Sarvar Down Hai
Author:
Yash MalviyaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Satire0 Reviews
Price: ₹ 156
₹
195
Unavailable
सृजन हृदय की अकुलाहट व्यक्त करने का माध्यम है। जब कोई संवेदनशील रचनाकार किसी विधा की अभिव्यक्ति के लिए अपर्याप्त पाता है तो वह विधाओं के दर-दर पर भटकता है। जीवन इतना जटिल है कि उसे विश्लेषित करना, समझना और अभिव्यक्त करना किसी भी संवेदनशील रचनाकार के लिए एक चुनौतीपूर्ण रचनाकर्म बना रहता है। शायद यही कारण है कि यश मालवीय भी विधा-दर-विधा भटकते रहते हैं। किसी भी बेचैन रूह के परिन्दे की यही परिणति है।
किसी भी पाठक के लिए यह एक चौंकानेवाला अनुभव होता है जब वह यश का अत्यन्त भावप्रवण गीत पढ़ने के बाद अचानक उसके किसी तीखे व्यंग्य लेख से साक्षात्कार करता है। कई बार तो यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि यश मूल रूप से संवेदनशील कवि हैं अथवा व्यग्यंकार। यश के पिता स्वर्गीय उमाकान्त मालवीय इस बेचैनी के शिकार थे मगर वह स्थितियों को उजागर करने के लिए अतीतोन्मुख हो जाते थे। यह बेचैनी एक तरह से यश को विरासत में मिली है। उनका दृष्टिकोण इस दृष्टि से नितान्त भिन्न है, वह वर्तमान से उचककर भविष्य की ओर झाँकने की कोशिश करते हैं। ऐसे रचनाकारों को एक समय में बहुमुखी प्रतिभा के धनी कहा जाता था।
समसामयिक ज्वलन्त प्रश्नों पर शरद जोशी बहुत निर्ममता से प्रहार करते थे, उनके बाद यह प्रवृत्ति यश में देखी जा सकती है। वह विडम्बनापूर्ण परिस्थितियों का अन्तःपरीक्षण करके यथार्थ से मुठभेड़ करते हैं। शरद जोशी की ही तरह यश के व्यंग्य लेख भी पत्र-पत्रिकाओं के अलावा दैनिक पत्रों के पृष्ठों पर बिखरे पड़े हैं। शरद जोशी के व्यंग्य लेखों के संकलन का कार्य आज तक जारी है! यह एक सुखद आश्चर्य है कि यश यह काम स्वयं कर रहे हैं, और इसी क्रम में उनका यह संकलन व्यंग्य लेखन की समृद्ध परम्परा में एक मील का पत्थर साबित होता है।
ISBN: 9788180316913
Pages: 336
Avg Reading Time: 11 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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