🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Pratinidhi Vyangya : Ravindranath Tyagi

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

आज़ादी के बाद भारतीय समाज और व्यक्ति-जीवन में जैसी विरूपताएँ पनपी हैं, वे यों भी एक गहरे विद्रूप की सृष्टि करती हैं। फिर यह पुस्तक तो रवीन्‍द्रनाथ त्यागी जैसे समर्थ व्यंग्यकार के चुने हुए व्यंग्य निबन्धों का संकलन है। रवीन्‍द्रनाथ त्यागी समकालीन साहित्यिक परिदृश्य में एक महत्त्वपूर्ण व्यंग्य लेखक के रूप में जाने जाते हैं। उनकी व्यंग्य रचनाओं में घटनाओं और चरित्रों के बजाय परिवेश और स्थितियों का चित्रण मिलता है, जिसके माध्यम से वे अपने समय और समाज के विभिन्न अन्‍तर्विरोधों को रेखांकित करते हैं। इस प्रक्रिया में उनके लिए इतिहास, पुराण, साहित्य, संस्कृति, राजनीति और प्रशासन—कुछ भी निषिद्ध नहीं है। सब कुछ जैसे उनके लेखकीय अनुभव में शामिल है। वे बिना अपना बचाव किए हर जगह चोट करते हैं और बेहद सहज भाव से, मानो हँसते-हँसाते जीवन के गम्भीर बुनियादी सवालों तक जा पहुँचते हैं। ‘पूज्य’ कही जानेवाली नारी उनके व्यंग्यों में सब कहीं मौजूद है, जो कहीं सामन्ती तो कहीं पूँजीवादी अप-संस्कृति से उपजी पुरुष-कुंठाओं और विकृतियों की शिकार नज़र आती है। कहना न होगा कि यह कृति अपने समय की बहुत-सी अशिष्टताओं पर बहुत ही शिष्टता से विचार करती है।

Read more

₹ 60

₹ 48 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Pratinidhi Vyangya : Ravindranath Tyagi This book ₹48
Urdu-Hindi Hashya-Vyangya Ravindranath Tyagi ₹250
Itihas Ka Shav Ravindranath Tyagi ₹595
3 books selected ₹905 ₹893

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

आज़ादी के बाद भारतीय समाज और व्यक्ति-जीवन में जैसी विरूपताएँ पनपी हैं, वे यों भी एक गहरे विद्रूप की सृष्टि करती हैं। फिर यह पुस्तक तो रवीन्‍द्रनाथ त्यागी जैसे समर्थ व्यंग्यकार के चुने हुए व्यंग्य निबन्धों का संकलन है।

रवीन्‍द्रनाथ त्यागी समकालीन साहित्यिक परिदृश्य में एक महत्त्वपूर्ण व्यंग्य लेखक के रूप में जाने जाते हैं। उनकी व्यंग्य रचनाओं में घटनाओं और चरित्रों के बजाय परिवेश और स्थितियों का चित्रण मिलता है, जिसके माध्यम से वे अपने समय और समाज के विभिन्न अन्‍तर्विरोधों को रेखांकित करते हैं। इस प्रक्रिया में उनके लिए इतिहास, पुराण, साहित्य, संस्कृति, राजनीति और प्रशासन—कुछ भी निषिद्ध नहीं है। सब कुछ जैसे उनके लेखकीय अनुभव में शामिल है। वे बिना अपना बचाव किए हर जगह चोट करते हैं और बेहद सहज भाव से, मानो हँसते-हँसाते जीवन के गम्भीर बुनियादी सवालों तक जा पहुँचते हैं। ‘पूज्य’ कही जानेवाली नारी उनके व्यंग्यों में सब कहीं मौजूद है, जो कहीं सामन्ती तो कहीं पूँजीवादी अप-संस्कृति से उपजी पुरुष-कुंठाओं और विकृतियों की शिकार नज़र आती है। कहना न होगा कि यह कृति अपने समय की बहुत-सी अशिष्टताओं पर बहुत ही शिष्टता से विचार करती है।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
1989
Weight
124 grams
ISBN-13
9788171780594
Pages
162
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
12 × 18 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp