनुभव-सम्पन्न जीवन-दृष्टि विविध रंगों का। एक ऐसा समाज इन कहानियों में बराबर दिखाई देता है, जिसमें विभिन्न प्रकार की आशंकाएँ, कुंठाएँ और अन्तर्विरोध मानव-जीवन को प्रभावित-परिचालित करते हैं। फिर भी उनका मनुष्य कहीं हारता नहीं। ठगा जाकर भी ठगने की कोशिश नहीं करता और मानव-मूल्यों के प्रति एकनिष्ठ बना रहता है। यही कारण है कि वर्तमान व्यावसायिक सभ्यता से शोषित-प्रताड़ित होने के बावजूद कहीं-कहीं तो वह नैतिक प्रतिरोध की शक्ल अख़्तियार करता दिखाई देता है।
राय के कथा-लेखन की कुछ और विशेषताओं से भी ये कहानियाँ परिचित कराती हैं। मसलन, स्थितियों की निस्संग रहस्यात्मकता, व्यंग्य-विनोद का महीन पुट और शिल्पगत नाटकीयता। संक्षेप में कहा जाए तो हिन्दी पाठकों के लिए ये कहानियाँ एक अलग तरह का अनुभव-संसार सँजोए हुए हैं।
Chhachhiya Bhar Chhachh
- Author Name:
Mahesh Katare
- Book Type:

- Description:
Short Stories
Hamzamin
- Author Name:
Avadhesh Preet
- Book Type:

- Description:
अवधेश प्रीत उन थोड़े से कथाकारों में हैं जो यथार्थ की भीतरी तह तक पहुँचकर उसकी आन्तरिक गतिशीलता को उजागर करते हैं। उनकी कहानियों में जीवन के गहरे अनुभव के साथ-साथ समाज में होनेवाले परिवर्तनों के संकेत भी मिलते हैं। विसंगतियों और विडम्बनाओं का चित्र उकेरते वक़्त उनकी नज़र हमेशा उन वंचितजनों पर टिकी होती है, जो अपनी स्थिति से उबरने तथा समाज के बदलने के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं। सपाटबयानी से बचते हुए अवधेश अपने एक-एक अनुभव को पहले वैचारिक धरातल पर सूत्रबद्ध करते हैं, फिर उनके कलात्मक संग्रन्थन से ऐसी फंतासी रचते हैं जिसमें किरदारों के आत्मसंघर्ष तथा सामाजिक संघर्ष के बीच की विभाजक रेखा मिट जाती है। उनका यह शिल्प ही उन्हें अपने समकालीनों से अलग करता है।
‘हमज़मीन’ संग्रह की कहानियों में अवधेश प्रीत ने साम्प्रदायिक और सामंती क्रूरताओं के शिकार वंचितों तथा स्त्रियों की पीड़ाओं के चित्रण के साथ-साथ उनके संघर्ष और जिजीविषा को रेखांकित करने का जो सार्थक प्रयास किया है वह उल्लेखनीय है।
Sadi Ka Sabse Bada Admee
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
इस संग्रह में शामिल कहानियों के बारे में स्वयं लेखक का यह कहना कि, ‘ये कहानियाँ आपके पास आ रही हैं—उठने-बैठने के लिए, बोलने-बतियाने के लिए, संग-साथ के लिए'—उतनी ही सार्थक टिप्पणी है जितनी कि ये कहानियाँ। अपनी रचना की जनपक्षीय भूमिका के प्रति आश्वस्त रचनाकार ही ऐसी आत्मीय बात कह सकता है।
समकालीन हिन्दी कथाकारों में काशीनाथ सिंह का महत्त्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने अपने कथा-पात्रों को न तो उनके सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक विकासक्रम से काटकर प्रस्तुत किया है और न ही रचना पर बौद्धिक या कलात्मक कुहासे की चादर ढकी है। अपने समाज और अपने लोगों से गहरे प्यार और उनकी तमाम ख़ामियों-ख़ूबियों की बेबाक समझ से पैदा हुई ये कहानियाँ हमें अभिभूत कर लेती हैं। साथ ही हम न सिर्फ़ अपने इर्द-गिर्द को बल्कि स्वयं को भी ज़्यादा ईमानदारी से पहचानने लगते हैं।
संक्षेप में कहें तो बातचीत का एक सहज अन्दाज़, जिसमें विषयगत परिवेश और उसके जटिलतर अन्तर्विरोध
उजागर होते चले आते हैं, इन कहानियों की एक ख़ास ख़ूबी है।
Kahaniyan Rishton Ki : Dampatya
- Author Name:
Akhilesh
- Book Type:

- Description:
सुखी दाम्पत्य एक कामना भी है, प्रयास भी, एक स्वस्थ परिवार की आधारशिला है तो परिवार-चक्र का केन्द्र-बिन्दु भी।
इस संकलन में दाम्पत्य सम्बन्ध को लेकर लिखी गईं कई पीढ़ियों की कहानियों के बीच से कुछ को शामिल किया गया है। ये आमतौर पर अपने-अपने समय की लोकप्रिय कहानियाँ हैं। इनसे समय के साथ पति-पत्नी के रिश्ते में आए बदलावों का भी अन्दाज़ा मिलता है और इस सम्बन्ध की जटिल ख़ूबसूरती भी सामने आती है। ये कहानियाँ सामान्य स्त्री-जीवन के बदलाव को समझने की दृष्टि से भी पठनीय हैं और भारतीय वैवाहिक जीवन के व्यावहारिक बदलाव को जानने के लिहाज से भी।
Pratinidhi Kahaniyan : Hrishikesh Sulabh
- Author Name:
Hrishikesh Sulabh
- Book Type:

- Description:
“अपनी कहानियों पर बात करना मेरे लिए कठिन काम है। बहुत हद तक अप्रिय भी। लिखी जा चुकी और प्रकाशित हो चुकी कहानियों से अक्सरहाँ मैं पीछा छुड़ाकर भाग निकलता हूँ, पर मुझे लगता है कि यह मेरा भ्रम ही है। मेरी कहानियों के कुछ पात्र लगातार मेरा पीछा करते हैं और अपनी छवि बदलकर, किसी लिखी जा रही नई कहानी में घुसने की बार-बार कोशिशें करते हैं। कई बार तो घुस भी आते हैं और मैं उन्हें न रोक पाने की अपनी विवशता पर हाथ मलते रह जाता हूँ। जैसे, ‘वधस्थल से छलाँग’ का रामप्रकाश तिवारी, जो ‘यह ग़म विरले बूझे’ या ‘काबर झील का पाखी’ जैसी कहानियों में घुस आया। मैंने अपनी कहानियों में प्रवेश के लिए किसी एक रास्ते का चुनाव नहीं किया। हर कहानी में प्रवेश के लिए मेरी राह बदल जाती है। कभी किसी पात्र की बाँह पकड़कर प्रवेश करता हूँ, तो कभी कोई घटना या व्यवहार या स्मृति या विचार कहानी के भीतर पैठने के लिए मेरी राहों की निर्मिति करते हैं। हमेशा एक अनिश्चय और अनिर्णय की स्थिति बनी रहती है। हर बार नई कहानी शुरू करने से पहले मेरा मन थरथर काँपता है। शायद यही कारण है कि बहुत कम कहानियाँ लिख सका हूँ। मेरे कुछ मित्रों का मानना है कि कहानी और नाटक लिखने के बीच आवाजाही के कारण मेरी कहानियों पर आलोचकों की नज़र नहीं पड़ी। पर यह सच है कि नाटक और कहानी के बीच मेरी यह आवाजाही मुझे बहुत प्रिय है। हर बार नौसिखुए की तरह अथ से आरम्भ करना मुझे पुनर्नवा करता है। मैं यह करते रहना चाहता हूँ।” —भूमिका से
Mansarovar Vol. 6 : Ramleela Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Pratinidhi Kahaniyan : Gyanranjan
- Author Name:
Gyanranjan
- Book Type:

- Description:
साठोत्तरी प्रगतिशील कथा-साहित्य में ज्ञानरंजन की कहानियों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस संग्रह में उनकी प्रायः सभी बहुचर्चित कहानियाँ शामिल हैं जो समकालीन सामाजिक जीवन की अनेकानेक विरूपताओं का खुलासा करती हैं। इस उद्देश्य तक पहुँचने के लिए ज्ञानरंजन ने अक्सर पारिवारिक कथा-फ़लक का चुनाव किया है, क्योंकि परिवार ही सामाजिक सम्बन्धों की प्राथमिक इकाई है। इसके माध्यम से वे उन प्रभावों और विकृतियों को सामने लाते हैं, जो हमारे बूर्ज्वा संस्कारों की देन हैं। ये बूर्ज्वा संस्कार ही हैं कि प्रेम-जैसा मनोभाव भी हमारे समाज में या तो रहस्यमूलक बना हुआ है या भोगवाचक। ऐसी कहानियों में किशोर प्रेम-सम्बन्धों से लेकर उनकी प्रौढ़ परिणति तक के चित्र उकेरते हुए ज्ञानरंजन अपने समय की प्रायः समूची दशा पर टिप्पणी करते हैं। मनुष्य के स्वातंत्र्य पर थोपा गया नैतिक जड़वाद या उसे अराजक बना देनेवाला आधुनिकतावाद मानव-समाज के लिए दोनों ही घातक और प्रतिगामी मूल्य हैं। वस्तुतः आर्थिक विडम्बनाओं से घिरा मध्यवर्ग सामान्य जन से न जुड़कर जिन बुराइयों और भटकावों का शिकार है, ये कहानियाँ उसके विविध पहलुओं का अविस्मरणीय साक्ष्य पेश करती हैं।
Shamil Baja
- Author Name:
Shashank
- Book Type:

- Description:
समृद्ध कहानी की छवियाँ शशांक की कहानियों में बिलकुल अलग ढंग से बसी हैं।
मानवीय उष्मा की निरन्तरता, सघन अनुभव, अनूठी भाषा और विचार-कला का सटीक अन्तस्सन्तुलन शशांक की कहानियों के रंग-रेशे हैं।
प्रस्तुत पुस्तक ‘शामिल बाजा’ शशांक की दस कहानियों का पठनीय संकलन है। ‘शामिल बाजा’ की कहानियाँ तेज़ी से बदलती सामाजिक स्थितियों में जीवन और जिजीविषा से अपना वस्तु-चयन करती हैं। दृश्य और घटनाएँ उनकी कहानियों की ज़रूरत, संरचना और त्वरा बदल रही हैं। विकट पर्यावरण में ये कहानियाँ ख़ाली जगहों में हमारी इच्छाओं और सबलता को रखना चाहती हैं।
‘शामिल बाजा’ में विविधता से भरपूर नवीनतम कहानियों के साथ सृजन-प्रक्रिया पर विनिबन्ध ‘बबूल मेज’ भी शामिल है। इससे कहानियों की रोचकता और बढ़ जाती है।
निस्सन्देह, अद्भुत कथालोक का अविस्मरणीय संग्रह है ‘शामिल बाजा’।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book