KETI-KOTI
Author:
Pushpita AwasthiPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 196.8
₹
240
Available
Collection Of Short stories
ISBN: 9789388799355
Pages: 88
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Main Kaise Hasun
- Author Name:
Sushant Supriy
- Book Type:

- Description: Collection Of Short stories
Ka : Bhartiya Manas Aur Devataon Ki Kahaniyan
- Author Name:
Roberto Calasso
- Book Type:

-
Description:
एक अद्भुत, रोमांचक और रहस्यपूर्ण यात्रा से अभी-अभी लौटा हूँ। सिर घूम रहा है— कुछ भी स्थिर नहीं। मैं उस विचित्र विचार-यात्रा के अनुभव आप सबके साथ बाँटना चाहता हूँ। एक में अनेक मानस यात्राएँ, लेकिन ज़रा ठहरिए, अभी-अभी जान पाया हूँ कि जिस अद्भुत यात्रा की बात कर रहा हूँ, वह तो शुरू ही नहीं हुई अभी तक। बस मन में कामना जगी है। और मैं इसी को यात्रा का आरम्भ और अन्त मान बैठा। सब गड्ड-मड्ड हो रहा है। प्रस्थान बिन्दु ही गन्तव्य है, और जिसे मैं गन्तव्य कह रहा हूँ, वही तो आरम्भ था। कोई आरम्भ प्रथम नहीं, क्योंकि वह दूसरा है, अन्त में से निकला है। जो नया है वह पिछले अन्त के अवशेष-शेष पर टिका है और अन्त भी अन्तिम सलिए नहीं कि वही आरम्भ है। मैं हूँ लेकिन नहीं भी हूँ। मेरा होना मेरे न होने में समाया है।
कहते हैं बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त किया था। बोधिसत्व बुद्धत्व प्राप्त कर अन्तिम बार जीवन-मरण के चक्र से निकलकर परे चले गए थे। लेकिन हम तक तो बुद्ध अपने अवशेष-आनन्द पर आधारित रहकर ही पहुँचे थे। यदि आनन्द न होते तो क्या हम बुद्ध के विचारों से इस तरह परिचित हो पाते? यही बात मैं इटली के भारत प्रेमी विद्वान श्री रॉबर्तो कलासो के बारे में कहना चाहता हूँ। संक्षेप में कहूँ तो कलासो के माध्यम से ही मैंने जटिल पुरातन भारतीय विचार-दर्शन को कथारस की लपेटन में पहली बार स्पर्श किया है। उसे पूरी तरह समझकर ग्रहण करने की परम स्थिति अभी दूर है। निर्वाण से पहले अनेक बार बोधिसत्व बनना होगा। प्रायः ही मेरे जैसे सामान्यजनों की दृष्टि अपने अतीत में पुराणों तक ही पहुँच पाती है। प्रागैतिहासिक वैदिक काल पवित्र अज्ञान की तरह है जिसे दूर से ही प्रणाम किया जा सकता है। पहले मन था, फिर विचार आया, विचार में से दूसरा विचार। सागर में लहर पर लहर की तरह जो तब से आज तक लगातार उठती जा रही हैं। और यह क्रम थमने वाला नहीं, अनन्त काल तक चलता जाएगा, उन चक्रीय कथाओं की तरह जो अश्वमेध के घोड़े के बलिस्थल पर लौटने की प्रतीक्षा में दस दिन के अन्तराल पर अपने को दोहराती चली जाती थीं।
इस पुस्तक को पढ़ते हुए ऐसी अनुभूति होती है मानो मैं एक चक्करदार झूले पर घूमता जा रहा हूँ। जो पहले था वही बार-बार दिखाई दे रहा है। आर्यों को ऐसा ही लगा था भारत-भूमि पर आगे बढ़ते हुए। न जाने क्यों ऐसा लगता था, जो नष्ट किया था, वही फिर से सामने प्रकट हो गया है और फिर ऐसा बार-बार होने लगा। वे चकित-चमत्कृत थे। फिर एक समय ऐसा आया, जब भारतीय विचार-दर्शन और जटिल कर्मकांडीय संयोजन की जटिलता ने मन को क्लान्त कर दिया। लोग चाहने लगे—गुनगुने सर्द मौसम में मद्धिम अलाव के चारों ओर बैठकर केवल रस-भरी कथाएँ सुनें और कुछ न करें। धीरे-धीरे यही क्रम चल निकला। जो कथाएँ संकोच से कर्मकांडीय अन्तराल के बीच चुपचाप सिमटकर आ बैठी थीं, वही प्रमुख हो गईं। अतीत के कर्मकांडीय सन्दर्भ कथा-विवरणों में ढल गए। इस पुस्तक के संयोजन में भी यही शैली अपनाई गई है। बात बिन्दु से उभरती है, विचार में ढलती है, विचार प्रक्रिया एक आवेशित, प्रचंड प्रवाह का रूप ले लेती है—लहरें इतनी ऊँची उठती हैं कि मन व्याकुल हो उठता है। और तभी कलासो कथा कहने लगते हैं। क़िस्सागोई का यह अन्दाज़ विचार-प्रवाह की गुरुता को कम नहीं करता उसे कहीं अधिक ग्राह्य बनाता है हम सभी के लिए।
श्री रॉबर्तो कलासो को बधाई। और उन जैसे भारत-प्रेमी विद्वान को जन्म देने के लिए इटली को धन्यवाद।—देवेन्द्र कुमार
Comrade Ka Coat
- Author Name:
Srinjay
- Book Type:

- Description: महत्त्वपूर्ण कथाकार सृंजय का यह पहला कहानी–संग्रह है। शीर्षक कथा ‘कामरेड का कोट’ भारतीय वामपन्थ पर तीक्ष्ण प्रहार करते हुए सच्चे और प्रतिबद्ध लोगों की बेचैनी को शिद्दत से उजागर करती है। वहीं ‘भगदत्त का हाथी’ हमारी गँवई ज़िन्दगी को आज भी निष्प्राण बनाए रखनेवाले सामन्ती अहंकार की बख़िया उधेड़ती है। सृंजय की ये कहानियाँ हिन्दी कथा–साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान ग्रहण करती हैं। ये कहानियाँ पुन: इस सच को स्थापित करती हैं कि रचना का कलात्मक मूल्य उसकी सामाजिक अन्तर्दृष्टि में ही निहित होता है। संग्रह में शामिल ‘बैल बधिया’ और ‘तख़्त–ओ–ताज’ भी सामन्ती सरोकारों के चलते अमानवीय होती हमारी ज़िन्दगी की आलोचना करती हैं तो ‘लक्ष्मी के पाँव’ इस संस्कृति की विरूपता पर कटु व्यंग्य करती है। कथाकार बेहद संवेदनशील है और समय को चौकन्नी दृष्टि से देखता है। लोक संस्कृति की गहरी समझ और रचनात्मक कौशल से उसका बेहतर इस्तेमाल कथाकार की ख़ूबी है। वह अपने पात्र समाज के बीचोबीच से उठाता है और उनके साथ चलते हुए उनकी तमाम कमज़ोरियों और कमियों को बारीकी से उकेरता है।
Pratinidhi Kahaniyan : Jaishankar Prasad
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

- Description: महाकवि के रूप में सुविख्यात जयशंकर प्रसाद हिन्दी नाट्य-जगत और कथा-साहित्य में भी एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। ‘स्कंदगुप्त‘, ‘चन्द्रगुप्त’ और ‘ध्रुवस्वामिनी’ सरीखे नाटक और ‘तितली’, ‘कंकाल’ और ‘इरावती’—जैसे उपन्यास तथा ‘आकाशदीप’, ‘मधुआ’ और ‘पुरस्कार’ जैसी कहानियाँ उनके गद्य लेखन की अनुलंघ्य ऊँचाइयाँ हैं। यहाँ प्रसाद की प्रायः सभी चुनिन्दा कहानियाँ संकलित हैं, जिनसे गुज़रते हुए हमें न सिर्फ़ भारतीय दर्शन की सुखवादी मूल्य-मान्यताओं की अनुगूँजें सुनाई पड़ती हैं, बल्कि सामाजिक यथार्थ के अनेक अप्रिय स्तरों तक भी जाना पड़ता है। वास्तव में प्रसाद के लिए साहित्य की रचना एक सांस्कृतिक-कर्म है और भारतीय परम्परा के प्राचीन अथवा उसके सनातन मूल्यों में गहन आस्था के बावजूद वे मनुष्य की वैयक्तिक मुक्ति के आकांक्षी नहीं हैं। व्यक्ति हो या समाज, वे उसे स्वाधीन और रूढ़िमुक्त देखना चाहते हैं। यही कारण है कि इन कहानियों में ऐसे अविस्मरणीय चरित्रों का बाहुल्य है, जो स्वाधीनता और मानव-गरिमा को सर्वोपरि मानते हैं। इतिहास और संस्कृति के ऐसे अनेक मनोरम दृश्यचित्र इन कहानियों में उकेरे गए हैं, जो हमें न केवल मुग्ध कर देते हैं, बल्कि कुछ सोचने पर भी विवश करते हैं।
Surang
- Author Name:
Sanjay Sahay
- Book Type:

-
Description:
90 के दशक में बड़ी तेज़ी से बदल रही थी हिन्दी कहानी और उतनी ही तेज़ी से बदल रहा यह हमारा देश। वह एक खौलते हुए यथार्थ का समय था जिसे कथा साहित्य में दक्षता के साथ प्रस्तुत करनेवाले लेखकों में संजय सहाय बेहद महत्त्वपूर्ण हैं। संजय सहाय की कहानियों का पहला संग्रह था—‘सुरंग’। ‘सुरंग’ को एक तरह से बेहतरीन कहानियों का निवास भी कहा जा सकता है जहाँ हर कहानी में मनुष्य जाति का कोई न कोई ज़ख़्म और कोहराम है। अच्छी कथाओं का मोक्ष यह होता है कि उन्हें कभी मोक्ष नहीं मिलता, हमेशा इसी दुनिया में जीना-मरना उनकी नियति और सिद्धि है। इसीलिए ‘सुरंग’ की कहानियाँ अपने प्रकाशन के क़रीब दो दशक बाद आज भी प्रासंगिक और समकालीन हैं, बल्कि कई अर्थ में पहले से भी अधिक। वे मौजूदा समाज के प्रातिनिधिक चरित्र उस हिंसा का प्रत्याख्यान करती हैं जो सर्वाधिक बेबस और मुफ़लिस का आखेट करती है। संजय सूक्ष्मता में जाकर हिंसा की सत्ता-संरचना का विखंडन करते हैं; यह अनायास नहीं है कि संजय की कहानियों में ख़ून, हथियार, प्रहार, वर्दी आदि बार-बार आते हैं। इन्हीं के समानान्तर सिर उठाती देखी जा सकती है, साधारण इनसान की रुलाई, चीख़ और प्रतिरोध की आवाज़।
‘सुरंग’ की कहानियों में देखा जा सकता है कि दृश्यान्तर बहुत हैं। ‘शेषान्त’, ‘मध्यान्तर’, सरीखी कहानियों में बहुत सारे लोग मिलकर विविध दृश्य रचते हैं तो ‘खेल’, ‘सुरंग’, ‘टोपी’ जैसी कहानियों में एक-दो पात्रों की आँख के सामने अनेक अपने-अपने क़िस्सों के दृश्यों के साथ प्रकट होते हैं। यूँ भी कह सकते हैं, संजय के यहाँ जीवन अनोखेपन और चाक्षुषता के साथ है। ‘अविश्वसनीय’ और ‘सुरंग’ में जहाँ लोग-बाग ज़्यादा नहीं हैं, वहाँ उनकी जगह समय का विस्तृत फलक है। ‘अविश्वसनीय’ में संजय ने स्त्री के दु:ख तथा उसके प्रति पुरुष-सत्ता के नज़रिए को शान्त, बढ़ा, बाजिरह कहा है। ‘सुरंग’ की सुरंग इतिहास के रक्तपात से भरी हुई है। यह सुरंग अतीत से चलकर बरास्ते वर्तमान होते हुए भविष्य तक का उद्घाटन करती है जिसमें शक्तियों की बेरहमी, अन्याय और बेदखली गश्त कर रही है।
संक्षेप में कहें, ‘सुरंग’ की कहानियाँ ऐसी हैं जो कभी-कभी रची जा पाती हैं लेकिन लम्बे वक़्त के लिए साथ रह जाती हैं।
—अखिलेश
Kala Sona
- Author Name:
Dr. Renu Yadav
- Book Type:

- Description: collection of seven brilliant stories
Vipralabdha
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं। अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़नेवाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे। प्रस्तुत संग्रह में ‘दो स्मृति-चिह्न’, ‘विप्रलब्धा’, ‘शायद’, ‘ज्येष्ठा’, ‘शपथ’, ‘घंटा’, ‘के’ एवं ’पुष्पहार’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है। कलात्मक कौशल के साथ रची गई ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Bapu Katha Chaudas
- Author Name:
Madhukar Upadhyay
- Book Type:

- Description: Mahatma Gandhi's life story in Hindi by Madhuker Upadhyay.
Rail Ki Bat
- Author Name:
Harimohan Jha
- Book Type:

- Description: हरिमोहन झा की कहानियां : पाँच पत्र/ रेल की बात/ गुलाबी गप्प/शास्त्रार्थ / अलंकार शिक्षा/ सरस्वती की पराजय/ चिकित्सा/ सिनेमा का दृश्य/ चंचला की करतूत/ कलाकार का पाप/ अंगरेजिया बाबू
Yashpal Ki Sampurn Kahaniyan
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shreshtha Bal Kahaniyan part 2
- Author Name:
Prakash Manu
- Book Type:

- Description: Collection of children short stories, compiled and edited by Prakash Manu.
Dastangoi - 1
- Author Name:
Mohammad Kazim +1
- Book Type:

- Description: दास्तान ज़बानी बयानिया है जिसे पेश करनेवाले दास्तानगो ज़बान, बयान, शायरी और क़िस्त के माहिर होते थे। दास्तानें बहुत-सी सुनाई गईं पर इनमें सबसे मशहूर हुई दास्ताने अमीर हमज़ा जिसमें हजरत मोहम्मद सः के चचा अमीर हमज़ा की ज़िन्दगी और उनके शानदार कारनामों को बयान किया जाता है। 18वीं और 19वीं सदी में जब ये दास्तान उर्दू में मक़बूल हुई तो इससे अदब और पेशकश का बेहतरीन मेल पैदा हुआ और इसमें कई ऐसी बातों का इज़ाफ़ा हुआ जो ख़ालिस हिन्दुस्तानी मिज़ाज की थीं। मसलन, तिलिस्म और अय्यारी जो बाद में दास्तानगोई का सबसे अहम हिस्सा साबित हुईं। बेशुमार क़िस्म के जानदार, सय्यारे सल्तनतें, तिलिस्म, जादूगर, देव, अय्यार, और अय्याराएँ जैसे किरदारों पर ‘मुश्तमिल दास्ताने-अमीर हमज़ा’ आख़िरकार 46 जख़ीम जिल्दों में पूरी होकर छपी और उर्दू अदब और हिन्दुस्तानी फनूने लतीफ़ा का मेराज साबित हुई। दास्तानगोई का फ़न ज़बानी और तहरीरी दोनों शक़्लों में जिस वक़्त अपने उरूज पर पहुँचा तक़रीबन उसी वक़्त नए मिज़ाज और नए मीडिया की आमद के साथ बड़ी तेज़ी से इसका जवाल भी हुआ। आख़िरी दास्तानगो मीर बाक़र अली का इन्तकाल 1928 में हुआ और इसके साथ ही ये अजमी रवायत नापैद हो गई।
Parinde
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

-
Description:
परिन्दे निर्मल वर्मा का पहला कहानी-संग्रह है। सात कहानियों के इस संग्रह के पहले प्रकाशन (1958) के बाद जैसे हिन्दी कहानी को एक नया प्रस्थान मिला था। न सिर्फ़ इन कहानियों की भाषा के कारण, बल्कि इतिहास और समय के विशाल फलक पर मानव-नियति को समझने की एक नई दृष्टि और प्रविधि के कारण भी।
नामवर सिंह ने ‘परिन्दे’ को नई कहानी धारा की पहली कहानी ठहराया था। उन्होंने सही ही कहा था कि हिन्दी भाषा के लिए जो काम कविता नहीं कर सकी, वह इन कहानियों के गद्य ने कर दिखाया।
निर्मल जी के पात्र अपने वातावरण में इतने प्राकृतिक होते हैं कि वे यथार्थवादी कही जानेवाली कहानियों के विवरण-बहुल चरित्रों से ज़्यादा वास्तविक लगने लगते हैं। अपनी व्यक्ति-सत्ता में वे इतने सजीव और सम्भव लोग हैं कि उनका वर्णन करने के लिए कथाकार की भाषा को लम्बी-लम्बी डिटेल्स देने की जरूरत नहीं पड़ती, वह बस उन्हें उनकी जगह पर आलोकित भर कर देती है, और हम देखते हैं कि ये हमारे अपने किसी हिस्से के कितने करीब हैं। वे हमारी स्मृति का हिस्सा हो जाते हैं, जैसे अपनी जिन्दगी के कुछ महीन अनुभव।
‘परिन्दे’ में संकलित सभी कहानियों में मनुष्य की ऐतिहासिक अवस्थिति से उत्पन्न अस्तित्वगत प्रश्नों को, स्वतंत्रता और मुक्ति की उसकी आन्तरिक व्याकुलता को समग्र अभिव्यक्ति मिली है। रोज़मर्रा जीवन की परिस्थितियों और पात्रों को निर्मल वर्मा यहाँ इस तरह अंकित करते हैं कि उनके पीछे हमें मानव की जिजीविषा की सुदीर्घ यात्रा अपने तमाम प्रश्नों और सन्देहों के साथ आती दिखाई देती है।
Ek Shravni Dophari Ki Dhoop
- Author Name:
Phanishwarnath Renu
- Book Type:

-
Description:
एक श्रावणी दोपहरी की धूप प्रख्यात कथाकार फणीश्वरनाथ 'रेणु’ की असंकलित कहानियों का संग्रह है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित ये प्राय: उनकी प्रारम्भिक रचनाएँ हैं, इसलिए इनका दोहरा महत्त्व है। एक ओर ये हमें उनकी रचनात्मक प्रतिभा के शैशव तक ले जाती हैं, तो दूसरी ओर समकालीन कथा-साहित्य में उस नई कथा-प्रवृत्ति का उदयाभास कराती हैं जो बाद में उनकी अन्य महत्त्वपूर्ण कहानियों और उपन्यासों में परिपक्व हुई और जिसने एक समूचे कथायुग को प्रभावित किया।
रेणु की कहानियाँ मानव-जीवन के प्रति गहन रागात्मकता का परिणाम हैं। वे उनके यथार्थ को समग्रता में पकडऩे और उसकी तरल भावनात्मक अभिव्यक्ति में विश्वास रखते हैं। हम उनके पात्रों के साथ-साथ उदास और उल्लसित हो उठते हैं। उनमें जो लोक-मानस का विस्तार है, जो रस और संगीत है, वह हमारे मानवीय संवेगों को गहराता है।
इन कहानियों के माध्यम से वस्तुत: रेणु एक बार फिर हमें उस रचना-भूमि तक ले जाते हैं, जिसमें पहली बार नहाई धरती के सोंधेपन, बसन्त की मादकता और पसीने की अम्लीय गन्ध का अहसास होने लगता है
Chhiyanat
- Author Name:
Taranand Viyogi
- Book Type:

- Description: संख्या मे कम कथा लिखलाक बादो मैथिली कथा-साहित्य मे तारानंद वियोगीक पैघ आ जरूरी स्थान मानल गेल अछि। प्रतिष्ठित कथा-संकलन सब मे हुनकर कथा संकलित भेल छनि आ आन-आन भाषा मे अनूदित सेहो। समाजक हाशिया परक लोक के कथा, ओकर संपूर्ण मानवीय गरिमाक संग, मैथिली मे कम लिखल गेल अछि। वियोगी जीक प्राय: सब टा कथा एही निम्नवर्ग, जाति आ वर्णक विषय मे लिखल गेल अछि। सब दिन ओ निर्माणाधीन सामाजिक यथार्थ केँ अपन कथाक विषय बनौलनि। एहि गुणक कारण हुनकर कथाक बेस मान अछि, मुदा एही कारणें विवादो अक्सरहां होइत रहल अछि। हुनकर सदा मान्यता रहलनि जे केवल मैथिली भाषा मे लिखल रहबाक कारण कोनो कथा मैथिली कथा नहि भ' सकैत अछि। तेँ, हुनकर कथा सब मे मिथिलाक जनजीवन केँ धकधक करैत महसूस कयल जा सकैए। तहिना, हुनकर कथा सब मे कथादेश आ कथासमय केँ साफ-साफ चित्रित भेल देखल जा सकैत अछि। ओ अपना समयक हरेक हलचल केँ नोटिस करैत चलैत छथि। तहिना, हुनकर कथाभाषा सेहो बेछप आ विलक्षण छनि। अपन देस-समाज केँ देखबाक आलोचनात्मक विवेक सब दिन वियोगी जी मे जाग्रत रहलनि, तेँ हुनकर कथाकला अपन उत्कर्ष धरि पहुँचल, जाहि लेल हुनकर कथा सब केँ बेस महत्त्व देल जाइत रहल अछि। हुनक कथा-लेखनक मादे पं. गोविन्द झा लिखने छथि— 'ललित-राजकमलक समय आ तारानंद वियोगीक समय मे महान अंतर अछि। पहिल विद्रूपता आ विसंगतिक समय छल तँ दोसर विकट संकटक समय। एहि संकट-काल मे मुख्य प्रश्न भ' गेल अछि अस्तित्व-रक्षाक। ललितक कालक जे स्थिति-रेखा छल, वियोगी जीक कथा-यात्रा तकर अतिक्रमण क' गेल अछि। मैथिली कथाक एक जीवन्त परंपरा हिनका एहि कथा-यात्रा मे संग दए रहल छनि आ तकर बोध सँ उद्भासित छथि। परंपरा-बोध आ अपन जीवन-अनुभव दुनू मिलि हिनका आबि तुलाएल संकट सँ लड़बाक ऊर्जा दैत अछि।'
ONE PROVERB ONE TALE: 50 Flash Fiction Stories Woven around 50 Hindi Proverbs
- Author Name:
Amit Behal
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Ghatshraadh
- Author Name:
U.R. Ananthamurthy
- Book Type:

- Description: प्रसिद्ध उपन्यासकार यू.आर. अनन्तमूर्ति की ये कहानियाँ अपनी प्रयोगधर्मिता, बौद्धिक संयम, अनूठी कथा-शैली और बेबाक आधुनिक दृष्टि के कारण कन्नड़ कथा-साहित्य में विशेष स्थान बना चुकी हैं। ‘घटश्राद्ध’ कहानी पर कन्नड़ में फ़िल्म भी बन चुकी है, जो काफ़ी चर्चित और पुरस्कृत हुई। इन कहानियों में प्रचलित रूढ़ियों के अनूठे चित्र और दिलचस्प चरित्र हैं जो आधुनिकता की मार खा-खाकर चरमरा रहे हैं, टूट रहे हैं, बिखर रहे हैं। उनके इस विघटन में निहित अनिवार्य त्रासदी मन को आलोड़ित करती है। कुछ प्रयोगधर्मी कहानियों में अनूठी फैंटेसियों का आकलन हुआ है, जो किसी गहरे आन्तरिक यथार्थ की प्रतीति कराती हैं। नारी के शोषण के अनेक चित्र इन कहानियों में देखने को मिलते हैं। कंठ के भीतर घुटते उच्छ् वासों को रचनाकार ने अपनी विशेष सजीव और सहज शैली में उभारा है। भारतीय भाषाओं को ‘संस्कार’ जैसा आधुनिक क्लासिक उपन्यास देनेवाले रचनाकार का यह संकलन पढ़ना एक अनूठा अनुभव है।
Katha Saptak - Divya Mathur
- Author Name:
Divya Mathur
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Amreeka Meri Jan
- Author Name:
Hariom
- Book Type:

- Description: Short Stories
Raf Raf Mail
- Author Name:
Abdul Bismillah
- Book Type:

-
Description:
समकालीन हिन्दी कथाकारों में जिन कुछ विशिष्ट कथाकारों की चर्चा की जाती है, उनमें अब्दुल बिस्मिल्लाह प्रमुख हैं। ऐसा इसलिए है कि इस वैश्विक सभ्यता, बाज़ारीकरण और मूल्यहीनता के दौर में भी उनकी आस्था लोक से, जनसामान्य से जुड़ी हुई है। उन्होंने पूँजीवादी व्यवस्था और दलाल बुर्जुआजी के बीच दम तोड़ते व्यक्तियों की सुगबुगाहट को अच्छी तरह पहचाना है और इनके भीतर छिपी विकासात्मक सम्भावनाओं को अपनी कहानियों में काव्यात्मक लय प्रदान की है। भावनात्मक स्तर पर वे जिस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं, वहाँ जीवन के प्रति निश्छल एवं अकुंठ प्रेम का दर्शन होता है। उनकी कहानियाँ परिवेशगत विचित्रताओं, विसंगतियों और जटिलताओं का सूक्ष्म, किन्तु मुकम्मल भाष्य हैं। यहाँ वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ भावना का तिरस्कार नहीं, स्वीकार है। रफ रफ मेल की सभी कहानियाँ अब्दुल बिस्मिल्लाह की इन्हीं जीवनेच्छाओं का प्रतिफल हैं।
‘रफ रफ मेल’ में संगृहीत कहानियाँ अपने मिज़ाज और तेवर में परस्पर भिन्न हैं। आज जबकि उत्तर-आधुनिक परिवेश और उत्तर-आधुनिक लेखन की चर्चा ज़ोरों पर है; ये कहानियाँ
अपने पाठकों को हर तरह के नारों से परे करके उन्हें उनकी जड़ों से जोड़ती हैं।
इस संग्रह में ‘गृह प्रवेश’, ‘दुलहिन जीना तो पड़ेगा’, ‘पेड़’, ‘लंठ’, ‘कर्मयोग’ और ‘माटा-मिरला की कहानी’ आदि ऐसी कहानियाँ हैं, जो शिल्प के स्तर पर एकदम नई तर्ज की रचनाशीलता से रू-ब-रू कराती हैं।
‘रफ रफ मेल’ की सम्पूर्ण कहानियाँ संवादात्मक तो हैं ही, प्रयोगधर्मी भी हैं। इन कहानियों में लोक-भाषा, लोक-लय और लोक-मुहावरों को सुरक्षित रखने की कोशिश की गई है, इसीलिए इनमें व्यंग्यात्मकता और ध्वन्यात्मकता की तीखी धार दिखाई पड़ती है।
बीसवीं सदी के अन्त में प्रकाशित यह कहानी-संग्रह अतीत का स्मरण तो दिलाता ही है, भविष्य की ओर भी संकेत करता है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book