Sukh Chalak Hai
Author:
Dr. Saroj KumarPublisher:
Shivna PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 144
₹
180
Available
Book
ISBN: 9789387310476
Pages: 130
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Delightful Novella (Volume-2)
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: Delightful Novella (Volume-2) is a collection of short stories that explores the darker side of life. The stories are inspired by true events and are written in a way that pulls you into the characters' lives. These are not your typical tales of heroes and villains; they're about people who make mistakes and learn from them, people who have to face their demons and fight back against them. They're about love and loss, about how we sometimes have to do things we don't want to do in order to find out who we really are at the end of the day.
Kachhari Ki Chakallas
- Author Name:
Durgesh Pandey
- Book Type:

- Description: दुर्गेश पांडेय, उत्तर प्रदेश के जनपद प्रतापगढ़ के निवासी हैं। इनके पिता का नाम श्री लक्ष्मी कांत पांडेय एवं माता का नाम स्वर्गीय श्रीमती ज्ञानती पांडेय है। सामान्य पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले दुर्गेश पांडेय के पितामह स्वर्गीय श्री श्याम सुंदर पांडेय (शास्त्री जी) संस्कृत के प्रकांड विद्वान रहे हैं। आपने लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक (LLB, Hons.) एवं दिल्ली विश्वविद्यालय से परास्नातक (LLM) की डिग्री प्राप्त की है। आपकी “गाँधी हार गये?” और “Crime Scene to Court Room ...Fundamentals of Forensic Science and Medical Jurisprudence” पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जो बेहद लोकप्रिय हैं।
Encouragement Short Stories (Volume-2)
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: Encouragement is like fuel for the soul. In Encouragement Short Stories (Volume-2), author Dr.Sanjay Rout delivers a collection of powerful, heartwarming tales designed to uplift and inspire readers of all ages. With a keen eye for detail and a knack for storytelling, Dr.Sanjay Rout weaves together narratives that showcase the power of hope, perseverance, and determination. From tales of everyday heroes who overcome impossible odds to stories of individuals who find redemption in the face of adversity, Encouragement Short Stories (Volume-2) is a powerful reminder that anything is possible when we believe in ourselves and the people around us. Through the pages of this book, readers will be transported to new worlds, meet unforgettable characters, and be reminded of the importance of never giving up on our dreams. With each story, Dr.Rout reminds us that we are all capable of achieving greatness, no matter what challenges we may face. Whether you are looking for a pick-me-up during a tough time or simply enjoy heartwarming stories that make you smile, Encouragement Short Stories (Volume-2) is the perfect addition to any bookshelf. So grab a copy today and get ready to be inspired!
Kautuk
- Author Name:
Manav Kaul +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: कौतुक में कौतुक है। कौतुक की अपनी तुक है। कौतुकी तुक। कौतुक में कौतुक की माँ हैं और माँ के साथ गप्प लड़ाती, तारे देखती कौतुक है। एक स्कूल है। कौतुक का स्कूल। स्कूल में कौतुक के दोस्त हैं। दोस्तों की कौतुक भरी बाते हैं। एक पहाड़ है। उसमें कौतुक देखता एक कवि है। कौतुक पढ़ोगे तो बार बार कौतुक से मिलने का मन करने लगेगा। और फिर तुम अपने दोस्तों में ही कौतुक ढूँढने लगोगे। तुम्हारी दोस्ती कौतुक भरी हो जाएगी। राजीव आइप के कौतुक भरे चित्रों से सजी एक सलोनी किताब।
Murdalok
- Author Name:
Kumar Mithilesh Prasad Singh
- Book Type:

-
Description:
परम्पराएँ, किंवदन्तियाँ और भ्रामक प्रचलित विचारों से मुक्ति दिलाकर समाज को जागरूक, चेतनासम्पन्न और प्रगतिशील धारा से जोड़नेवाला कहानी-संकलन। इस संकलन की हर कहानी की विषयवस्तु का अपना एक धरातल है और हर कहानी अनुभव का एक नया संसार खोलती है। संकलन की कहानियाँ नई दृष्टि, नई सोच को ही प्रतिष्ठापित नहीं करती हैं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी देती हैं। कहानियों के पात्र आम जीवन से उठाए गए हैं जो साधारण जीवन जीते हैं और बहुत से मानदंडों और निषेधों से मुक्त भी
हैं।लेखक ने इनके साथ सदियों से हो रहे जुल्म और अन्याय को भी रेखांकित किया है जो वे सदियों से झेल रहे हैं और उनके लिए एक समतामूलक समाज की आकांक्षा व्यक्त करते हैं। लेखक ने कहानियों को लोकभाषा से अलंकृत कर पात्रों को जीवन्त ही नहीं किया, बल्कि उनकी मर्मभेदी पीड़ा को संवेदनशील अभिव्यक्ति भी दी है। ये कहानियाँ सही और सच्चे अर्थों में साहित्य की उस सार्थक भूमिका का भी निर्वाह करती हैं जिसके तहत साहित्य को समाज का पथप्रदर्शक माना जाता है। समाज के यथार्थ से साक्षात्कार कराते हुए, वर्तमान समाज को बदलने का आह्वान करते हुए सघन संवेदना के धरातल पर सृजित की गई ये कहानियाँ कुरीतियों को पोषित करनेवाले रूढ़िवादी समाज के लिए एक संकेत भी हैं कि अब परिवर्तन आवश्यक नहीं अनिवार्य हो चला है। पाठकगण इन कहानियों के माध्यम से एक नया अर्थ-सन्दर्भ प्राप्त करेंगे।
Dastkhat
- Author Name:
Ramkumar Atrey
- Book Type:

- Description: 'दस्तखत' राम कुमार आत्रेय रचित लघुकथाओं का संकलन है जिसमें 64 कहानियाँ हैं। आत्रेय जी की लघुकथाएँ 'गागर में सागर' लोकोक्ति को चरितार्थ करती हुई प्रतीत होती हैं। चंद पंक्तियों के माध्यम से ही उनकी प्रत्येक कथा एक गहरा सन्देश दे जाती है। उनकी कथाओं में विषयों की गहन व्यापकता पायी जाती है। यह कथा संकलन भी एक ऐसी ही बगिया के समान है जिसमें लगभग हर रंग का फूल उपस्थित है। 'हनीट्रैप', 'आशीर्वाद', 'धर्मगुरु और तीन चोर' जैसी लघुकथाएँ समसामयिक सामजिक मुद्दों का तीखा विश्लेषण करती हैं। 'कोयल की कूक' तथा 'और वह' कथा प्रकृति के प्रति उनके प्रेम को दर्शाती हैं। उनकी कथाएँ मानवीय संवेदनाओं की गहराई को बहुत सहज सरल शब्दों में पाठकों के समक्ष रखती हैं। 'जिद', 'सलाम रिश्ता', 'पूर्णिमा का चाँद' इसका जीवंत उदाहरण हैं। 'पिताजी सीरियस हैं', 'फर्क', 'मुर्दाखोर मोबाइल', 'बूढ़ा चौकीदार' कथाएँ वर्तमान समाज में बढ़ती हुई संवेदनहीनता को दर्शाती हैं। आज के युग में मानवीय मूल्यों के पतन और भावहीन प्राणहीन मानवीय संबंधों को आत्रेय जी ने सरल से शब्दों में गंभीर कथा का रूप दिया है। हास्य बोध को प्रकट करते हुए आत्रेय जी कुछ कथाओं में समाज पर व्यंग भी करते हैं जैसे 'पैसा', 'दस्तखत', 'हनुमानजी कहाँ हैं'। आत्रेयजी की कथाएँ अपने लघु रूप में ही हमारे तथाकथित सभ्य मानव समाज के समक्ष एक विशाल प्रश्नचिह्नï प्रस्तुत करती हैं। इन कथाओं को पढऩे के लिए आपको अलग से समय की व्यवस्था करने की आवश्यकता नहीं है। कुछ पल अगर आपके पास हैं तो आप कोई एक लघु कथा पढ़ सकते हैं। वे कुछ पल आपको उस कथानक पर सोचने पर विवश कर देंगे, आपके मानस पर एक गहरा दस्तखत कर देंगे। आईये पढ़ते हैं—'दस्तखत' —आयाम मेहता (अभिनेता)
Sadi Ka Sabse Bada Admee
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

-
Description:
इस संग्रह में शामिल कहानियों के बारे में स्वयं लेखक का यह कहना कि, ‘ये कहानियाँ आपके पास आ रही हैं—उठने-बैठने के लिए, बोलने-बतियाने के लिए, संग-साथ के लिए'—उतनी ही सार्थक टिप्पणी है जितनी कि ये कहानियाँ। अपनी रचना की जनपक्षीय भूमिका के प्रति आश्वस्त रचनाकार ही ऐसी आत्मीय बात कह सकता है।
समकालीन हिन्दी कथाकारों में काशीनाथ सिंह का महत्त्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने अपने कथा-पात्रों को न तो उनके सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक विकासक्रम से काटकर प्रस्तुत किया है और न ही रचना पर बौद्धिक या कलात्मक कुहासे की चादर ढकी है। अपने समाज और अपने लोगों से गहरे प्यार और उनकी तमाम ख़ामियों-ख़ूबियों की बेबाक समझ से पैदा हुई ये कहानियाँ हमें अभिभूत कर लेती हैं। साथ ही हम न सिर्फ़ अपने इर्द-गिर्द को बल्कि स्वयं को भी ज़्यादा ईमानदारी से पहचानने लगते हैं।
संक्षेप में कहें तो बातचीत का एक सहज अन्दाज़, जिसमें विषयगत परिवेश और उसके जटिलतर अन्तर्विरोध
उजागर होते चले आते हैं, इन कहानियों की एक ख़ास ख़ूबी है।
Yugaadi
- Author Name:
Vasudhendra
- Book Type:

- Description: ವಸುಧೇಂದ್ರರ ಈ ಕಥಾಸಂಕಲನಕ್ಕೆ ಹಲವು ಪ್ರಶಸ್ತಿಗಳು ಸಂದಿವೆ. ಮುಖ್ಯವಾಗಿ ಡಾ. ಯು ಆರ್ ಅನಂತಮೂರ್ತಿ ಪ್ರಶಸ್ತಿ ಹಾಗೂ ವರ್ಧಮಾನ ಉದಯೋನ್ಮುಖ ಪ್ರಶಸ್ತಿಗಳು ಈ ಸಂಕಲನಕ್ಕೆ ದಕ್ಕಿವೆ.
Dharohar Kahaniyaan : Jaishankar Prasad
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

- Description: प्रसाद नाटकीय विडम्बनाओं की उस परम्परा के कथाकार हैं जो शेक्सपियर के नाटकों और तुर्गनेव के उपन्यासों में दिखाई पड़ती है। प्रसाद ऐसी ही क्रूर, निर्मम विडम्बनाओं के रचनाकार हैं। उनकी कहानियों में ऐसे नाटकीय तत्त्व संयोगवश नहीं हैं, वे समावेशी तत्त्व हैं। निरपराध और अपराधी, सत्य और असत्य, जीवन और मृत्यु के बीच प्रायः नाटकीय ढंग से ही पार्थक्य स्थापित कर लिया जाता है और असत्य सत्य का वाहक बन जाता है, ‘अपराधी’ उन अपराधों के लिए दंड पाता है जो उसने किये ही नहीं होते। —विजयमोहन सिंह
Fengshui
- Author Name:
Kabir Sanjay
- Book Type:

-
Description:
कबीर संजय की कहानियाँ अछूते अनुभवों, विषयों और ब्योरों का खजाना हैं, ऐसा उनके पहले संग्रह ‘सुरखाब के पंख’ को पढ़ते हुए महसूस हुआ था। यह नया संग्रह उस अहसास को दुबारा पुष्ट करता है। उनकी कहानियाँ आपको आपकी ही परिचित दुनिया में किसी नए दरवाजे से दाखिल कराती हैं और अक्सर ऐसे धूल-अँटे कोनों तक ले जाती हैं जो कहानी विधा के लिए अड्डेबाजी के पसन्दीदा ठिकाने नहीं रहे। गरज कि उनके विषय और ब्योरे विचित्र होने के अर्थ में नहीं, उपेक्षित होने के अर्थ में अछूते हैं। अक्सर वे कहानीकार को अपने बचपन और कैशोर्य की स्मृतियों में भटकते हुए हाथ लगते हैं और वह जब उन्हें साफ-सुथरा करके आपके सामने पेश करते हैं तो आप वैसी ही उत्तेजना अनुभव करते हैं जैसी अपनी किसी खोई हुई अनमोल वस्तु के मिल जाने पर होनी चाहिए। इस संग्रह की एक कहानी ‘थप्पड़’ में वाचक कहता है, ‘बचपन में ज्यादा कुछ कहा नहीं। बस हर वक्त चुप ही रहा। इसलिए अब मन कहता है कि हर वक्त कुछ न कुछ कहता रहूँ। अगर थोड़ा ज्यादा भी हो जाए तो आप लोग बुरा नहीं मानेंगे, इसका मुझे भरोसा है।’ अगर यह वाचक की ही नहीं, कबीर संजय की भी अपनी बात है, तो कहना चाहिए कि भरोसा लाज़िमी है। उन्हें कहानी कहना आता है और वे जैसी अकृत्रिम, अतिरेकों से रहित, रवाँ जुबान में कहानी कहते हैं, उन्हें कौन नहीं सुनना चाहेगा!
—संजीव कुमार
Jagdamba Babu Gaon Aa Rahe Hai
- Author Name:
Chitra Mudgal
- Book Type:

-
Description:
चित्रा जी की कलम की पगडंडी चेतना की पगडंडी है। यह केवल उनके ही डग भरने के लिए नहीं है। सैकड़ों, हजारों पाँवों के नीचे भीगी दूब बिछाने के लिए है। उनका कथा साहित्य वादों, नारों एवं आन्दोलनों से अधिक अपने समय और समाज के सच और अन्तर्विरोधों में दुबकती मानवीय संवेदना का रचनात्मक आख्यान है। उनकी रचना दृष्टि में विचारहीनता की परिधि से बाहर निकलने का संकल्प है; पराधीनता को कुचलनेवाली विवेक दृष्टि को जागृत करने का हठ है।
साहित्य का सांस्कृतिक कार्यक्षेत्र मनुष्य का मानसिक जगत है। लुकाच की मान्यता है कि साहित्य मनुष्य के विवेक को वाणी देता है। स्वयं लेखिका मुर्दों के गाँव में चेतना की पगडंडी बनना चाहती हैं। उनकी कहानियाँ पढ़ते हुए जो बिम्ब बनते हैं, उनका अन्तर्निहित अर्थ एक प्रकाशपूर्ण क्षण में उद्घाटित होकर ग्रहण होता है। कहानी की प्रकृति जनतांत्रिक होती है और उसका रसास्वादन अनुभवपरक बोध से होता है। चित्रा मुद्गल की कहानियाँ अनुभवपरक बोध से पाठक को कहानी के पुनर्सृजन में लीन कर विविध अर्थों का निर्माण करती हैं। प्रकाशपूर्ण ये क्षण संवेदनाओं के सघन, सार्थक क्षण हैं, जो अनुभव का, संवेदनाओं का विस्तार करते हैं और कहानी एक समग्र प्रभाव को संप्रेषित करती है...
मनुष्य जब अपनी क्षुद्रताओं, कमजोरियों और छलावों को स्वीकार करता है तो इस स्वीकार से वह आत्मोन्नयन करता है। गौरतलब है, उनकी कहानियाँ उपदेशात्मक या निर्देशात्मक नहीं, निर्णयात्मक और क्रियात्मक संकल्पों से सम्पन्न हैं।
—डॉ. भूपेन्द्र कलसी
Makadjaal
- Author Name:
Rajendra Shrivastava
- Book Type:

-
Description:
राजेन्द्र श्रीवास्तव की कहानियाँ उम्मीद का नया पर्यावरण सृजित करती हैं। ऐसे कथाकार विश्वसनीयता का एक नया विश्व बनाते हैं। यह अकारण नहीं है कि उनकी कहानियाँ पढ़ते हुए पाठक का मन सिर्फ व्यथित नहीं होता बल्कि लंबे समय तक भीगा रहता है। उसे ऐसा लगता है जैसे यह कहानियाँ उसी के जीवन या उस जैसों के जीवन का वृत्तान्त हैं। कथाकार जानता है कि जीवन की सच्चाइयों से अधिक जादू किसी और मसाले में नहीं हो सकता। इसीलिए वह बहुत मद्धिम स्वर में अपने समय की सार्थक समीक्षा प्रस्तुत करता है।
राजेन्द्र की कहानियों में प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का जीवनधर्मी रसायन है, वहाँ प्रेम एक जिम्मेदारी भी है। एक ऐसे समय में जब लोग हर प्रकार की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाना चाहते हैं तब कहानियों में ऐसे भावों को विन्यस्त करना लेखकीय उत्तरदायित्व का श्लाघ्य उदाहरण है। वे जानते हैं कि कहानी में क्या और कितना कहना है। शायद यही कारण है कि उनकी कहानियाँ अपने पाठकों को उबाती नहीं हैं। विषय चयन के साथ ही वे कहानी कला के प्रति भी सजग हैं। उनकी भाषा सादगी का सौंदर्यशास्त्र रचती है। बिल्कुल कबीर की भाषा की तरह। कहानियों में विन्यस्त दाहकता और शीतलता–पाठकों के अंतःकरण की सहचर बन जाती हैं।
—जितेन्द्र श्रीवास्तव
Setu Tatha Anya Kahaniyan
- Author Name:
Jyoti Jain
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Raat Din
- Author Name:
Vishnu Nagar
- Book Type:

-
Description:
विष्णु नागर का यह पाँचवाँ कहानी-संग्रह है ‘रात-दिन’। कविता और व्यंग्य की दुनिया में जितने वह सक्रिय हैं, उतने ही कहानी की दुनिया में भी। उनका यह कहानी-संग्रह इस मायने में दूसरों से बहुत भिन्न है कि इसकी चंदेक कहानियों को छोड़कर लगभग सारी कहानियों-लघुकथाओं का स्वर व्यंग्यात्मक है। वह चाहे ‘प्रेम-कहानियाँ’ हो या ‘पापा मैं ग़रीब बनूँगा’ हो या ‘भगत सिंह बिल्डर्स’ हो या ‘साले तू किसकी इजाज़त से मरा’ है। वह चाहे प्रेम-प्रसंग हो, शैतान के अच्छा आदमी दीखने की कोशिश हो या जीवन-भर भ्रष्टाचार और काहिली के बाद सत्य और न्याय के पथ पर चलने की कोशिश करनेवाले ढोंगी और कायर बूढ़े हों, करियर और पैसे के पीछे भागते लोग हों या साम्प्रदायिक शक्तियाँ हों या गाँव और देश से बनावटी प्रेम करनेवाले लोग हों या महात्मा गांधी के नाम पर तरह-तरह के धन्धे करनेवाले लोग हों—सभी उनकी कहानियों का विषय बनते हैं। यहाँ तक कि सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्ति के प्रति शोकाकुल मित्र के प्रेम को भी उन्होंने व्यंग्यात्मक अन्दाज़ में व्यक्त किया है। यह व्यंग्य, व्यंग्य-विनोदवाला नहीं है—यह चुभता है, गड़ता है, परेशान करता है, उत्तेजित करता है, विकल करता है।
हमेशा की तरह दिलचस्प और पठनीय विष्णु नागर के इस संग्रह में ‘भटकनेवाला आदमी’, ‘बेटा और माँ’, ‘बचपन के पहाड़’, ‘दयालु पागल’ जैसी कहानियाँ भी हैं जो एक तरह से कहानी होकर भी कविता हैं और कविता होकर भी कहानी हैं। वे कहानी में कविता और व्यंग्य की ताक़त के साथ आते हैं और कविता में कहानी और व्यंग्य की शक्ति के साथ और उनका व्यंग्य, कविता भी होता है, कहानी भी, निबन्ध भी, राजनीतिक टिप्पणी भी।
बहरहाल यह कहानी-संग्रह आपके हाथों में है और यह परखने का मौक़ा देगा कि जो कहा गया। वह कितना सच है। विश्वास है कि यह सब कुछ आपको सच लगेगा।
Main Hawa Pani Parinda Kuchh Nahin
- Author Name:
Rajesh Joshi
- Book Type:

-
Description:
यह एक कवि का गल्प है, सो ज़ाहिर है इसमें कल्पना की उड़ान भी है, और ज़मीन का खुरदरापन भी। ये कहानियाँ जिनके बारे में ख़ुद लेखक का कहना है कि बहुत अनुशासित ढंग से नहीं लिखी गईं, अपने आयतन में मध्यवर्गीय जीवन की कठोर सीमाओं को रेखांकित करते हुए उन फ़ंतासियों तक जाती हैं जिनमें एक बड़े जीवन-बोध की संभावनाएँ खुलती हैं।
संग्रह की पहली कहानी ‘मैं हवा पानी परिंदा कुछ नहीं’, जिसका नायक अपने पक्षी-प्रेम के चलते सहसा एक चिडि़या में बदल जाता है, फ़ंतासी के फ्रेम में समय तथा सत्ता-संरचना के कई कँटीले पहलुओं को रेखांकित करती है। इसी तरह ‘साँप’ भी जिसमें मध्यवर्गीय आकांक्षाओं और उनके सभ्यतागत विस्तार को एक साँप के रूपक में उसकी तमाम भयावहताओं के साथ साकार कर दिया गया है।
मँझोले शहरों का साँवला-सा माहौल इन कहानियों में अपने तमाम शेड्स के साथ मौजूद है जिसे राजेश जी की चुटीली कहन ने और जीवन्त कर दिया है। ‘सोमवार’ कहानी के विवरण इस लिहाज़ से विशेष तौर पर पढ़ने लायक़ है और इसमें चित्रित किया गया जीवन भी जो अपने देश और काल की छवियों को एक सजीव कोलाज में ढाल देता है।
कविता के पंखों पर उड़ता हुआ गद्य इन सभी कहानियों की उपलब्धि है। इन कहानियों को पढ़ते हुए हम सिर्फ़ कथा-सूत्र के साथ नहीं चलते, उसकी बिम्ब-योजना हमें अनुभव के एक समानान्तर लोक में भी प्रक्षेपित करती जाती है; जिससे एक वृहत्तर यथार्थ हमारी पहुँच में होता है।
Tales Told by Mystics
- Author Name:
Manoj Das
- Rating:
- Book Type:

- Description: Tales Told by Mystics is a collection of Mystic tales retold by Manoj Das. A significant branch of India's vast literary heritage consists of tales told by mistake through the ages, different from myths and legends. Though taken for granted as a part of our folklore and rarely discussed, their influence on the minds of generations of common people has been only next to that of the epics. Sometimes they hit the nail on the head, sometimes they shock and sometimes they make one laugh at oneself, but they invariably in enrich one's mind by identifying the complex and intriguing forces psychological and occult, at work in our lives. This collection probably the first ever of its kind of a full 100 tales called from sages is known and unknown through decades of a sustained interest by its present author, should prove as revealing as they have proved for centuries past.
Metoo
- Author Name:
Akash Mathur
- Book Type:

- Description: Book
Pratinidhi Kahaniyan : Qurratul Ain Haider
- Author Name:
Qurratul Ain Haider
- Book Type:

- Description: क़ुर्रतुल ऐन हैदर उर्दू भाषा के सशक्त और चर्चित कथाकारों में हैं। मंटो, कृष्णचन्दर, बेदी और इस्मत चुग़ताई के बाद उभरनेवाली नस्ल में उनका महत्त्वपूर्ण स्थान है। क़ुर्रतुल ऐन हैदर की कहानियाँ प्रचलित प्रगतिशील कहानियों के मुक़ाबले नई शैली, नए माहौल और नई दुनिया को सामने लाती हैं। इनकी कहानियों में उच्च वर्ग, ग्लैमर भरा जीवन, अतीत की स्वप्नीली ख़ूबसूरत यादें, रिश्तों के टूटने, ख़ानदानों के बिखरने और अतीत के उत्कृष्ट मानवीय मूल्यों के चूर-चूर हो जाने की त्रासदी का बेहद सूक्ष्म चित्रण मिलता है। क़ुर्रतुल ऐन हैदर समाज में औरत की कमज़ोरी और बेबसी को उसकी पूरी सच्चाई के साथ स्वीकारने का हौसला रखती हैं। उन्होंने इसी सच्चाई को अपने कथा साहित्य में ईमानदारी से प्रस्तुत करने का भरसक प्रयत्न किया है। यहाँ संकलित ‘कोहरे के पीछे’, ‘जिन बोलो तारा-तारा’, ‘हसब-नसब’, ‘आवारागर्द’ जैसी यथार्थवादी कहानियों के साथ ‘मलफ़ूज़ते हाजी गुलाबाना बेकताशी’ और ‘रौशनी की रफ़्तार’ शीर्षक कहानियाँ भी शामिल हैं जो उनकी सृजनशक्ति के नए आयामों को उद्घाटित करती हैं। क़ुर्रतुल ऐन हैदर की कहानियाँ अपनी विषयवस्तु, चरित्र-सृष्टि, तकनीक, भाषा और शैली हर लिहाज़ से उर्दू कहानी साहित्य में उल्लेखनीय ‘इज़ाफा’ मानी जा सकती हैं। इनसान और इनसानियत पर गहरा विश्वास उनकी कहानी-कला और चिन्तन का केन्द्र बिन्दु है। इनकी कहानियों में प्रेम और घृणा, ख़ुशियाँ और ग़म, सुन्दरता और कुरूपता एक साथ मौजूद हैं।
Dayan
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Book Type:

-
Description:
भीष्म साहनी ऐसे कथाकार थे जिन्हें किसी आन्दोलन ने न कभी विचलित किया, न प्रेरित किया। कला और यथार्थ के साथ उनका अपना निजी रिश्ता था, जिसे उन्होंने आख़िर तक अक्षत बनाए रखा। जीवन, जीवन को चुनौती देनेवाले विद्रूप और उसे बल देनेवाले सौन्दर्यबोध की शाश्वत मौजूदगी, यही उनका संसार था।
'डायन' का प्रकाशन 1998 में हुआ था, और यह उनके जीवन-काल में प्रकाशित उनका अन्तिम कहानी-संग्रह था। इसके बाद उनका उपन्यास 'नीलू नीलिमा निलोफ़र' और आत्मकथा 'आज के अतीत' ही प्रकाशित हुए। आज़ादी की पचासवीं वर्षगाँठ पर प्रकाशित इस संकलन में भी उस पीड़ा की तारतम्यिक उपस्थिति दिखाई देती है जिससे भीष्म जी की संवेदना आज़ादी की शुरुआती सुबहों से ही जुड़ गई थी और जिसका चरम 'तमस' में प्रकट हुआ—विभाजन और साम्प्रदायिक क्रूरता।
इस संकलन की 'बीरो' कहानी पुनः विभाजन की तरफ़ लौटती है, वह बीरो जो बँटवारे के वक़्त पाकिस्तान में रह गई थी, और बाद में सलीमा बनकर वहीं की हो गई। लेकिन भीतर के तार जो सीमाओं की बाड़ को लाँघकर दोनों मुल्कों की गलियों में बार-बार आ पहुँचते है, अब भी बीरो के ह्रदय में सजीव हैं।
'डायन' कहानी मध्यवर्गीय मानसिकता की ऊहापोह का बिम्ब है। अन्य कहानियाँ भी पचास
Thasak
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

-
Description:
वरिष्ठ कथाकार ममता कालिया की इन कहानियों में आज का वक़्त अपनी तमाम विडम्बनाओं के साथ मौजूद है। नब्बे के दशक के दौरान और उसके बाद हमारे समाज ने जीवन के जिन नए रूपों को देखा और भोगा, वह उससे पहले हमारे दैनिक अनुभवों का हिस्सा नहीं थे। उदारीकरण आया, और अपने साथ ऐसी अनेक चीज़ें लेकर आया जिनसे हमारा जीने और देखने का तरीक़ा एकदम बदल गया—मोबाइल, इंटरनेट, बैंकिंग की नई-नई पद्धतियों, एटीएम, मल्टीप्लेक्स, मनोरंजन की चारों दिशाओं में पसरे नए-नए साधन और इन सबका बिना किसी हिचक सुख भोगने के लिए ज़रूरी निश्चिन्तता।
इन कहानियों में ममता कालिया ने बिलकुल इसी दौर में जन्मे नए कथाकार जैसी ताज़गी और सहजता के साथ इन सब चीज़ों से बनते नए वक़्त और नए नागरिक के चित्र खींचे हैं। और यह सुनी-पढ़ी सूचनाओं के नहीं, प्राथमिक और आँखों देखे अनुभवों के चित्र हैं। मशीनी सुगमता में बीतते जीवन ने अपने को इन कहानियों में इतने स्पष्ट रूप में रेखांकित किया है कि ममता जी की भाषा और कहन के प्रवाह में डूबा पाठक भी, उन्हें महसूस करने से नहीं बच पाता। यही इन कहानियों को लगभग इन्हीं विषयों पर लिखी जा रही अनेक कहानियों से विशिष्ट बनाता है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book