Kahaniyan Rishton Ki : Prem
(0)
Author:
AkhileshPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
150
₹ 120 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
प्रेम एक बहुआयामी और छलिया शब्द! अपना ही विरोधी! आह्लादकारी और यातनादायी दोनों रहा है संसार के लिए यह शब्द। प्रेम और समाज दो विपरीत ध्रुव हैं और उनके बीच खड़ा है, दोनों को सहेजता मनुष्य। हम सबका जीवन ऐसी प्रेम कहानी/कहानियाँ होता है जिसका/जिनके क्लाइमेक्स अज्ञात या अन्तविहीन होते हैं। यह संकलन उन ख़ास कहानियों को चुनकर तैयार किया गया है, जिनमें प्रेम प्रखरता से उपस्थित है। वही प्रेम जो उबरने में नहीं, डूबने में सार पाता है...अपने प्रिय को खोकर प्रेम को पाने का गुमान रखने वाले साधारण, सिरफेरे चरित्रों की असाधारण कहानियाँ।
Read moreAbout the Book
प्रेम एक बहुआयामी और छलिया शब्द! अपना ही विरोधी! आह्लादकारी और यातनादायी दोनों रहा है संसार के लिए यह शब्द। प्रेम और समाज दो विपरीत ध्रुव हैं और उनके बीच खड़ा है, दोनों को सहेजता मनुष्य। हम सबका जीवन ऐसी प्रेम कहानी/कहानियाँ होता है जिसका/जिनके क्लाइमेक्स अज्ञात या अन्तविहीन होते हैं। यह संकलन उन ख़ास कहानियों को चुनकर तैयार किया गया है, जिनमें प्रेम प्रखरता से उपस्थित है। वही प्रेम जो उबरने में नहीं, डूबने में सार पाता है...अपने प्रिय को खोकर प्रेम को पाने का गुमान रखने वाले साधारण, सिरफेरे चरित्रों की असाधारण कहानियाँ।
Book Details
-
ISBN9788126725533
-
Pages168
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Pratinidhi Kahaniyan : Premchand
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: भारतीय ग्रामीण जीवन और जनमानस की विभिन्न स्थितियों के अप्रतिम चितेरे मुंशी प्रेमचन्द विश्वविख्यात साहित्यकारों की पंक्ति में आते हैं। उनकी ये प्रतिनिधि कहानियाँ प्रायः पूरी दुनिया की पाठकीय चेतना का हिस्सा बन चुकी हैं। सुप्रसिद्ध प्रगतिशील कथाकार भीष्म साहनी द्वारा चयनित ये कहानियाँ भारतीय समाज और उसके स्वभाव के जिन विभिन्न मसलों को उठाती हैं, ‘आज़ादी’ के बावजूद वे आज और भी विकराल हो उठे हैं, और जैसा कि भीष्म जी ने संकलन की भूमिका में कहा है कि प्रेमचन्द की मृत्यु के पचास साल बाद आज उनका साहित्य हमारे लिए एक चेतावनी के रूप में उपस्थित है। जिन विषमताओं से प्रेमचन्द अपने साहित्य में जूझते रहे, उनमें से केवल ब्रिटिश शासन हमारे बीच मौजूद नहीं है, शेष सब तो किसी-न-किसी रूप में वैसी-की-वैसी मौजूद हैं! वस्तुतः प्रेमचन्द ने हमारे साहित्य में जिस नए युग का सूत्रपात किया था, साहित्य को वे जिस तरह जीवन के निकट अथवा जीवन को साहित्य के केन्द्र में ले आए थे, वह हमारे लिए आज भी प्रासंगिक है।
Ichchhayen
- Author Name:
Kumar Ambuj
- Book Type:

-
Description:
मैं कुमार अंबुज की कविताओं का तो प्रशंसक रहा हूँ लेकिन मुझे दूर-दूर तक यह ख़याल नहीं था कि वे कहानी की दुनिया में भी क़दम रखेंगे। क़दम भी ऐसा कि कहानी की परिभाषा ही बदल दी है। ये चित्रों में कही गई कहानियाँ हैं। एक कैमरे की आँख है जो एक-एक बारीक दृश्य को देखती है। भाषा अंबुज की इन कहानियों की सबसे बड़ी ताक़त है जो हर दृश्य की सूक्ष्म परतों को खोलती चली जाती है।
—नामवर सिंह
इन कहानियों की रेंज बहुत व्यापक है, प्राय: ही अपने समय, समाज और जीवन का बहुत कुछ घेरते हुए। छोटे-छोटे उदाहरण या ब्यौरों से कुमार अंबुज क़िस्सागोई की कला को जैसे एक नया आयाम देते हैं। इन्हीं छोटी-छोटी चीज़ों से वे समाज और राष्ट्र की बड़ी चिन्ता से जुड़ते हैं, यहीं से वे भूमंडलीकरण और बाज़ारवाद के बढ़ते संक्रमण के प्रतिवाद और प्रतिरोध के सूत्र उठाते हैं। ये प्रच्छन्न इच्छाएँ ही वस्तुत: एक दुनिया के प्रतिवाद के साथ दूसरी वैकल्पिक दुनिया का संकेत देती हैं। ये गहरे में जाकर मनुष्य को मानवीय बनाने और बने रहने के उद्यम के अंग हैं। कुमार अंबुज की ये कहानियाँ बार-बार पढ़े जाने को उकसाएँगी।
—मधुरेश
ये कहानियाँ हमारे जीवन के बेहद मामूली अनुभवों के बीच से असाधारणता का विरल तत्त्व खोजने का जो साहस दिखाती हैं, वह हिन्दी के सन्दर्भ में बेहद औचक और नया है। समूचे सामाजिक एवं बौद्धिक जीवन में जो ठहराव धीरे-धीरे घर कर रहा है, उसकी तह तक पहुँचने, उसे तोड़ने और उसका सर्जनात्मक विकल्प तैयार करने का महत्त्वपूर्ण काम ये कहानियाँ सहजता और बेहद सादगी के साथ करती हैं। यही इन विलक्षण कहानियों की सबसे बड़ी सफलता भी है।
—जितेन्द्र भाटिया
Khidki
- Author Name:
Sheela Roy Sharma
- Book Type:

- Description: "विदेश में लंबे समय से रह रही युवती जब स्त्री के रूप में माता-पिता के घर लौटती है तो पुराने नक्श खोजती है, लेकिन अब तो उसके लिए वह खिड़की भी नहीं खुलती जिसके इंद्रधनुषी पारदर्शी शीशे कभी उसके अपने थे। हमारे सांप्रदायिक संस्कार शिक्षा और सभ्यता पर अकसर ही भारी पड़ते हैं। भाषा के महीन रेशों से बुनी जानेवाली कहानी के लिए लेखिका को मेरा साधुवाद। —मैत्रेयी पुष्पा शीला राय शर्मा की कहानियों का पर्यावरण सामाजिक होकर भी अधिकतर पारिवारिक है। कहानियाँ ‘सौतेली माँ’ और ‘चिल्लर बहू’ दो भिन्न वातावरण से जनमती हैं लेकिन दोनों के जीवन-मूल्य जैसे विवाह संस्था और धर्म के आधार पर संचालित हैं। इस जंजीर की कड़ी ही कहानी ‘खिड़की’ है। इसमें मनोविज्ञान की भीतरी तहों का कार्य-व्यापार है। सूक्ष्म मनोभावों का अंकन यहाँ गौरतलब है। कहन की ऐसी विशेषता भी द्रष्टव्य है जो अन्य कथा-कथन से अप्रभावित है। यही पाठ में विश्वसनीयता पैदा करता है। यह कहानीकार का अपना संवेदना, कथ्य और कहन का संसार है। यह निजता का ऐसा हस्ताक्षर है जो मौलिक है। —लीलाधर मंडलोई
Kahaniyan Sunati Yatrayen
- Author Name:
Kusum Khemani
- Book Type:

-
Description:
यात्राएँ केवल भूगोल का नहीं, वस्तुतः अनुभव का ही विस्तार है और इस तरह हमारी जीवन-दृष्टि का भी।
इस दृष्टि से डॉ. कुसुम खेमानी की ‘कहानियाँ सुनाती यात्राएँ’ पुस्तक यात्रा-साहित्य के मुकुट में एक और मोरपंख की तरह प्रतीत होती है।
पाठक इन यात्रा-निबंधों को पढ़ते हुए अनुभव करेंगे कि ये यात्राएँ जितनी बाहर की हैं, उससे कहीं अधिक भीतर की भी हैं। भौगोलिक धरातल पर लेखिका सौ कदम चलती हैं तो आनुभूतिक धरातल पर हज़ार कदम। भीतर-बाहर की यह उड़ान अपना एक ऐसा अन्तरिक्ष रचती है जहाँ तारे भी हैं, मेघ भी और सात नहीं, अनेक रंगों वाला इन्द्रधनुष भी।
शैली यहाँ बतरस की है और अन्दाज-ए-बयाँ किस्सागो का। यही कारण है कि निबंध, कहानी, संस्मरण जैसी विधाएँ अपनी सरहदों को लाँघकर यहाँ जैसे एकमेक हो गई हैं। यात्रा-साहित्य के चिर-परिचित स्वाद में यह सीधा हस्तक्षेप है और डॉ. कुसुम की सर्जनात्मक मौलिकता का साक्ष्य भी।
हरिद्वार, कश्मीर, उज्जयनी, कोलकाता, शिलांग, हैदराबाद से लेकर उर्बन, रोम, बर्लिन, स्विट्जरलैंड, प्राग, मास्को, मिश्र, मॉरिशस, भूटान और अलास्का तक जैसे समस्त ब्रह्मांड को यहाँ मथ दिया गया है और इस मंथन से जो अनुभव-अमृत निकलता है, वह अब आपके सामने है।
–भूमिका से
Kali Billiyon Ke Saaye Mein Chatori Chudail
- Author Name:
Uzma Kalam
- Book Type:

- Description: उज़्मा कलाम की कहानियाँ इतनी सहज और अनायास हैं कि एकदम पड़ोस की लगने के बावजूद उनका जादुई सम्मोहन देर तक अपनी गिरफ्त में लिए रहता है। ये कहानियाँ अक्सर दो विपरीत छोरों पर एक साथ चलती हैं इसलिए समय के मारक विरोधाभास इनमें ठोस और साकार होकर उपस्थित होते हैं। यहाँ एक तरफ एक क्रूर और निस्संग दुनिया है तो दूसरी तरफ फूलों से भी कोमल मन और उनके रंग और खूशबू। एक तरफ दारुण अभाव हैं तो दूसरी तरफ इतनी सघन भाव भरी स्मृतियाँ हैं कि वे एकदम मूर्तिमान होकर बारम्बार लौट आती हैं। विश्वसनीय जीवन यथार्थ और उसकी बन्दिशें हैं तो उनके जाल से बाहर निकलने को बेताब फन्तासियाँ और कल्पनाएँ भी हैं। यह कहानियाँ जीवन की धूप-छाँही निरन्तरता से अपना ताना-बाना लेती हैं। यहाँ अल्पसंख्यकों और हाशिए के जीवन की रोजमर्रा की जद्दोजहद के बीच, अतीत और वर्तमान, धर्म और आधुनिकता की तमाम बहसों और रिश्तों के दरमियाँ जीवन के अनेक संस्तरों से गुजरते हुए यह बार-बार जानना होता है कि चीजें इतनी इकहरी नहीं हैं जितनी बनाकर वह पेश की जाती हैं। इन कहानियों में एक जिद्दी दुनिया है जो हार भले जाती है पर जूझना नहीं छोड़ती। एक निहत्थी, पर मारक मासूमियत है जो संवेदना की सबसे भीतरी तहों में धँस-सी जाती है। स्त्रियाँ और बच्चे इन कहानियों के पर्यावरण का अनिवार्य हिस्सा हैं जो इन्हें देखने के एक अलग तर्क और तरीके की तरफ ले जाते हैं। अनेक यादगार स्त्री चरित्रों की उपस्थिति इन कहानियों को कभी न भूलनेवाली बना देती है। ‘काली बिल्लियों के साये में चटोरी चुड़ैल’ बेहतरीन कहानियों का एक ऐसा संग्रह है, जिसे हास्य और विडम्बना के अद्भुत ताने-बाने से बुना गया है। —कुणाल सिंह
Vichar Jo Kamyab Rahe
- Author Name:
Bhagwati Prasad Dobhal
- Book Type:

- Description: विचार जो कामयाब रहे’ भारत के बीस अग्रणी उद्योगपतियों, राजनेताओं, अधिकारियों और समाजसेवियों के रोचक और ज्ञानवर्द्धक लेखों का संकलन है। इन लेखों में इन प्रबुद्ध हस्तियों ने बताया है कि कैसे उन्होंने अपने सामने आई चुनौतियों का सामना किया और देशी व नवीन प्रौद्योगिकियों का विकास किया, जिनसे राष्ट्र की उन्नति का मार्ग प्रशस्त हुआ। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में आनेवाली चुनौतियों और उनमें मिली सफलताओं के बारे में बताया है, साथ ही पाँच ऐसे मेगा प्रोजेक्ट्स के बारे में भी बताया है, जो हमारे राष्ट्र को एक विकसित देश बना सकते हैं। एन.आर. नारायण मूर्ति याद करते हैं कि किस तरह उन्होंने अपनी टीम के साथ इंफोसिस टेक्नोलॉजीज को विश्वस्तरीय फॉर्चून 500 कंपनी की सूची में शामिल होने लायक बनाया। रतन टाटा भारत की पहली स्वदेशी कार इंडिका के निर्माण और उसका डिजाइन तैयार करने से जुड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का ब्योरा देते हैं, तो मुकेश अंबानी 2005 तक नॉलेज इकोनॉमी में भारत द्वारा विश्व का नेतृत्व करने के अपने सपने को विस्तार से बताते हैं। आलोक शर्मा ने अपने उन दो सालों के अनुभव का जिक्र किया है, जब उन्होंने प्रतिदिन लगभग दो करोड़ लोगों के जमावड़े वाले दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेले कुंभ के आयोजन की तैयारियाँ की थीं, और विलासराव सालुंखे ने पानी पंचायत के विकास का ब्योरा दिया है, जो जल-संरक्षण के क्षेत्र में एक नायाब प्रयोग है और जिसने सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र के गाँवों में किसानों की जिंदगी बदल दी है। ये अनुभव भारत के विकास की अंदरूनी कहानियाँ बताएँगे और आपको प्रेरित भी करेंगे।
Dogri Kathavan
- Author Name:
Shyam Jangid
- Book Type:

- Description: भारतीय भासावां मांय डोगरी कहाणियां आपरी अळगी मठोठ राखै। डीगा डूंगर, चीड़-देवदार रा जंगल अर लोक-संस्क्रति डोगरी कहाणियां में गमकै। केंद्रीय साहित्य अकादेमी कांनी सू प्रकासित राजस्थानी में उल्थासुदा औ डोगरी कथावां रौ संकलण निश्चै ई एक महताऊ ग्रंथ है। क्यूंकै इण पोथी में डोगरी रा सबळ अर नांमी रचनाकारां री कहाणियां भेली है।
Katha Saptak Ushakiran Khan
- Author Name:
Ushakiran Khan
- Rating:
- Book Type:

- Description: Padamshri Ushakiran Khan Famous 7 Stories
Smriti Gandh
- Author Name:
Veena Sinha
- Book Type:

-
Description:
‘ब्लर्ब’ पर छपनेवाली सम्मतियाँ अक्सर खातिरन् लिखी जाती हैं, जिनमें अमूमन तआरुफ़ और तारीफ़ की बातें रहती हैं—कोई मूल्यांकन नहीं। शायद, कहानियों की इस किताब को रस्मी तौर पर लिखी गई ऐसी सम्मति की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि इस संग्रह की कई कहानियों की अपनी औक़ात है।
अधिकतर कहानियों के कथा-कलन में बया के घोंसले जैसी संकुल और कलापूर्ण बुनावट है, जिसमें लेखिका इशारतन एक साथ कई बातें कह देती है। मानो इसकी कहानी उस चाकू या क़लमतराश की तरह है, जिसमें कई छुरियाँ एक साथ रहती हैं। ख़ासकर स्त्री-विमर्श से जुड़ी हुई कहानियाँ पठनीय हैं, जो मुनिया और अंजू जैसे चरित्रों के पक्ष में खुलकर खड़ी हैं और पुंप्रभुत्व से पीड़ित इस अलील समाज को दवा की कड़ी खुराक ही नहीं देना चाहती हैं, बल्कि उसे बेहोश किए बिना नश्तर भी लगा देना चाहती हैं। यह दूसरी बात है कि इस तासीर की कहानियों में भी कहीं-कहीं पुराने समाज के ‘सेंसर-मोरोंस’ के भय के साथ-साथ ‘प्यूडेंडा’—केन्द्रिक शब्दों व क्रियाओं के कथन से परहेज़ की झलक मिल जाती है।
अन्तर्यात्रा की ख़ास बातों को इशारों से कहने में माहिर और बर्फ़ के गाले में ‘आग’ को ढोने-सुलगानेवाली ये कहानियाँ इसलिए भी सराही जाएँगी कि घन की चोट से यथास्थिति को तोड़कर ‘अदल-बदल’ लाने की सूझ-समझ वाली हर कोशिश किसी नए ‘भिनसार’ को क़रीब लाती है।
—डॉ. कुमार विमल।
Sampurna Kahaniyan : Manzoor Ehtesham
- Author Name:
Manzoor Ehtesham
- Book Type:

- Description: मंज़ूर एहतेशाम हमारे समय के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कथाकार हैं। उनकी रचनाएँ किसी चमत्कार के लिए व्यग्र नहीं दिखतीं, बल्कि वे अनेक अन्तर्विरोधों और त्रासदियों के बावजूद ‘चमत्कार की तरह बचे जीवन’ का आख्यान रचती हैं। इस संग्रह में उनकी सभी कहानियाँ शामिल हैं। सम्पूर्णता में पढ़ने पर यह स्पष्ट होता है कि मंज़ूर एहतेशाम मध्यवर्गीय भारतीय समाज के द्वन्द्वात्मक यथार्थ को उल्लेखनीय शिल्प में अभिव्यक्त करते हैं। ‘तमाशा’ कहानी का प्रारम्भ है, ‘याद करता हूँ तो कोई किस्सा-कहानी लगता है : ख़ुद से बहुत दूर और अविश्वसनीय-सा। यह कमाल वक़्त के पास है कि असलियत को क़िस्से-कहानी में तब्दील कर दे।’ किसी भी श्रेष्ठ रचनाकार की तरह यह कमाल मंज़ूर एहतेशाम के पास भी है कि वे परिचित यथार्थ के अदेखे कोनों-अँतरों को अपनी रचनाशीलता से अद्भुत कहानी में बदल देते हैं। स्थानीयता इन कहानियों का स्वभाव और व्यापक मनुष्यता इनका प्रभाव। अपनी बहुतेरी चिन्ता और चेतना के साथ मध्यवर्गीय मुस्लिम समाज मंज़ूर एहतेशाम की कहानियों में प्रामाणिकता के साथ प्रकट होता रहा है। कुछ इस भाँति कि इनसे विमर्श के जाने कितने सूत्र सामने आते हैं। ये कहानियाँ ‘समूची सामाजिकता’ का मार्ग प्रशस्त करती हैं। इन रचनाओं में शैली के रेखांकित करने योग्य प्रयोग हैं, फिर भी लक्ष्य है अनकहे सच की अधिकतम अभिव्यक्ति। सहजता इनकी सहजात विशेषता है। मंज़ूर एहतेशाम का कहानी-समग्र ‘सम्पूर्ण कहानियाँ’ समय और समाज की आन्तरिकता को समेकित रूप से हमारे लिए चमकदार बनाता है।
Pratinidhi Kahaniyan : Shivmurti
- Author Name:
Shivmurti
- Book Type:

- Description: शिवमूर्ति आम जन-मन को जीनेवाले, उनके बीच रचने-बसनेवाले, उन्हीं की दुनिया के एक ऐसे नागरिक हैं जो अपने समाज के लोगों की दशा-दुर्दशा की वास्तविक स्थितियों-परिस्थितियों को, बगैर किसी पर्दे या झालर-झूमर के सामने लाता है। उनकी कहानियों के पात्र पूरी ताकत के साथ सामाजिक अन्याय, पीड़ा, प्रताड़ना को जीते हुए भी, चुपचाप उसे सहन नहीं कर जाते। बल्कि उस यंत्रणा को भोगते हुए, उनसे लड़ते, पछाड़ खाते पर अन्ततः उन्हें पछाड़ते देखे जा सकते हैं। यही शिवमूर्ति की कहानियों की ताकत है। चित्रण में वही गँवई धूसरपन, विट, लोकोक्तियों से रची-पगी भाषा का सौन्दर्य। उनकी भाषा में किसी तरह की कोई चिकनाहट नहीं, कृत्रिमता नहीं, ठेठ सहज खुरदुरापन है। अगर शिवमूर्ति का कोई ‘शिवमूर्तियाना’ अन्दाज है तो इसी ‘कथाभाषा’ में है, जिसे उन्होंने अर्जित नहीं किया है, जिया है और कमाया है।
Aurat : Uttarkatha
- Author Name:
Archana Verma
- Book Type:

- Description: लगभग सात-आठ वर्ष पहले (1994 हठ ने ‘औरत : उत्तरकथा’ नाम से विशेषांक का आयोजन किया था, बीसवीं सदी के अन्तिम दशक तक लगने लगा था कि समाज और साहित्य में औरत की कथा अब वह नहीं रह गई है जो सौ-डेढ़ सौ सालों से कही जाती रही है, क्योंकि उसे ‘हम' कहते रहे हैं—‘उसकी’ ओर से। हमारे सामने कुछ सवाल थे जो समस्याओं के रूप में रेखांकित किए जा रहे थे, और हम उनके हल उन्हीं बँधे हुए साँचों में थोड़ी फेर-बदल के साथ तलाश रहे थे। लोकतांत्रिक खुलावों ने अब तक अनसुनी आवाज़ों को साहित्य में ‘मित्रो मरजानी’ (कृष्णा सोबती), ‘आपका बंटी’ (मन्नू भण्डारी), ‘रुकोगी नहीं राधिका’ (उषा प्रियंवदा) और ‘बेघर’ (ममता कालिया) के रूप में सबका ध्यान दूसरे पक्षों की ओर खींचना शुरू कर दिया था। लगा कि हमारे सवालों के उत्तर तो यहाँ से आ रहे हैं। इधर मैत्रेयी पुष्पा की ‘चाक’ और ‘कस्तूरी कुंडल बसै’ आदि किताबों को भी इस कड़ी में जोड़ा जा सकता है। पिछली सदी का अन्तिम दशक लगभग स्त्री और दलित-विमर्श के उभार का दशक रहा है। ‘हंस’ उस पर बात न करे, यह साहित्य और समय के साथ विश्वासघात होगा और यह ऋणशोध किया गया ‘औरत : उत्तरकथा’ के रूप में... इधर यह विशेषांक शुरू से ही अनुपलब्ध हो गया था। आख़िर कब तक इसकी फ़ोटो प्रतिलिपियाँ दी जाती रहें—इसी दबाव में तय किया गया कि अब इसे पुस्तकाकार आना चाहिए...कुछ रचनाएँ छोड़कर अब यह आपके सामने है। —भूमिका से
Chot
- Author Name:
Chandan Pandey
- Book Type:

-
Description:
चर्चित और सर्वप्रिय कथाकार चन्दन पाण्डेय की ये कहानियाँ बहुत तेज़ी से बदल रही इस दुनिया और उसके साथ ही बदल रहे मानवीय, पारिवारिक और सामाजिक सम्बन्धों के समीकरणों को बेहद निर्मम तटस्थता से उघाड़ती हैं। संग्रह की शीर्षक कथा ‘चोट’ में जो चोट है, वह अलग-अलग रूपों में संग्रह में शामिल सातों कहानियों में महसूस होती है। एक चोट है जो हममें से हर कोई या तो खा रहा है या किसी को दे रहा है।
‘चोट’ का अनिरुद्ध जिसने दफ़्तरी ऊब से ऊपर उठने और अपने तानाशाह-मिजाज़ अधिकारियों को चोट पहुँचाने का अपना एक खिलंदड़ा-सा तरीक़ा निकाला है, आख़िरकार अपने मक़सद में सफल तो होता है लेकिन नौकरी की क़ीमत पर। ‘दूब की वर्णमाला’ का नायक अपनी चोट के पीछे छिपकर ही गली के दबंगों से बचता है और अपने देनदारों से भी जो उसकी टाँग कटाकर ब्याज वसूलने की फ़िराक़ में थे।
‘गाँठ’ कहानी भी एक चोट पर ही ख़त्म होती है, जिसका लक्ष्य शहरी मध्यवर्ग की भीतरी जड़ता को तोड़ना है। ‘पितृपक्ष’ के जंगी पाण्डे की चोट तो शायद सबसे गहरी है। भारतीय समाज के जाति-समीकरणों में आए निर्णायक बदलाव को यह कहानी अत्यन्त कुशलता से चिन्हित करती है।
भाषा को नया करने और उसकी सम्प्रेषणीयता को वाक्य-दर-वाक्य विस्तृत करने की क्षमता चन्दन पाण्डेय की इन सभी कहानियों में बराबर दिखाई देती है। ‘शुभकामना का शव’ इस लिहाज से बेहद प्रभावशाली कहानी है; और अपनी विषय-वस्तु में इतनी भीषण कि आप सिहर उठते हैं।
‘वैधानिक गल्प’ और ‘कीर्तिगान’ जैसे उपन्यासों और कई असाधारण कहानियों से अपने कौशल का लोहा मनवा चुके चन्दन पाण्डेय का यह संग्रह निश्चय ही उनके पाठकों की उम्मीदों पर पूरा उतरेगा।
Barzakh
- Author Name:
Abbas Pathan
- Book Type:

- Description: राजस्थान के जोधपुर शहर से ताल्लुक रखने वाले अब्बास पठान का नाम ख़बर की ख़बर रखने वालों में से है। आप सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चित हैं एवं अपनी व्यंग्यात्मक शैली, राजनैतिक स्तंभ, गंभीर लेखन और कहानियों के ज़रिए जाने जाते हैं। पूर्व में आपका कहानी-संग्रह “राक्षस राज्य” नाम से प्रकाशित हो चुका है जिसे पाठकों का बहुत प्यार मिला। आपकी कहानियों पर हिंदी, मराठी और गुजराती भाषाओं में अनेकों वॉइस वीड़ियो बने हैं जिन्हें करोड़ों श्रोताओं का अपार प्रेम प्राप्त हुआ।
Gulmarg Gulzar Hoga
- Author Name:
Priyanka Vaidya
- Book Type:

- Description: यह किताब 34 कहानियों का संग्रह है। यह समर्पित है उन लोगों को जो गुलमर्ग के गुलज़ार होने का इंतज़ार कर रहे हैं, जो बिछड़ी हुई बच्ची की छोटी-छोटी चूड़ियों को देख ज़िंदगी का सफ़र तय करते हैं, वो औरत जो पति के इंतज़ार में बैठी है और उसकी दी हुई लालटेन से ज़िंदगी को रौशन करने की कोशिश कर रही है। एक साहित्य उत्सव में प्रिया उस पिता को मिलती है जिसकी बेटी ने कैन्सर से लड़ते हुए अपने प्राण त्याग दिए और वो प्रिया में अपनी बेटी को देखता है। ये संग्रह है उन लोगों के बारे में है जो विदेशों में देश की मिट्टी की महक ढूँढ रहे हैं, वो लोग जो माँ का बुना हुआ स्वेटर पहन विदेश की ठिठुरती शीत को सहने की कोशिश करते हैं, वही लोग जो रोज़ घर की तलाश में घर से निकलते हैं, मंडी की पराशर झील को लंदन के हाइड पार्क में ढूँढते हैं। हाँ माता-पिता ने ही तो वो दिल दिया जो सतरंगी आसमान को देख सके, उस कलाकार की ज़िंदगी का चित्र खींच सके जो प्रेमिका का चित्र बनाते-बनाते प्रेमिका को प्रेम करना ही भूल गया है। वो लड़की जो हज़ारों पन्ने लिखती है और फिर इस दौड़ को रोकने के लिए सारे पन्ने जला देती है, किताबों को हासिल करने के लिए ठंड में शिमला से चंडीगढ़ का सफ़र और सनवारा में बस के रुकने पर एक कप चाय की ललक। बिखरे तिनकों को जोड़ने के लिए कल्पना और प्रेरणा भी उन्हीं की देन है। वो लड़की जो बूढ़े माँ बाप को छोड़ शहर चली जाती है और वापिस लौटती है पिता की ख़ाली कुर्सी देखने के लिए, वक़्त ने उसे वक़्त पर उनकी क़द्र न करने की सज़ा दी, अब वो गुलमोहर के पेड़ से लिपट कर रोती है, मानो पिता ने गले लगाया हो। उस लड़के की कहानी जो पिता के घर छोड़ने के बाद पश्चात्ताप से भर आँसू बहाता है। नानी के सूने घर में अमावस्या में फैले अँधियारे को कौन दूर करेगा?
Short Stories from Pakistan
- Author Name:
Intizar Hussain +2
- Rating:
- Book Type:

- Description: The short stories - written originally in Urdu, Punjabi, Sindhi, Pushto and Saraiki, and now translated into English - showcased in this anthology engage with the above questions in their own ways, articulating a multiplicity of voices and experiences. They chrocle the birth of Pakistan nation in traumatic circumstances and its schequered history over the past fifty yearsthrough depicting the "desire and aspirations, fear and horror, pride, shame, helplessness and a thousand other unnamed feelings" of their protagonists. While doing so, they also depict the immensely varied and rich tapestry of the cultural life in Pakistan.
Main Bhi Jaunga
- Author Name:
Ganga Prasad Vimal
- Book Type:

- Description: Collection of Stories
Chhachhiya Bhar Chhachh
- Author Name:
Mahesh Katare
- Book Type:

- Description: Short Stories
Case Files of The Dead
- Author Name:
Various Authors
- Rating:
- Book Type:

- Description: Welcome to a mysterious land where ghosts. Ghouls and spirits rule. Welcome to a place where haunted houses and evil souls will make a shiver run down your spine. A spooky tale in the scenic hills of Mussoorie awaits you while uncanny happenings in a literary competition are sure to intrigue you. The case of a mysterious white Maruti baffles everyone, even as the unsuspecting jogger experiences something he had never bargained for. A group of friends will encounter the worst terror of their lives while nightmares of his death rack the young man! Author's In and The Book Bakers present an eclectic mix of true stories, legends, and fables that have often been a part of India's folklore—armed with some of the best authors in India's paranormal literature history. CASE FILES OF THE DEAD; India's first pure horror public anthology will turn every host into (G)Host!!!
Raat mein Sagar
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

-
Description:
चन्द्रकान्ता उन विरल लेखिकाओं में हैं जिन्होंने कश्मीर और पंजाब के आतंकवाद से उत्पन्न करुण मानवीय स्थितियों को रचना का केन्द्र बनाया है। वैसे भी कश्मीर हिन्दी साहित्य में उतना नहीं आया जितना आना चाहिए था। भूमंडलीकरण के इस दौर में, वैज्ञानिक अभिज्ञानों के आलोक में टूटते-चरमराते स्त्री-पुरुष यौन-सम्बन्ध और इतर द्वन्द्वात्मकताएँ इनके लेखन के उपजीव्य रहे हैं।
लेखिका की कहानियों का अनुभव-वृत्त अत्यन्त विस्तृत है। ये कहानियाँ उस चौहद्दी का अतिक्रमण करती हैं जिसे केवल ‘महिला लेखन’ के सीमित दायरे में समेटा जाता है। इन कहानियों में काल तथा संस्कृतियों के द्वन्द्व भी सामने आए हैं।
चन्द्रकान्ता का आत्मकथन बिलकुल सही लगता है कि मनुष्य विरोधी व्यवस्था के प्रतिपक्ष में खड़ी ये कहानियाँ दोतरफा खुलने वाली खिड़कियाँ हैं...
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book